परमाणु क्रमांक 6 है, विन्यास 2, 4।
बाहरी कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए संयोजकता चार है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 4 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Carbon and its Compounds
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 4.1 से 4.12, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. साबुन का मिसेल चित्र देखो — तैल अंदर, सिर बाहर
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Covalent bond and tetravalency — Activity 4.1 · NCERT 4.1 · क्रियाकलाप 4.1
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है। इलेक्ट्रॉन विन्यास 2, 4 है। अष्टक पूरा करने के लिए उसे चार इलेक्ट्रॉन और चाहिए।
चार इलेक्ट्रॉन लेने से C4− बनता, पर छह प्रोटॉन दस इलेक्ट्रॉन नहीं थाम पाते। चार इलेक्ट्रॉन छोड़ने से C4+ बनता, पर उसमें बहुत ऊर्जा लगती है। इसलिए कार्बन इलेक्ट्रॉन बाँटकर सहसंयोजक बंध बनाता है। मीथेन में कार्बन चार हाइड्रोजन से एक-एक जोड़ा बाँटता है।
अणु के अंदर बंध मजबूत है, अणुओं के बीच खिंचाव कमजोर। इसलिए गलनांक-क्वथनांक कम हैं और ये यौगिक प्रायः विद्युत नहीं चलाते। आयन बनते ही नहीं।
सुबह से खाई या इस्तेमाल की दस चीज़ें लिखो। कक्षा की सूचियाँ मिलाकर तीन cột बनाओ: धातु, काँच या मिट्टी, और बाकी। एक चीज़ दो पदार्थों की हो तो दोनों स्तंभों में लिखो।
आखिरी स्तंभ की ज़्यादातर चीज़ें कार्बन के यौगिक हैं। रोटी, कपड़ा, दवा, कागज़, प्लास्टिक। इन्हें जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। चूने का पानी दूधिया होना उसी गैस की पहचान है।
भूपर्पटी में कार्बन लगभग 0.02% है और वायु में कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.03%। मात्रा कम है, यौगिक बहुत हैं।
| यौगिक | गलनांक | क्वथनांक |
|---|---|---|
| एथेनॉइक अम्ल | 290 K | 391 K |
| एथेनॉल | 156 K | 351 K |
| मीथेन | 90 K | 111 K |
| क्लोरोफॉर्म | 209 K | 334 K |
प्रश्न: मीथेन विद्युत क्यों नहीं चलाता, जबकि पिघला नमक चलाता है?
उत्तर: मीथेन में इलेक्ट्रॉन बँटे हुए हैं, आयन नहीं बने। धारा ले जाने के लिए आवेशित कण चाहिए। पिघले नमक में आयन चलते हैं, इसलिए बल्ब जलता है।
वस्तुनिष्ठ में C4+ या C4− दोनों गलत रास्ते हैं। सही रास्ता इलेक्ट्रॉन का साझा है।
CBSE कारण माँगता है: नाभिक चार अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन नहीं थाम सकता, और चार इलेक्ट्रॉन निकालने में बहुत ऊर्जा लगती है।
परमाणु क्रमांक 6 है, विन्यास 2, 4।
बाहरी कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए संयोजकता चार है।
गलत — बंध से आयन नहीं बनते, इसलिए ये कुचालक हैं।
नाभिक में छह प्रोटॉन बच जाते, इलेक्ट्रॉन केवल दो।
चार इलेक्ट्रॉन हटाने में बहुत ऊर्जा लगती है, इसलिए कार्बन बाँटता है।
अंग्रेज़ी नाम covalent है।
साझी जोड़ी को सहसंयोजक बंध कहते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। उसे चूने के पानी में प्रवाहित करो। पानी दूधिया हो जाता है।
Diamond, graphite and C60 · NCERT · कार्बन के अपररूप
हीरा और ग्रेफाइट दोनों केवल कार्बन हैं। अंतर परमाणुओं के जुड़ने का है। हीरे में हर कार्बन चार और कार्बन से जुड़ा है। ढाँचा कड़ा और तीन दिशाओं में फैला है। हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
ग्रेफाइट में हर कार्बन उसी तल में तीन कार्बन से जुड़ा है। षट्कोण की चादरें एक के ऊपर एक रहती हैं। एक बंध द्वि-बंध जैसा होता है, इसलिए संयोजकता पूरी रहती है। परतें फिसलती हैं, इसलिए ग्रेफाइट चिकना है। मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण वह विद्युत चलाता है।
C60 में साठ कार्बन फुटबॉल के आकार में जमे हैं। यह फुलरीन है। नाम वास्तुकार बकमिन्स्टर फुलर के गुंबद से पड़ा। शुद्ध कार्बन पर बहुत दाब और ताप से छोटे हीरे भी बनाए जाते हैं।
प्रश्न: हीरा कुचालक है और ग्रेफाइट चालक। दोनों कार्बन हैं, फिर अंतर क्यों?
उत्तर: हीरे में हर कार्बन के चारों इलेक्ट्रॉन बंध में फँसे हैं, चलने को स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं बचता। ग्रेफाइट में हर कार्बन तीन से जुड़ा है, चौथा इलेक्ट्रॉन परत में चल सकता है।
वस्तुनिष्ठ में चालक अधातु ग्रेफाइट है, हीरा नहीं।
CBSE संरचना पूछता है। केवल नाम लिखकर मत रुकना — चार बंध या तीन बंध बताओ।
तीन दिशाओं में कड़ा ढाँचा।
हीरे में हर कार्बन चार अन्य कार्बन से जुड़ा है।
सही — परत में इलेक्ट्रॉन चल सकते हैं। हीरा नहीं चलाता।
फुलरीन का पहला सदस्य।
C60 में कार्बन परमाणु फुटबॉल के आकार में जमे हैं।
हीरे में हर कार्बन चार कार्बन से त्रिविमीय जाल में बँधा है, इसलिए वह कठोर है। ग्रेफाइट में षट्कोणीय परतें कमजोर बल से टिकी हैं और फिसल जाती हैं।
Saturated, unsaturated and the homologous series — Activity 4.2 · NCERT 4.2 · क्रियाकलाप 4.2
कार्बन अपने परमाणुओं से श्रृंखला जोड़ता है। इसे श्रृंखलन कहते हैं। श्रृंखला सीधी, शाखित या वलय हो सकती है। सिलिकॉन भी छोटी श्रृंखला बनाता है, पर वे बहुत सक्रिय रहती हैं। कार्बन-कार्बन बंध मजबूत है, परमाणु छोटा है, इसलिए यौगिक टिकते हैं।
केवल एकल बंध वाले यौगिक संतृप्त हैं, जैसे एथेन C2H6। कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि या त्रि-बंध हो तो यौगिक असंतृप्त है। एथीन C2H4 में द्वि-बंध है, एथाइन C2H2 में त्रि-बंध। असंतृप्त यौगिक अधिक क्रियाशील होते हैं।
केवल कार्बन और हाइड्रोजन वाले यौगिक हाइड्रोकार्बन हैं। संतृप्त को ऐल्केन कहते हैं, सामान्य सूत्र CnH2n+2। एक द्वि-बंध वाले ऐल्कीन CnH2n हैं। एक त्रि-बंध वाले ऐल्काइन CnH2n−2 हैं। C4H10 की दो संरचनाएँ होती हैं। समान सूत्र और भिन्न संरचना वाले यौगिक संरचनात्मक समावयवी हैं।
| कार्बन | नाम | सूत्र |
|---|---|---|
| 1 | मीथेन | CH4 |
| 2 | एथेन | C2H6 |
| 3 | प्रोपेन | C3H8 |
| 4 | ब्यूटेन | C4H10 |
| 5 | पेन्टेन | C5H12 |
| 6 | हेक्सेन | C6H14 |
ऐल्कोहॉल की कड़ी लो: CH3OH, C2H5OH, C3H7OH, C4H9OH। हर अगले सूत्र में पिछले से CH2 अधिक है। कार्बन 12 u और हाइड्रोजन 1 u है, इसलिए द्रव्यमान का अंतर 14 u है। तीनों जोड़ियों में यही अंतर है।
कार्बन बढ़ाते हुए इन्हें एक परिवार बनाओ। प्रकार्यात्मक समूह वही −OH है। ऐसी कड़ी समजातीय श्रेणी है। ऐल्कीन में भी यही बात है: C2H4, C3H6, C4H8। द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक-क्वथनांक बढ़ते हैं। रासायनिक गुण समूह के कारण मिलते रहते हैं।
प्रश्न: C2H6 और C3H8 के अणु द्रव्यमान का अंतर निकालो।
हल: C2H6 = 2×12 + 6×1 = 30 u। C3H8 = 3×12 + 8×1 = 44 u। अंतर = 44 − 30 = 14 u। यही एक CH2 का द्रव्यमान है।
वस्तुनिष्ठ में 14 u याद रखो। 12 u या 16 u लिखोगे तो अंक कटता है।
CBSE क्रियाकलाप 4.2 की तीन जोड़ियाँ पूछ सकता है। हर जोड़ी पर CH2 और 14 u दोनों लिखो।
द्वि-बंध देखो।
एथीन C2H4 में कार्बन-कार्बन द्वि-बंध है।
सही — द्रव्यमान भी 14 u बढ़ता है।
एथीन C2H4, प्रोपेन नहीं। n कम से कम 2।
ऐल्कीन का सामान्य सूत्र CnH2n है।
क्रियाकलाप 4.2। समूह वही −OH है।
एक ही प्रकार्यात्मक समूह और CH2 का अंतर — यह समजातीय श्रेणी है।
सही — सूत्र एक है, कार्बन का ढाँचा अलग है। एक सीधी श्रृंखला, एक शाखा।
सूत्र का अंतर CH2 है। द्रव्यमान का अंतर 12 + 2 = 14 u है। दोनों ऐल्कोहॉल एक ही समजातीय श्रेणी के हैं।
Names of carbon compounds · NCERT 4.2.5 · नामकरण
हाइड्रोजन की जगह कोई और परमाणु या समूह लगे तो उसे प्रकार्यात्मक समूह कहते हैं। वही समूह यौगिक का रासायनिक स्वभाव तय करता है, श्रृंखला लंबी हो या छोटी।
नाम का आधार कार्बन की संख्या है: 1 मेथ, 2 एथ, 3 प्रोप, 4 ब्यूट, 5 पेन्ट। तीन कार्बन की श्रृंखला प्रोपेन है। समूह प्रत्यय से आए और प्रत्यय स्वर से शुरू हो तो आखिरी e हटाओ। प्रोपेन − e + one = प्रोपेनोन।
द्वि-बंध हो तो ane की जगह ene, त्रि-बंध हो तो yne। तीन कार्बन और द्वि-बंध = प्रोपीन। तीन कार्बन और त्रि-बंध = प्रोपाइन।
| वर्ग | नाम में | उदाहरण |
|---|---|---|
| हैलोऐल्केन | पूर्वलग्न क्लोरो / ब्रोमो | क्लोरोप्रोपेन |
| ऐल्कोहॉल | प्रत्यय ऑल | प्रोपेनॉल |
| ऐल्डिहाइड | प्रत्यय ऐल | प्रोपेनल |
| कीटोन | प्रत्यय ओन | प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल | प्रत्यय ओइक अम्ल | प्रोपेनॉइक अम्ल |
प्रश्न: CH3−CH2−Br का नाम लिखो।
उत्तर: कार्बन दो हैं, मूल नाम एथेन। ब्रोमीन पूर्वलग्न है, प्रत्यय नहीं। नाम ब्रोमोएथेन है। e नहीं हटेगा, क्योंकि ब्रोमो आगे लगता है।
वस्तुनिष्ठ में ब्यूटेनोन चार कार्बन का कीटोन है। अम्ल या ऐल्डिहाइड मत चुनना।
CBSE नाम के तीन कदम लिखवाता है: कार्बन गिनो, समूह पहचानो, e हटाना है या नहीं देखो।
प्रत्यय one कीटोन का है।
ब्यूटेनोन चार कार्बन का कीटोन है।
तीन कार्बन का कीटोन।
प्रोपेन − e + one = प्रोपेनोन।
कार्बन दो हैं, ब्रोमीन आगे लगता है।
दो कार्बन और −Br पूर्वलग्न: ब्रोमोएथेन।
सही — मेथेनॉल, एथेनॉल, प्रोपेनॉल। क्लोरो पूर्वलग्न है, प्रत्यय नहीं।
तीन कार्बन का मूल नाम प्रोपेन है। कार्बोक्सिलिक अम्ल का प्रत्यय oic acid है और वह स्वर से शुरू होता है, इसलिए e हटाओ। नाम प्रोपेनॉइक अम्ल है।
Combustion and the sooty flame — Activities 4.3 and 4.4 · NCERT 4.3.1 · क्रियाकलाप 4.3, 4.4
कार्बन और उसके अधिकतर यौगिक जलने पर ऊष्मा और प्रकाश देते हैं। पर्याप्त हवा में संतृप्त हाइड्रोकार्बन साफ नीली ज्वाला देते हैं। असंतृप्त यौगिक पीली ज्वाला और काला धुआँ देते हैं।
हवा कम हो तो संतृप्त यौगिक भी अधूरा जलता है और कज्जल देता है। गैस या मिट्टी के तेल के चूल्हे में हवा के छेद इसीलिए होते हैं। बर्तन का पेंदा काला पड़ रहा हो तो छेद बंद हैं और ईंधन बरबाद हो रहा है।
कोयला और पेट्रोलियम में थोड़ा नाइट्रोजन और सल्फर होता है। उनके ऑक्साइड वायु को गंदा करते हैं। कोयला कभी केवल लाल होकर गरमी देता है, क्योंकि ज्वाला गैसों के जलने से बनती है। मोमबत्ती की पीली ज्वाला अधजले कार्बन कणों की है।
क्रियाकलाप 4.3 शिक्षक के साथ करो। नैफ्थलीन, कपूर और ऐल्कोहॉल को स्वयं अकेले मत जलाना।
नैफ्थलीन, कपूर और ऐल्कोहॉल को बारी-बारी स्पैचुला पर जलाओ। ज्वाला का रंग और धुआँ लिखो। ज्वाला के ऊपर धातु की प्लेट रखो।
असंतृप्त या अधजले यौगिक पर प्लेट काली हो जाती है। यही कज्जल है।
बुन्सन ज्वालक जलाओ और पेंदे का हवा-छेद घुमाओ। छेद बंद हो तो हवा कम मिलती है और ज्वाला पीली, कज्जली होती है। छेद खुला हो तो हवा काफी है और ज्वाला नीली होती है।
प्रश्न: मीथेन के दहन का संतुलित समीकरण लिखो।
उत्तर: CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा और प्रकाश। कार्बन 1 = 1, हाइड्रोजन 4 = 4, ऑक्सीजन 4 = 2 + 2।
वस्तुनिष्ठ में बर्तन काला होने का उत्तर अधूरा दहन है, गीला ईंधन नहीं।
CBSE वेल्डिंग वाला प्रश्न पूछता है। एथाइन के साथ हवा नहीं, ऑक्सीजन मिलाते हैं, ताकि दहन पूरा हो और गरमी काफी मिले।
10-सेकंड रिवीजन
हवा के छेद बंद होने की निशानी।
काला पेंदा अधूरे दहन का चिह्न है। ईंधन बरबाद हो रहा है।
सही — कज्जल तब आता है जब यौगिक असंतृप्त हो या हवा कम हो।
हवा कम, दहन अधूरा।
हवा-छेद बंद होने पर ऑक्सीजन कम मिलती है और ज्वाला पीली तथा कज्जली होती है।
क्रियाकलाप 4.3 की प्लेट।
काले जमाव को कज्जल कहते हैं। वह कार्बन है।
पूरी गरमी और पूरा दहन चाहिए।
हवा में ऑक्सीजन कम है। मिश्रण अधूरा जलता है, कज्जल बनता है और ताप वेल्डिंग के लिए काफी नहीं रहता।
C2H5OH + 3O2 → 2CO2 + 3H2O। पर्याप्त हवा में उत्पाद केवल कार्बन डाइऑक्साइड और जल हैं।
Oxidation, addition and substitution — Activity 4.5 · NCERT 4.3.2–4.3.4 · क्रियाकलाप 4.5
परखनली में लगभग 3 mL एथेनॉल लो और जल-ऊष्मक में हल्के से गर्म करो। सीधी लौ मत लगाना। इसमें 5% क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट बूंद-बूंद डालो।
शुरू में गुलाबी रंग गायब हो जाता है, क्योंकि परमैंगनेट एथेनॉल को ऑक्सीकृत करने में खर्च हो रहा है। जब एथेनॉल पूरा एथेनॉइक अम्ल बन चुका हो तो अतिरिक्त बूँद का रंग रह जाता है।
जो पदार्थ दूसरे में ऑक्सीजन जोड़ दे, वह ऑक्सीकारक है। क्षारीय KMnO4 और अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट ऐल्कोहॉल को अम्ल बनाते हैं। एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल बनना ऑक्सीकरण है, क्योंकि अणु में ऑक्सीजन जुड़ती है।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन निकैल या पैलेडियम की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त बन जाते हैं। वनस्पति तेलों की लंबी श्रृंखलाएँ प्रायः असंतृप्त होती हैं। निकैल उत्प्रेरक से हाइड्रोजन जोड़कर उन्हें ठोस वसा बनाया जाता है। खाना पकाने के लिए असंतृप्त तेल चुनना बेहतर माना जाता है। उत्प्रेरक गति बदलता है, स्वयं खर्च नहीं होता।
संतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिकतर अभिकर्मकों से सुस्त रहते हैं। धूप में क्लोरीन तेज़ी से हाइड्रोजन की जगह लेती है। CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl यह प्रतिस्थापन है। एक परमाणु दूसरे की जगह आता है।
प्रश्न: एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल बनना ऑक्सीकरण क्यों है?
उत्तर: एथेनॉल C2H5OH है और एथेनॉइक अम्ल CH3COOH। अम्ल में ऑक्सीजन का अनुपात बढ़ गया है। ऑक्सीजन क्षारीय KMnO4 ने जोड़ी। इसलिए यह ऑक्सीकरण है।
वस्तुनिष्ठ में रंग मिटना खर्च होने का चिह्न है। रंग रुकना मतलब ऐल्कोहॉल खत्म।
CBSE उत्प्रेरक की परिभाषा अलग से पूछता है। लिखो: गति बदलता है, स्वयं अभिक्रिया में खर्च नहीं होता।
10-सेकंड रिवीजन
ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण कार्बोक्सिलिक अम्ल देता है।
एथेनॉल ऑक्सीकृत होकर एथेनॉइक अम्ल बनता है।
सही — खर्च करने को ऐल्कोहॉल बचा नहीं, इसलिए गुलाबी रंग टिकता है।
पैलेडियम भी योग करा सकता है। किताब निकैल लिखती है।
निकैल उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त तेल हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त वसा बनता है।
एक परमाणु दूसरे की जगह लेता है।
Cl हाइड्रोजन की जगह लेती है, इसलिए यह प्रतिस्थापन है।
जो पदार्थ किसी दूसरे में ऑक्सीजन जोड़ दे, वह ऑक्सीकारक है। क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट और अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट ऐल्कोहॉल को अम्ल बनाते हैं।
Ethanol and sodium — Activity 4.6 · NCERT 4.4.1 · क्रियाकलाप 4.6
एथेनॉल का गलनांक 156 K और क्वथनांक 351 K है। यही आम भाषा का ऐल्कोहॉल है। यह दवाओं में विलायक है, जैसे टिंक्चर आयोडीन। जल में हर अनुपात में घुल जाता है।
थोड़ा तनु एथेनॉल नशा देता है। शुद्ध एथेनॉल (निरपेक्ष ऐल्कोहॉल) की थोड़ी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है। लंबे समय का सेवन सेहत बिगाड़ता है। मेथेनॉल और भी खतरनाक है। यकृत उसे मेथेनल बनाता है, जो दृष्टि-तंत्रिका को नुकसान देकर अंधा कर सकता है। औद्योगिक ऐल्कोहॉल में मेथेनॉल और नीली रंजक मिलाकर उसे विकृतिकृत किया जाता है, ताकि कोई पी न सके।
443 K पर अधिक सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल एथेनॉल से जल निकालकर एथीन बनाता है। सांद्र अम्ल यहाँ निर्जलीकारक है। C2H5OH → C2H4 + H2O
सोडियम चावल के दो दानों जितना छोटा टुकड़ा हो। नंगे हाथ से मत छूना। वह नमी से तेज़ी से अभिक्रिया करता है। यह प्रदर्शन केवल शिक्षक का है।
निरपेक्ष ऐल्कोहॉल में सोडियम का छोटा टुकड़ा डालो। बुलबुले उठते हैं। गैस हाइड्रोजन है। जलती तीली मुँह पर लाओ तो पॉप की आवाज़ आती है।
दूसरा उत्पाद सोडियम एथॉक्साइड है। 2Na + 2C2H5OH → 2C2H5ONa + H2
प्रश्न: क्रियाकलाप 4.6 की गैस की पहचान कैसे करोगे?
उत्तर: परखनली के मुँह पर जलती तीली ले जाओ। तीखी पॉप हाइड्रोजन की पहचान है। समीकरण में H2 ही गैस है। सोडियम एथॉक्साइड परखनली में रह जाता है।
वस्तुनिष्ठ में गैस हाइड्रोजन है, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं। पॉप CO2 की पहचान नहीं है।
CBSE सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की भूमिका पूछता है। लिखो: निर्जलीकारक, 443 K पर एथीन बनती है।
10-सेकंड रिवीजन
जलती तीली पर पॉप।
गैस हाइड्रोजन है। पॉप उसी की पहचान है।
सही — किताब यही माप देती है। प्रदर्शन शिक्षक करता है।
सूत्र C2H5ONa।
दूसरा उत्पाद सोडियम एथॉक्साइड है।
जल निकलता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन बचता है।
निर्जलीकरण से एथीन और जल बनते हैं।
औद्योगिक एथेनॉल में मेथेनॉल और रंजक मिला दी जाती है, ताकि वह पीने योग्य न रहे। मेथेनॉल यकृत में मेथेनल बनता है, कोशिकाओं को जमाता है और दृष्टि-तंत्रिका को नुकसान देकर अंधा कर सकता है।
Ethanoic acid — Activities 4.7, 4.8 and 4.9 · NCERT 4.4.2 · क्रियाकलाप 4.7 से 4.9
एथेनॉइक अम्ल का आम नाम ऐसीटिक अम्ल है। जल में 5–8% घोल सिरका है, अचार का परिरक्षक। शुद्ध अम्ल का गलनांक 290 K है। ठंडे मौसम में वह जम जाता है, इसलिए उसे हिमनदित ऐसीटिक अम्ल कहते हैं।
कार्बोक्सिलिक अम्ल खनिज अम्लों से कमजोर हैं। HCl लगभग पूरा आयनित होता है, एथेनॉइक अम्ल नहीं। क्षार के साथ लवण और जल बनते हैं: NaOH + CH3COOH → CH3COONa + H2O
तनु ऐसीटिक अम्ल और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का pH तुलना करो। दोनों नीले लिटमस को लाल करते हैं। सार्वत्रिक सूचक उन्हें बराबर प्रबल नहीं दिखाता। ऐसीटिक अम्ल का pH ऊँचा रहता है। वह कमजोर अम्ल है।
1 mL निरपेक्ष एथेनॉल, 1 mL हिमनदित ऐसीटिक अम्ल और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें लो। कम से कम पाँच मिनट जल-ऊष्मक में गर्म करो। फिर 20–50 mL जल वाले बीकर में उड़ेलो।
सावधानी: सांद्र अम्ल शिक्षक के पास रहे। सीधी लौ मत लगाना। मिश्रण की गंध मीठी है। बना यौगिक एस्टर है, एथिल एथेनोएट।
परखनली में सोडियम कार्बोनेट की एक स्पैचुला मात्रा लो और 2 mL तनु एथेनॉइक अम्ल डालो। गैस को ताज़े चूने के पानी में भेजो। पानी दूधिया होता है, क्योंकि गैस कार्बन डाइऑक्साइड है। सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ भी यही होता है।
2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2
प्रश्न: एथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल से एस्टर लिखो। उत्प्रेरक और गंध भी बताओ।
उत्तर: CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O
उत्प्रेरक सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल है। उत्पाद एथिल एथेनोएट है। गंध मीठी है। एस्टर इत्र और सुगंध में काम आते हैं। क्षार के साथ एस्टर फिर ऐल्कोहॉल और अम्ल के सोडियम लवण में टूटता है। इसी अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
वस्तुनिष्ठ में सिरका 5–8% ऐसीटिक अम्ल है। शुद्ध अम्ल का गलनांक 290 K है।
CBSE ऐल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल का प्रयोगात्मक अंतर पूछता है। लिटमस और कार्बोनेट-परीक्षण दोनों लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
गलनांक 290 K।
गलनांक 290 K है, इसलिए ठंड में वह बर्फ की तरह जम जाता है।
सही — दोनों नीले लिटमस को लाल करते हैं। ऐसीटिक अम्ल कमजोर है, pH ऊँचा रहता है।
अम्ल और ऐल्कोहॉल, सांद्र H2SO4 के साथ।
मीठी गंध एथिल एथेनोएट की है, जो एक एस्टर है।
एक सीमा है, एक अंक नहीं।
सिरका जल में ऐसीटिक अम्ल का 5–8% घोल है।
सही — गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है। क्रियाकलाप 4.9।
एथेनॉइक अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है, एथेनॉल नहीं। एथेनॉइक अम्ल सोडियम कार्बोनेट से CO2 निकालता है और चूने का पानी दूधिया होता है। एथेनॉल कार्बोनेट से यह गैस नहीं देता।
The soap micelle and hard water — Activities 4.10 to 4.12 · NCERT 4.5 · क्रियाकलाप 4.10, 4.11, 4.12
दो परखनलियों में 10–10 mL जल लो। दोनों में खाना पकाने के तेल की एक बूँद डालो। इन्हें A और B कहो। केवल B में साबुन की कुछ बूँदें डालो। दोनों को बराबर समय तक हिलाओ।
हिलाना बंद करते ही A में तेल और जल की परतें अलग दिखती हैं। B में तेल देर तक मिला रहता है। साबुन तेल को पानी में पायस बना देता है। कपड़े पीटना या मशीन का घुमाना इसलिए ज़रूरी है कि गंदगी मिसेल के बीच में आ सके।
साबुन लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है। आयनिक सिरा जल से मित्र है, यानी जलरागी। कार्बन की पूँछ तैल से मित्र है, यानी जलविरागी।
पानी के अंदर पूँछें बूँद के बीच में छिपती हैं और आयनिक सिर बाहर रहते हैं। यही मिसेल है। समान आवेश वाले सिर पास नहीं आते, इसलिए मिसेल कोलॉइड की तरह लटका रहता है और धोने पर गंदगी बह जाती है। मिसेल प्रकाश फैलाते हैं, इसलिए साबुन का घोल दूधिया दिखता है।
10 mL आसुत जल या वर्षा जल और 10 mL कठोर जल (नलकूप या हैंडपंप) अलग परखनलियों में लो। दोनों में साबुन की कुछ बूँदें डालकर बराबर हिलाओ। झाग आसुत जल में अधिक बनता है। कठोर जल में सफेद दही जैसा अवक्षेप बनता है। कठोर जल न मिले तो उसमें कैल्सियम या मैग्नीशियम के हाइड्रोजनकार्बोनेट, सल्फेट या क्लोराइड घोलकर बना लो।
अब दो परखनलियों में केवल कठोर जल लो। एक में साबुन की पाँच बूँदें, दूसरी में अपमार्जक की पाँच। बराबर हिलाओ। अपमार्जक झाग देता है। साबुन वाली नली में ही दही जैसा ठोस बनता है।
| अंतर | साबुन | अपमार्जक |
|---|---|---|
| बना क्या है | लंबी-श्रृंखला कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण | सल्फोनिक अम्ल का सोडियम लवण, या क्लोराइड-ब्रोमाइड वाला अमोनियम लवण |
| कठोर जल | Ca और Mg से अघुलनशील स्कम | अघुलनशील थक्का नहीं, झाग बना रहता है |
| कपड़े | मृदु जल में अच्छा; कठोर जल में अधिक खर्च | कठोर जल में भी सफाई करता है |
प्रश्न: साबुन और अपमार्जक में तीन अंतर लिखो।
उत्तर: (1) साबुन कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण है, अपमार्जक सल्फोनिक अम्ल का। (2) कठोर जल में साबुन सफेद स्कम देता है, अपमार्जक नहीं। (3) साबुन कठोर जल में झाग कम देता है, अपमार्जक झाग बनाए रखता है।
वस्तुनिष्ठ में स्कम साबुन और कठोर जल का है। अपमार्जक से कठोर जल की जाँच नहीं होती।
CBSE सफाई की क्रिया चार कदम में लिखवाता है: पूँछ तेल में, सिर बाहर, पायस, आयन-आयन प्रतिकर्षण से गंदगी बहना।
10-सेकंड रिवीजन
पूँछ जलविरागी है।
जलविरागी पूँछ तैल के अंदर रहती है और आयनिक सिर बाहर पानी की ओर।
गलत — स्कम साबुन बनाता है। अपमार्जक का आवेशित सिरा Ca या Mg से थक्का नहीं बनाता।
क्रियाकलाप 4.11 की सफेद दही।
कैल्सियम और मैग्नीशियम साबुन से अघुलनशील स्कम बनाते हैं।
स्कम वाली नली में झाग कम है।
आसुत जल या वर्षा जल में झाग अधिक बनता है। कठोर जल में सफेद अवक्षेप बनता है।
साबुन लंबी-श्रृंखला कार्बोक्सिलिक अम्ल का Na या K लवण है। अपमार्जक सल्फोनिक अम्ल का लवण है। साबुन कठोर जल में Ca और Mg से स्कम बनाता है, अपमार्जक नहीं। इसलिए कठोर जल में साबुन का झाग गिर जाता है और अपमार्जक का झाग बना रहता है।
प्रकार चुनो। पाठों के 47 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
एक C−C और छह C−H।
एथेन में 7 सहसंयोजक बंध हैं।
वायु में CO2 लगभग 0.03% है।
भूपर्पटी में कार्बन लगभग 0.02% है।
परत में मुक्त इलेक्ट्रॉन।
ग्रेफाइट चालक है। हीरा नहीं।
फुटबॉल जैसी संरचना।
C60 एक फुलरीन है।
मीथेन CH4, एथेन C2H6।
ऐल्केन CnH2n+2 हैं।
पाँच कार्बन, तीन ढाँचे।
पेन्टेन के तीन संरचनात्मक समावयवी हैं।
CH2 = 12 + 2।
अंतर 14 u है।
प्रत्यय one।
प्रोपेनोन तीन कार्बन का कीटोन है।
साफ ज्वाला वाली स्थिति चुनो।
पर्याप्त हवा में संतृप्त यौगिक साफ ज्वाला देता है।
क्षारीय KMnO4।
एथेनॉल एथेनॉइक अम्ल में बदलता है।
प्रतिस्थापन।
उत्पाद क्लोरोमीथेन और HCl हैं।
सांद्र H2SO4 के साथ।
443 K पर एथीन बनती है।
अचार का परिरक्षक।
सिरका ऐसीटिक अम्ल का 5–8% घोल है।
Ca और Mg लवण।
साबुन स्कम बनाता है। अपमार्जक नहीं।
सही — अणुओं के बीच बल कमजोर है। सारणी 4.1 देखो।
गलत — चालक अपररूप ग्रेफाइट है।
गलत — एथीन में द्वि-बंध है, वह असंतृप्त है।
सही — किताब में सावधानी लिखी है।
सही — किताब धूप में तेज़ अभिक्रिया लिखती है।
गलत — यह परीक्षण कार्बोक्सिलिक अम्ल का है, ऐल्कोहॉल का नहीं।
सही — मिसेल प्रकाश बिखेरते हैं।
गलत — अपमार्जक कठोर जल में भी झाग देता है। जाँच साबुन से होती है।
इस गुण का नाम श्रृंखलन है।
अंग्रेज़ी catenation।
एथेनॉल 351 K पर उबलता है।
सारणी 4.1। गलनांक 156 K है।
ऐल्काइन CnH2n−2 हैं।
एथाइन C2H2।
प्रत्यय one है।
प्रोपेनोन।
गैस हाइड्रोजन है।
पॉप वाली गैस।
एथिल एथेनोएट एक एस्टर है।
मीठी गंध।
गलनांक 290 K है।
हिमनदित ऐसीटिक अम्ल।
बाहरी सिरा जलरागी या आयनिक है।
पानी की ओर।
ऑल, ऐल, ओन, और क्लोरो आगे लगता है।
बंद छेद से कज्जल, सोडियम से पॉप, एस्टर से गंध, कठोर जल से स्कम।
अभिकथन (A): हीरा बहुत कठोर है।
कारण (R): हीरे में हर कार्बन चार अन्य कार्बन से त्रिविमीय जाल में जुड़ा है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): ग्रेफाइट विद्युत चलाता है।
कारण (R): ग्रेफाइट एक धातु है।
A सही है। R गलत — ग्रेफाइट कार्बन का अपररूप है, अधातु है।
अभिकथन (A): समजातीय श्रेणी के अगले सदस्य का सूत्र पिछले से CH2 भिन्न होता है।
कारण (R): उनके अणु द्रव्यमान का अंतर 14 u होता है।
दोनों सही हैं। R द्रव्यमान बताता है, सूत्र का अंतर नहीं समझाता। R, A की व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A): एथेनॉल नीले लिटमस को लाल कर देता है।
कारण (R): कार्बोक्सिलिक अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं।
A गलत है — एथेनॉल लिटमस नहीं बदलता। R सही है।
अभिकथन (A): कठोर जल में साबुन से कपड़ा ठीक से नहीं धुलता।
कारण (R): कैल्सियम और मैग्नीशियम लवण साबुन से अघुलनशील स्कम बनाते हैं।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
एथेन और प्रोपेन संतृप्त हैं। एथीन और एथाइन असंतृप्त हैं।
स्कम और कार्बोक्सिलिक लवण साबुन के हैं। कठोर जल में टिका झाग अपमार्जक का है।
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन की जोड़ी के साझे से बना बंध सहसंयोजक बंध है।
वह परमाणु या समूह जो हाइड्रोकार्बन की हाइड्रोजन की जगह लगकर यौगिक का रासायनिक गुण तय करे।
समान अणु सूत्र और भिन्न संरचना वाले यौगिक संरचनात्मक समावयवी हैं। ब्यूटेन का सूत्र C4H10 है और उसकी दो संरचनाएँ हैं।
जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ में ऑक्सीजन जोड़ दे, वह ऑक्सीकारक है। उदाहरण: क्षारीय KMnO4।
साबुन क्षारीय लवण है। वह लाल लिटमस को नीला करता है। नीला लिटमस नीला ही रहता है।
हीरे में हर कार्बन चार से जुड़ा है, ग्रेफाइट में तीन से। हीरा कठोर है, ग्रेफाइट मुलायम और फिसलन भरा। हीरा कुचालक है, ग्रेफाइट चालक।
एक ही प्रकार्यात्मक समूह वाले यौगिकों की कड़ी, जिसमें अगला सदस्य CH2 और 14 u से भारी हो। उदाहरण: CH3OH, C2H5OH, C3H7OH। रासायनिक गुण मिलते हैं, भौतिक गुण क्रम से बदलते हैं।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में निकैल या पैलेडियम की उपस्थिति में हाइड्रोजन जुड़ना हाइड्रोजनीकरण है। वनस्पति तेलों को वनस्पति घी जैसी संतृप्त वसा बनाने में इसका उपयोग होता है।
2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2। CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2। दोनों में चूने का पानी दूधिया होता है।
साबुन का आयनिक सिरा जलरागी है और कार्बन पूँछ जलविरागी। पानी में पूँछें तैलीय गंदगी के अंदर छिपती हैं और सिर बाहर रहते हैं। यही मिसेल है। हिलाने से गंदगी बीच में आती है। समान आवेश के कारण मिसेल चिपककर नहीं जमता और पानी के साथ बह जाता है। कठोर जल के Ca और Mg आयन साबुन से अघुलनशील स्कम बनाते हैं, इसलिए झाग नहीं बनता। अपमार्जक यह स्कम नहीं बनाता।
एथेनॉल 351 K पर उबलता है, एथेनॉइक अम्ल 391 K पर। शुद्ध अम्ल 290 K पर जमकर हिमनदित कहलाता है। अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है, एथेनॉल नहीं। अम्ल सोडियम कार्बोनेट से CO2 देता है, एथेनॉल नहीं। एस्टर: CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O, सांद्र H2SO4 के साथ।
कार्बन छोटा परमाणु है और कार्बन-कार्बन बंध मजबूत है। श्रृंखलन से वह लंबी श्रृंखला, शाखा और वलय बनाता है, जैसे हेक्सेन की श्रृंखला या साइक्लोहेक्सेन का वलय। चतुर्संयोजकता से हर कार्बन चार बंध जोड़ता है, इसलिए हाइड्रोजन के साथ मीथेन CH4 बनता है और ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन के साथ और समूह जुड़ते हैं। दोनों गुण साथ मिलकर लाखों यौगिक देते हैं।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
केवल एकल बंध।
C2H6 एथेन है और संतृप्त है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण।
साबुन लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है।
ब्यूटेनोन में चार कार्बन हैं।
ब्यूट = चार।
हवा के छेद बंद होने से ईंधन अधूरा जलता है और कज्जल बर्तन पर जमता है। चूल्हे के हवा-छेद साफ करो, ताकि नीली ज्वाला मिले।
2Na + 2C2H5OH → 2C2H5ONa + H2। गैस की पॉप हाइड्रोजन की पहचान है। सोडियम चावल के दो दानों जितना हो और शिक्षक ही डाले। 443 K पर अधिक सांद्र H2SO4 एथेनॉल से जल निकालकर एथीन बनाती है। सांद्र अम्ल त्वचा जलाता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
साबुन पायस बनाता है।
बिना साबुन वाली नली A में परतें जल्दी अलग होती हैं।
द्वि या त्रि-बंध चाहिए।
एथीन और एथाइन असंतृप्त हैं, वे हाइड्रोजन जोड़ते हैं।
अभिकथन (A): क्रियाकलाप 4.5 में शुरू की बूँदों का गुलाबी रंग मिट जाता है।
कारण (R): क्षारीय KMnO4 एथेनॉल को ऑक्सीकृत करने में खर्च हो जाता है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): कठोर जल में अपमार्जक झाग दे सकता है।
कारण (R): अपमार्जक कैल्सियम आयनों से वही अघुलनशील स्कम बनाता है जो साबुन बनाता है।
A सही है। R गलत — अपमार्जक का आवेशित सिरा अघुलनशील स्कम नहीं बनाता।
पहला द्रव एथेनॉल हो सकता है। दूसरा एथेनॉइक अम्ल। अम्ल लिटमस बदलता है और कार्बोनेट से CO2 देता है।
हाइड्रोकार्बन में जलरागी सिर अंदर की ओर मुड़ेंगे और जलविरागी पूँछें बाहर विलायक की ओर रहेंगी। पानी में इसका उल्टा होता है: पूँछ अंदर, सिर बाहर।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| मीथेन का दहन | CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O |
| एथेनॉल का दहन | C2H5OH + 3O2 → 2CO2 + 3H2O |
| एथेनॉल और सोडियम | 2Na + 2C2H5OH → 2C2H5ONa + H2 |
| एस्टरीकरण | CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O |
| अम्ल और कार्बोनेट | 2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2 |
| समजातीय अंतर | CH2 और 14 u |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।