रेगमाल रगड़ने के बाद जो चमक लौटती है।
शुद्ध धातु की चमकती सतह को धात्विक चमक कहते हैं।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 3 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Metals and Non-metals
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 3.1 से 3.14, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. पाठ 8 की सक्रियता श्रेणी और पाठ 12 की तीन परखनलियाँ याद रखने का चित्र हैं।
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Metallic lustre and hardness — Activities 3.1 and 3.2 · NCERT 3.1.1 · क्रियाकलाप 3.1, 3.2
लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, सोडियम, सीसा और ज़िंक धातु हैं। कार्बन, सल्फ़र, आयोडीन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अधातु हैं। ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो कमरे के ताप पर द्रव है।
शुद्ध धातु की सतह रगड़ने पर चमकती है। इसी चमक को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं।
लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और मैग्नीशियम के नमूने लो। पहले उनका रंग और सतह लिखो। फिर रेगमाल से रगड़ो। रगड़ने के बाद हर नमूना चमकने लगता है। धूल और ऑक्साइड की पतली परत चमक छिपाए बैठी थी।
लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और मैग्नीशियम चाकू से आसानी से नहीं कटते — ये कठोर हैं। सोडियम को चिमटी से पकड़ो, फ़िल्टर पत्र की तहों के बीच सुखाओ और वॉच-ग्लास पर चाकू से काटो। वह मक्खन की तरह कट जाता है।
सावधानी: सोडियम नंगे हाथ से मत पकड़ो। वह वायु की नमी से तेज़ी से अभिक्रिया करता है, इसलिए उसे केरोसिन में रखा जाता है।
प्रश्न: सोडियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है?
उत्तर: सोडियम बहुत सक्रिय है। खुली वायु में वह ऑक्सीजन और नमी दोनों से अभिक्रिया कर जाता है। केरोसिन उसे वायु और जल से अलग रखता है।
वस्तुनिष्ठ में «सोडियम को किसमें रखते हैं?» का उत्तर केरोसिन है, जल नहीं।
CBSE कारण पूछता है — वायु की नमी और ऑक्सीजन से अभिक्रिया। केवल «सक्रिय है» लिखकर मत रुकना।
रेगमाल रगड़ने के बाद जो चमक लौटती है।
शुद्ध धातु की चमकती सतह को धात्विक चमक कहते हैं।
सही — क्षार धातुएँ नरम होती हैं। लोहा और ताँबा चाकू से नहीं कटते।
वह वायु और नमी से तेज़ी से अभिक्रिया करता है।
केरोसिन सोडियम को वायु और जल के संपर्क से बचाता है।
मैली या ऑक्साइड की परत हटती है और सतह फिर से चमकने लगती है। यही धात्विक चमक है।
Malleability and ductility — Activities 3.3 and 3.4 · NCERT 3.1.1 · क्रियाकलाप 3.3, 3.4
लोहा, ज़िंक, सीसा और ताँबे के टुकड़े लो। एक टुकड़े को लोहे के गुटके पर रखकर हथौड़े से चार-पाँच बार मारो। धातु चपटी चादर बन जाती है, चूर-चूर नहीं होती। धातु को पीटकर पतली चादर बनाने के गुण को आघातवर्ध्यता (malleability) कहते हैं। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं।
ताँबा, ऐलुमिनियम, लोहा और सीसा तार के रूप में मिलते हैं। धातु को खींचकर पतला तार बनाने के गुण को तन्यता (ductility) कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य है — एक ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा तार खिंच सकता है।
इन्हीं दो गुणों के कारण धातु को बर्तन, तार और आभूषण का आकार दिया जाता है। अधातु ठोकर पड़ने पर टूट जाते हैं — वे भंगुर (brittle) होते हैं।
आघातवर्ध्य = चादर। तन्य = तार। परीक्षा में ये दोनों अक्सर अदला-बदली कर दिए जाते हैं।
BSEB में परिभाषा दो पंक्ति की होती है — गुण का नाम और एक उदाहरण (सोना) साथ लिखो।
CBSE «क्यों बर्तन धातु के बनते हैं?» पूछता है — आघातवर्ध्यता और ऊष्मा का चालन, दोनों कारण दो।
चादर हथौड़े से बनती है, तार खींचने से नहीं।
पीटकर चादर बनाना आघातवर्ध्यता है। तार खींचना तन्यता है।
सही — सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।
अंग्रेज़ी शब्द brittle।
अधातु भंगुर होते हैं। धातु आघातवर्ध्य होते हैं।
उसी धातु से एक ग्राम में किलोमीटर लंबा तार बनता है।
सोना सबसे अधिक तन्य है। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य भी हैं।
Heat, electricity and sound — Activities 3.5 to 3.7 · NCERT 3.1.1–3.1.2 · क्रियाकलाप 3.5, 3.6, 3.7 · सारणी 3.1
ऐलुमिनियम या ताँबे के तार को स्टैंड पर क्लैंप करो। स्वतंत्र सिरे पर मोम से एक पिन चिपकाओ। क्लैंप के पास तार को स्पिरिट लैंप से गर्म करो। कुछ देर में मोम पिघलता है और पिन गिर जाती है, पर तार स्वयं नहीं पिघलता। धातु ऊष्मा की सुचालक है और उसका गलनांक ऊँचा है। ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक चाँदी और ताँबा हैं। सीसा और पारा तुलना में कमज़ोर चालक हैं।
परिपथ में धातु को टर्मिनल A और B के बीच रखो। बल्ब जलता है — धातु विद्युत की सुचालक है। घर के तार पर PVC या रबर की परत इसलिए होती है कि धारा बाहर न आए। धातु को कठोर सतह पर मारो तो ध्वनि निकलती है — धातु ध्वानिक (sonorous) है। स्कूल की घंटी इसीलिए धातु की होती है।
कार्बन (कोयला या ग्रेफाइट), सल्फ़र और आयोडीन पर वही जाँच दोहराओ। अधातु प्रायः कुचालक और भंगुर होते हैं।
इसलिए केवल भौतिक गुणों से वर्गीकरण पूरा नहीं होता। रासायनिक गुण साफ़ रेखा खींचते हैं।
अपवाद वाला बहुविकल्पी लगभग हर साल आता है। पारा, ग्रेफाइट, आयोडीन, गैलियम — चारों एक सूची में याद रखो।
कारण-प्रश्न: «बेल धातु की क्यों?» — ध्वानिक। «तार पर रबर क्यों?» — धातु चालक है, आवरण कुचालक है।
ब्रोमीन अधातु है।
पारा कमरे के ताप पर द्रव धातु है। ब्रोमीन द्रव अधातु है।
सही — ग्रेफाइट कार्बन का अपररूप है और विद्युत चालक है। हीरा चालक नहीं है।
ठोकर पर ध्वनि निकलती है।
धातु ध्वानिक होती है, इसलिए घंटी धातु की बनती है।
गलनांक बहुत कम है।
गैलियम और सीज़ियम हथेली की गर्मी से पिघल जाते हैं।
ग्रेफाइट अधातु है, फिर भी विद्युत का सुचालक है। या: सीसा और पारा ऊष्मा के तुलनात्मक रूप से कमज़ोर चालक हैं।
The oxide formed on burning — Activity 3.8 · NCERT 3.2 की भूमिका · क्रियाकलाप 3.8
मैग्नीशियम रिबन जलाओ। राख इकट्ठा करके जल में घोलो और लाल तथा नीले लिटमस से जाँचो। राख मैग्नीशियम ऑक्साइड है। विलयन लाल लिटमस को नीला करता है — धातु का ऑक्साइड क्षारकीय है।
अब सल्फ़र का चूर्ण जलाओ। परखनली को जलती सल्फ़र के ऊपर रखकर धुआँ इकट्ठा करो, थोड़ा जल डालकर हिलाओ। यह विलयन नीले लिटमस को लाल करता है — अधातु का ऑक्साइड अम्लीय है।
धातु + ऑक्सीजन → क्षारकीय ऑक्साइड। अधातु + ऑक्सीजन → अम्लीय ऑक्साइड। अगले पाठ में दो अपवाद मिलेंगे — ऐलुमिनियम और ज़िंक के ऑक्साइड दोनों तरह व्यवहार करते हैं।
प्रश्न: MgO का जलीय विलयन लाल लिटमस पर क्या करेगा, और SO₂ का जलीय विलयन नीले लिटमस पर?
उत्तर: MgO क्षारकीय है, इसलिए लाल लिटमस नीला हो जाएगा। SO₂ जल में अम्ल बनाती है, इसलिए नीला लिटमस लाल हो जाएगा।
समीकरण और लिटमस का रंग एक ही उत्तर में माँगे जाते हैं। दोनों लिखो।
«क्यों क्षारकीय?» का उत्तर है: धातु ऑक्साइड जल में क्षार की तरह व्यवहार करता है।
MgO क्षारकीय ऑक्साइड है।
क्षारक लाल लिटमस को नीला करता है। MgO क्षारकीय है।
सही — SO₂ जल में अम्ल देती है और नीला लिटमस लाल हो जाता है।
ऑक्सीजन बाईं ओर दो परमाणु है, दाईं ओर MgO में एक।
धातु का ऑक्साइड क्षारकीय होता है, जैसे MgO लाल लिटमस को नीला करता है। अधातु का ऑक्साइड अम्लीय होता है, जैसे SO₂ नीले लिटमस को लाल करता है।
Metals burn in air — Activity 3.9 · NCERT 3.2.1 · क्रियाकलाप 3.9 · उभयधर्मी ऑक्साइड
शिक्षक के साथ मैग्नीशियम, ऐलुमिनियम, ज़िंक, लोहा और ताँबा जलाकर देखो। मैग्नीशियम चमकीली सफ़ेद लौ से जलता है। ऐलुमिनियम और ज़िंक भी ऑक्साइड बनाते हैं। लोहा धीमा है। ताँबा केवल सतह पर काला कॉपर ऑक्साइड बनाता है। सब धातुएँ ऑक्सीजन से एक गति से नहीं जलतीं — यही सक्रियता का पहला संकेत है।
2Cu + O2 → 2CuO4Al + 3O2 → 2Al2O3ऐलुमिनियम ऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया करते हैं। इन्हें उभयधर्मी (amphoteric) कहते हैं।
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2OAl2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2Oसोडियम और पोटैशियम इतने सक्रिय हैं कि खुली वायु में आग पकड़ सकते हैं, इसलिए केरोसिन में रहते हैं। मैग्नीशियम, ऐलुमिनियम और ज़िंक पर ऑक्साइड की पतली परत और अधिक ऑक्सीजन को अंदर नहीं जाने देती — धातु नीचे सुरक्षित रहती है।
प्रश्न: Al₂O₃ को उभयधर्मी क्यों कहते हैं? एक अम्ल और एक क्षारक से समीकरण लिखो।
उत्तर: क्योंकि वह अम्ल और क्षारक दोनों से लवण बनाता है। HCl से AlCl₃ और NaOH से NaAlO₂।
उभयधर्मी की परिभाषा एक पंक्ति है: अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया। उदाहरण Al₂O₃, ZnO।
केरोसिन वाला कारण पाठ 1 से जुड़ता है — यहाँ ऑक्सीजन से जलना जोड़ दो।
10-सेकंड रिवीजन
अम्ल और क्षारक दोनों से लवण बनाता है।
Al₂O₃ और ZnO उभयधर्मी हैं। MgO केवल क्षारकीय है, SO₂ अम्लीय।
वायु में आग पकड़ सकते हैं।
केरोसिन इन्हें ऑक्सीजन और नमी से अलग रखता है।
गलत — ताँबा केवल सतह पर काला CuO बनाता है। मैग्नीशियम चमकीली सफ़ेद लौ से जलता है।
Al₂O₃ में ऑक्सीजन के 3 परमाणु हैं। बाईं ओर O₂ है।
सतह पर Al₂O₃ की पतली परत बन जाती है। यह परत और ऑक्सीजन को धातु तक नहीं पहुँचने देती।
Metals and water — Activity 3.10 · NCERT 3.2.2 · क्रियाकलाप 3.10
शिक्षक के साथ वही धातुएँ लो। ठंडे जल से शुरू करो।
ऐलुमिनियम और लोहे वाले समीकरण भाप के लिए हैं। लोहे का ऑक्साइड Fe₃O₄ है, FeO नहीं।
प्रश्न: सोडियम ठंडे जल में डालते ही आग क्यों दिखती है, और ताँबे में क्यों नहीं?
उत्तर: सोडियम बहुत सक्रिय है। अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है और बनी H₂ आग पकड़ लेती है। ताँबा सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए जल से H₂ नहीं निकालता।
क्रम पूछें तो लिखो: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb, Cu, Ag, Au।
भाप और ठंडे जल का अंतर छूटता है। लोहे के सामने «भाप» और Fe₃O₄ दोनों लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
इसे केरोसिन में रखना पड़ता है।
सोडियम और पोटैशियम ठंडे जल से तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं और H₂ जल उठती है।
लोहा ठंडे जल से नहीं चलता।
3Fe + 4H₂O (भाप) → Fe₃O₄ + 4H₂।
गलत — ताँबा, चाँदी और सोना जल से अभिक्रिया नहीं करते।
H₂ में हाइड्रोजन के दो परमाणु हैं।
ठंडे जल से अभिक्रिया बहुत धीमी है। गर्म जल में गति बढ़ती है और हाइड्रोजन गैस बनती है। Mg, Na से कम सक्रिय है।
Metals and dilute acids — Activity 3.11 · NCERT 3.2.3 · क्रियाकलाप 3.11 · अम्लराज
परखनली में धातु का नमूना और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लो। जो धातु सक्रिय है, वह बुदबुदाहट देती है। गैस जलती तीली के पास पॉप ध्वनि से जलती है — यह हाइड्रोजन है।
गति का क्रम लगभग यह है: Mg > Al > Zn > Fe। ताँबा तनु HCl से हाइड्रोजन नहीं निकालता। हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ ही तनु अम्ल से H₂ निकालती हैं।
तनु नाइट्रिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक है। वह धातु से अभिक्रिया तो करता है, पर हाइड्रोजन गैस प्रायः नहीं देता — H₂ को पानी में ऑक्सीकृत कर देता है। मैग्नीशियम और मैंगनीज़ इस नियम के अपवाद हैं; ये तनु HNO₃ से H₂ दे देते हैं।
सोना और प्लैटिनम अकेले अम्ल में नहीं घुलते। अम्लराज (aqua regia) — सांद्र HCl और सांद्र HNO₃ का 3 : 1 मिश्रण — इन्हें घोल लेता है।
प्रश्न: ताँबा तनु HCl में नहीं घुलता, पर अम्लराज सोने को घोल लेता है। दोनों बातों का एक-एक कारण लिखो।
उत्तर: ताँबा सक्रियता में हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए तनु HCl से H₂ नहीं हटाता। अम्लराज नवजात क्लोरीन देता है, जो सोने को घुलनशील क्लोराइड में बदल देती है।
पॉप टेस्ट अध्याय 2 से जुड़ा है — गैस का नाम और जाँच दोनों लिखो।
अम्लराज का अनुपात 3:1 है। उलटा लिखना आम गलती है।
10-सेकंड रिवीजन
यह हाइड्रोजन है।
H₂ जलती तीली के पास पॉप ध्वनि देती है।
गलत — ताँबा हाइड्रोजन से कम सक्रिय है।
HCl अधिक है।
अम्लराज सांद्र HCl और सांद्र HNO₃ का 3:1 मिश्रण है। यह सोना और प्लैटिनम घोलता है।
साधारणत: HNO₃ हाइड्रोजन को जल में ऑक्सीकृत कर देता है। मैग्नीशियम और मैंगनीज़ अपवाद हैं — ये तनु HNO₃ से H₂ दे देते हैं।
सबसे सक्रिय धातु सबसे तेज़।
Mg > Al > Zn > Fe। ताँबा इस सूची में नहीं आता।
Displacement and the reactivity series — Activity 3.12 · NCERT 3.2.4–3.2.5 · क्रियाकलाप 3.12 · सारणी 3.2
लोहे की कील को कॉपर सल्फ़ेट के नीले विलयन में डालो। विलयन का नीला रंग फीका पड़ता है और कील पर लाल-भूरी ताँबे की परत जमती है। लोहा ताँबे से अधिक सक्रिय है, इसलिए उसे विस्थापित कर देता है।
उलटी जोड़ी नहीं चलती। ताँबे की पट्टी ज़िंक सल्फ़ेट में डालो तो कुछ नहीं होता — ताँबा ज़िंक को नहीं हटा सकता। नियम: अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण-विलयन से निकाल देती है।
K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Hg, Ag, Au
हाइड्रोजन धातु नहीं है, पर श्रेणी में इसलिए बैठाया गया है कि बता सके कौन तनु अम्ल से H₂ निकाल सकता है। H से ऊपर वाली धातु निकाल सकती है।
श्रेणी का क्रम उलटा लिखना सबसे आम गलती है। K सबसे ऊपर, Au सबसे नीचे।
रंग-परिवर्तन वाला केस-प्रश्न आता है: नीला CuSO₄ + Fe → हल्का हरा FeSO₄।
10-सेकंड रिवीजन
लोहा ताँबे से अधिक सक्रिय है।
Fe, Cu को CuSO₄ से विस्थापित करता है। विलयन FeSO₄ का हल्का हरा हो जाता है।
हर पक्ष में एक-एक परमाणु है।
गलत — ज़िंक ताँबे से अधिक सक्रिय है। कम सक्रिय धातु अधिक सक्रिय को नहीं निकालती।
जिन धातुओं का स्थान हाइड्रोजन से ऊपर है, वे तनु अम्ल से H₂ निकाल सकती हैं। नीचे वाली, जैसे Cu और Ag, नहीं निकाल सकतीं।
श्रेणी के सबसे दाएँ या सबसे नीचे।
श्रेणी K से शुरू होकर Au पर समाप्त होती है। सोना सबसे कम सक्रिय है।
How metals and non-metals join — a transfer of electrons · NCERT 3.3 · सारणी 3.3 · आयनिक आबंध
परमाणु के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (हाइड्रोजन में 2) होने पर विन्यास स्थायी होता है। धातु के पास बाहरी इलेक्ट्रॉन कम होते हैं, इसलिए वह उन्हें देकर धनायन बनती है। अधातु के पास बाहरी इलेक्ट्रॉन अधिक होते हैं, इसलिए वह उन्हें लेकर ऋणायन बनती है।
सोडियम (2, 8, 1) एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ (2, 8) बनता है। क्लोरीन (2, 8, 7) एक इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻ (2, 8, 8) बनती है। विपरीत आवेश खिंचकर आयनिक आबंध बनाते हैं — यौगिक NaCl।
मैग्नीशियम (2, 8, 2) दो इलेक्ट्रॉन खोता है और Mg²⁺ बनता है। हर क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन लेती है। इसलिए एक Mg²⁺ को दो Cl⁻ चाहिए — सूत्र MgCl₂।
इसी तरह सोडियम ऑक्साइड में ऑक्सीजन को दो इलेक्ट्रॉन चाहिए, इसलिए दो Na⁺ लगते हैं — Na₂O।
प्रश्न: NaCl में कौन इलेक्ट्रॉन देता है और कौन लेता है? आयनों के प्रतीक लिखो।
उत्तर: सोडियम एक इलेक्ट्रॉन देकर Na⁺ बनता है। क्लोरीन वही इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻ बनती है।
इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना में केवल बाहरी कोश के बिंदु दिखाओ। Na के एक बिंदु और Cl के सात।
सूत्र पूछें तो आवेश संतुलित करो: Mg²⁺ के साथ Cl⁻ दो होने चाहिए।
10-सेकंड रिवीजन
धातु इलेक्ट्रॉन देती है।
सोडियम एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनता है। क्लोरीन Cl⁻ बनती है।
गलत — आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉन के हस्तांतरण से बनता है। साझेदारी सहसंयोजी आबंध में होती है।
Mg दो इलेक्ट्रॉन खोता है।
Mg²⁺ और दो Cl⁻ मिलकर MgCl₂ बनाते हैं।
1. Na (2, 8, 1) एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ (2, 8) बनता है। 2. Cl (2, 8, 7) वह इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻ (2, 8, 8) बनती है। 3. Na⁺ और Cl⁻ के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण से NaCl बनता है।
Properties of ionic compounds — Activity 3.13 · NCERT 3.3.1 · क्रियाकलाप 3.13 · सारणी 3.4
सोडियम क्लोराइड, पोटैशियम आयोडाइड जैसे आयनिक यौगिक लो।
प्रश्न: ठोस NaCl विद्युत का चालक क्यों नहीं है, जबकि उसका जलीय विलयन चालक है?
उत्तर: ठोस में Na⁺ और Cl⁻ अपने स्थान पर बँधे हैं। जल में वे अलग-अलग घूम सकते हैं, इसलिए धारा बहती है।
तीन अवस्थाएँ लिखो: ठोस — नहीं; पिघला — हाँ; जलीय — हाँ।
कारण हमेशा «आयन गतिमान हैं या नहीं» से दो, «जल चालक है» से नहीं।
10-सेकंड रिवीजन
पिघलाने पर वही यौगिक चालक हो जाता है।
ठोस में आयन स्थिर होते हैं। पिघलने या घुलने पर वे चलकर धारा ले जाते हैं।
सही — विपरीत आयनों के बीच आकर्षण तोड़ने में अधिक ऊर्जा लगती है। NaCl लगभग 1074 K पर पिघलता है।
आयन स्वतंत्र हो जाते हैं।
जलीय विलयन में आयन चलते हैं, इसलिए यौगिक चालक बन जाता है।
हथौड़े की ठोकर से आयनों की एक परत खिसकती है। तब समान आवेश वाले आयन आमने-सामने आ जाते हैं और प्रतिकर्षण से क्रिस्टल टूट जाता है।
From ore to metal — three paths by reactivity · NCERT 3.4.1–3.4.5 · निस्तापन, भर्जन, थर्मिट
पृथ्वी की पर्पटी में धातुएँ प्रायः यौगिक के रूप में मिलती हैं। ऐसे प्राकृतिक पदार्थ को खनिज कहते हैं। जिस खनिज से धातु लाभदायक ढंग से निकाली जा सके, वह अयस्क (ore) है। अयस्क के साथ मिली रेत-मिट्टी की अशुद्धि गैंग (gangue) है। अयस्क को गैंग से अलग करना सांद्रण (enrichment) है।
कम सक्रिय धातुएँ (Cu, Ag, Au) कभी-कभी मुक्त अवस्था में मिलती हैं। बीच की (Zn, Fe, Pb) ऑक्साइड, सल्फ़ाइड या कार्बोनेट के रूप में। सबसे सक्रिय (K, Na, Ca, Mg, Al) को पिघले लवण के विद्युत-अपघटन से निकाला जाता है।
कम सक्रिय: सल्फ़ाइड को हवा में गर्म करके ऑक्साइड, फिर और गर्म करके धातु। पारे के ऑक्साइड को केवल गर्म करना काफी है।
2HgO → 2Hg + O2मध्य सक्रिय: सल्फ़ाइड अयस्क को अधिक वायु में गर्म करना भर्जन (roasting) है। कार्बोनेट को सीमित वायु में गर्म करना निस्तापन (calcination) है। ऑक्साइड को कार्बन से अपचयित करते हैं।
2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2ZnCO3 → ZnO + CO2ZnO + C → Zn + COथर्मिट: ऐलुमिनियम लोहे के ऑक्साइड से लोहा निकाल देता है। रेल की पटरी जोड़ने में यही ऊष्मा काम आती है।
Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3सबसे सक्रिय: कार्बन इन्हें नहीं निकाल सकता। पिघले NaCl या ऐलुमिना (क्रायोलाइट के साथ) का विद्युत-अपघटन करते हैं।
भर्जन और निस्तापन की परिभाषा में «अधिक वायु» और «सीमित वायु» शब्द अनिवार्य हैं।
थर्मिट में अपचायक ऐलुमिनियम है, कार्बन नहीं। रेल-पटरी उसका उपयोग है।
10-सेकंड रिवीजन
कार्बोनेट वाले प्रक्रम का नाम दूसरा है।
भर्जन सल्फ़ाइड अयस्क को अधिक वायु में गर्म करना है। निस्तापन कार्बोनेट को सीमित वायु में गर्म करना है।
सही — ये सक्रियता श्रेणी में नीचे हैं, इसलिए यौगिक बनाकर नहीं छिपते।
Al₂O₃ में ऐलुमिनियम के दो परमाणु हैं।
अंग्रेज़ी शब्द gangue।
गैंग अयस्क के साथ मिली अवांछित रेत या मिट्टी है।
भर्जन: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂। फिर कार्बन से अपचयन: ZnO + C → Zn + CO।
Refining and corrosion — Activity 3.14 · NCERT 3.4.6, 3.5, 3.5.1 · क्रियाकलाप 3.14
अशुद्ध ताँबा ऐनोड होता है और शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी कैथोड। विद्युत-अपघट्य अम्लीय कॉपर सल्फ़ेट है। ऐनोड से Cu²⁺ विलयन में जाता है और कैथोड पर शुद्ध ताँबा जमता है। अघुलनशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक (anode mud) के रूप में बैठती हैं — इसमें कभी-कभी चाँदी और सोना भी होता है।
तीन परखनलियों में साफ़ लोहे की कीलें रखो।
जंग के लिए हवा (ऑक्सीजन) और जल दोनों एक साथ चाहिए। लोहे पर जंग का सूत्र जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड है — Fe₂O₃·xH₂O।
ऐनोड-कैथोड उलटा लिखना आम गलती है। अशुद्धि ऐनोड पर होती है, शुद्ध धातु कैथोड पर जमती है।
तीन परखनलियों का चित्र खुद बनाकर अभ्यास करो। तेल की परत और CaCl₂ का काम एक-एक वाक्य में लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
अशुद्ध धातु ऐनोड होती है।
शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है। अघुलनशील अशुद्धि ऐनोड पंक बनती है।
गलत — जंग के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों चाहिए। क्रियाकलाप 3.14 की परखनली C सूखी रहती है और जंग नहीं लगता।
लोहे पर ज़िंक की परत चढ़ाई जाती है। ज़िंक अधिक सक्रिय होने के कारण पहले संक्षारित होता है और लोहे तक हवा-जल नहीं पहुँचने देता। परत छिल भी जाए तो आस-पास का ज़िंक लोहे की रक्षा करता रहता है।
कांसा ताँबा और टिन है।
स्टेनलेस स्टील में लोहा, कार्बन, निकैल और क्रोमियम होते हैं।
O₂ में ऑक्सीजन के दो परमाणु हैं।
प्रकार चुनो। पाठों के 55 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
रेगमाल के बाद जो चमक लौटती है।
शुद्ध धातु की चमकती सतह को धात्विक चमक कहते हैं।
एक ग्राम से लगभग दो किलोमीटर तार।
सोना सबसे अधिक तन्य है।
ब्रोमीन अधातु है।
पारा द्रव धातु है। ब्रोमीन द्रव अधातु है।
कार्बन का एक अपररूप।
ग्रेफाइट अधातु होकर भी विद्युत चालक है। हीरा नहीं।
धातु का ऑक्साइड।
MgO क्षारकीय है और लाल लिटमस को नीला करता है।
अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया।
ZnO और Al₂O₃ उभयधर्मी हैं।
श्रेणी में सबसे ऊपर।
पोटैशियम और सोडियम ठंडे जल से तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं।
समीकरण 3Fe + 4H₂O।
भाप के साथ लोहा Fe₃O₄ देता है।
HCl अधिक मात्रा में।
अम्लराज सांद्र HCl और सांद्र HNO₃ का 3:1 मिश्रण है।
FeSO₄ का रंग।
नीला CuSO₄, हल्के हरे FeSO₄ में बदलता है और ताँबा कील पर जमता है।
सारणी 3.2।
क्रम है Pb, H, Cu।
धातु इलेक्ट्रॉन देती है।
सोडियम एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनता है।
पिघलाने पर चालक हो जाता है।
ठोस में आयन स्थिर होते हैं।
सल्फ़ाइड वाले प्रक्रम का नाम दूसरा है।
निस्तापन कार्बोनेट का है। भर्जन सल्फ़ाइड का, अधिक वायु में।
रेल की पटरी जोड़ने वाली धातु।
Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ में ऐलुमिनियम अपचायक है।
अशुद्ध छड़ ऐनोड है।
शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है।
क्रियाकलाप 3.14 की तीन परखनलियाँ।
नमी और हवा दोनों के बिना जंग नहीं लगता।
गलत — सोडियम केरोसिन में रखा जाता है। जल से वह आग पकड़ लेता है।
सही — यह भौतिक गुणों के वर्गीकरण का अपवाद है।
गलत — केवल हाइड्रोजन से ऊपर वाली धातुएँ। ताँबा नहीं निकालता।
सही — यही क्रियाकलाप 3.12 का नियम है।
गलत — ठोस में आयन चल नहीं सकते। पिघली या जलीय अवस्था में चालन होता है।
गलत — भर्जन अधिक वायु में होता है। सीमित वायु निस्तापन की बात है।
सही — ज़िंक पहले संक्षारित होकर लोहे को बचाता है।
गलत — इसमें लोहा, कार्बन, निकैल और क्रोमियम होते हैं।
तार = तन्यता।
चादर बनाना आघातवर्ध्यता है।
गैलियम और सीज़ियम।
गलनांक बहुत कम।
अम्लराज सोना और प्लैटिनम घोलता है।
दो बहुत कम सक्रिय धातुएँ।
पोटैशियम सबसे सक्रिय है और सोना सबसे कम।
श्रेणी का पहला नाम।
Mg²⁺ और दो Cl⁻ से MgCl₂ बनता है।
Mg दो इलेक्ट्रॉन खोता है।
गैंग अवांछित रेत या मिट्टी है।
अंग्रेज़ी gangue।
जंग जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड है, Fe₂O₃·xH₂O।
जल के अणुओं की संख्या निश्चित नहीं लिखी जाती।
पीतल = ताँबा + ज़िंक। कांसा = ताँबा + टिन।
कांसे में टिन होता है।
चादर, तार, ध्वनि, चमक — इसी क्रम में।
पीतल में ज़िंक, कांसे में टिन, सोल्डर में सीसा-टिन, स्टेनलेस स्टील में निकैल और क्रोमियम।
अभिकथन (A): सोडियम को केरोसिन में रखा जाता है।
कारण (R): सोडियम वायु की नमी और ऑक्सीजन से तेज़ी से अभिक्रिया करता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): ग्रेफाइट विद्युत का चालक है।
कारण (R): ग्रेफाइट एक धातु है।
A सही है। R गलत — ग्रेफाइट कार्बन का अपररूप है, अधातु है।
अभिकथन (A): लोहे की कील नीले कॉपर सल्फ़ेट में लाल-भूरी हो जाती है।
कारण (R): लोहा ताँबे से अधिक सक्रिय है और उसे विस्थापित कर देता है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): ठोस सोडियम क्लोराइड विद्युत नहीं चलाता।
कारण (R): ठोस NaCl में आयन होते ही नहीं।
A सही है। R गलत — आयन होते हैं, पर ठोस में चल नहीं सकते।
पारा धातु है, ग्रेफाइट और आयोडीन अधातु, पीतल मिश्रधातु।
MgO क्षारकीय, SO₂ अम्लीय, Al₂O₃ और ZnO उभयधर्मी।
सोडियम ठंडे जल से, लोहा केवल भाप से, ताँबा जल से नहीं।
धातु को पीटकर पतली चादर बनाने के गुण को आघातवर्ध्यता कहते हैं।
जो धातु कठोर सतह पर मारने से ध्वनि दे, वह ध्वानिक कहलाती है।
सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 मिश्रण। यह सोना और प्लैटिनम को घोल लेता है।
खनिज पृथ्वी में मिला धातु का प्राकृतिक यौगिक है। जिस खनिज से धातु लाभदायक ढंग से निकले, वह अयस्क है। हर अयस्क खनिज है, हर खनिज अयस्क नहीं।
विद्युत-अपघटनी शोधन में ऐनोड की अघुलनशील अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं। इसी निक्षेप को ऐनोड पंक कहते हैं।
धातु चमकदार, आघातवर्ध्य और विद्युत की सुचालक होती हैं। अधातु प्रायः फीके, भंगुर और कुचालक होते हैं। अपवाद: ग्रेफाइट चालक है, आयोडीन चमकदार है।
K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Hg, Ag, Au। ताँबा हाइड्रोजन से नीचे है, इसलिए तनु अम्ल से H₂ नहीं हटाता।
भर्जन सल्फ़ाइड को अधिक वायु में गर्म करना है: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂। निस्तापन कार्बोनेट को सीमित वायु में गर्म करना है: ZnCO₃ → ZnO + CO₂।
पेंट या तेल की परत, यशद-लेपन (ज़िंक की परत) और मिश्रधातु बनाना, जैसे स्टेनलेस स्टील।
तीन परखनलियों में लोहे की कीलें रखो। A में जल और हवा दोनों हों — जंग लगता है। B में उबला जल और ऊपर तेल की परत हो ताकि हवा न घुले — जंग नहीं। C में निर्जल CaCl₂ के साथ सूखी हवा हो — जंग नहीं। अतः ऑक्सीजन और नमी दोनों चाहिए।
Na (2, 8, 1) एक इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनता है। Cl (2, 8, 7) उसे लेकर Cl⁻ बनती है। विपरीत आवेश से NaCl बनता है। गुण: ऊँचा गलनांक, और ठोस अवस्था में विद्युत का चालक नहीं।
कम सक्रिय धातुओं के ऑक्साइड को केवल गर्म करते हैं, जैसे HgO से Hg। मध्य की धातुओं के ऑक्साइड को कार्बन से अपचयित करते हैं, जैसे ZnO + C → Zn + CO। सबसे सक्रिय धातुएँ पिघले लवण के विद्युत-अपघटन से मिलती हैं, जैसे NaCl से Na।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
अधातु ठोकर से टूटती है।
सल्फ़र अधातु है और भंगुर है।
जंग से बचाने वाली सक्रिय धातु।
यशद-लेपन में ज़िंक की परत होती है।
कांसा = ताँबा + टिन।
पीतल में ज़िंक होता है।
सतह पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की पतली परत बन जाती है, जो और ऑक्सीजन को अंदर नहीं जाने देती।
यह धातुओं की घटती सक्रियता की सूची है: K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Hg, Ag, Au। हाइड्रोजन से ऊपर की धातु तनु अम्ल से H₂ निकालती है। अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण-विलयन से विस्थापित कर देती है, जैसे Fe, CuSO₄ से Cu निकालता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
ताँबा हाइड्रोजन से नीचे है।
Al > Zn > Fe, और Cu तनु HCl से H₂ नहीं देता।
हवा और पानी दोनों चाहिए।
केवल A में हवा और जल दोनों हैं।
अभिकथन (A): रेल की पटरी जोड़ने में थर्मिट अभिक्रिया काम आती है।
कारण (R): ऐलुमिनियम, आयरन ऑक्साइड को अपचयित करता है और बहुत ऊष्मा निकलती है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): मैग्नीशियम तनु नाइट्रिक अम्ल से हाइड्रोजन दे देता है।
कारण (R): नाइट्रिक अम्ल कभी ऑक्सीकारक नहीं होता।
A सही है। R गलत — HNO₃ प्रबल ऑक्सीकारक है। Mg और Mn अपवाद हैं।
चूर्ण लोहा है और विलयन कॉपर सल्फ़ेट। Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu।
लवण आयनिक है, क्योंकि घुलने पर आयन चलकर धारा ले जाते हैं। इस वर्ग के गलनांक ऊँचे होते हैं और ये भंगुर होते हैं।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | संतुलित समीकरण |
|---|---|
| मैग्नीशियम, वायु | 2Mg + O₂ → 2MgO |
| ऐलुमिनियम, वायु | 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ |
| सोडियम, जल | 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ |
| लोहा, भाप | 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂ |
| विस्थापन | Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu |
| थर्मिट | Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ |
| भर्जन | 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ |
| निस्तापन | ZnCO₃ → ZnO + CO₂ |
| कार्बन अपचयन | ZnO + C → Zn + CO |
| कम सक्रिय ऑक्साइड | 2HgO → 2Hg + O₂ |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।