साल 1665 है।
रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की काट देखी।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 5 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
The Fundamental Unit of Life
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 5.1 प्याज · 5.2 और छिलके · 5.3 अंडा · 5.4 किशमिश · 5.5 इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी · 5.6 रियो · 5.7 गाल, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र पादप और जंतु कोशिका को साथ रखता है, और केवल भित्ति, हरितलवक तथा बड़ी रसधानी का अंतर दिखाता है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 5 है। NCERT 2026-27 की Exploration किताब में कोशिका का अध्याय 2 है, इसलिए दोनों के नंबर अलग हैं। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
पिछले 7 दिन:
सब कुछ इसी फ़ोन/ब्राउज़र में सेव होता है — कोई लॉगिन नहीं।
इस अध्याय का कोई Short अभी चैनल पर नहीं है, इसलिए दस खाली कार्ड नहीं दिखाए गए। नोट्स, चित्र और जाँच-प्रश्न पूरे हैं।
The discovery of the cell — Activities 5.1 and 5.2 · अध्याय 5.1 · क्रियाकलाप 5.1 · 5.2
1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क की पतली काट देखी। छोटे खाने मधुमक्खी के छत्ते जैसे थे। कॉर्क पेड़ की छाल से आता है। cell का अर्थ छोटा कमरा है, और यही नाम आज भी चलता है। वे कोशिकाएँ मृत थीं।
ल्यूवेनहुक ने 1674 में बेहतर सूक्ष्मदर्शी से तालाब के पानी में स्वतंत्र जीवित कोशिकाएँ देखीं। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में केंद्रक देखा। पुरकिंजे ने 1839 में कोशिका के तरल पदार्थ को जीवद्रव्य कहा। श्लाइडन (1838) और श्वान (1839) ने कहा कि पौधे और जंतु कोशिकाओं के बने हैं और कोशिका जीवन की मूल इकाई है। विरको (1855) ने जोड़ा कि हर कोशिका पहले से मौजूद कोशिका से बनती है। 1940 के इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के बाद कोशिकांगों की बारीक बनावट समझ आई।
प्याज के कंद का छोटा टुकड़ा लो। चिमटी से अवतल भीतरी परत की त्वचा उतारो। इसे तुरंत पानी वाली वॉच-ग्लास में रखो, नहीं तो झिल्ली मुड़ जाएगी या सूख जाएगी।
स्लाइड पर पानी की एक बूँद रखो और झिल्ली का छोटा सपाट टुकड़ा रखो। ऊँट के बालों वाला ब्रश मदद कर सकता है। साफ्रानिन की एक बूँद डालो, फिर कवर-स्लिप। माउंटिंग सुई से हवा का बुलबुला मत आने दो। पहले कम शक्ति, फिर अधिक शक्ति पर देखो। शिक्षक से मदद लो।
पत्ती की झिल्ली, प्याज की जड़ का सिरा, और अलग-अलग आकार के प्याज की झिल्ली के अस्थायी माउंट बनाओ। फिर चार बातें पूछो: क्या सब कोशिकाएँ आकार में एक जैसी हैं, बनावट में एक जैसी हैं, पौधे के अलग भागों में फर्क है, और समानता क्या है।
एक ही प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ कंद के बड़े या छोटे होने पर भी एक जैसी दिखती हैं। ये छोटी रचनाएँ मिलकर कंद बनाती हैं। जंतु में तंत्रिका, वसा, शुक्राणु, अस्थि, चिकनी पेशी, रक्त और अंडाणु की कोशिकाएँ अलग दिखती हैं। अमीबा का आकार बदलता रहता है। बहुकोशिकीय शरीर में काम बँटा होता है, और एक कोशिका के अंदर कोशिकांग काम बाँटते हैं।
प्रश्न: कोशिका को संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई क्यों कहते हैं?
उत्तर: हर जीव कोशिकाओं से बना है, इसलिए यह संरचना की इकाई है। एक कोशिका भोजन लेती है, साँस की गैसें बदलती है और अपशिष्ट हटाती है, इसलिए यह कार्य की इकाई भी है। अमीबा, क्लैमाइडोमोनास, पैरामीशियम और जीवाणु में एक कोशिका ही पूरा जीव है।
खोज का क्रम लिखो: हुक, ल्यूवेनहुक, ब्राउन, पुरकिंजे, श्लाइडन-श्वान, विरको। साल के साथ नाम काफी है।
एककोशिकीय के चार उदाहरण याद रखो: अमीबा, क्लैमाइडोमोनास, पैरामीशियम, जीवाणु।
साल 1665 है।
रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की काट देखी।
सही — यह विरको की 1855 वाली बात है।
कवर-स्लिप से पहले वाला अभिरंजक।
साफ्रानिन। गाल की क्रिया 5.7 में मेथिलीन ब्लू है।
uni का अर्थ एक है।
पैरामीशियम एक कोशिका का जीव है।
हुक ने 1665 में देखा कि जीव अलग इकाइयों के बने दिखते हैं। हर जीव कोशिकाओं से बना है और कोशिका के अपने अंग जीवन के काम चलाते हैं, इसलिए यह संरचना और कार्य दोनों की इकाई है।
Membrane, diffusion and osmosis — 5.3 to 5.5 · 5.2.1 · क्रियाकलाप 5.3 · 5.4 · 5.5
प्लैज्मा झिल्ली कोशिका की सबसे बाहरी जीवित परत है। यह कुछ पदार्थों को आने-जाने देती है और कुछ को रोकती है, इसलिए चयनात्मक पारगम्य कहलाती है। CO2 अंदर अधिक हो तो विसरण से बाहर जाता है। O2 अंदर कम हो तो विसरण से अंदर आता है।
परासरण पानी का झिल्ली के आर-पार जाना है, अधिक जल-सांद्रता से कम जल-सांद्रता की ओर। अल्पपरासारी घोल में बाहर पानी अधिक है, कोशिका फूलती है। समपरासारी में पानी बराबर आता-जाता है, आकार नहीं बदलता। अतिपरासारी में बाहर पानी कम है, कोशिका सिकुड़ती है। कुछ अणु ऊर्जा खर्च करके भी झिल्ली पार करते हैं।
| बाहरी घोल | पानी कहाँ अधिक | कोशिका |
|---|---|---|
| अल्पपरासारी | बाहर | फूलती है |
| समपरासारी | बराबर | आकार वही |
| अतिपरासारी | अंदर | सिकुड़ती है |
क्रियाकलाप 5.3 में छिलका तनु अम्ल से घुलता है। अम्ल चखो मत, त्वचा पर मत गिराओ, और शिक्षक के सामने करो। छिलका ज्यादातर कैल्सियम कार्बोनेट है।
अंडे का छिलका तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलाओ। पतली बाहरी त्वचा बचती है। इस अंडे को शुद्ध पानी में रखो। पाँच मिनट बाद यह फूल जाता है, क्योंकि पानी परासरण से अंदर जाता है।
वैसा ही बिना छिलके का अंडा सांद्र नमक के घोल में रखो। पाँच मिनट में यह सिकुड़ता है। अंडे का पानी अधिक सांद्र नमक की ओर बाहर चला जाता है।
सूखी किशमिश या खुबानी सादे पानी में फूलती है। फिर सांद्र चीनी या नमक में रखने पर पानी छोड़कर सिकुड़ती है। जड़ से पानी का चूसना भी परासरण है। अलवणजलीय एककोशिकीय जीव और अधिकतर पादप कोशिकाएँ पानी लेती हैं।
झिल्ली लिपिड और प्रोटीन की है और लचीली है। इसकी बारीक बनावट केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में दिखती है। क्रियाकलाप 5.5 में पुस्तकालय या इंटरनेट से इस यंत्र के बारे में पढ़ो और शिक्षक से बात करो। इसी लचीलेपन से अमीबा भोजन निगलती है। इस प्रक्रिया का नाम एंडोसाइटोसिस है।
प्रश्न: चार आलू के कप पानी की परात में हैं। B में चीनी, C में नमक, A खाली, और D उबला आलू है जिसमें चीनी है। दो घंटे बाद B और C में पानी क्यों भरता है, A और D में क्यों नहीं?
उत्तर: B और C के अंदर घोल बाहर के पानी से अधिक सांद्र है, इसलिए जीवित झिल्ली से पानी परासरण द्वारा अंदर आता है। A में खींचने वाला विलेय नहीं है। D की कोशिकाएँ उबाल से मर चुकी हैं, और मृत कोशिका परासरण से पानी नहीं खींचती। A नियंत्रण है।
तीन घोलों के नाम अर्थ के साथ लिखो। केवल «पानी गया» अधूरा है।
अंडे का समय पाँच मिनट है और छिलका कैल्सियम कार्बोनेट है। ये दो तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं।
गैस झिल्ली पार अपनी कम सांद्रता की ओर जाती है।
CO2 विसरण से बाहर जाता है। पानी का रास्ता परासरण है।
सही — यह विसरण का खास रूप है, और पदार्थ पानी है।
पानी बाहर अधिक है।
अल्पपरासारी।
नमक का घोल अधिक सांद्र है।
पानी अंडे से बाहर जाता है, इसलिए अंडा सिकुड़ता है।
शुद्ध आवाजाही शून्य।
समपरासारी। कोशिका का आकार नहीं बदलता।
सादे पानी में किशमिश परासरण से पानी लेकर फूलती है। सांद्र चीनी में पानी बाहर निकलता है, इसलिए वह सिकुड़ती है।
The cell wall and plasmolysis — 5.6 · 5.2.2 · क्रियाकलाप 5.6
पादप कोशिका में प्लैज्मा झिल्ली के बाहर कड़ी भित्ति होती है। यह मुख्यतः सेलुलोस की है और पौधे को मजबूती देती है। जीवित पादप कोशिका परासरण से पानी खोए तो अंदर का पदार्थ भित्ति से सिकुड़कर अलग हो जाता है। इसे जीवद्रव्य कुंचन कहते हैं।
पौधे, कवक और जीवाणु की भित्ति बहुत तनु बाहरी माध्यम सह लेती है। पानी आने से कोशिका फूलती है और भित्ति बराबर दबाव वापस लगाती है। जंतु कोशिका इतना परिवर्तन नहीं सह पाती।
क्रियाकलाप 5.6 में पत्तियाँ कुछ मिनट उबलते पानी में रखी जाती हैं। भाप और गर्म पानी से हाथ जला सकते हैं। चिमटी का उपयोग करो।
रियो की पत्ती की झिल्ली पानी में माउंट करो और उच्च शक्ति पर देखो। छोटे हरे कण हरितलवक हैं। इनमें क्लोरोफिल है। माउंट पर सांद्र चीनी या नमक रखो, एक मिनट रुको, फिर देखो। जीवित कोशिका में पदार्थ भित्ति से हट जाता है।
कुछ पत्तियाँ कुछ मिनट उबलते पानी में रखो। इससे कोशिकाएँ मरती हैं। फिर माउंट करो, सांद्र घोल डालो और एक मिनट बाद फिर देखो। मृत कोशिका में जीवद्रव्य कुंचन नहीं होता। निष्कर्ष: परासरण से पानी केवल जीवित कोशिका खींचती है।
प्रश्न: शुद्ध पानी में जंतु कोशिका फट सकती है, पादप कोशिका क्यों फूली रहती है?
उत्तर: शुद्ध पानी अल्पपरासारी है। दोनों में पानी अंदर आता है। जंतु कोशिका की केवल झिल्ली है, इसलिए वह फट सकती है। पादप भित्ति फूलने पर दबाव रोकती है और कोशिका स्फीत रहती है।
जीवद्रव्य कुंचन की परिभाषा में तीन शब्द रखो: जीवित, पानी की हानि, भित्ति से अलग।
भित्ति वाले तीन समूह लिखो: पौधे, कवक, जीवाणु। केवल «पौधे» अधूरा रह जाता है।
जटिल पदार्थ, जो मजबूती देता है।
सेलुलोस। भित्ति प्लैज्मा झिल्ली के बाहर होती है।
गलत — उबाल कोशिका मार देता है। कुंचन केवल जीवित कोशिका में होता है।
सांद्र नमक या चीनी के बाद।
जीवद्रव्य कुंचन।
सेलुलोस की भित्ति फूलती कोशिका पर बराबर दबाव लगाती है। जंतु कोशिका में यह भित्ति नहीं होती, इसलिए वह फट सकती है। कवक और जीवाणु की भित्ति भी यही काम करती है।
The nucleus and two kinds of cell — 5.7 · 5.2.3 · क्रियाकलाप 5.7
केंद्रक पर दोहरी झिल्ली होती है। छिद्रों से पदार्थ कोशिका द्रव्य तक जाता है। गुणसूत्र केवल विभाजन के समय छड़ जैसे दिखते हैं। वे DNA और प्रोटीन के हैं। DNA की कार्यकारी खंड जीन कहलाते हैं। जब कोशिका नहीं बँट रही होती, DNA क्रोमैटिन के उलझे धागों में रहता है।
केंद्रक कोशिका के बँटकर दो कोशिकाएँ बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह रसायनों को दिशा देकर यह भी तय करता है कि कोशिका बड़ी होकर कैसी बनेगी। जीवाणु में केंद्रक-झिल्ली नहीं होती। न्यूक्लिक अम्ल वाला अनिर्धारित भाग केंद्रकाभ है। ऐसे जीव प्रोकैरियोट हैं। केंद्रक-झिल्ली वाले यूकैरियोट हैं।
स्लाइड पर पानी की बूँद रखो। आइसक्रीम की चम्मच से गाल की भीतरी सतह हल्के से खुरचो। सुई से पदार्थ फैलाओ। मेथिलीन ब्लू की एक बूँद डालो। कवर-स्लिप लगाना मत भूलना।
बीच में गहरे रंग का गोल या अंडाकार बिंदु केंद्रक है। प्याज की कोशिकाओं में भी ऐसा केंद्रक था। अभिरंजक अलग-अलग भागों को अलग गहराई देता है। आयोडीन, साफ्रानिन या मेथिलीन ब्लू तीनों काम आते हैं। 5.1 के लिखे चरण साफ्रानिन कहते हैं। 5.7 मेथिलीन ब्लू कहती है।
| बात | प्रोकैरियोट | यूकैरियोट |
|---|---|---|
| आकार | प्रायः 1–10 μm | प्रायः 5–100 μm |
| केंद्रक क्षेत्र | केंद्रकाभ, झिल्ली नहीं | केंद्रक, दोहरी झिल्ली |
| गुणसूत्र | एक | एक से अधिक |
| झिल्ली वाले अंग | नहीं | हैं |
प्रश्न: एक प्रोकैरियोटिक कोशिका 2 μm लंबी है। मीटर में लिखो।
सूत्र: 1 μm = 10−6 m
प्रतिस्थापन: 2 μm = 2 × 10−6 m
इकाई: मीटर। यानी 0.000002 m। किताब 1 μm को 10−6 m लिखती है।
तालिका के चार पंक्तियाँ याद रखो: आकार, केंद्रक, गुणसूत्र, झिल्ली वाले अंग।
विषाणु का वाक्य अलग रखो: झिल्ली नहीं, इसलिए जीवित शरीर में घुसे बिना जीवन के लक्षण नहीं।
केंद्रक-झिल्ली नहीं होती।
प्रोकैरियोट, जैसे जीवाणु, में केंद्रकाभ होता है।
गलत — छड़ जैसा रूप तभी दिखता है जब कोशिका बँटने वाली होती है। शेष समय क्रोमैटिन होता है।
विरासत की सूचना यहीं है।
जीन।
चम्मच से खुरचने के बाद।
मेथिलीन ब्लू। अम्ल अंडे की क्रिया 5.3 का है।
1 μm = 10^(−6) m। 8 μm = 8 × 10^(−6) m = 0.000008 m।
Cytoplasm, the reticulum, Golgi and lysosomes · 5.2.4 · 5.2.5 ER · गॉल्जी · लाइसोसोम
प्याज और गाल दोनों में झिल्ली के अंदर बड़ा क्षेत्र कम रंग लेता है। यही कोशिका द्रव्य है, प्लैज्मा झिल्ली के अंदर का तरल। इसमें विशेष कोशिकांग होते हैं। यूकैरियोट में ये झिल्ली से घिरे होते हैं। प्रोकैरियोट में झिल्ली वाले अंग नहीं होते। विषाणु में कोई झिल्ली नहीं, इसलिए जीवित शरीर में घुसकर उसकी मशीन इस्तेमाल किए बिना जीवन के लक्षण नहीं दिखते।
अंतःद्रव्यी जालिका नलिकाओं और शीटों का जाल है। खुरदरी जालिका पर राइबोसोम होते हैं। सक्रिय कोशिकाओं में राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं। चिकनी जालिका वसा या लिपिड बनाती है। कुछ प्रोटीन और लिपिड झिल्ली बनाते हैं। इसे झिल्ली जैवजनन कहते हैं। कशेरुकी के यकृत में चिकनी जालिका कई विष और दवाएँ हानिरहित करती है। RER प्रोटीन, SER वसा।
कैमिलो गॉल्जी ने इस अंग का वर्णन किया। यह झिल्ली की पुटिकाओं के समानांतर ढेर हैं, जिन्हें सिस्टर्नी कहते हैं। ये अक्सर जालिका की झिल्ली से जुड़े रहते हैं। काम है सामान को सहेजना, बदलना और पुटिकाओं में पैक करके अंदर या बाहर भेजना। कभी-कभी सरल शर्करा से जटिल शर्करा बनती है। लाइसोसोम भी यहीं बनते हैं।
लाइसोसोम कोशिका का कचरा तंत्र है। बाहरी पदार्थ, जैसे जीवाणु या भोजन, और पुराने कोशिकांग यहीं छोटे टुकड़ों में टूटते हैं। एंजाइम RER बनाती है। कोशिका क्षतिग्रस्त हो या उपापचय गड़बड़ाए तो थैली फट सकती है और अपनी कोशिका पचा सकती है। इसलिए ये आत्मघाती थैली हैं।
प्रश्न: झिल्ली के लिपिड और प्रोटीन कहाँ बनते हैं?
उत्तर: लिपिड चिकनी अंतःद्रव्यी जालिका में बनते हैं। प्रोटीन खुरदरी जालिका के राइबोसोम पर बनते हैं। दोनों मिलकर झिल्ली बनाते हैं। इसे झिल्ली जैवजनन कहते हैं।
RER और SER की जोड़ी एक वाक्य में लिखो, फिर जैवजनन अलग वाक्य में।
आत्मघाती थैली का कारण फटना है, केवल «पाचन» लिखना अधूरा है।
10-सेकंड रिवीजन
RER खुरदरी इन्हीं कणों से दिखती है।
राइबोसोम। सक्रिय कोशिका में ये प्रोटीन बनाते हैं।
सही — वसा अणु या लिपिड SER का काम है। प्रोटीन RER का है।
आत्मघाती थैली।
लाइसोसोम।
सिस्टर्नी के ढेर।
यह उत्पादों को सहेजता, बदलता और पैक करके भेजता है।
सही — किताब यही काम यकृत की चिकनी जालिका को देती है।
जालिका के पास बना पदार्थ पैक होकर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँचेगा। लाइसोसोम ठीक से नहीं बनेंगे, और सरल शर्करा से जटिल शर्करा बनना भी रुक सकता है।
Mitochondria, plastids and vacuoles · 5.2.5 · पादप और जंतु कोशिका
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का शक्ति-घर है। जीवन की रासायनिक क्रियाओं की ऊर्जा ATP के रूप में निकलती है। ATP ऊर्जा की मुद्रा है। बाहरी झिल्ली छिद्रिल होती है और भीतरी झिल्ली गहरी वलित होती है, ताकि ATP बनाने की सतह बड़ी हो। इनका अपना DNA और राइबोसोम होता है, इसलिए ये कुछ प्रोटीन खुद बना लेते हैं।
लवक केवल पादप कोशिका में होते हैं। दो प्रकार हैं: रंगीन वर्णीलवक और श्वेत या रंगहीन अवर्णीलवक। क्लोरोफिल वाला लवक हरितलवक है। यही प्रकाश-संश्लेषण करता है और इसमें पीले या नारंगी वर्णक भी हो सकते हैं। अवर्णीलवक मंड, तेल और प्रोटीन कण सहेजते हैं। अंदर की झिल्ली-परतें पीठिका में धँसी होती हैं। लवक भी अपना DNA और राइबोसोम रखते हैं। अपना आनुवंशिक पदार्थ माइटोकॉन्ड्रिया और लवक में है।
रसधानी ठोस या तरल की थैली है। जंतु में ये छोटी होती हैं। पादप कोशिका की केंद्रीय रसधानी आयतन का 50 से 90 प्रतिशत ले सकती है। इसमें कोशिका रस भरा रहता है, जिससे स्फीति और कठोरता मिलती है। अमीनो अम्ल, शर्करा, कार्बनिक अम्ल और कुछ प्रोटीन यहीं रहते हैं।
अमीबा की खाद्य रसधानी में खाया हुआ भोजन होता है। कुछ एककोशिकीय जीवों की खास रसधानी अतिरिक्त पानी और कुछ अपशिष्ट बाहर फेंकती है। कोशिका की झिल्ली और अंग मिलकर श्वसन, पोषण, सफाई और नए प्रोटीन का काम चलाते हैं। इसलिए कोशिका संरचना और कार्य दोनों की मूल इकाई है।
प्रश्न: किन दो कोशिकांगों में अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है?
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया और लवक। दोनों का अपना DNA और राइबोसोम है, इसलिए दोनों कुछ प्रोटीन खुद बना सकते हैं। लवक जंतु कोशिका में नहीं होता।
पादप और जंतु का अंतर तीन बिंदुओं में लिखो: भित्ति, हरितलवक, रसधानी का आकार। चित्र वही तीन दिखाता है।
अवर्णीलवक भंडार है और हरितलवक प्रकाश-संश्लेषण। दोनों को एक मत लिखना।
10-सेकंड रिवीजन
ATP यहीं बनता है।
माइटोकॉन्ड्रिया ATP बनाता है। ATP ऊर्जा की मुद्रा है।
गलत — लवक केवल पादप कोशिका में होते हैं।
एक सीमा है, एक अकेली संख्या नहीं।
50 से 90 प्रतिशत।
पादप कोशिका में सेलुलोस की भित्ति होती है, जंतु में नहीं। हरितलवक केवल पौधे में होता है। पादप रसधानी बड़ी होती है और आयतन का 50–90 प्रतिशत ले सकती है, जंतु की रसधानी छोटी होती है।
प्रकार चुनो। पाठों के 30 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
1665।
रॉबर्ट हुक।
1839।
पुरकिंजे ने 1839 में जीवद्रव्य कहा।
सबको नहीं।
कुछ पदार्थ अंदर-बाहर होते हैं, कुछ रुकते हैं।
गैस है, पानी नहीं।
विसरण से।
बाहर पानी कम है।
पानी बाहर जाता है और कोशिका सिकुड़ती है।
तनु अम्ल उसे घुलाता है।
कैल्सियम कार्बोनेट।
भित्ति से पदार्थ हटे।
केवल जीवित पादप कोशिका में।
प्रोकैरियोट छोटा वाला अंतराल है।
5–100 μm।
RER पर बैठे कण।
राइबोसोम।
फटने पर अपनी कोशिका पचाता है।
लाइसोसोम।
माइटोकॉन्ड्रिया इसे बनाते हैं।
ATP।
प्रकाश-संश्लेषण का अंग।
हरितलवक।
झिल्ली लचीली है।
एंडोसाइटोसिस से।
पादप कोशिका।
50–90 प्रतिशत।
सही।
गलत — परासरण पानी का है।
गलत — भित्ति पादप, कवक और जीवाणु में है।
सही। राइबोसोम छोटे होते हैं और केंद्रकाभ बिना झिल्ली के होता है।
गलत — अवर्णीलवक मंड, तेल और प्रोटीन सहेजता है। प्रकाश-संश्लेषण हरितलवक का है।
गलत — झिल्ली नहीं होती, इसलिए उसे जीवित शरीर की मशीन चाहिए।
सही।
हुक का नाम।
छोटा कमरा।
रॉबर्ट ब्राउन।
अतिपरासारी। कोशिका सिकुड़ती है।
केंद्रकाभ।
चिकनी अंतःद्रव्यी जालिका।
वलित।
खाद्य रसधानी।
हुक कॉर्क, ब्राउन केंद्रक, विरको पूर्ववर्ती कोशिका, पुरकिंजे जीवद्रव्य।
राइबोसोम प्रोटीन, लाइसोसोम पाचन, अवर्णीलवक भंडार, माइटोकॉन्ड्रिया ATP।
अभिकथन (A): प्लैज्मा झिल्ली चयनात्मक पारगम्य है।
कारण (R): यह कुछ पदार्थों को आने-जाने देती है और कुछ को रोकती है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): माइटोकॉन्ड्रिया का अपना DNA होता है।
कारण (R): लवक केवल पादप कोशिका में होते हैं।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है। दोनों अलग तथ्य हैं।
अभिकथन (A): जीवद्रव्य कुंचन केवल जीवित कोशिका में होता है।
कारण (R): उबाली रियो की पत्ती में भी कुंचन दिखता है।
A सही है। R गलत — उबाल कोशिका मार देता है और कुंचन नहीं होता।
अभिकथन (A): अल्पपरासारी घोल में पादप कोशिका जंतु कोशिका की तरह फट जाती है।
कारण (R): सेलुलोस की भित्ति फूलती कोशिका पर दबाव लगाती है।
A गलत है — भित्ति के कारण पादप कोशिका नहीं फटती। R सही है।
फूलना अल्प, बराबर सम, सिकुड़ना अति। बाहर अधिक पानी भी अल्पपरासारी है।
केंद्रकाभ और छोटा आकार प्रोकैरियोट के हैं। झिल्ली वाले अंग और अनेक गुणसूत्र यूकैरियोट के हैं।
लैटिन में इसका अर्थ छोटा कमरा है।
क्योंकि यह कुछ पदार्थों को कोशिका के अंदर-बाहर जाने देती है और कुछ पदार्थों को रोकती है।
परासरण पानी का चयनात्मक पारगम्य झिल्ली के आर-पार, अधिक जल-सांद्रता से कम जल-सांद्रता की ओर जाना है।
दो परत। छिद्रों से पदार्थ कोशिका द्रव्य में जाता है।
क्षति या उपापचय की गड़बड़ी में यह फट सकता है और पाचक एंजाइम अपनी ही कोशिका को पचा लेते हैं।
छिलका तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलता है क्योंकि वह कैल्सियम कार्बोनेट है। बिना छिलके का अंडा शुद्ध पानी में पाँच मिनट में फूलता है, पानी परासरण से अंदर जाता है। सांद्र नमक में पाँच मिनट में सिकुड़ता है, पानी बाहर जाता है।
प्रोकैरियोट में केंद्रकाभ होता है, केंद्रक-झिल्ली नहीं। गुणसूत्र एक होता है और झिल्ली वाले अंग नहीं होते। यूकैरियोट में केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है, गुणसूत्र एक से अधिक होते हैं और झिल्ली वाले अंग होते हैं।
RER के राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं। SER लिपिड बनाती है और यकृत में विष हानिरहित करती है। गॉल्जी पदार्थों को पैक करके भेजता है और लाइसोसोम बनाता है।
1 μm = 10^(−6) m। 4 μm = 4 × 10^(−6) m। यह प्रोकैरियोटिक सीमा 1–10 μm के अंदर है।
पादप कोशिका में सेलुलोस भित्ति, हरितलवक और बड़ी रसधानी होती है। जंतु में भित्ति और हरितलवक नहीं होते और रसधानी छोटी होती है। जड़ द्वारा पानी लेना परासरण है। जीवद्रव्य कुंचन तभी होता है जब जीवित पादप कोशिका अतिपरासारी माध्यम में पानी खोए। मृत कोशिका में नहीं होता।
5.1 में प्याज की भीतरी झिल्ली पानी में रखो, स्लाइड पर सपाट रखो, साफ्रानिन लगाओ और बिना बुलबुले के कवर-स्लिप रखो। 5.7 में गाल हल्के से खुरचो, पानी में फैलाओ, मेथिलीन ब्लू लगाओ और कवर-स्लिप रखो। दोनों में बीच का गहरा गोल या अंडाकार बिंदु केंद्रक है।
शक्ति माइटोकॉन्ड्रिया और ATP। प्रोटीन राइबोसोम। पैकिंग गॉल्जी। सफाई लाइसोसोम। प्रकाश-संश्लेषण हरितलवक। भंडार अवर्णीलवक और रसधानी। गॉल्जी न हो तो पैकिंग और लाइसोसोम बनना रुकता है। झिल्ली फटे तो चयन समाप्त और कोशिका मरती है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
1855।
विरको।
शुद्ध आवाजाही शून्य।
आकार नहीं बदलता।
उबाल के बाद कुंचन नहीं।
रियो। किताब यही वर्तनी छापती है।
लचीली झिल्ली द्वारा बाहर से भोजन या पदार्थ को कोशिका के अंदर लेना एंडोसाइटोसिस है। अमीबा अपना भोजन इसी तरह लेती है।
विसरण में पदार्थ अधिक सांद्रता से कम की ओर जाता है। CO2 बाहर और O2 अंदर इसी से जाते हैं। परासरण में पानी झिल्ली पार अधिक जल से कम जल की ओर जाता है। बिना छिलके का अंडा शुद्ध पानी में फूलता है और सांद्र नमक में सिकुड़ता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
5.6 का निष्कर्ष याद रखो।
उबाल झिल्ली का जीवित चयन खत्म कर देता है। चीनी खींचती है, पर मृत कप में पानी नहीं भरता।
क्रिया 5.7 की अंतिम चेतावनी।
कवर-स्लिप रखना है। अम्ल अंडे की क्रिया का है।
अभिकथन (A): जड़ें मिट्टी से पानी लेती हैं।
कारण (R): यह गति परासरण का उदाहरण है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): प्रोकैरियोटिक गुणसूत्र एक होता है।
कारण (R): उस गुणसूत्र में हमेशा कई झिल्ली वाले अंग चिपके रहते हैं।
A सही है। R गलत — प्रोकैरियोट में झिल्ली वाले अंग नहीं होते।
फूलना शुद्ध पानी में होता है, क्योंकि वहाँ पानी अंडे में जाता है। सांद्र नमक अतिपरासारी है। पाँच मिनट बाद अंडा सिकुड़ता है, क्योंकि पानी बाहर निकलता है। छिलका पहले तनु अम्ल से हटा होना चाहिए।
लाइसोसोम फट सकता है और पाचक एंजाइम कोशिका को पचा सकते हैं। अलग-अलग अंग अपने काम नहीं कर पाएँगे, इसलिए श्वसन, सफाई और प्रोटीन बनना रुक जाएगा और कोशिका मर सकती है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| परासरण | water, high to low, across a membrane |
| अल्पपरासारी | cell gains water and swells |
| अतिपरासारी | cell loses water and shrinks |
| आकार | prokaryote 1–10 μm, eukaryote 5–100 μm |
| अपना DNA | mitochondria and plastids |
| आत्मघाती थैली | lysosome |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।