रक्त और पेशी भी ऊतक हैं।
फ्लोएम एक ऊतक है। अमीबा एक कोशिका का पूरा जीव है।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 6 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Tissues
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 6.1 प्याज की जड़ · 6.2 तने की काट · 6.3 रियो की बाह्यत्वचा, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र जाइलम और फ्लोएम को साथ दिखाता है, जिसमें पानी ऊपर जाता है और भोजन दोनों दिशाओं में चलता है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 6 है। NCERT 2026-27 की Exploration किताब में ऊतक अध्याय 3 है, इसलिए दोनों के नंबर अलग हैं। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Tissues and meristem — Activity 6.1 · 6.1 · 6.2.1 · क्रियाकलाप 6.1
अमीबा में एक कोशिका चलन, भोजन, गैस, श्वसन और उत्सर्जन सब करती है। बहुकोशिकीय शरीर में लाखों कोशिकाएँ होती हैं और अधिकतर एक-दो काम में माहिर हो जाती हैं। ऐसा झुंड ऊतक है। रक्त, फ्लोएम और पेशी इसके उदाहरण हैं।
पौधा एक जगह टिका रहता है, इसलिए उसके अधिकतर ऊतक सहारा देते हैं। मृत कोशिका भी मजबूती दे सकती है और उसे रखरखाव कम चाहिए। जंतु भोजन और आश्रय के लिए चलते हैं और अधिक ऊर्जा खर्च करते हैं। उनके अधिकतर ऊतक जीवित होते हैं। पौधे की वृद्धि कुछ क्षेत्रों तक सीमित है। जंतु में वृद्धि अधिक एकसमान है, इसलिए बँटने और न बँटने वाले क्षेत्र अलग नहीं दिखते।
दो काँच के जार पानी से भरो। प्रत्येक पर एक प्याज रखो। कुछ दिन जड़ों की वृद्धि देखो। दिन 1, 2 और 3 को लंबाई नापो। दिन 4 को जार 2 की जड़ों के सिरे लगभग 1 cm काट दो। फिर पाँच दिन और दोनों की लंबाई तालिका में लिखो।
जार 1 की जड़ें लंबी रहती हैं, क्योंकि सिरा बचा है। जार 2 में कटे सिरे रुक जाते हैं। सिरा शीर्षस्थ विभज्योतक है। उसे काट दो तो वह जड़ आगे नहीं बढ़ती।
शीर्षस्थ विभज्योतक तने और जड़ के सिरे पर है और लंबाई बढ़ाता है। पार्श्व विभज्योतक, एधा, तने या जड़ की मोटाई बढ़ाती है। अंतर्विष्ट विभज्योतक पत्तियों के आधार पर या पर्व पर, पर्वसंधि के दोनों ओर, टहनी में होता है।
नई कोशिकाएँ पहले विभज्योतक जैसी होती हैं। बढ़ते-बढ़ते वे दूसरे ऊतकों का रूप ले लेती हैं। ये कोशिकाएँ बहुत सक्रिय हैं: घना द्रव्य, पतली सेलुलोस भित्ति, स्पष्ट केंद्रक, और रसधानी नहीं। रसधानी परिपक्व कोशिका में भंडार और स्फीति के लिए होती है। बँटती कोशिका को वह जगह द्रव्य के लिए चाहिए।
प्रश्न: दिन 4 की सुबह जार 2 की एक जड़ 4.0 cm है। सिरा 1 cm काटा गया। काट के ठीक बाद लंबाई क्या है, और आगे वृद्धि क्यों रुकती है?
सूत्र: शेष लंबाई = काट से पहले की लंबाई − 1 cm
प्रतिस्थापन: 4.0 cm − 1.0 cm = 3.0 cm
इकाई: सेंटीमीटर। शीर्षस्थ विभज्योतक कट चुका है, इसलिए यह जड़ आगे नहीं बढ़ती। जार 1 की जड़ बढ़ती रहती है।
तीनों विभज्योतक स्थान और काम के साथ लिखो। केवल नाम सूची अधूरी रहती है।
रसधानी की अनुपस्थिति का कारण भंडार वाला काम है, यह मत लिखना कि कोशिका में केंद्रक नहीं है।
रक्त और पेशी भी ऊतक हैं।
फ्लोएम एक ऊतक है। अमीबा एक कोशिका का पूरा जीव है।
गलत — पौधे में वृद्धि कुछ क्षेत्रों के विभज्योतक तक सीमित है। जंतु में वृद्धि अधिक एकसमान है।
एधा दूसरा नाम है।
पार्श्व विभज्योतक या एधा।
दिन 4, लगभग 1 cm।
सिरा शीर्षस्थ विभज्योतक है। उसके बिना वह जड़ लंबी नहीं होती।
घना कोशिका द्रव्य, पतली सेलुलोस भित्ति और स्पष्ट केंद्रक। रसधानी परिपक्व कोशिका में भंडार और स्फीति देती है। बँटती कोशिका को वह स्थान द्रव्य के लिए चाहिए, इसलिए रसधानी नहीं होती।
Simple permanent tissue — Activity 6.2 · 6.2.2 · क्रियाकलाप 6.2
विभज्योतक की कोशिका एक निश्चित रूप, आकार और काम ले लेती है और बँटना छोड़ देती है। इस प्रक्रिया का नाम विभेदीकरण है। ऐसे स्थायी ऊतक बनते हैं। एक ही तरह की कोशिकाओं वाला स्थायी ऊतक सरल कहलाता है।
मृदूतक पैकिंग का ऊतक है। कोशिकाएँ जीवित, अपेक्षाकृत अविशिष्ट, पतली भित्ति वाली और ढीली सजी होती हैं, इसलिए बीच में बड़ी जगह रहती है। यह सहारा देता है और भोजन सहेजता है। जब इसमें क्लोरोफिल हो तो यह हरित ऊतक कहलाता है और प्रकाश-संश्लेषण करता है। जलीय पौधे में बड़ी वायु-गुहाएँ उत्प्लावकता देती हैं। ऐसा मृदूतक वायुतक है। नारियल की भूसी दृढ़ोतक है।
क्रियाकलाप 6.2 में बहुत पतली काट काटनी होती है। ब्लेड शिक्षक चलाएँ। छात्र काट को उंगली से मत दबाएँ।
शिक्षक की मदद से पौधे के तने की बहुत पतली काट काटो। काट पर साफ्रानिन लगाओ। एक साफ कटी काट स्लाइड पर रखो और ग्लिसरीन की एक बूँद डालो। कवर-स्लिप रखकर सूक्ष्मदर्शी में देखो। चित्र 6.3 से मिलाओ।
सभी कोशिकाएँ एक जैसी नहीं होतीं। कई प्रकार दिखते हैं, क्योंकि हर परत का काम अलग है। जड़ की काट भी इसी तरह काटी जा सकती है।
स्थूलकोण ऊतक पौधे को बिना टूटे मुड़ने देता है। पत्ती और तना दोनों में यह लचीलापन देता है और यांत्रिक सहारा भी। पत्ती के वृंत में बाह्यत्वचा के नीचे यह मिलता है। कोशिकाएँ जीवित, लंबी और कोनों पर अनियमित रूप से मोटी होती हैं। बीच की जगह बहुत कम होती है।
दृढ़ोतक पौधे को कठोर और अकड़दार बनाता है। कोशिकाएँ मृत, लंबी और संकरी होती हैं। भित्ति लिग्निन से मोटी होती है। लिग्निन सीमेंट की तरह भित्ति कड़ी करता है। अक्सर अंदर जगह नहीं बचती। यह तने में, संवहन बंडल के चारों ओर, पत्ती की शिराओं में और बीज तथा मेवे के कठोर आवरण में होता है।
प्रश्न: तीन सरल ऊतकों की भित्ति अलग-अलग कैसे है?
उत्तर: मृदूतक की भित्ति पतली है। स्थूलकोण की भित्ति कोनों पर मोटी है। दृढ़ोतक की भित्ति लिग्निन से एकसमान मोटी है और कोशिका मृत है।
भित्ति के आधार पर तीन पंक्तियाँ लिखो। जीवित या मृत दूसरा स्तंभ रखो।
हरित ऊतक को हरितलवक वाला अलग अंग मत लिखना। वह क्लोरोफिलयुक्त मृदूतक है।
कठोर और मृत।
दृढ़ोतक। भित्ति लिग्निन से मोटी होती है।
गलत — मृदूतक जीवित है। मृत सरल ऊतक दृढ़ोतक है।
प्रकाश-संश्लेषण करता है।
हरित ऊतक।
बड़ी वायु-गुहा।
वायुतक। वायु-गुहा उत्प्लावकता देती है।
कोशिका जीवित रहती है।
कोनों पर।
अभिरंजक साफ्रानिन है और स्लाइड पर ग्लिसरीन की बूँद डाली जाती है। काट में कई प्रकार की कोशिकाएँ दिखती हैं, सब एक जैसी नहीं होतीं।
Epidermis, stomata and cork — 6.3 · रक्षी ऊतक · क्रियाकलाप 6.3
ताज़ी तोड़ी रियो की पत्ती को खींचकर दबाओ और तोड़ो। तोड़ते समय खिंचाव बनाए रखो ताकि कटी जगह से छिलका बाहर निकले। छिलका पानी वाली पेट्री डिश में रखो। साफ्रानिन की कुछ बूँदें डालो। दो मिनट रुको, फिर स्लाइड पर रखो और कवर-स्लिप लगाओ।
यह सबसे बाहरी परत बाह्यत्वचा है। प्रायः एक कोशिका मोटी होती है। सूखे स्थान के पौधे में यह मोटी हो सकती है, क्योंकि पानी बचाना जरूरी है। कोशिकाएँ लगातार परत बनाती हैं, बीच में जगह नहीं होती।
हवाई भागों की बाह्यत्वचा बाहर मोम जैसी जलरोधी परत छोड़ती है। यह पानी की हानि, यांत्रिक चोट और परजीवी कवक से बचाती है। मरुस्थली पौधे की बाहरी सतह पर क्यूटिन की मोटी परत होती है। जड़ की बाह्यत्वचा पर लंबे रोम अवशोषण की सतह बढ़ाते हैं।
पत्ती में छोटे छिद्र रंध्र हैं। दो वृक्काकार द्वार कोशिकाएँ उन्हें घेरती हैं। गैसें यहीं बदलती हैं और वाष्पोत्सर्जन भी यहीं होता है। प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड चाहिए। पुराने तने में द्वितीयक विभज्योतक बाह्यत्वचा की जगह कॉर्क बनाता है। कॉर्क की कोशिकाएँ मृत और ठोस सजी होती हैं। भित्ति में सुबेरिन होता है, इसलिए गैस और पानी आर-पार नहीं होते।
प्रश्न: युवा तने की बाहरी परत और पुरानी डाल की छाल एक क्यों नहीं हैं?
उत्तर: युवा तने पर जीवित बाह्यत्वचा होती है, प्रायः एक परत। पुरानी डाल में द्वितीयक विभज्योतक कई परत का कॉर्क बना देता है। कॉर्क मृत होता है और सुबेरिन से गैस तथा पानी नहीं जाने देता।
रंध्र के दो काम लिखो: गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन। एक ही काफी नहीं।
कॉर्क को बाह्यत्वचा मत लिखना। कॉर्क बाद में बनता है और मृत होता है।
दो कोशिकाएँ।
दो वृक्काकार द्वार कोशिकाएँ।
सही — सुबेरिन गैस और पानी को रोकता है। कोशिकाएँ मृत होती हैं।
साफ्रानिन इसी झिल्ली पर पड़ता है।
रियो।
हवाई भागों पर मोम जैसी परत पानी की हानि और परजीवी कवक से बचाती है। परत बिना अंतरकोशिकीय स्थान के लगातार रहती है। जड़ की बाह्यत्वचा पर रोम होते हैं जो पानी सोखने की सतह बढ़ाते हैं।
Xylem and phloem · 6.2.2 जटिल स्थायी ऊतक
सरल ऊतक एक तरह की कोशिकाओं का होता है। जटिल ऊतक में एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ एक साझा काम करती हैं। जाइलम और फ्लोएम ऐसे ही हैं। दोनों मिलकर संवहन बंडल बनाते हैं। इसी ऊतक ने जटिल पौधों को जमीन पर टिकने दिया।
जाइलम में चार घटक हैं: वाहिनिका, वाहिका, जाइलम मृदूतक और जाइलम रेशे। भित्ति मोटी होती है और अनेक कोशिकाएँ मृत होती हैं। वाहिनिका और वाहिका नली जैसी हैं, इसलिए पानी और खनिज ऊर्ध्वाधर जाते हैं। मृदूतक भोजन सहेजता है और पानी को बगल में ले जाने में मदद करता है। रेशे मुख्यतः सहारा देते हैं।
फ्लोएम के चार घटक हैं: चालनी नलिका, सहचर कोशिका, फ्लोएम रेशे और फ्लोएम मृदूतक। चालनी नलिका की भित्ति छिद्रित होती है। भोजन दोनों दिशाओं में चल सकता है। पत्तियों से बने भोजन को यही बाकी भागों तक ले जाता है। फ्लोएम रेशों को छोड़कर शेष फ्लोएम जीवित होता है।
प्रश्न: जाइलम के चारों घटकों के नाम और पानी की दिशा लिखो।
उत्तर: वाहिनिका, वाहिका, जाइलम मृदूतक, जाइलम रेशे। पानी और खनिज वाहिनिका तथा वाहिका में ऊर्ध्वाधर चलते हैं। मृदूतक बगल की दिशा में पानी ले जाने में मदद करता है।
चार-चार नाम क्रम से लिखो। एक नाम छूटा तो अंक कटता है।
दिशा का वाक्य अलग रखो: पानी ऊर्ध्वाधर, भोजन दोनों दिशाएँ।
जाइलम से यह अलग है।
फ्लोएम में पदार्थ दोनों दिशाओं में चलते हैं।
गलत — फ्लोएम रेशे मृत हैं। बाकी फ्लोएम जीवित है।
फ्लोएम का नली जैसा भाग।
छिद्रित।
यह घटक जीवित है और भोजन भी सहेजता है।
जाइलम मृदूतक।
सरल ऊतक एक प्रकार की कोशिकाओं का होता है, जैसे मृदूतक। जटिल ऊतक में एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ मिलकर एक काम करती हैं, जैसे जाइलम या फ्लोएम।
Epithelial tissue · 6.3.1 · जंतु ऊतक
जंतु के चार ऊतक हैं: उपकला, संयोजी, पेशी और तंत्रिका। रक्त संयोजी है और पेशी पेशीय ऊतक है। उपकला ढकने और रक्षा का ऊतक है। यह अंगों और गुहाओं को ढकती है और तंत्रों को अलग रखती है। त्वचा, मुँह की परत, रक्तवाहिनी, फेफड़े की कूपिका और वृक्क नलिका सब उपकला हैं।
कोशिकाएँ कसकर जुड़ी चादर बनाती हैं। बीच में सीमेंट बहुत कम होता है और अंतरकोशिकीय स्थान लगभग नहीं। शरीर में आने या जाने वाली हर चीज कम से कम एक उपकला पार करती है। नीचे के ऊतक से इसे रेशेदार आधार झिल्ली अलग रखती है।
रक्तवाहिनी और फेफड़े की कूपिका में सरल शल्की उपकला होती है। कोशिकाएँ बहुत पतली और चपटी होती हैं। मुँह और ग्रसिका की परत भी शल्की है। त्वचा कई परतों की होती है ताकि घिसने से बचाव हो। यह स्तरित शल्की उपकला है।
आँत की भीतरी परत स्तंभाकार है। लंबी कोशिकाएँ अवशोषण और स्राव में मदद करती हैं। श्वसन मार्ग में इन्हीं पर पक्ष्माभ होते हैं, जो श्लेष्मा को आगे धकेलते हैं। वृक्क नलिका और लार-ग्रंथि की नलिका घनाकार उपकला से बनी हैं और यांत्रिक सहारा देती हैं। कभी उपकला अंदर की ओर मुड़कर बहुकोशिकीय ग्रंथि बनाती है। यह ग्रंथिल उपकला है। त्वचा स्तरित शल्की है, आँत स्तंभाकार।
प्रश्न: मुँह की भीतरी परत, वृक्क नलिका और श्वसन मार्ग की उपकला अलग-अलग नाम दो।
उत्तर: मुँह की परत शल्की है। वृक्क नलिका घनाकार है। श्वसन मार्ग पक्ष्माभी स्तंभाकार है, क्योंकि पक्ष्माभ श्लेष्मा हटाते हैं।
पाँच नाम एक तालिका में रखो: शल्की, स्तरित, स्तंभाकार, पक्ष्माभी, घनाकार, और ग्रंथिल छठा।
त्वचा को सरल शल्की मत लिखना। त्वचा स्तरित है। कूपिका सरल शल्की है।
10-सेकंड रिवीजन
पतली और चपटी।
सरल शल्की उपकला।
गलत — त्वचा कई परतों की स्तरित शल्की उपकला है।
श्लेष्मा को आगे धकेलते हैं।
पक्ष्माभ।
घन जैसी कोशिका।
घनाकार। लार-ग्रंथि की नलिका भी इसी की है।
सही — यह रेशेदार बाह्यकोशिकीय झिल्ली है।
उपकला का एक भाग अंदर की ओर मुड़ता है और बहुकोशिकीय ग्रंथि बनती है। ये कोशिकाएँ सतह पर पदार्थ स्रावित करती हैं।
Connective tissue · 6.3.2 · आधात्री
संयोजी ऊतक की कोशिकाएँ ढीली सजी होती हैं और अंतरकोशिकीय आधात्री में धँसी रहती हैं। आधात्री जेली जैसी, तरल, सघन या कठोर हो सकती है। रक्त की आधात्री तरल प्लाज्मा है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ और पट्टिकाणु तैरते हैं। प्लाज्मा में प्रोटीन, लवण और हॉर्मोन होते हैं। रक्त गैसें, पचा भोजन, हॉर्मोन और अपशिष्ट ढोता है।
अस्थि का ढाँचा शरीर को सहारा देता है, पेशियों को बाँधता है और अंगों को टिकाता है। यह मजबूत और न मुड़ने वाली है। कठोर आधात्री कैल्सियम और फॉस्फोरस यौगिकों की है। स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है। यह बहुत प्रत्यास्थ है और आधात्री बहुत कम होती है। कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है। यह रेशेदार है, ताकत बहुत और लचीलापन सीमित।
उपास्थि में कोशिकाएँ दूर-दूर होती हैं। ठोस आधात्री प्रोटीन और शर्करा की है। यह जोड़ों पर अस्थि की सतह चिकनी करती है। नाक, कान, श्वासनली और स्वरयंत्र में भी होती है। कान मोड़ा जा सकता है, बाँह की अस्थि नहीं।
एरिओलर ऊतक त्वचा और पेशियों के बीच, रक्तवाहिनियों और तंत्रिकाओं के आसपास तथा अस्थिमज्जा में होता है। यह अंगों के अंदर जगह भरता है, उन्हें सहारा देता है और ऊतक की मरम्मत में मदद करता है। वसा त्वचा के नीचे और अंगों के बीच वसामय ऊतक में भरी रहती है। कोशिका वसा-बूँदों से भरी होती है। यह ऊष्मा रोधी का काम भी करता है। स्लाइड पर रक्त की एक बूँद रखकर कोशिकाएँ देखी जा सकती हैं। यह क्रमांकित क्रियाकलाप नहीं है।
प्रश्न: स्नायु और कंडरा में दो अंतर लिखो।
उत्तर: स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है और बहुत प्रत्यास्थ है। कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है, ताकत बहुत है पर लचीलापन कम है।
आधात्री का प्रकार लिखो: रक्त तरल, अस्थि कठोर कैल्सियम-फॉस्फोरस, उपास्थि प्रोटीन-शर्करा।
एरिओलर के तीन काम: जगह भरना, सहारा, मरम्मत। एक काम अधूरा है।
10-सेकंड रिवीजन
लचीलापन सीमित, ताकत अधिक।
कंडरा। स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
गलत — वह अस्थि की आधात्री है। उपास्थि की आधात्री प्रोटीन और शर्करा की है।
त्वचा के नीचे।
वसामय ऊतक। यह ऊष्मा रोधी भी है।
यह त्वचा और पेशियों के बीच, रक्तवाहिनियों और तंत्रिकाओं के आसपास तथा अस्थिमज्जा में होता है। यह अंगों के अंदर जगह भरता है और ऊतक की मरम्मत में मदद करता है।
Muscle and nerve · 6.3.3 · 6.3.4
पेशी ऊतक लंबी कोशिकाओं का है, जिन्हें पेशी तंतु कहते हैं। इनमें संकुचन प्रोटीन होती हैं जो सिकुड़ती और ढीली होती हैं, इसलिए गति होती है। हाथ-पैर की पेशी ऐच्छिक है। हम चाहें तो चलाते हैं और चाहें तो रोकते हैं। यह अधिकतर अस्थि से जुड़ी कंकाल पेशी है। रंगने पर हल्की-गहरी पट्टियाँ दिखती हैं, इसलिए रेखित कहलाती है। कोशिका लंबी, बेलनाकार, अशाखित और बहुनाभिकीय होती है।
आहार नाल में भोजन की गति और रक्तवाहिनी का सिकुड़ना अनैच्छिक है। यह अरेखित या चिकनी पेशी करती है। आँख की पुतली, मूत्रवाहिनी और फेफड़े की श्वसनी में भी यही है। कोशिका लंबी, नुकीले सिरों वाली, तर्कुरूप और एककेंद्रकीय होती है। पट्टियाँ नहीं होतीं। हृदय की पेशी जीवन भर लय से सिकुड़ती है। कोशिका बेलनाकार, शाखित और एककेंद्रकीय होती है। चित्र में पट्टियाँ अंकित हैं, पर यह ऐच्छिक रेखित पेशी नहीं है। हृदय पेशी अनैच्छिक है।
हर कोशिका उद्दीपन का उत्तर दे सकती है। तंत्रिका ऊतक इस काम में माहिर है और संदेश बहुत तेज ले जाता है। मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ इसी ऊतक की हैं। कोशिका का नाम तंत्रिकोशिका या न्यूरॉन है।
इसमें केंद्रक और द्रव्य वाला कोशिका-काय होता है। प्रायः एक लंबा तंत्रिकाक्ष और कई छोटी शाखित द्रुमिकाएँ होती हैं। एक तंत्रिकोशिका एक मीटर तक लंबी हो सकती है। कई तंत्रिका तंतु संयोजी ऊतक से बँधकर एक तंत्रिका बनाते हैं। तंत्रिका आवेग चाहने पर पेशी चलाता है। तंत्रिका और पेशी मिलकर जंतु को उद्दीपन पर तेजी से चलाती हैं।
| पेशी | रूप | केंद्रक | इच्छा |
|---|---|---|---|
| रेखित | बेलनाकार, अशाखित | अनेक | ऐच्छिक |
| अरेखित | तर्कुरूप | एक | अनैच्छिक |
| हृदय | बेलनाकार, शाखित | एक | अनैच्छिक |
प्रश्न: न्यूरॉन के तीन भाग और उनका काम लिखो।
उत्तर: कोशिका-काय में केंद्रक होता है। द्रुमिकाएँ छोटी और शाखित होती हैं तथा संदेश लेती हैं। तंत्रिकाक्ष प्रायः एक लंबा भाग है जो संदेश आगे ले जाता है। कई तंतु मिलकर तंत्रिका बनाते हैं।
पेशी उत्तर में स्थान, पट्टी, केंद्रक की संख्या और ऐच्छिक या अनैच्छिक चारों लिखो।
न्यूरॉन का चित्र शब्दों में भी बनना चाहिए: काय, द्रुमिका, तंत्रिकाक्ष। लंबाई एक मीटर तक।
10-सेकंड रिवीजन
लय जीवन भर चलती है।
हृदय पेशी बेलनाकार, शाखित, एककेंद्रकीय और अनैच्छिक है।
सही — भोजन की गति अनैच्छिक है। पुतली, मूत्रवाहिनी और श्वसनी में भी यही पेशी है।
द्रुमिकाएँ छोटी होती हैं।
तंत्रिकाक्ष।
बहुनाभिकीय।
अनेक केंद्रक। कोशिका अशाखित और बेलनाकार भी है।
रेखित पेशी अधिकतर हाथ-पैर की अस्थियों से जुड़ी है। अरेखित पेशी आहार नाल, रक्तवाहिनी, पुतली, मूत्रवाहिनी और श्वसनी में है। हृदय पेशी केवल हृदय में है।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
एक झुंड एक काम।
काम बँटता है और कुशलता बढ़ती है।
पर्वसंधि के दोनों ओर।
पत्ती के आधार या पर्व पर, टहनी में।
स्थायी ऊतक बनता है।
कोशिका बँटना छोड़कर निश्चित रूप और काम लेती है।
कोने मोटी, जीवित।
स्थूलकोण ऊतक।
द्वार कोशिकाएँ घेरती हैं।
रंध्र से। पानी वाष्प बनकर निकलता है।
बगल में पानी भी ले जाता है।
जाइलम मृदूतक।
बाकी जीवित हैं।
फ्लोएम रेशा।
त्वचा इससे अलग, कई परत की है।
शल्की उपकला।
प्लाज्मा।
रक्त।
बाँह की अस्थि नहीं मुड़ती।
उपास्थि।
हाथ-पैर।
कंकाल रेखित पेशी।
कई तंतु एक साथ।
संयोजी ऊतक।
द्वार कोशिकाएँ रास्ता देती हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड।
कठोर और नमनीय नहीं।
कैल्सियम और फॉस्फोरस के यौगिक।
सही। पौधे के कई सहारे वाले ऊतक मृत होते हैं।
गलत — शीर्ष लंबाई बढ़ाता है। मोटाई एधा बढ़ाती है।
सही। भित्ति लिग्निन से मोटी होती है।
गलत — रक्षा के लिए परत लगातार होती है।
गलत — दोनों जटिल हैं, क्योंकि एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ हैं।
गलत — वह वर्णन स्नायु का है। कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है।
सही। यह अनैच्छिक है।
क्रियाकलाप 6.1।
1 cm।
दृढ़ोतक।
सुबेरिन।
पत्तियों से।
घनाकार।
प्लाज्मा।
द्रुमिका।
एधा मोटाई, वायुतक तैरना, रंध्र गैस, कॉर्क रोकना।
कंडरा पेशी-अस्थि, वसा त्वचा के नीचे, घनाकार वृक्क, हृदय पेशी हृदय।
अभिकथन (A): जार 2 में कटी जड़ आगे नहीं बढ़ती।
कारण (R): जड़ का सिरा शीर्षस्थ विभज्योतक है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): दृढ़ोतक मृत होता है।
कारण (R): फ्लोएम भोजन दोनों दिशाओं में ले जाता है।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A): स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
कारण (R): स्नायु पेशी को अस्थि से जोड़ता है और नाम कंडरा नहीं है।
A सही है। R गलत — पेशी को अस्थि से कंडरा जोड़ती है।
अभिकथन (A): फ्लोएम की हर कोशिका मृत होती है।
कारण (R): फ्लोएम रेशे को छोड़कर फ्लोएम जीवित होता है।
A गलत है। R सही है और वही सुधार है।
मृदूतक और स्थूलकोण एक प्रकार की कोशिका के हैं। जाइलम और फ्लोएम कई प्रकार की कोशिकाओं के हैं।
कंकाल पेशी ऐच्छिक है। आहार नाल, हृदय और पुतली अनैच्छिक हैं।
संरचना में समान या एक काम के लिए जुड़ी कोशिकाओं का समूह ऊतक है।
गैसों का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन। प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड यहीं से आती है।
वाहिनिका, वाहिका, जाइलम मृदूतक और जाइलम रेशे।
तंत्रिका ऊतक।
यह जीवन भर लय से सिकुड़ती और ढीली होती है, इसलिए हृदय धड़कता रहता है।
मृदूतक की भित्ति पतली होती है और कोशिका जीवित होती है। स्थूलकोण की भित्ति कोनों पर मोटी होती है और कोशिका जीवित होती है। दृढ़ोतक की भित्ति लिग्निन से मोटी होती है और कोशिका मृत होती है।
चालनी नलिका, सहचर कोशिका, फ्लोएम रेशे और फ्लोएम मृदूतक। फ्लोएम रेशे मृत हैं। बाकी जीवित हैं। भोजन दोनों दिशाओं में चलता है।
त्वचा स्तरित शल्की उपकला है। छाल कॉर्क है। अस्थि संयोजी ऊतक है। वृक्क नलिका घनाकार उपकला है। संवहन बंडल जाइलम और फ्लोएम है।
रेखित पेशी अस्थि से जुड़ी है, पट्टियाँ दिखाती है और बहुनाभिकीय है। अरेखित पेशी आहार नाल जैसी जगहों में है, पट्टी नहीं दिखाती और एककेंद्रकीय है।
दो जार पानी से भरो और दो प्याज रखो। दिन 1 से 3 तक जड़ नापो। दिन 4 को जार 2 के सिरे लगभग 1 cm काटो और पाँच दिन और नापो। जार 1 की जड़ लंबी रहती है। जार 2 में कटे सिरे नहीं बढ़ते। कारण शीर्षस्थ विभज्योतक का हट जाना है।
जाइलम में वाहिनिका, वाहिका, मृदूतक और रेशे होते हैं। पानी और खनिज ऊर्ध्वाधर जाते हैं। अनेक कोशिकाएँ मृत हैं, मृदूतक जीवित है। फ्लोएम में चालनी नलिका, सहचर कोशिका, रेशे और मृदूतक होते हैं। भोजन दोनों दिशाओं में जाता है। रेशे मृत हैं, बाकी जीवित।
उपकला ढकती है, जैसे त्वचा। संयोजी जोड़ता और सहारा देता है। स्नायु अस्थि को अस्थि से और कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है। रक्त भी संयोजी है। पेशी गति देती है, जैसे हृदय की लय। तंत्रिका संदेश ले जाती है, जैसे न्यूरॉन का तंत्रिकाक्ष।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
फ्लोएम में कई प्रकार की कोशिकाएँ हैं।
फ्लोएम जटिल है।
वायु-गुहा।
मृदूतक।
स्नायु अस्थि-अस्थि है।
कंडरा।
पुराने तने में द्वितीयक विभज्योतक बाह्यत्वचा की जगह कई परत का कॉर्क बनाता है। कोशिकाएँ मृत और ठोस सजी होती हैं। सुबेरिन गैस और पानी नहीं जाने देता।
पौधे के कई ऊतक मृत होकर सहारा देते हैं और वृद्धि कुछ स्थानों तक है। जंतु के अधिकतर ऊतक जीवित हैं और वृद्धि अधिक एकसमान है। शीर्षस्थ सिरा लंबाई बढ़ाता है। पार्श्व एधा मोटाई बढ़ाती है। अंतर्विष्ट पत्ती के आधार या पर्व पर होता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
क्रिया 6.1 का तीसरा प्रश्न।
सिरा काटने से शीर्षस्थ विभज्योतक हट जाता है, इसलिए वृद्धि रुकती है।
क्रिया 6.3।
बाह्यत्वचा और रंध्र। दो कोशिकाएँ द्वार कोशिकाएँ हैं।
अभिकथन (A): मरुस्थली पौधे की बाहरी सतह पर क्यूटिन की मोटी परत होती है।
कारण (R): यह परत पानी की हानि कम करती है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): अरेखित पेशी को इच्छा से रोका जा सकता है।
कारण (R): आहार नाल की गति अनैच्छिक है।
A गलत है। R सही है।
भूसी दृढ़ोतक है। भित्ति लिग्निन से मोटी होती है और अक्सर अंदर जगह नहीं बचती। कोशिका मृत है। जलीय तने में वायुतक होता है, जो मृदूतक है। बड़ी वायु-गुहा तैरने में मदद करती है।
अस्थि-अस्थि जोड़ स्नायु है और वह बचा। पेशी-अस्थि जोड़ कंडरा है और वही टूटा। स्नायु बहुत प्रत्यास्थ है। कंडरा में ताकत अधिक और लचीलापन कम होता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| शीर्षस्थ | length of root and stem |
| पार्श्व एधा | girth of stem or root |
| नारियल का छिलका | sclerenchyma |
| जाइलम | water and minerals, vertical |
| फ्लोएम | food, both directions |
| स्नायु / कंडरा | bone to bone / muscle to bone |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।