गैस डिस्चार्ज वाली किरणें।
धनावेशित कैनाल किरणें गोल्डस्टीन ने 1886 में देखीं। प्रोटॉन इन्हीं से खुला।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 4 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Structure of the Atom
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 4.1 आवेश · 4.2 स्थिर मॉडल, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. पहले तीन बोहर कोशों वाला याद रखने वाला चित्र K, L और M पर इलेक्ट्रॉन 2, 8 और 8 लिखकर दिखाता है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 4 है। NCERT 2026-27 अन्वेषण में परमाणु की यात्रा बाद में आती है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Charged particles — Activity 4.1 · बिहार 4.1 · क्रियाकलाप 4.1
डाल्टन ने परमाणु को अविभाज्य कहा था। सदी के अंत तक स्थिर विद्युत ने बताया कि बात अधूरी है। रगड़ने पर वस्तु आवेशित होती है। आवेश कहीं बाहर से नया पदार्थ बनकर नहीं आता। वह परमाणु के अंदर के कणों से आता है।
1900 तक एक अवपरमाणुक कण पहचाना जा चुका था, इलेक्ट्रॉन। पहचान जे. जे. थॉमसन की है। संकेत e− है। आवेश ऋण एक माना जाता है और द्रव्यमान नगण्य।
गोल्डस्टीन ने 1886 में कैनाल किरणें देखीं। ये धनावेशित विकिरण थीं। इन्हीं से प्रोटॉन खुला। प्रोटॉन का आवेश इलेक्ट्रॉन जितना और चिह्न उलटा है। द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 2000 गुना है। संकेत p+ है। द्रव्यमान एक इकाई और आवेश धन एक लिया जाता है। एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन वाला परमाणु उदासीन होता है।
इस क्रियाकलाप के दो भाग हैं। इन्हें 4.2 मत बना देना।
क. सूखे बालों में कंघी करो। क्या कंघी कागज के छोटे टुकड़ों को खींचती है?
ख. काँच की छड़ को रेशम से रगड़ो और फुले गुब्बारे के पास लाओ। क्या होता है, देखो।
दो वस्तुओं को रगड़ने पर वे विद्युत आवेश ले लेती हैं। सवाल यह है कि आवेश कहाँ से आया। उत्तर यही है कि परमाणु विभाज्य है और उसमें आवेशित कण हैं। इलेक्ट्रॉन तुलना से आसानी से अलग हो जाता है। प्रोटॉन भीतर रहता है।
प्रश्न: एक परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन है। उस पर कितना आवेश है?
सूत्र: कुल आवेश = प्रोटॉन का आवेश + इलेक्ट्रॉन का आवेश।
मान: (+1) + (−1) = 0।
इकाई: आवेश की यह इकाई वही है जिसमें प्रोटॉन को +1 और इलेक्ट्रॉन को −1 कहते हैं। परमाणु उदासीन है।
कैनाल किरण और प्रोटॉन को एक वाक्य में जोड़ो। केवल «धनात्मक कण» अधूरा रहता है।
द्रव्यमान का गुणज 2000 प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का है। न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर है।
गैस डिस्चार्ज वाली किरणें।
धनावेशित कैनाल किरणें गोल्डस्टीन ने 1886 में देखीं। प्रोटॉन इन्हीं से खुला।
गलत — प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 2000 गुना है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान नगण्य लिया जाता है।
1906 का नोबेल इसी काम से जुड़ा है।
जे. जे. थॉमसन। प्रोटॉन कैनाल किरणों से खुला और न्यूट्रॉन चैडविक का है।
(+1) और (−1) जोड़ो।
(+1) + (−1) = 0। परमाणु उदासीन है।
सूखे बालों में कंघी कागज खींचती है। रेशम से रगी काँच की छड़ गुब्बारे के पास असर दिखाती है। आवेश परमाणु के अंदर के कणों से आता है, क्योंकि परमाणु विभाज्य है।
The Thomson model · बिहार 4.2.1 · धन गोला
थॉमसन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने परमाणु की बनावट का मॉडल दिया। इलेक्ट्रॉन धन आवेश के गोले में जड़े होते हैं, जैसे क्रिसमस पुडिंग में सूखे मेवे। तरबूज वाला चित्र भी वही बात कहता है। लाल भाग धन आवेश है और बीज इलेक्ट्रॉन हैं।
दो बातें मॉडल में हैं। परमाणु एक धन गोला है और इलेक्ट्रॉन उसमें धँसे हैं। ऋण और धन आवेश बराबर हैं, इसलिए पूरा परमाणु उदासीन है।
इस मॉडल में नाभिक नहीं है। उदासीनता की व्याख्या हो जाती है। आगे के प्रकीर्णन प्रयोग की व्याख्या नहीं होती। नाभिक में केवल न्यूक्लियॉन हों, यह थॉमसन का कथन नहीं है।
सोने की पत्ती और नाभिक रदरफोर्ड के हैं। थॉमसन से केवल उदासीन गोला पूछा जाए तो नाभिक लिखना उत्तर बदल देता है।
प्रश्न: थॉमसन मॉडल में परमाणु उदासीन क्यों है?
सूत्र: कुल आवेश = धन आवेश + ऋण आवेश।
मान: दोनों आवेश परिमाण में बराबर हैं, इसलिए योग 0 है।
इकाई: आवेश की इकाई में परिणाम 0 है। गोला धन है, इलेक्ट्रॉन ऋण हैं, पूरा परमाणु उदासीन है।
दो बिंदु क्रम से लिखो: गोला, फिर आवेशों की बराबरी।
सीमा भी एक पंक्ति में रखो। मॉडल प्रकीर्णन नहीं समझाता।
गलत — धन आवेश पूरे गोले में फैला है। नाभिक रदरफोर्ड के प्रयोग से आया।
तरबूज के बीज वाला चित्र।
इलेक्ट्रॉन धन गोले में जड़े होते हैं।
परमाणु धन गोला है और इलेक्ट्रॉन उसमें जड़े हैं। धन और ऋण आवेश बराबर होने से परमाणु उदासीन है। यह मॉडल अल्फा कणों के प्रकीर्णन को नहीं समझाता।
तरबूज का लाल भाग।
धन गोले में। इलेक्ट्रॉन उसी में जड़े होते हैं।
Rutherford and the gold foil · बिहार 4.2.2 · प्रकीर्णन · बिना नंबर की तुलना
रदरफोर्ड जानना चाहते थे कि इलेक्ट्रॉन परमाणु में कैसे बैठे हैं। तेज अल्फा कणों को सोने की पतली पत्ती पर डाला गया। पत्ती लगभग 1000 परमाणु मोटी थी, फिर भी यथासंभव पतली। अल्फा कण हीलियम के दुगुने आवेश वाले आयन हैं। द्रव्यमान 4 u है, इसलिए तेज कण के पास काफी ऊर्जा है। प्रोटॉन से भारी होने के कारण बड़े विचलन की उम्मीद नहीं थी।
नतीजे उलटे पड़े। अधिकांश कण सीधे निकल गए। कुछ छोटे कोण से मुड़े। हर 12000 में से कोई एक लौट पड़ा। रदरफोर्ड को यह लौटना बहुत अचंभा लगा।
निष्कर्ष तीन हैं। अधिकांश जगह खाली है, क्योंकि अधिकांश कण नहीं मुड़े। धन आवेश बहुत छोटी जगह में है, क्योंकि कम कण मुड़े। सारा धन आवेश और द्रव्यमान बहुत छोटे आयतन में है, क्योंकि बहुत थोड़े कण लगभग 180° मुड़कर लौटे। नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से लगभग 105 गुना छोटी निकली।
नाभिकीय मॉडल: धन नाभिक है और लगभग सारा द्रव्यमान वहीं है। इलेक्ट्रॉन वृत्तीय पथ पर चक्कर काटते हैं। नाभिक परमाणु से बहुत छोटा है। चक्कर काटता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर सकता है, इसलिए मॉडल परमाणु की स्थिरता नहीं समझाता।
इसकी क्रियाकलाप संख्या नहीं है। 4.3 मत लिखना।
आँख बंद बच्चा दीवार पर पत्थर फेंके तो हर बार आवाज आए। काँटेदार तार की बाड़ पर फेंके तो अधिकांश पत्थर बीच के खाली स्थान से निकल जाएँ और आवाज न आए। सोने की पत्ती वैसी बाड़ है। अधिकांश अल्फा कण खाली जगह से निकल जाते हैं। लौटने वाला कण उस छोटी सघन जगह से टकराया है जिसे नाभिक कहते हैं।
प्रश्न: 12000 अल्फा कणों में लगभग कितने लौटते हैं, और नाभिक की त्रिज्या परमाणु से कितनी छोटी है?
सूत्र: लौटे कण = कुल कण / 12000। त्रिज्या का अनुपात लगभग 1 : 105 है।
मान: 12000 / 12000 = 1 कण। त्रिज्या लगभग 105 गुना कम।
इकाई: गिनती एक कण की है। त्रिज्या की तुलना गुना में है, ग्राम में नहीं।
तीन अवलोकन और तीन निष्कर्ष अलग लिखो। दोनों को एक वाक्य में मिलाना अंक काटता है।
कमी अलग प्रश्न है। नाभिक की खोज सही है, स्थिरता की व्याख्या नहीं।
थॉमसन इलेक्ट्रॉन हैं, चैडविक न्यूट्रॉन।
परमाणु नाभिक। अधिकांश कण सीधे गए, बहुत कम लौटे।
गलत — ये हीलियम के दुगुने धन आवेश वाले आयन हैं और द्रव्यमान 4 u है।
पत्ती लगभग 1000 परमाणु मोटी थी। यह संख्या दूसरी है।
12000।
बाड़ वाले खाली स्थान।
अधिकांश जगह खाली है।
वृत्तीय पथ पर चक्कर काटता आवेशित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोता है और नाभिक में गिरना चाहिए। तब परमाणु स्थिर नहीं रहता, जबकि परमाणु स्थिर होते हैं।
सही — सोना पतली पत्ती के लिए चुना गया था। नाभिकीय बनावट केवल सोने की नहीं है।
Bohr orbits and the neutron · बिहार 4.2.3 और 4.2.4
रदरफोर्ड की कमी हटाने के लिए नील्स बोहर ने दो बातें कहीं। परमाणु के अंदर केवल कुछ खास कक्षाएँ अनुमति में हैं। इन्हें विविक्त कक्षा कहते हैं। इन कक्षाओं में चक्कर काटते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोता।
ये कक्षाएँ ऊर्जा स्तर भी कहलाती हैं। इन्हें K, L, M, N या n = 1, 2, 3, 4 कहते हैं। पूरा कोश होने पर परमाणु अधिक स्थिर और कम क्रियाशील होता है। यह बात आगे संयोजकता में खुलती है।
1932 में जे. चैडविक ने एक और कण पाया। उस पर आवेश नहीं है और द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर है। नाम न्यूट्रॉन है। संकेत n है। हाइड्रोजन को छोड़कर सब परमाणुओं के नाभिक में न्यूट्रॉन होता है। परमाणु का द्रव्यमान प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के द्रव्यमान का योग है। ये दोनों नाभिक में रहते हैं, इसलिए इन्हें न्यूक्लियॉन भी कहते हैं।
तीन कण हैं: इलेक्ट्रॉन ऋण, प्रोटॉन धन, न्यूट्रॉन आवेशरहित। न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन को चिपकाकर नहीं बनता।
प्रश्न: हीलियम का परमाणु द्रव्यमान 4 u है और नाभिक में 2 प्रोटॉन हैं। न्यूट्रॉन कितने हैं?
सूत्र: न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन। द्रव्यमान संख्या यहाँ 4 है।
मान: 4 − 2 = 2।
इकाई: 2 न्यूट्रॉन। द्रव्यमान लगभग 2 u इन्हीं का है, क्योंकि हर न्यूट्रॉन लगभग 1 u है।
बोहर के दो बिंदु पूरे लिखो। केवल «कक्षा» लिखना रदरफोर्ड से अलग नहीं पड़ता।
हीलियम वाले प्रश्न में 4 − 2 = 2 दिखाओ। उत्तर केवल «दो» बिना घटाव के अधूरा रहता है।
यही रदरफोर्ड की कमी का उत्तर है।
विविक्त कक्षा में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोता।
गलत — न्यूट्रॉन अलग कण है। आवेश शून्य है, पर वह चिपका हुआ जोड़ा नहीं है।
आवेश शून्य वाला कण।
जे. चैडविक।
4 में से 2 घटाओ।
4 − 2 = 2 न्यूट्रॉन।
इलेक्ट्रॉन ऋण है, थॉमसन। प्रोटॉन धन है, कैनाल किरणों से, गोल्डस्टीन। न्यूट्रॉन आवेशरहित है, चैडविक, 1932।
Sharing electrons into shells — Activity 4.2 · बिहार 4.3 · क्रियाकलाप 4.2 · 2n^2
बोहर और बरी ने बताया कि इलेक्ट्रॉन कक्षाओं में कैसे बाँटें।
पहला नियम: किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन 2n2 है। n कक्षा का क्रमांक है।
| कोश | n | 2n^2 |
|---|---|---|
| K | 1 | 2 |
| L | 2 | 8 |
| M | 3 | 18 |
| N | 4 | 32 |
दूसरा नियम: बाहरी कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रखते। तीसरा नियम: भीतरी कोश भरे बिना बाहरी में इलेक्ट्रॉन नहीं डालते। भरना सीढ़ी की तरह है।
पहले अठारह तत्वों की तालिका यहीं रुकती है। आर्गन 2, 8, 8 है। M का 2n2 अधिकतम 18 है, पर आर्गन में M बाहरी कोश है इसलिए वहाँ 8 हैं। चित्र की संख्या 2, 8, 8 बाहरी भराव है। M की पूरी क्षमता 18 है। हीलियम के बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं और संयोजकता 0 है। अष्टक बाद के निष्क्रिय तत्वों में 8 का है।
पहले अठारह तत्वों का स्थिर परमाणु मॉडल बनाओ जिसमें इलेक्ट्रॉन विन्यास दिखे। हाइड्रोजन से आर्गन तक K, L, M भरो। भीतरी कोश पहले भरो। कार्बन 2, 4 है। सोडियम 2, 8, 1 है। आर्गन 2, 8, 8 है। मॉडल पर आवेश मत लिखो। केवल कोश और इलेक्ट्रॉन की संख्या लिखो।
प्रश्न: M कोश में 2n2 से अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन आते हैं? आर्गन के M में कितने हैं?
सूत्र: अधिकतम = 2n2। M के लिए n = 3। बाहरी नियम अलग है।
मान: 2 × 32 = 2 × 9 = 18। आर्गन में M बाहरी है, इसलिए वहाँ 8 हैं। विन्यास 2, 8, 8।
इकाई: 18 इलेक्ट्रॉन क्षमता है। आर्गन के उस कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हैं।
2n^2 और बाहरी सीमा दोनों लिखो। केवल 2, 8, 8 लिखकर M की क्षमता 8 मत बना देना।
सोडियम 2, 8, 1 है। 2, 8 या 8, 2, 1 दोनों गलत क्रम हैं।
10-सेकंड रिवीजन
n = 2।
2 × 2^2 = 8। K का अधिकतम 2 है और M का 18।
गलत — बाहरी कोश में अधिकतम 8 हैं। 18, M का 2n^2 अधिकतम है जब वह भीतरी हो।
K और L भरो, अंतिम एक M में।
2, 8, 1। परमाणु क्रमांक 11 है।
2 + 8।
2 + 8 = 10।
कार्बन 2, 4। सोडियम 2, 8, 1। तीसरा नियम कहता है कि भीतरी कोश भरे बिना बाहरी में इलेक्ट्रॉन नहीं जाते।
सही — कंघी वाला भाग क्रियाकलाप 4.1 है।
Valency and the outer shell · बिहार 4.4 · अष्टक
बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। बाहरी कोश पूरा भरा हो तो संयोजकता शून्य होती है। हीलियम में बाहरी इलेक्ट्रॉन 2 हैं। बाद के निष्क्रिय तत्वों में 8 हैं। 8 इलेक्ट्रॉन वाले बाहरी कोश को अष्टक कहते हैं।
परमाणु अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन खोता, पाता या बाँटता है। जितने इलेक्ट्रॉन इस काम में लगें, वही संयोजकता है। हाइड्रोजन, लिथियम और सोडियम के बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन है, इसलिए संयोजकता 1 है। मैग्नीशियम 2 है, ऐलुमिनियम 3।
बाहरी इलेक्ट्रॉन पूरे भराव के पास हों तो गिनती उलट जाती है। फ्लोरीन के बाहरी कोश में 7 हैं। सात खोना कठिन है, एक पाना आसान है। संयोजकता 8 − 7 = 1 है, 7 नहीं। ऑक्सीजन में 6 हैं, संयोजकता 2। क्लोरीन 1, सल्फर 2। सिलिकॉन के बाहरी कोश में 4 हैं, संयोजकता 4। फॉस्फोरस की तालिका में 3 और 5 दोनों हैं।
प्रश्न: ऑक्सीजन, क्लोरीन और मैग्नीशियम की संयोजकता निकालो।
सूत्र: भराव के पास हो तो संयोजकता = 8 − बाहरी इलेक्ट्रॉन। दूर हो तो संयोजकता = बाहरी इलेक्ट्रॉन।
मान: ऑक्सीजन 8 − 6 = 2। क्लोरीन 8 − 7 = 1। मैग्नीशियम बाहरी इलेक्ट्रॉन 2 खोता है, संयोजकता 2।
इकाई: तीनों उत्तर संख्या हैं: 2, 1 और 2।
फ्लोरीन पर 7 मत लिखना। परीक्षा में 8 − 7 दिखाना जरूरी है।
हीलियम को अष्टक मत कहना। उसका भरा कोश 2 का है और संयोजकता 0 है।
10-सेकंड रिवीजन
8 में से 7 घटाओ।
1। एक इलेक्ट्रॉन पाना सात खोने से आसान है।
विन्यास 2, 8, 4।
4। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं।
गलत — बाहरी कोश भरा है, इसलिए संयोजकता 0 है। 2 इलेक्ट्रॉन डुप्लेट है, अष्टक नहीं।
क्लोरीन के बाहरी कोश में 7 हैं, संयोजकता 8 − 7 = 1। सल्फर में 6 हैं, संयोजकता 2। मैग्नीशियम में 2 हैं और वह दोनों खोकर संयोजकता 2 पाता है।
Atomic number and mass number · बिहार 4.5 · Z और A
परमाणु क्रमांक Z नाभिक के प्रोटॉनों की संख्या है। एक तत्व के सब परमाणुओं का Z समान होता है। तत्व की पहचान प्रोटॉनों से होती है। हाइड्रोजन में Z = 1। कार्बन में Z = 6। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन भी Z के बराबर होते हैं।
द्रव्यमान लगभग पूरा प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का है। दोनों नाभिक में हैं और न्यूक्लियॉन कहलाते हैं। द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या। कार्बन में 6 + 6 = 12, इसलिए द्रव्यमान 12 u है। ऐलुमिनियम में 13 प्रोटॉन और 14 न्यूट्रॉन हैं, द्रव्यमान संख्या 27।
लिखने का ढंग: द्रव्यमान संख्या ऊपर, परमाणु क्रमांक नीचे, बीच में संकेत। नाइट्रोजन 147N है। यह रासायनिक समीकरण नहीं है। ऑक्सीजन की द्रव्यमान संख्या 8 + 8 = 16 है। सल्फर की 16 + 16 = 32।
प्रश्न: किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन 8 हैं और प्रोटॉन 8। परमाणु क्रमांक और आवेश निकालो।
सूत्र: Z = प्रोटॉनों की संख्या। आवेश = प्रोटॉन − इलेक्ट्रॉन, उदासीन इकाई में।
मान: Z = 8। आवेश = 8 − 8 = 0।
इकाई: क्रमांक 8 है। आवेश 0 है। यह ऑक्सीजन का उदासीन परमाणु है।
द्रव्यमान संख्या और परमाणु द्रव्यमान की इकाई अलग रखो। संख्या 32 है, द्रव्यमान लगभग 32 u।
संकेत के ऊपर द्रव्यमान संख्या लिखो और नीचे परमाणु क्रमांक। उलटा लिखना समस्थानिक का अर्थ बदल देता है।
10-सेकंड रिवीजन
तत्व की पहचान यही है।
प्रोटॉनों की संख्या। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन भी इतने ही होते हैं।
गलत — द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग है।
प्रोटॉन 16 और न्यूट्रॉन 16।
32। 16 + 16 = 32।
Z भी 8 है।
0। परमाणु उदासीन है और क्रमांक 8 है।
परमाणु क्रमांक नाभिक के प्रोटॉनों की संख्या है। कार्बन का Z = 6। द्रव्यमान संख्या प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का योग है। कार्बन में 6 + 6 = 12।
Isotopes and isobars · बिहार 4.6 · औसत द्रव्यमान
कुछ तत्वों के परमाणुओं का क्रमांक समान होता है और द्रव्यमान संख्या अलग। ये समस्थानिक हैं। हाइड्रोजन के तीन रूप हैं। प्रोटियम में 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन। ड्यूटीरियम में 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन। ट्राइटियम में 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन। कार्बन के 126C और 146C समस्थानिक हैं। क्लोरीन के 35 और 37 भी।
हर समस्थानिक शुद्ध पदार्थ है। रासायनिक गुण समान रहते हैं, भौतिक गुण बदलते हैं। औसत द्रव्यमान प्रतिशत से निकलता है। प्रकृति में क्लोरीन 35 u और 37 u के रूप में 3:1 है। किसी एक परमाणु का द्रव्यमान 35.5 u नहीं होता।
उपयोग अलग हैं। यूरेनियम का एक समस्थानिक नाभिकीय भट्टी का ईंधन है। कोबाल्ट का एक समस्थानिक कैंसर के उपचार में है। आयोडीन का एक समस्थानिक घेंघा के उपचार में है। टिंक्चर आयोडीन यह समस्थानिक नहीं है।
समभारिक अलग तत्वों के परमाणु हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या समान हो और परमाणु क्रमांक अलग। कैल्सियम का क्रमांक 20 है, आर्गन का 18। दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है। समस्थानिक में Z समान, समभारिक में A समान।
औसत नमूने का है। उत्तर में 3:1 या 75% और 25% दिखाओ। टिंक्चर को समस्थानिक का उपयोग मत लिखना।
प्रश्न: क्लोरीन के समस्थानिक 35 u और 37 u अनुपात 3:1 में हैं। औसत परमाणु द्रव्यमान निकालो।
सूत्र: औसत = (3 × 35 + 1 × 37) / 4।
मान: (105 + 37) / 4 = 142 / 4 = 35.5।
इकाई: 35.5 u। यह औसत है। किसी एक परमाणु पर 35.5 u नहीं लिखते।
औसत वाले प्रश्न में प्रतिशत या 3:1 का जोड़ दिखाओ। केवल 35.5 याद से लिखना अधूरा है।
समस्थानिक और समभारिक की एक-एक जोड़ी साथ लिखो: Cl-35 और Cl-37, तथा Ar-40 और Ca-40।
10-सेकंड रिवीजन
Z समान रहता है।
न्यूट्रॉनों की संख्या अलग होती है, इसलिए द्रव्यमान संख्या बदलती है।
गलत — समस्थानिक घेंघा के उपचार में है। टिंक्चर साधारण आयोडीन का घोल है।
क्रमांक 18 और 20 अलग हैं।
समभारिक। समस्थानिक में क्रमांक समान होता है।
(3×35 + 37)/4।
3:1 का औसत 35.5 u है। एक अकेला परमाणु 35.5 u नहीं होता।
तीनों में प्रोटॉन 1 और इलेक्ट्रॉन 1 हैं। न्यूट्रॉन प्रोटियम में 0, ड्यूटीरियम में 1, ट्राइटियम में 2 हैं।
सही — Z दोनों का 6 है। द्रव्यमान संख्या 12 और 14 है। ये कार्बन के समस्थानिक हैं।
प्रकार चुनो। पाठों के 41 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
1886।
गोल्डस्टीन। किरणें धनावेशित थीं।
इलेक्ट्रॉन नगण्य है।
लगभग 2000 गुना।
गोले वाला मॉडल।
धन और ऋण आवेश बराबर हैं।
खाली जगह।
सीधे निकल जाते हैं।
ऊर्जा खोने वाला आवेश।
चक्कर काटता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर सकता है।
आवेश शून्य।
1932 में चैडविक।
n = 3।
2 × 9 = 18। बाहरी नियम अलग से 8 कहता है।
K, L, फिर M।
2, 8, 1।
2, 8, 7 एक इलेक्ट्रॉन पाकर 2, 8, 8।
8। कुल इलेक्ट्रॉन 18 हो जाते हैं, पर बाहरी कोश में 8 हैं।
Z।
प्रोटॉनों की संख्या।
A समान, Z अलग।
आर्गन और कैल्सियम। पहली दो जोड़ियाँ समस्थानिक हैं।
विन्यास 2, 1।
लिथियम, संयोजकता 1।
K = 2 और L = 8।
परमाणु 2, 8, 1 था। एक इलेक्ट्रॉन खोने पर 2, 8 बचता है।
(49.7×79 + 50.3×81)/100 = 80.006।
80.006 u, यानी लगभग 80 u। 35.5 क्लोरीन का औसत है।
गलत — थॉमसन मॉडल में नाभिक ही नहीं है।
सही — प्रोटॉन लगभग 2000 गुना भारी है।
गलत — प्रोटियम में 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन हैं। किताब हाइड्रोजन को न्यूट्रॉन वाली बात से अलग रखती है।
सही — बाहरी कोश 2 इलेक्ट्रॉन से भरा है।
गलत — 35.5 u औसत है। समस्थानिक 35 u और 37 u हैं।
सही — भौतिक गुण अलग होते हैं।
सही — यह दुगुना आवेशित हीलियम आयन है।
गलत — बाहरी कोश में अधिकतम 8 हैं। 18 क्षमता है, बाहरी सीमा नहीं।
1886।
गोल्डस्टीन।
लगभग 10^5 गुना।
सोने की पत्ती लगभग 1000 परमाणु मोटी थी। यह संख्या दूसरी है।
2।
n = 1, 2n^2 = 2।
6।
प्रोटॉन 6।
27।
13 प्रोटॉन + 14 न्यूट्रॉन।
2। 8 − 6 = 2।
बाहरी इलेक्ट्रॉन 6 हैं।
35.5 u।
3:1 वाला औसत।
कैल्सियम।
क्रमांक 20।
थॉमसन इलेक्ट्रॉन, गोल्डस्टीन कैनाल किरणें, रदरफोर्ड नाभिक, चैडविक न्यूट्रॉन।
हाइड्रोजन, क्लोरीन और कार्बन के जोड़े समस्थानिक हैं। आर्गन और कैल्सियम द्रव्यमान 40 के समभारिक हैं।
अभिकथन (A): परमाणु के अंदर अधिकांश स्थान खाली है।
कारण (R): अधिकांश अल्फा कण सोने की पत्ती से सीधे निकल गए।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): बोहर की विविक्त कक्षा में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोता।
कारण (R): इससे रदरफोर्ड मॉडल वाली गिरने की कमी हटती है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं।
कारण (R): समस्थानिकों के भौतिक गुण भी हमेशा समान होते हैं।
A सही है। R गलत है। भौतिक गुण अलग होते हैं।
अभिकथन (A): थॉमसन मॉडल में धन नाभिक होता है।
कारण (R): अल्फा प्रकीर्णन से नाभिक का पता चला।
A गलत है। R सही है। नाभिक रदरफोर्ड के प्रयोग का परिणाम है।
अभिकथन (A): क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 u है।
कारण (R): आर्गन और कैल्सियम समभारिक हैं।
दोनों सही हैं, पर R औसत 35.5 की व्याख्या नहीं करता। औसत 35 और 37 के अनुपात 3:1 से आता है।
इलेक्ट्रॉन ऋण है। प्रोटॉन और अल्फा कण धन हैं। न्यूट्रॉन शून्य है।
केवल आर्गन और कैल्सियम समभारिक हैं। बाकी समस्थानिक हैं।
गोल्डस्टीन द्वारा 1886 में देखी गई धनावेशित किरणें कैनाल किरणें हैं। इन्हीं से प्रोटॉन खुला।
यह मॉडल अल्फा कणों के प्रकीर्णन को नहीं समझाता, क्योंकि इसमें छोटा धन नाभिक नहीं है।
द्रव्यमान संख्या नाभिक में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या है।
अलग परमाणु क्रमांक और समान द्रव्यमान संख्या वाले परमाणु समभारिक हैं। जोड़ा आर्गन और कैल्सियम है, दोनों की द्रव्यमान संख्या 40।
संयोजकता परमाणु की संयोजन क्षमता है, यानी अष्टक पूरा करने के लिए खोए, पाए या बाँटे इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
धन नाभिक में लगभग सारा द्रव्यमान होता है। इलेक्ट्रॉन वृत्तीय पथ पर चक्कर काटते हैं। कमी यह है कि चक्कर काटता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर सकता है, जबकि परमाणु स्थिर है।
कार्बन 2, 4। सोडियम 2, 8, 1। आर्गन 2, 8, 8। बाहरी कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रखते। M का 2n^2 अधिकतम फिर भी 18 है।
सिलिकॉन 2, 8, 4 है। बाहरी 4 इलेक्ट्रॉन बाँटता है, संयोजकता 4। ऑक्सीजन 2, 6 है। अष्टक के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए, संयोजकता 8 − 6 = 2।
औसत = (49.7 × 79 + 50.3 × 81) / 100 = (3926.3 + 4074.3) / 100 = 8000.6 / 100 = 80.006 u।
थॉमसन: इलेक्ट्रॉन धन गोले में जड़े हैं और परमाणु उदासीन है। सीमा: प्रकीर्णन नहीं समझाता। रदरफोर्ड: छोटा धन नाभिक और चक्कर काटते इलेक्ट्रॉन। सीमा: ऊर्जा खोकर इलेक्ट्रॉन गिरेगा। बोहर: केवल विविक्त कक्षाएँ, और उनमें ऊर्जा नहीं छूटती। यही रदरफोर्ड की कमी सुधारता है।
परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या है, कार्बन का 6। द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन + न्यूट्रॉन है, कार्बन का 12। समस्थानिक में क्रमांक समान और द्रव्यमान अलग होता है, जैसे Cl-35 और Cl-37। समभारिक में द्रव्यमान समान और क्रमांक अलग, जैसे Ar और Ca दोनों 40। उपयोग: यूरेनियम का समस्थानिक नाभिकीय ईंधन है, कोबाल्ट का समस्थानिक कैंसर के उपचार में है।
मान लो 18X का प्रतिशत x है। (16(100 − x) + 18x) / 100 = 16.2। 1600 + 2x = 1620, इसलिए x = 10। 18X 10% है और 16X 90%। क्लोरीन: (3×35 + 1×37)/4 = 142/4 = 35.5 u।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
12000 लौटने वाली गिनती है।
लगभग 1000 परमाणु।
संयोजकता 0।
2, 8, 8।
2।
4 − 2।
रगड़ने पर कंघी आवेशित होकर कागज खींचती है। आवेश परमाणु के भीतर के कणों से आता है, इसलिए परमाणु अविभाज्य नहीं है।
सोडियम 2, 8, 1 है। एक इलेक्ट्रॉन खोने पर 2, 8 बचता है। K में 2 और L में 8, दोनों भरे हैं। Cl− में विन्यास 2, 8, 8 होता है, इसलिए संयोजी इलेक्ट्रॉन 8 हैं।
अधिकतम 2n^2 है। बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं। भीतरी कोश पहले भरता है। कार्बन 2, 4। सोडियम 2, 8, 1। K और L पूरे हों तो इलेक्ट्रॉन 2 + 8 = 10। M का अधिकतम 2 × 3^2 = 18 है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
बाहरी नियम और 2n^2 अलग हैं।
क्षमता 18 है। आर्गन में M बाहरी है इसलिए 8 इलेक्ट्रॉन हैं।
1/12000।
लगभग एक लौटेगा। अधिकांश खाली जगह से सीधे निकलेंगे।
अभिकथन (A): Cl− में संयोजी इलेक्ट्रॉन 8 हैं।
कारण (R): क्लोरीन 2, 8, 7 एक इलेक्ट्रॉन पाकर 2, 8, 8 हो जाता है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है। कुल इलेक्ट्रॉन 18 हैं, पर संयोजी 8 हैं।
अभिकथन (A): टिंक्चर आयोडीन आयोडीन के समस्थानिक से बनता है।
कारण (R): आयोडीन का एक समस्थानिक घेंघा के उपचार में काम आता है।
A गलत है। R सही है। टिंक्चर साधारण घोल है।
आवेश शून्य होने से वह जोड़ा सिद्ध नहीं होता। न्यूट्रॉन अलग कण है। चैडविक ने इसे 1932 में पाया। द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर है और हाइड्रोजन को छोड़कर नाभिक में रहता है।
(16(100 − x) + 18x)/100 = 16.2 से x = 10। भारी समस्थानिक 10% है। क्लोरीन का 35.5 भी किसी एक परमाणु का द्रव्यमान नहीं, दो समस्थानिकों का औसत है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| प्रोटॉन | charge +1, mass about 1 u |
| इलेक्ट्रॉन | charge −1, mass about 1/2000 u |
| न्यूट्रॉन | charge 0, mass about 1 u, none in protium |
| कोश नियम | 2n^2, and at most 8 in the outer shell |
| क्लोरीन का औसत | 35.5 u from 35 and 37 in the ratio 3:1 |
| समभारिक जोड़ी | argon and calcium, both mass number 40 |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।