कली निकलती है।
यीस्ट मुकुलन करता है। अमीबा और लीश्मानिया द्विखंडन करते हैं। प्लाज्मोडियम बहुखंडन करता है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 7 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
How do Organisms Reproduce?
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 7.1 से 7.7, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. फूल के भागों वाले SVG में पुंकेसर, स्त्रीकेसर और अंडाशय पहचानो।
NCERT 2026-27 में यह अध्याय 7 है। बिहार की 16-अध्याय वाली पुरानी किताब में यह अध्याय 8 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Copying DNA and yeast — Activity 7.1 · NCERT 7.1 · क्रियाकलाप 7.1
जनन व्यक्ति को जीवित रखने के लिए जरूरी नहीं। वह जाति को आगे ले जाता है। शरीर का नक्शा DNA में है। नकल से दो DNA बनते हैं, और हर नकल के साथ कोशिका का नया सामान भी बनता है। तभी दोनों कोशिकाएँ जीवित रह सकती हैं।
कोई भी जैव-रासायनिक नकल पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होती। इसलिए संतति जनक जैसी होती है, पर हूबहू नहीं। जो विभिन्नता बहुत बिगाड़ दे, वह कोशिका मर जाती है। बचने वाली विभिन्नता आगे विकास का आधार है। निकेत बदल जाए तो यही थोड़ी विभिन्नता जाति को बचा सकती है।
लगभग 10 ग्राम चीनी 100 mL पानी में घोलो। इस घोल के 20 mL एक परखनली में लो और एक चुटकी यीस्ट डालो। मुँह पर रुई का डाट लगाओ और परखनली को गर्म स्थान पर रखो।
एक या दो घंटे बाद एक बूँद स्लाइड पर रखो, कवरस्लिप लगाओ और सूक्ष्मदर्शी से देखो। कई कोशिकाओं पर छोटी कली दिखती है। यही मुकुलन है। कली बढ़कर अलग हो जाती है।
प्रश्न: विभिन्नता व्यक्ति के लिए हमेशा फ़ायदेमंद क्यों नहीं, जाति के लिए क्यों हो सकती है?
उत्तर: एक जीव अपनी विभिन्नता के कारण उस निकेत में कमजोर भी हो सकता है। पर जनसंख्या में कुछ विभिन्न जीव बचे रहें तो निकेत बदलने पर जाति मिटती नहीं।
मुकुलन का उदाहरण यीस्ट है, अमीबा नहीं। अमीबा द्विखंडन करता है।
CBSE पूछता है कि केवल DNA बाहर धकेलने से काम क्यों नहीं चलता — बाहर गई नकल के पास जीवित रहने का सामान नहीं होता।
कली निकलती है।
यीस्ट मुकुलन करता है। अमीबा और लीश्मानिया द्विखंडन करते हैं। प्लाज्मोडियम बहुखंडन करता है।
गलत — नकल में थोड़ी विभिन्नता आ ही जाती है।
10 ग्राम चीनी 100 mL पानी में, फिर 20 mL में एक चुटकी यीस्ट।
अकेली नकल जीवित नहीं रहती।
नए कोशिकीय सामान के बिना बाहर गई DNA नकल जीवन-प्रक्रिया नहीं चला सकती।
कोशिका पर एक छोटी कली उभरी दिखेगी। वह बाद में बढ़कर जनक से अलग हो जाती है। यह दो बराबर टुकड़ों वाला द्विखंडन नहीं है।
Modes of one organism — Activity 7.2, bread mould · NCERT 7.2 · क्रियाकलाप 7.2
खंड 7.2 एक ही जीव से होने वाले जनन के तरीके बताता है। यीस्ट की कली पहला तरीका थी। दूसरा तरीका ब्रेड की फफूँद है। पुस्तक इसे क्रियाकलाप 7.2 कहती है।
राइजोपस के धागे कवकतंतु हैं। वे जनन अंग नहीं। डंडी पर छोटी गोल रचना बीजाणुधानी है। उसके अंदर बीजाणु होते हैं। मोटी दीवार उन्हें तब तक बचाती है जब तक वे गीली सतह पर नया राइजोपस न बना लें।
ब्रेड की एक फाँक गीली करो। उसे ठंडी, नम और अँधेरी जगह रखो। एक हफ्ते तक आवर्धक लेंस से सतह देखो और लिखो।
यीस्ट की वृद्धि कली से होती है, जो कोशिका पर निकलती है। फफूँद धागों और बीजाणुधानियों से फैलती है। दोनों में एक ही जीव नई पीढ़ी बनाता है, पर ढंग अलग है।
प्रश्न: बीजाणु से जनन जीव को क्या फ़ायदा देता है?
उत्तर: बीजाणु हल्के होते हैं और मोटी दीवार से बचे रहते हैं। वे हवा से दूर तक जा सकते हैं और अनुकूल गीली जगह मिलने पर नया जीव बनाते हैं।
कवकतंतु और बीजाणुधानी को एक मत लिखना। परीक्षा में यही अंतर पूछा जाता है।
CBSE पूछता है कि बीजाणु दीवार क्यों मोटी है — सूखे या प्रतिकूल समय तक बचाव, फिर गीली सतह पर अंकुरण।
डंडी पर गोल थैली।
बीजाणुधानी में बीजाणु होते हैं। कवकतंतु जनन भाग नहीं है।
गलत — फाँक गीली हो और जगह ठंडी, नम तथा अँधेरी हो।
बीजाणु बीजाणुधानी के अंदर होते हैं।
यीस्ट कोशिका पर कली निकालता है। राइजोपस धागे बनाता है और बीजाणुधानियों के बीजाणुओं से नया जीव बनता है।
Binary fission in Amoeba — Activity 7.3 · NCERT 7.2.1 · क्रियाकलाप 7.3
एककोशिकीय जीव में कोशिका का बँटना ही नया जीव बना देता है। अमीबा दो बराबर हिस्सों में बँटता है। बँटने का तल कोई भी हो सकता है।
लीश्मानिया (काला-आजार) के एक सिरे पर चाबुक-सा भाग होता है। इसलिए उसका द्विखंडन एक निश्चित दिशा में होता है। मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम एक साथ कई संतति कोशिकाओं में बँटता है। इसे बहुखंडन कहते हैं।
सूक्ष्मदर्शी पर अमीबा की एक स्थायी स्लाइड देखो। फिर द्विखंडन दिखाती दूसरी स्लाइड देखो। दोनों की तुलना करो।
पहली में एक अनियमित कोशिका दिखती है। दूसरी में केन्द्रक और कोशिका दो होने की राह पर होते हैं। तल चित्र में अलग-अलग दिशाओं में हो सकता है। यही अमीबा की पहचान है।
प्रश्न: द्विखंडन और बहुखंडन में एक अंतर लिखो।
उत्तर: द्विखंडन में एक कोशिका दो बराबर संतति बनाती है, जैसे अमीबा। बहुखंडन में एक साथ कई संतति बनती हैं, जैसे प्लाज्मोडियम।
अमीबा को बहुखंडन मत लिखना। बहुखंडन प्लाज्मोडियम का है।
CBSE लीश्मानिया का कारण पूछता है — चाबुक-सा सिरा दिशा तय कर देता है।
लीश्मानिया इससे अलग है।
अमीबा किसी भी तल में दो बराबर भागों में बँटता है।
सही — एक साथ कई संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
इसी कारण द्विखंडन एक निश्चित दिशा में होता है।
यह लीश्मानिया है।
चाबुक-से सिरे के कारण तल निश्चित रहता है।
गलत — एक स्लाइड साधारण अमीबा की हो और दूसरी बँटते अमीबा की। तुलना तभी बनती है।
पहली स्लाइड पूरा अमीबा दिखाती है। दूसरी द्विखंडन का चरण दिखाती है। दोनों की तुलना से पता चलता है कि एक कोशिका दो में बँट रही है।
Spirogyra and regeneration — Activity 7.4 · NCERT 7.2.2–7.2.4 · क्रियाकलाप 7.4
जटिल जीव की कोशिकाएँ ऊतक और अंग बनाती हैं, और अंग निश्चित जगह बैठते हैं। ऐसे शरीर को कोशा-दर-कोशा काटकर नया जीव नहीं बनाया जा सकता। स्पाइरोगाइरा का शरीर इतना सरल है कि टूटकर टुकड़े नए तंतु बन जाते हैं। इसे खंडन कहते हैं।
हाइड्रा और प्लेनेरिया का कटा टुकड़ा पूरा जीव बन सकता है। यह पुनरुद्भवन है। विशेष कोशिकाएँ बढ़ती हैं और विकास के क्रम में तरह-तरह की कोशिकाएँ बनती हैं। फिर भी यह जनन का आम तरीका नहीं, क्योंकि जीव सामान्यतः कटे बिना ही संतति बनाते हैं।
हाइड्रा जनन के लिए एक निश्चित जगह पर कोशिका विभाजन से कली निकालता है। कली छोटी हाइड्रा बनकर अलग हो जाती है। यह यीस्ट के मुकुलन जैसा विचार है, पर बहुकोशिकीय शरीर पर।
ऐसे तालाब या झील का पानी लो जो गहरा हरा हो और जिसमें धागे जैसे तंतु हों। एक-दो तंतु स्लाइड पर रखो। ग्लिसरीन की एक बूँद डालो, कवरस्लिप लगाओ और सूक्ष्मदर्शी से देखो।
स्पाइरोगाइरा में अलग-अलग ऊतक नहीं दिखते। इसलिए परिपक्व तंतु टूटकर नए जीव बन सकते हैं। जटिल जंतु में ऐसा नहीं हो सकता।
प्रश्न: जटिल जीव पुनरुद्भवन को जनन का मुख्य ढंग क्यों नहीं बनाते?
उत्तर: उनके अंग निश्चित जगह और निश्चित ऊतक माँगते हैं। शरीर के कटने पर हर टुकड़ा अपने आप पूरा क्रम नहीं चला पाता। जनन के लिए अलग जनन-कोशिकाएँ होती हैं।
खंडन और पुनरुद्भवन के उदाहरण अलग लिखो: स्पाइरोगाइरा, तथा हाइड्रा या प्लेनेरिया।
CBSE पूछता है कि अधिकांश जीव कटने पर निर्भर क्यों नहीं — क्योंकि कटना सामान्य घटना नहीं है।
तंतु टुकड़ों में टूटता है।
सरल तंतु टूटकर नए स्पाइरोगाइरा बनते हैं। यही खंडन है।
सही — यह पुनरुद्भवन है। विशेष कोशिकाएँ विकास का क्रम चलाती हैं।
फिर कवरस्लिप लगाकर सूक्ष्मदर्शी से देखा जाता है।
चित्र में एक उभार दिखता है।
एक जगह बार-बार विभाजन से कली बनती है और बाद में अलग हो जाती है।
पुनरुद्भवन में कटा टुकड़ा नया जीव बन सकता है, पर अधिकांश जीव जनन के लिए कटे जाने पर निर्भर नहीं करते। जनन उनका सामान्य ढंग नहीं है।
The eye of a potato — Activity 7.5 · NCERT 7.2.5 · क्रियाकलाप 7.5
कायिक प्रवर्धन में जड़, तना या पत्ती उपयुक्त हालात में नया पौधा बनाती है। दाब लगाना और कलम बाँधना गन्ना, गुलाब और अंगूर में चलता है। ऐसे पौधे बीज वाले पौधों से जल्दी फूल और फल दे सकते हैं।
केला, संतरा, गुलाब और चमेली बीज बनाने की क्षमता खो चुके हैं, फिर भी कायिक ढंग से उगाए जाते हैं। संतति जनक जैसी रहती है। ब्रायोफिलम की पत्ती के किनारे की कलियाँ मिट्टी पर गिरकर नया पौधा बनाती हैं।
आलू की सतह देखो। गड्ढे या आँख दिखती है क्या? आलू के टुकड़े ऐसे काटो कि कुछ में कलिका हो और कुछ में न हो। तश्तरी में गीली रुई बिछाओ और टुकड़े रखो। रुई सूखने मत दो।
कुछ दिन बाद हरे प्ररोह और जड़ें उन्हीं टुकड़ों से निकलती हैं जिनमें कलिका थी। बिना कलिका वाला टुकड़ा नया पौधा नहीं देता।
प्रश्न: कायिक प्रवर्धन के दो फ़ायदे लिखो।
उत्तर: पौधे जल्दी फूलते-फलते हैं। बीज न बना सकने वाले पौधे भी उगाए जा सकते हैं, और गुण जनक जैसे रहते हैं।
आलू का तना है, जड़ नहीं। आँख कलिका है।
CBSE तीन फ़ायदे एक साथ माँगता है: जल्दी फल, बीज के बिना उगाना, जनक जैसे गुण।
10-सेकंड रिवीजन
गड्ढा ही कलिका है।
कलिका वाला टुकड़ा प्ररोह और जड़ देता है।
सही — कलियाँ मिट्टी पर गिरकर उगती हैं।
केला, संतरा, गुलाब और चमेली कायिक प्रवर्धन से उगाए जाते हैं।
समय का फ़ायदा।
वे जल्दी फूल और फल दे सकते हैं और गुण जनक जैसे रहते हैं।
कलिका तभी प्ररोह और जड़ निकालती है जब टुकड़े को पानी मिलता रहे। सूखी रुई पर वृद्धि रुक जाती है।
Cuttings of a money-plant — Activity 7.6 · NCERT 7.2.5–7.2.6 · क्रियाकलाप 7.6
मनी-प्लांट के तने पर पत्ती निकलने की जगह गाँठ है। गाँठ पर कलिका होती है। दो पत्तों के बीच का खाली भाग नया पौधा नहीं बनाता।
ऊतक संवर्धन में वृद्धि शीर्ष से ऊतक या कोशिकाएँ निकालकर कृत्रिम माध्यम में रखी जाती हैं। वे तेजी से बँटकर कैलस बनाती हैं। फिर हॉर्मोन वाले माध्यम में छोटे पौधे बनते हैं, जिन्हें मिट्टी में लगाते हैं। रोगमुक्त पौधे एक ही जनक से कई बन सकते हैं। यह तरीका सजावटी पौधों में आम है।
मनी-प्लांट लो। कुछ टुकड़े ऐसे काटो कि हर टुकड़े में कम से कम एक पत्ती हो। कुछ टुकड़े दो पत्तों के बीच से काटो, जिनमें पत्ती न हो। सबके एक सिरे को पानी में डुबाओ और कुछ दिन देखो।
नई पत्तियाँ उन्हीं टुकड़ों पर आती हैं जिनमें पत्ती और उसकी गाँठ थी। बीच का खाली टुकड़ा नहीं बढ़ता। निष्कर्ष: कलिका गाँठ पर होती है।
प्रश्न: ऊतक संवर्धन का एक फ़ायदा लिखो।
उत्तर: एक जनक से कम जगह में कई पौधे मिलते हैं, और उन्हें रोगमुक्त रखा जा सकता है।
«दोनों टुकड़े उगेंगे» गलत है। खाली टुकड़ा उत्तर में जरूर काटो।
CBSE कैलस के बाद का चरण पूछता है — हॉर्मोन वाला माध्यम, फिर मिट्टी।
10-सेकंड रिवीजन
गाँठ कलिका रखती है।
पत्ती वाली गाँठ नया पौधा देती है। बीच का खाली टुकड़ा नहीं।
सही — पहले तेजी से विभाजन से कैलस बनता है, फिर हॉर्मोन वाला माध्यम विभेदन करता है।
कैलस फिर हॉर्मोन वाले माध्यम में छोटे पौधे बनाता है।
नई वृद्धि तभी होती है जब टुकड़े में पत्ती की गाँठ हो। दो गाँठों के बीच का भाग कलिका नहीं रखता, इसलिए नहीं बढ़ता।
The flower and a gram seed — Activity 7.7 · NCERT 7.3.2 · क्रियाकलाप 7.7
लैंगिक जनन दो जीवों की विभिन्नता जोड़ता है। अगर हर पीढ़ी में DNA दोगुना होता रहे तो नियंत्रण बिगड़ जाएगा। इसलिए जनन-कोशिकाएँ अर्धसूत्री विभाजन से आधा DNA लेकर बनती हैं। नर युग्मक चल सकता है। मादा युग्मक में भोजन भरा होता है।
फूल में बाह्यदल और दल सहायक भाग हैं। पुंकेसर नर भाग है और पराग बनाता है। स्त्रीकेसर मादा भाग है: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। अंडाशय में बीजांड और अंडाणु होते हैं। पपीता और तरबूज एकलिंगी हो सकते हैं। गुड़हल और सरसों द्विलिंगी हैं।
पराग का वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण है। उसी फूल में हो तो स्वपरागण, दूसरे फूल से आए तो परपरागण। हवा, पानी या जंतु पराग उठाते हैं। परागनली वर्तिका से अंडाशय तक जाती है। निषेचन से युग्मनज बनता है। बीजांड बीज बनता है और अंडाशय फल।
चने के कुछ बीज रात भर भिगोओ। पानी निकालो, गीले कपड़े से ढको और एक दिन रखो। बीज सूखने मत दो। फिर सावधानी से काटकर भाग पहचानो।
बीजपत्र भोजन रखते हैं। प्रांकुर भावी प्ररोह है। मूलांकुर भावी जड़ है और अंकुरण में पहले बाहर निकलता है। बीज भ्रूण को सूखे समय में बचाकर दूर ले जा सकता है।
प्रश्न: परागण के बाद निषेचन तक का छोटा क्रम लिखो।
उत्तर: पराग वर्तिकाग्र पर पड़ता है। परागनली वर्तिका से अंडाशय में बीजांड तक जाती है। नर युग्मक अंडाणु से जुड़कर युग्मनज बनाता है।
फल अंडाशय से बनता है, बीजांड से नहीं। बीजांड बीज बनता है।
CBSE एकलिंगी और द्विलिंगी के उदाहरण पूछता है: पपीता या तरबूज, तथा गुड़हल या सरसों।
10-सेकंड रिवीजन
पुंकेसर का ऊपरी भाग।
पुंकेसर का परागकोष पराग बनाता है।
सही — निषेचन के बाद यही बदलाव होता है।
प्रांकुर भावी प्ररोह है। मूलांकुर भावी जड़ है।
सरसों भी ऐसा ही है।
गुड़हल और सरसों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं।
गलत — वह स्वपरागण है। परपरागण दूसरे फूल का पराग लाता है।
बीजपत्र भोजन रखते हैं। प्रांकुर भावी प्ररोह है। मूलांकुर भावी जड़ है और अंकुरण में पहले बढ़ता है।
Human reproduction and contraception · NCERT 7.3.3 · जनन स्वास्थ्य
यौवन में जनन-ऊतक पकते हैं, जब शरीर की सामान्य वृद्धि धीमी पड़ने लगती है। लड़कों और लड़कियों दोनों में नए बाल, तैलीय त्वचा और मुँहासे हो सकते हैं। लड़कियों में स्तन का विकास और ऋतुस्राव शुरू होता है। लड़कों में दाढ़ी-मूँछ और आवाज में बदलाव आता है। ये परिवर्तन धीमे होते हैं और हर व्यक्ति में एक ही उम्र पर पूरे नहीं होते।
वृषण उदर के बाहर वृषण-कोश में होते हैं, क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए ताप शरीर से कम चाहिए। वृषण टेस्टोस्टेरोन भी बनाते हैं। शुक्राणु शुक्रवाहिनी से जाते हैं। प्रोस्टेट और शुक्राशय तरल मिलाते हैं, जो पोषण देता है और ले जाने में मदद करता है। मूत्रमार्ग शुक्राणु और मूत्र दोनों का साझा मार्ग है।
अंडाशय में अंडाणु बनते हैं। हर माह एक अंडाणु अंडवाहिनी में आता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है। युग्मनज बँटकर भ्रूण बनता है और गर्भाशय की दीवार में बैठता है। गर्भाशय योनि में ग्रीवा से खुलता है।
अपरा गर्भाशय की दीवार में धँसी एक तश्तरी है। भ्रूण की ओर अंकुर होते हैं और माँ की ओर रक्त-स्थान। ग्लूकोज और ऑक्सीजन माँ से भ्रूण को जाते हैं। भ्रूण का अपशिष्ट माँ के रक्त में चला जाता है। गर्भ लगभग नौ महीने रहता है।
अंडाणु निषेचित न हो तो वह लगभग एक दिन जीवित रहता है। गर्भाशय की मोटी परत अब जरूरत नहीं। वह रक्त और म्यूकस के रूप में योनि से निकलती है। यह ऋतुस्राव है और करीब हर माह होता है, प्रायः दो से आठ दिन।
गर्भ रोकने के ढंग: कंडोम जैसी यांत्रिक रोक शुक्राणु को अंडाणु तक नहीं पहुँचने देती और कई संक्रमणों का खतरा कुछ हद तक घटाती है। गोलियाँ हॉर्मोन संतुलन बदलकर अंडाणु नहीं निकलने देतीं, पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। लूप या कॉपर-टी गर्भाशय में रखकर गर्भ रोकती है, संक्रमण नहीं। शुक्रवाहिनी या अंडवाहिनी को शल्य से बंद करने पर निषेचन नहीं होता। शल्य ठीक से न हो तो संक्रमण हो सकता है। जन्म से पहले लिंग जाँच कर कन्या भ्रूण हटाना कानून रोकता है।
प्रश्न: एक स्त्री कॉपर-टी लगवाए है। क्या यह यौन संचारित रोग से बचाएगा? भ्रूण को पोषण कौन देता है?
उत्तर: कॉपर-टी गर्भ रोकने में मदद करती है, रोग के कीटाणु नहीं रोकती। भ्रूण को ग्लूकोज और ऑक्सीजन अपरा के बड़े तल से माँ के रक्त से मिलते हैं।
शुक्रवाहिनी नर तंत्र का भाग है। मादा तंत्र के विकल्प में उसे मत चुनना।
CBSE ऋतुस्राव का कारण पूछता है — निषेचन न होने पर मोटी परत टूटकर निकलती है। और कॉपर-टी रोग नहीं रोकती।
10-सेकंड रिवीजन
अंडाणु यहीं आता है।
निषेचन अंडवाहिनी में होता है। भ्रूण बाद में गर्भाशय में बैठता है।
गलत — वह गर्भाशय में गर्भ रोकने के लिए रखी जाती है। कीटाणु नहीं रोकती।
अपरा ग्लूकोज और ऑक्सीजन अंदर लाती है और अपशिष्ट बाहर ले जाती है।
यह शुक्राणु का मार्ग है।
शुक्रवाहिनी नर तंत्र में है।
कंडोम शुक्राणु को अंडाणु तक नहीं पहुँचने देता और कई संक्रमणों का खतरा कुछ हद तक घटाता है। गोलियाँ हॉर्मोन बदलकर अंडाणु रोकती हैं। कॉपर-टी गर्भाशय में गर्भ रोकती है, पर संक्रमण नहीं रोकती। शल्य से शुक्रवाहिनी या अंडवाहिनी बंद की जा सकती है।
प्रकार चुनो। पाठों के 40 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
कली निकलती है।
यीस्ट मुकुलन करता है।
नर का मार्ग।
शुक्रवाहिनी नर तंत्र में होती है।
पुंकेसर का भाग।
परागकोष परागकण बनाता है।
लीश्मानिया उलटा है।
अमीबा किसी भी तल में बँटता है।
अंडाणु यहीं पहुँचता है।
निषेचन अंडवाहिनी में होता है।
गर्भाशय में रखी जाती है।
कॉपर-टी गर्भ रोकती है। यौन संचारित रोग नहीं रोकती।
माँ का रक्त।
अपरा के बड़े तल से ऑक्सीजन और ग्लूकोज जाते हैं।
बीज नहीं बनते।
केला बीज नहीं बना पाता, इसलिए कायिक ढंग से उगाया जाता है।
तंतु टूटता है।
सरल तंतु के टुकड़े नए जीव बनते हैं।
बीज अलग भाग से बनता है।
अंडाशय फल बनता है और बीजांड बीज।
चाबुक-सा सिरा।
एक सिरे की रचना दिशा तय कर देती है।
क्रियाकलाप 7.7।
मूलांकुर भावी जड़ है। प्रांकुर भावी प्ररोह है।
ढकना।
कंडोम शुक्राणु रोकता है और कई संक्रमणों का खतरा कुछ हद तक घटाता है।
मोटी दीवार।
बीजाणु बीजाणुधानी में होते हैं। कवकतंतु जनन भाग नहीं।
गलत — श्वसन रुके तो जीव मरता है। जनन रुके तो वह जीव जीवित रह सकता है।
सही — बार-बार विभाजन से उभार बनता है और फिर अलग हो जाता है।
गलत — कलिका वाले टुकड़े ही हरे प्ररोह और जड़ देते हैं।
गलत — स्वपरागण उसी फूल में होता है। दूसरे फूल से परपरागण होता है।
सही — वे वृषण-कोश में होते हैं।
गलत — निषेचन न हो तो मोटी परत टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में निकलती है।
गलत — नई पत्ती गाँठ वाले टुकड़े पर आती है।
सही — ग्लूकोज और ऑक्सीजन अंदर आते हैं, अपशिष्ट बाहर जाता है।
बहुखंडन में कई संतति एक साथ बनती हैं।
एक साथ कई संतति।
राइजोपस के कवकतंतु और बीजाणुधानी बनते हैं।
धागे और बीजाणुधानी।
ग्लिसरीन की बूँद के बाद कवरस्लिप लगाई जाती है।
कवरस्लिप से पहले।
ब्रायोफिलम की कलियाँ मिट्टी पर गिरकर उगती हैं।
गड्ढों में कलियाँ।
कैलस हॉर्मोन वाले माध्यम में छोटे पौधे बनाता है।
फिर हॉर्मोन।
परागण पहुँचाना है। निषेचन युग्मकों का जुड़ना है।
जुड़ना दूसरा शब्द है।
मूत्रमार्ग दोनों का साझा मार्ग है।
नर तंत्र।
गर्भाशय ग्रीवा से योनि में खुलता है।
संकरा मुँह।
यीस्ट कली, अमीबा कोई भी तल, प्लाज्मोडियम कई संतति, स्पाइरोगाइरा टुकड़े।
पुंकेसर पराग, अंडाशय फल, मूलांकुर जड़, अपरा पोषण।
अभिकथन (A): कायिक प्रवर्धन केला और गुलाब उगाने में काम आता है।
कारण (R): ये पौधे बीज बनाने की क्षमता खो सकते हैं, फिर भी जनक जैसे गुण चाहिए।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): अमीबा किसी भी तल में द्विखंडन कर सकता है।
कारण (R): अमीबा के एक सिरे पर चाबुक-सा भाग दिशा तय करता है।
A सही है। R गलत — चाबुक-सा भाग लीश्मानिया का है, अमीबा का नहीं।
अभिकथन (A): परागण पराग को वर्तिकाग्र तक लाता है।
कारण (R): अपरा भ्रूण को ग्लूकोज और ऑक्सीजन देती है।
दोनों सही हैं, पर R फूल वाले वाक्य की व्याख्या नहीं है। एक पौधे की बात है, दूसरा मानव भ्रूण की।
अभिकथन (A): कॉपर-टी यौन संचारित रोग रोकती है।
कारण (R): कंडोम एक यांत्रिक रोक है और कई संक्रमणों का खतरा कुछ हद तक घटाती है।
A गलत है। R सही है। कॉपर-टी गर्भ रोकती है, कीटाणु नहीं।
इस अध्याय में कोई रासायनिक समीकरण नहीं है। नीचे के चारों प्रश्न केवल गुणांक अभ्यास हैं। इन्हें अध्याय का परिणाम मत समझना।
यीस्ट और हाइड्रा मुकुलन करते हैं। स्पाइरोगाइरा खंडन करता है। आलू की आँख कायिक प्रवर्धन है।
कंडोम यांत्रिक रोक है। गोली हॉर्मोन बदलती है। शुक्रवाहिनी शल्य से बंद होती है। कॉपर-टी गर्भाशय में रखी जाती है।
शरीर का नक्शा DNA में है। नकल के बिना संतति जनक जैसी बनावट नहीं पाती। नकल के साथ नया कोशिकीय सामान भी बनता है।
बीजाणुधानी। कवकतंतु धागे हैं, जनन अंग नहीं। बीजाणु अंदर होते हैं।
ये शुक्राणु के मार्ग में तरल मिलाते हैं। तरल पोषण देता है और शुक्राणु को ले जाने में मदद करता है।
पपीता या तरबूज एकलिंगी हो सकता है। गुड़हल या सरसों द्विलिंगी है, जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं।
अंडाणु निषेचित न हो तो गर्भाशय की मोटी, रक्त से भरी परत जरूरत नहीं रहती। वह टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में निकलती है।
द्विखंडन में एक कोशिका दो संतति बनाती है। अमीबा में तल कोई भी हो सकता है। लीश्मानिया में दिशा निश्चित होती है। बहुखंडन में एक साथ कई संतति बनती हैं, जैसे प्लाज्मोडियम।
आलू में वही टुकड़ा उगता है जिसमें आँख या कलिका हो। मनी-प्लांट में वही टुकड़ा नई पत्ती देता है जिसमें कम से कम एक पत्ती की गाँठ हो। खाली टुकड़ा नहीं बढ़ता।
परागण पराग को वर्तिकाग्र तक लाता है। निषेचन नर और मादा युग्मक का जुड़ना है, जिससे युग्मनज बनता है। बीजांड बीज बनता है और अंडाशय फल।
लड़कों में चेहरे पर नए बाल आते हैं और आवाज बदलती है। लड़कियों में स्तन विकसित होते हैं और ऋतुस्राव शुरू होता है। ये बदलाव हर व्यक्ति में एक ही दिन पूरे नहीं होते।
पुंकेसर पराग बनाता है। स्त्रीकेसर मादा भाग है, जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं। अंडाशय बीजांड रखता है। पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है। परागनली वर्तिका से बीजांड तक जाती है। निषेचन से युग्मनज और फिर भ्रूण बनता है। बीजांड बीज बनता है और अंडाशय फल। चने के बीज में मूलांकुर भावी जड़ होता है।
शुक्राणु वृषण में बनते हैं। वृषण उदर के बाहर होते हैं ताकि ताप कम रहे। शुक्रवाहिनी उन्हें आगे ले जाती है और प्रोस्टेट तथा शुक्राशय तरल मिलाते हैं। निषेचन अंडवाहिनी में होता है। भ्रूण गर्भाशय की दीवार में बैठता है। अपरा माँ के रक्त से ग्लूकोज और ऑक्सीजन लाती है तथा अपशिष्ट वापस भेजती है।
कंडोम यांत्रिक रोक है और कई संक्रमणों का खतरा कुछ हद तक घटाती है। गोलियाँ हॉर्मोन बदलकर अंडाणु रोकती हैं, दुष्प्रभाव हो सकते हैं, संक्रमण नहीं रोकतीं। कॉपर-टी गर्भाशय में गर्भ रोकती है, कीटाणु नहीं। शल्य से शुक्रवाहिनी या अंडवाहिनी बंद होने पर निषेचन नहीं होता, पर शल्य ठीक से न हो तो संक्रमण हो सकता है। जन्म से पहले लिंग जाँच कर कन्या भ्रूण हटाना कानून रोकता है, क्योंकि इससे लिंग अनुपात बिगड़ता है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
हरा तंतु।
स्पाइरोगाइरा खंडन करता है।
बाहर, कम ताप पर।
वृषण शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन दोनों बनाते हैं।
प्रांकुर भावी प्ररोह है। मूलांकुर भावी जड़ है।
जड़ दूसरा नाम है।
डाट परखनली का मुँह बंद रखता है, ताकि धूल कम जाए, पर हवा का थोड़ा आदान-प्रदान रुकता नहीं। यीस्ट गर्म स्थान पर चीनी के घोल में कली निकालता है।
दोनों में शरीर का एक भाग नया जीव बना सकता है। पुनरुद्भवन हाइड्रा या प्लेनेरिया जैसे जंतुओं में कटे टुकड़े से होता है और सामान्य जनन-ढंग नहीं है। कायिक प्रवर्धन पौधों का सामान्य ढंग है, जैसे आलू की आँख या ब्रायोफिलम की पत्ती।
अलैंगिक जनन एक ही जीव की नकल है, इसलिए विभिन्नता धीमी है। लैंगिक जनन दो जीवों की संचित विभिन्नता जोड़ता है। हर पीढ़ी में DNA दोगुना न हो, इसके लिए अर्धसूत्री विभाजन जनन-कोशिका में DNA आधा कर देता है। दो युग्मक जुड़कर फिर पूरी मात्रा लौटाते हैं।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र या past paper की प्रति नहीं हैं।
कलिका गाँठ में होती है।
आँख ही कलिका है। बिना कलिका वाला टुकड़ा नहीं उगता।
दो काम एक उपाय से।
कंडोम गर्भ और कई संक्रमण दोनों का खतरा घटाता है। कॉपर-टी संक्रमण नहीं रोकती।
अभिकथन (A): मनी-प्लांट का बीच का खाली टुकड़ा पानी में नई पत्ती नहीं देता।
कारण (R): कलिका गाँठ पर होती है, दो पत्तों के बीच के खाली भाग पर नहीं।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): बीजाणु मोटी दीवार के अंदर सुरक्षित रहते हैं।
कारण (R): कवकतंतु ही राइजोपस का जनन अंग है।
A सही है। R गलत — जनन बीजाणुधानी के बीजाणु करते हैं। कवकतंतु धागे हैं।
पहली अमीबा का द्विखंडन है, क्योंकि तल कोई भी हो सकता है और भाग दो हैं। दूसरी बहुखंडन है, जैसा प्लाज्मोडियम में होता है।
बीज बीजांड से बनता है और फल अंडाशय से। दल, बाह्यदल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र प्रायः सूखकर गिर जाते हैं, पर कोई भाग फल पर बचा रह सकता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| यीस्ट | budding |
| अमीबा | binary fission, any plane |
| राइजोपस | sporangium and spores |
| आलू की आँख | vegetative bud |
| निषेचन का स्थान | oviduct in humans; ovule in a flower |
| अपरा | glucose and oxygen in; waste out |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।