ये नाक में बैठे हैं।
घ्राण ग्राही गंध पकड़ते हैं। स्वाद ग्राही जिह्वा पर हैं।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 6 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Control and Coordination
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 6.1 से 6.4, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. प्रतिवर्ती चाप वाले SVG का क्रम नाम लो: ग्राही → संवेदी → मेरुरज्जु → प्रेरक → प्रभावक।
NCERT 2026-27 में यह अध्याय 6 है। बिहार की 16-अध्याय वाली पुरानी किताब में यह अध्याय 7 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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इस अध्याय का कोई Short अभी चैनल पर नहीं है, इसलिए दस खाली कार्ड नहीं दिखाए गए। नोट्स, चित्र और जाँच-प्रश्न पूरे हैं।
Taste, smell and the neuron — Activity 6.1 · NCERT 6.1 · क्रियाकलाप 6.1
पर्यावरण की खबर तंत्रिका कोशिकाओं के सिरों पर बैठे ग्राही लेते हैं। जिह्वा के स्वाद ग्राही स्वाद पकड़ते हैं। नाक के घ्राण ग्राही गंध पकड़ते हैं।
डेंड्राइट के सिरे पर रासायनिक क्रिया से विद्युत आवेग बनता है। वह कोशिका-काय से ऐक्सॉन तक जाता है। ऐक्सॉन के अंत में रसायन निकलते हैं, सिनेप्स पार करते हैं, और अगली कोशिका में नया आवेग जगाते हैं।
पहले मुँह में चीनी रखो। स्वाद मीठा लगता है। फिर अँगूठे और तर्जनी से नाक दबाकर चीनी फिर चखो। दोपहर के भोजन पर भी नाक बंद करके देखो कि स्वाद पूरा खुलता है या नहीं।
अक्सर स्वाद फीका पड़ जाता है। जुकाम में भी ऐसा होता है, क्योंकि गंध के ग्राही साथ नहीं दे रहे। चीनी का मीठापन जिह्वा पर रहता है, पर भोजन की पूरी पहचान नाक माँगती है।
प्रश्न: अगरबत्ती की गंध हम कैसे पकड़ते हैं?
उत्तर: नाक के घ्राण ग्राही गंध पकड़ते हैं। वहाँ से आवेग संवेदी तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क के अग्र भाग तक जाता है, जहाँ गंध का क्षेत्र है।
वस्तुनिष्ठ में सिनेप्स दो न्यूरॉन के बीच का खाली स्थान है, डेंड्राइट नहीं।
CBSE पूछता है कि सूचना कहाँ रासायनिक संकेत बनती है — ऐक्सॉन के अंत में, अगली कोशिका के लिए।
ये नाक में बैठे हैं।
घ्राण ग्राही गंध पकड़ते हैं। स्वाद ग्राही जिह्वा पर हैं।
सही — गंध स्वाद की पहचान में साथ देती है। जुकाम में भी ऐसा होता है।
सिनेप्स पर रसायन अगली कोशिका में आवेग जगाते हैं।
खबर डेंड्राइट के सिरे पर आती है।
आवेग डेंड्राइट से काय होते हुए ऐक्सॉन तक जाता है।
भोजन की पूरी पहचान स्वाद और गंध दोनों से बनती है। नाक बंद हो तो घ्राण ग्राही काम नहीं कर पाते, इसलिए स्वाद फीका लगता है।
The reflex arc · NCERT 6.1.1 · प्रतिवर्ती क्रिया
गर्म वस्तु छूना खतरनाक है। अगर हर बार मस्तिष्क सोचकर आदेश दे, तो जलन हो चुकी होगी। इसलिए संवेदी और प्रेरक तंत्रिकाएँ वहीं जुड़ती हैं जहाँ वे पहले मिलती हैं — मेरुरज्जु में।
इसी जोड़ को प्रतिवर्ती चाप कहते हैं। क्रम है: ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु की रिले तंत्रिका, प्रेरक तंत्रिका, प्रभावक। सूचना आगे मस्तिष्क तक भी जाती है, पर आदेश निकल चुका होता है।
प्रश्न: तेज रोशनी आँख पर पड़े तो पुतली सिकुड़ती है। यह चाप कहाँ बनता है, और मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
उत्तर: यह प्रतिवर्त है। इनपुट और आउटपुट मेरुरज्जु में जल्दी जुड़ जाते हैं। मस्तिष्क को सूचना मिलती है, पर सिकुड़ने का इंतज़ार वह नहीं करवाता।
बीच की रिले तंत्रिका का नाम लिखो। केवल «मेरुरज्जु» लिखकर क्रम अधूरा मत छोड़ना।
CBSE पूछता है कि मस्तिष्क प्रतिवर्त में बेकार नहीं है — उसे खबर मिलती है, पर फैसला तेज उत्तर के लिए मेरुरज्जु करता है।
नसें यहाँ एक बंडल में मिलती हैं।
प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में बनता है।
गलत — सूचना मस्तिष्क तक भी जाती है। तेज आदेश मेरुरज्जु से निकलता है।
प्रभावक वह अंग है जो उत्तर देता है। इस उदाहरण में वह पेशी है।
प्रतिवर्त बिना सोचे मेरुरज्जु से होता है, जैसे लौ से हाथ हटना। कुर्सी खिसकाना ऐच्छिक है और मस्तिष्क के निर्णय से होता है।
Parts of the brain and how they are protected · NCERT 6.1.2–6.1.4
मस्तिष्क और मेरुरज्जु मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र हैं। खोपड़ी से निकलने वाली कपालीय नसें और मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु नसें परिधीय तंत्रिका तंत्र बनाती हैं।
अग्रमस्तिष्क सोचता है। सुनने, सूँघने और देखने के अलग क्षेत्र हैं, और भूख का केंद्र भी यहीं जुड़ा है। ऐच्छिक पेशियाँ, जैसे टाँग, प्रेरक क्षेत्र से आदेश पाती हैं।
अनुमस्तिष्क पश्चमस्तिष्क में है। वह ऐच्छिक गति को सटीक रखता है और मुद्रा तथा संतुलन सँभालता है। मेडुला रक्तचाप, लार और वमन जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ देखता है। मध्य और पश्च मस्तिष्क कई अनैच्छिक गतियाँ सँभालते हैं।
| भाग | कहाँ | मुख्य काम |
|---|---|---|
| अग्रमस्तिष्क | खोपड़ी का अगला भाग | सोच, ज्ञानेंद्रिय, ऐच्छिक गति |
| अनुमस्तिष्क | पश्चमस्तिष्क | मुद्रा, संतुलन, सटीकता |
| मेडुला | पश्चमस्तिष्क | रक्तचाप, लार, वमन |
मस्तिष्क हड्डी के बॉक्स में है। उसके चारों ओर तरल से भरा आवरण झटके सोखता है। मेरुरज्जु को कशेरुक दंड बचाता है — पीठ के बीच की सख्त ऊबड़ रचना।
आदेश के बाद पेशी कोशिका विशेष प्रोटीन के आकार और जमाव को बदलकर छोटी हो जाती है। ऐच्छिक पेशी सोच के आदेश से चलती है। अनैच्छिक पेशी मेडुला जैसे केंद्रों से चलती है।
प्रश्न: साइकिल पर संतुलन और अचानक मुँह में पानी आना — दोनों एक ही भाग करते हैं क्या?
उत्तर: नहीं। संतुलन अनुमस्तिष्क करता है। बिना सोचे लार आना अनैच्छिक है और मेडुला के अधीन है।
घेघा या इंसुलिन इस पाठ में मत घुसेड़ना। यहाँ प्रश्न भाग का नाम माँगता है।
CBSE तीनों को एक साथ पूछता है: सोचना, धड़कन का नियम, संतुलन — तीनों मस्तिष्क के अलग भाग हैं, इसलिए «सभी» सही विकल्प बनता है।
पश्चमस्तिष्क का एक भाग, मेडुला नहीं।
अनुमस्तिष्क मुद्रा और संतुलन रखता है।
सही — रक्तचाप, लार और वमन मेडुला के अनैच्छिक काम हैं।
हड्डी के बॉक्स के अंदर।
मस्तिष्क हड्डी के बॉक्स में है और तरल झटका सोखता है।
सीधी रेखा में चलना और पेंसिल उठाना अनुमस्तिष्क की सटीकता से होता है।
गलत — कपालीय नसें मस्तिष्क से निकलती हैं। मेरु नसें मेरुरज्जु से।
प्रतिवर्ती चाप टूट सकते हैं। शरीर से मस्तिष्क तक जाने वाली खबर और मस्तिष्क से पेशियों तक आने वाले आदेश दोनों रुक सकते हैं।
Two kinds of movement in plants · NCERT 6.2 · छुई-मुई और प्रतान
छुई-मुई का पत्ता छूते ही मुड़कर झुक जाता है। इस गति में वृद्धि नहीं होती। छुअन एक जगह होती है और गति दूसरी जगह। सूचना कोशिका से कोशिका तक विद्युत-रासायनिक ढंग से जाती है, पर जंतु जैसी अलग चालक ऊतक नहीं है।
पत्ते की कोशिकाएँ पानी की मात्रा बदलकर फूलती या सिकुड़ती हैं। जंतु पेशी में विशेष प्रोटीन आकार बदलता है। यहाँ पानी आकार बदलता है।
मटर का प्रतान छूने पर सहारे के चारों ओर लिपटता है। सहारे से लगी ओर की वृद्धि धीमी रहती है और दूर वाली ओर तेज। यह गति वृद्धि से होती है। वृद्धि रोक दो तो यह मुड़ना रुक जाता है।
प्रश्न: छुई-मुई के पत्ते और प्रकाश की ओर झुकते प्ररोह में एक अंतर लिखो।
उत्तर: पत्ते की गति तुरंत होती है और पानी के घटने-बढ़ने से होती है, वृद्धि से नहीं। प्ररोह की गति धीमी है और कोशिकाओं के लंबा होने से होती है।
«तुरंत» और «वृद्धि से» ये दो शब्द उत्तर में अलग-अलग वाक्य में लिखो।
CBSE टाँग की गति से तुलना पूछता है — टाँग में तंत्रिका और प्रोटीन हैं, पत्ते में पानी का बदलना है।
इस गति में वृद्धि नहीं है।
पानी घटने-बढ़ने से कोशिका फूलती या सिकुड़ती है।
सही — सहारे से दूर वाली ओर कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं।
पौधे में जंतु जैसा तंत्रिका तंत्र नहीं है।
दूर वाली ओर तेज वृद्धि।
धीमी और तेज वृद्धि का अंतर प्रतान को घुमा देता है।
सूचना छुए हुए बिंदु से उस बिंदु तक जाती है जो हिलता है। पौधे यह खबर विद्युत-रासायनिक ढंग से भेजते हैं, बिना किसी अलग तंत्रिका ऊतक के।
Seedlings, direction and carbon dioxide — Activity 6.2 · NCERT 6.2.2 · क्रियाकलाप 6.2
अंकुरित बीज साँस में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। पिछला अध्याय उसे चूने के पानी से दूधिया करके दिखाता है। क्रियाकलाप 6.2 वह जाँच नहीं है। यहाँ बीज इसलिए हैं कि उनकी नई वृद्धि किस दिशा में होती है।
प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है और जड़ प्रकाश से दूर। इसे प्रकाशानुवर्तन कहते हैं। गुरुत्व से जड़ नीचे और प्ररोह ऊपर बढ़ते हैं — गुरुत्वानुवर्तन। जल की ओर वृद्धि जलानुवर्तन है। रसायन की ओर वृद्धि रसायनानुवर्तन है, जैसे परागनली का बीजांड की ओर बढ़ना।
शंक्वाकार फ्लास्क में पानी भरो। मुँह पर जाली रखो। दो-तीन ताजे अंकुरित सेम के बीज जाली पर रखो। फ्लास्क को ऐसे गत्ते के डिब्बे में रखो जो एक ओर से खुला हो और खुली ओर खिड़की की रोशनी आए।
दो-तीन दिन बाद प्ररोह प्रकाश की ओर और जड़ें प्रकाश से दूर मुड़ जाती हैं। अब फ्लास्क घुमाओ, ताकि पुराना प्ररोह प्रकाश से दूर हो जाए। कुछ दिन बाद पुराना भाग दिशा नहीं बदलता। नई वृद्धि नई दिशा पकड़ती है।
प्रश्न: फ्लास्क के पानी को चूने का पानी समझकर छात्र लिखता है कि क्रियाकलाप 6.2 कार्बन डाइऑक्साइड सिद्ध करता है। गलती क्या है?
उत्तर: फ्लास्क का पानी बीज को गीला रखता है। निष्कर्ष दिशा का है: नई वृद्धि प्रकाश की ओर या उससे दूर। दूधिया चूने का पानी श्वसन वाले प्रयोग की बात है।
घुमाने के बाद का प्रश्न अक्सर आता है। उत्तर «नई वृद्धि» है, «पूरा तना घूम गया» नहीं।
CBSE जलानुवर्तन का प्रयोग पूछे तो अंकुरित बीज को छलनी में लटकाओ और नीचे गीला रुई या पानी रखो। जड़ पानी की ओर झुकती है।
10-सेकंड रिवीजन
फ्लास्क घुमाने के बाद क्या बदलता है।
पुराना भाग अपनी जगह रहता है। नई वृद्धि प्रकाश की ओर या उससे दूर होती है।
गलत — जड़ें प्रकाश से दूर मुड़ती हैं। प्ररोह प्रकाश की ओर।
प्ररोह ऊपर और जड़ नीचे — यह गुरुत्वानुवर्तन है।
रसायन की ओर वृद्धि।
यह रसायनानुवर्तन है।
प्ररोह प्रकाश की ओर झुककर पत्तियों को रोशनी दिलाता है, और जड़ प्रकाश से दूर रहकर मिट्टी में जाती है।
Plant hormones — growth and a stop · NCERT 6.2 · ऑक्सिन से एब्सिसिक अम्ल
विद्युत आवेग केवल उन्हीं कोशिकाओं तक पहुँचता है जो तंत्रिका से जुड़ी हों, और एक आवेग के बाद कोशिका को फिर से तैयार होने में समय लगता है। इसलिए बहुकोशिकीय शरीर दूसरा रास्ता भी रखते हैं: रासायनिक संदेश।
पादप हॉर्मोन बनने की जगह से दूर काम करते हैं और विसरण से पहुँचते हैं। ऑक्सिन प्ररोह के सिरे पर बनता है। एक ओर से रोशनी आए तो वह छाया वाली ओर चला जाता है और उन कोशिकाओं को लंबा करता है। प्ररोह प्रकाश की ओर झुकता दिखता है।
जिबरेलिन भी तने की वृद्धि में मदद करते हैं। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन बढ़ाते हैं, इसलिए फल और बीज में अधिक होते हैं। एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोकता है। उसके प्रभाव में पत्तियाँ मुरझाती हैं।
उसी फ्लास्क वाले प्रयोग में प्ररोह इसलिए प्रकाश की ओर मुड़ा क्योंकि सिरे पर बना ऑक्सिन छाया वाली ओर अधिक जमा हुआ। नई वृद्धि वहीं लंबी हुई। पुराना भाग नहीं झुका, क्योंकि वह वृद्धि पहले ही पूरी कर चुका था।
| हॉर्मोन | काम |
|---|---|
| ऑक्सिन | कोशिकाएँ लंबी; प्ररोह प्रकाश की ओर |
| जिबरेलिन | तने की वृद्धि |
| साइटोकाइनिन | कोशिका विभाजन; फल और बीज |
| एब्सिसिक अम्ल | वृद्धि रोकता है; पत्तियाँ मुरझाती हैं |
प्रश्न: प्रतान को लपेटने में ऑक्सिन कैसे मदद करता है?
उत्तर: सहारे से दूर वाली ओर ऑक्सिन कोशिकाएँ अधिक लंबी कर देता है। लगी हुई ओर वृद्धि कम रहती है, इसलिए प्रतान सहारे के गिर्द घूम जाता है।
साइटोकाइनिन को «तने की लंबाई» मत लिखना। विभाजन उसका शब्द है।
CBSE चारों में से वृद्धि रोकने वाला अलग पूछता है। एब्सिसिक अम्ल अकेला अवरोधक है।
10-सेकंड रिवीजन
सिरे पर बनता है।
ऑक्सिन छाया वाली कोशिकाओं को लंबा करता है।
सही — फल और बीज जैसे तेज विभाजन वाले भागों में यह अधिक होता है।
एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोकता है और पत्तियाँ मुरझा सकती हैं।
दोनों वृद्धि बढ़ाने वाले हैं।
जिबरेलिन तने की वृद्धि में मदद करते हैं।
गलत — वह छाया वाली ओर अधिक होता है। लंबी कोशिकाएँ छाया में होती हैं, इसलिए मुड़ाव प्रकाश की ओर दिखता है।
ये रासायनिक संदेश हैं जो एक जगह बनकर दूसरी जगह वृद्धि और पर्यावरण के उत्तर को जोड़ते हैं। ऑक्सिन छाया वाली ओर कोशिकाओं को लंबा करके प्ररोह को प्रकाश की ओर मोड़ता है।
Animal hormones — Activities 6.3 and 6.4 · NCERT 6.3 · सारणी 6.1
डरावनी स्थिति में शरीर को लड़ने या भागने, दोनों के लिए तैयार होना पड़ता है। केवल तंत्रिका से हर ऊतक तक खबर नहीं पहुँचती। एड्रिनलिन अधिवृक्क ग्रंथि से सीधे रक्त में जाता है। हृदय तेज होता है, कंकाल पेशियों को अधिक ऑक्सीजन मिलती है, पाचन और त्वचा की ओर रक्त घटता है, साँस बढ़ती है।
हॉर्मोन की मात्रा और समय पुनर्भरण से नियंत्रित होते हैं। रक्त शर्करा बढ़े तो अग्न्याशय अधिक इंसुलिन बनाता है। शर्करा गिरे तो स्राव घटता है। वृद्धि हॉर्मोन कम हो तो हाइपोथैलेमस मोचक कारक छोड़ता है और पीयूष ग्रंथि वृद्धि हॉर्मोन निकालती है।
अंतःस्रावी ग्रंथियों के चित्र में पीयूष, थायरॉइड, अधिवृक्क, अग्न्याशय, वृषण और अंडाशय पहचानो। जो ग्रंथि सारणी में नहीं आई, उसे शिक्षक या पुस्तक से पूछो। हाइपोथैलेमस पीयूष को कई हॉर्मोन छोड़ने के लिए उकसाता है।
खाली स्थान हॉर्मोन, ग्रंथि या काम में से कोई एक होता है। थायरॉइड वाली पंक्ति का हॉर्मोन थायरॉक्सिन है। इंसुलिन की ग्रंथि अग्न्याशय है। वृषण का काम पुरुष के यौवन के लक्षण और शुक्राणु बनना है। अंडाशय का हॉर्मोन एस्ट्रोजन है। एड्रिनलिन शरीर को आपात स्थिति के लिए तैयार करता है। मोचक हॉर्मोन हाइपोथैलेमस छोड़ता है।
आयोडीन थायरॉक्सिन बनाने के लिए जरूरी है। भोजन में कमी हो तो घेघा हो सकता है — गर्दन सूजती है, क्योंकि थायरॉइड वहीं है। बचपन में वृद्धि हॉर्मोन कम हो तो बौनापन हो सकता है। यौवन के आसपास लड़कों में टेस्टोस्टेरोन और लड़कियों में एस्ट्रोजन शरीर के रूप को बदलते हैं।
| हॉर्मोन | ग्रंथि | काम |
|---|---|---|
| वृद्धि हॉर्मोन | पीयूष | अंगों की वृद्धि |
| थायरॉक्सिन | थायरॉइड | उपापचय और वृद्धि; आयोडीन चाहिए |
| इंसुलिन | अग्न्याशय | रक्त शर्करा घटाता है |
| टेस्टोस्टेरोन | वृषण | पुरुष के यौवन के लक्षण |
| एस्ट्रोजन | अंडाशय | स्त्री अंग और ऋतुचक्र |
| एड्रिनलिन | अधिवृक्क | आपात तैयारी |
प्रश्न: मधुमेह के कुछ रोगियों को इंसुलिन का इंजेक्शन क्यों दिया जाता है?
उत्तर: अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना रहा होता। रक्त में शर्करा बढ़ जाती है। इंजेक्शन वाला इंसुलिन उस शर्करा को कोशिकाओं के उपयोग के लायक घटाता है।
सारणी की खाली पंक्ति रट लो: थायरॉक्सिन, अग्न्याशय, एस्ट्रोजन।
CBSE आयोडीन और घेघे को कारण सहित पूछता है। केवल «नमक अच्छा है» मत लिखना। थायरॉक्सिन और गर्दन की सूजन दोनों लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
रक्त शर्करा इसी से जुड़ी है।
अग्न्याशय इंसुलिन बनाता है।
गलत — इस अध्याय में कॉपर-टी नहीं है। इंसुलिन, थायरॉक्सिन और एड्रिनलिन हॉर्मोन हैं।
घेघे में गर्दन सूजती है, क्योंकि थायरॉइड पर्याप्त थायरॉक्सिन नहीं बना पाती।
यह पुनर्भरण है।
अधिक इंसुलिन शर्करा गिराता है। शर्करा गिरे तो स्राव घटता है।
सही — यह हॉर्मोन पीयूष ग्रंथि छोड़ती है।
हृदय तेज धड़कता है। छोटी धमनियों के सिकुड़ने से पाचन और त्वचा का रक्त कंकाल पेशियों की ओर मुड़ जाता है, इसलिए पेशियों को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। डायाफ्राम और पसलियों की पेशियाँ साँस तेज कर देती हैं।
प्रकार चुनो। पाठों के 37 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
रसायन इसी खाली जगह को पार करते हैं।
सिनेप्स दो न्यूरॉन के बीच का स्थान है।
बाकी तीन जंतु हॉर्मोन हैं।
साइटोकाइनिन पादप हॉर्मोन है और विभाजन बढ़ाता है।
अलग-अलग भाग अलग काम करते हैं।
सोच अग्रमस्तिष्क, अनैच्छिक धड़कन मेडुला, संतुलन अनुमस्तिष्क।
थायरॉक्सिन इसी से बनता है।
आयोडीन के बिना थायरॉक्सिन नहीं बनता और घेघा हो सकता है।
प्रकाश शब्द इसी में है।
प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना प्रकाशानुवर्तन है।
अग्न्याशय।
इंसुलिन अग्न्याशय से निकलकर रक्त शर्करा घटाता है।
इसमें निर्णय होता है।
कुर्सी खिसकाना सोचकर किया जाता है। वमन और पुतली प्रतिवर्त या अनैच्छिक हैं।
रोकने वाला हॉर्मोन।
एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोकता है और पत्तियाँ मुरझा सकती हैं।
लड़कों के यौवन से जुड़ा है।
वृषण टेस्टोस्टेरोन बनाते हैं।
पानी घटता-बढ़ता है।
पत्ते की गति पानी से होती है, वृद्धि से नहीं। प्ररोह की गति वृद्धि से होती है।
हाइपोथैलेमस से आते हैं।
मोचक हॉर्मोन पीयूष को हॉर्मोन छोड़ने के लिए उकसाते हैं।
पृथ्वी का खिंचाव।
जड़ का नीचे बढ़ना गुरुत्वानुवर्तन है।
कक्षा 9 की पेशी याद करो।
विशेष प्रोटीन अपना आकार और जमाव बदलते हैं, इसलिए कोशिका छोटी हो जाती है।
लंबी कोशिकाएँ उसी ओर बनती हैं।
ऑक्सिन छाया वाली ओर जाता है और वे कोशिकाएँ लंबी होती हैं।
गलत — न तंत्रिका ऊतक है न पेशी। संदेश विद्युत-रासायनिक और हॉर्मोन से जाता है।
सही — संवेदी और प्रेरक यहीं जल्दी जुड़ते हैं।
गलत — वमन मेडुला देखता है। अनुमस्तिष्क संतुलन रखता है।
सही — अधिवृक्क ग्रंथि से, ताकि कई ऊतक एक साथ तैयार हों।
गलत — तेज विभाजन वाले इन्हीं भागों में यह अधिक होता है।
सही — यही पुनर्भरण है।
गलत — पानी बीज को गीला रखता है। निष्कर्ष नई वृद्धि की दिशा है। दूधिया चूना श्वसन वाले प्रयोग का है।
सही — वह कारक पीयूष को वृद्धि हॉर्मोन छोड़ने के लिए उकसाता है।
घ्राण ग्राही गंध पकड़ते हैं।
नाक में।
खोपड़ी हड्डी का बॉक्स है।
कड़ी रक्षा।
जिबरेलिन तने की वृद्धि में मदद करते हैं।
दोनों वृद्धि बढ़ाते हैं।
इंसुलिन की कमी से रक्त शर्करा बढ़ती है।
अग्न्याशय।
एस्ट्रोजन अंडाशय से निकलता है।
अंडाशय।
कशेरुक दंड मेरुरज्जु की रक्षा करता है।
पीठ के बीच की ऊबड़ हड्डी।
जलानुवर्तन जल की ओर दिशात्मक वृद्धि है।
hydro का अर्थ जल।
एड्रिनलिन अधिवृक्क से रक्त में जाता है।
हृदय तेज करता है।
संतुलन अनुमस्तिष्क, वमन मेडुला, सोच अग्रमस्तिष्क, चाप मेरुरज्जु।
थायरॉक्सिन थायरॉइड, इंसुलिन अग्न्याशय, एड्रिनलिन अधिवृक्क, वृद्धि हॉर्मोन पीयूष।
अभिकथन (A): आयोडीन युक्त नमक उचित है।
कारण (R): थायरॉइड थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन माँगती है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। कमी से घेघा हो सकता है।
अभिकथन (A): अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन रखता है।
कारण (R): वमन और संतुलन दोनों मेडुला के काम हैं।
A सही है। R गलत — वमन मेडुला का है, संतुलन अनुमस्तिष्क का।
अभिकथन (A): ऑक्सिन प्ररोह के सिरे पर बनता है।
कारण (R): साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन बढ़ाता है।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है। दोनों अलग हॉर्मोन हैं।
अभिकथन (A): प्ररोह प्रकाश से दूर मुड़ता है।
कारण (R): ऑक्सिन छाया वाली ओर कोशिकाओं को लंबा करता है।
A गलत है — प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है। R सही है, और इसी कारण मुड़ाव प्रकाश की ओर दिखता है।
इस अध्याय में कोई रासायनिक समीकरण नहीं है। नीचे के चारों प्रश्न केवल गुणांक अभ्यास हैं। इन्हें अध्याय का परिणाम मत समझना।
ऑक्सिन और एब्सिसिक अम्ल पौधे के हैं। इंसुलिन जंतु का है। सिनेप्स तंत्रिका का जोड़ है।
हाथ का हटना प्रतिवर्त है। कुर्सी ऐच्छिक है। प्ररोह वृद्धि से मुड़ता है। छुई-मुई पानी बदलकर हिलती है, वृद्धि से नहीं।
ऐक्सॉन के अंत से रसायन निकलते हैं, खाली स्थान पार करते हैं और अगले न्यूरॉन में विद्युत आवेग जगाते हैं।
जिह्वा पर। गंध के घ्राण ग्राही नाक में होते हैं।
सूचना मस्तिष्क तक पहुँचती है, पर तेज उत्तर मेरुरज्जु के चाप से निकल चुका होता है। मस्तिष्क सोचकर देर नहीं करता।
ऑक्सिन और जिबरेलिन। साइटोकाइनिन भी विभाजन बढ़ाता है। एब्सिसिक अम्ल रोकता है।
आयोडीन थायरॉक्सिन के लिए चाहिए। थायरॉक्सिन उपापचय को वृद्धि के अनुकूल रखता है। कमी से घेघा हो सकता है।
तंत्रिका विद्युत आवेग भेजती है और तेज है, पर केवल जुड़ी कोशिकाओं तक। हॉर्मोन धीमे हैं, रक्त या विसरण से दूर तक जाते हैं और लगातार काम कर सकते हैं।
पुराना प्ररोह अपनी पुरानी दिशा में रहता है। नई वृद्धि प्रकाश की ओर मुड़ती है और नई जड़ प्रकाश से दूर। चूने का पानी दूधिया करना श्वसन का प्रयोग है। इस फ्लास्क का पानी केवल नमी है।
हृदय तेज धड़कता है, कंकाल पेशियों को अधिक रक्त मिलता है, और साँस तेज हो जाती है। पाचन की ओर रक्त घट जाता है।
प्रतिवर्त किसी बाहरी बदलाव का तेज उत्तर है, जैसे लौ से हाथ हटना, और चाप मेरुरज्जु में है। अनैच्छिक क्रिया बिना हमारे आदेश के चलती रहती है, जैसे मेडुला के अधीन वमन या हृदय की धड़कन।
ऑक्सिन प्ररोह के सिरे पर बनता है। एक ओर से प्रकाश आए तो वह छाया वाली ओर अधिक होता है और वहाँ की कोशिकाएँ लंबी हो जाती हैं, इसलिए प्ररोह प्रकाश की ओर झुकता है। जड़ें प्रकाश से दूर मुड़ती हैं। फ्लास्क घुमाने पर पुराना भाग नहीं मुड़ता, नई वृद्धि नई दिशा लेती है। यह चूने के पानी वाली कार्बन डाइऑक्साइड की जाँच नहीं है।
थायरॉक्सिन थायरॉइड से बनता है और उपापचय को वृद्धि के लिए संतुलित रखता है। आयोडीन चाहिए। कमी से घेघा होता है। इंसुलिन अग्न्याशय से बनता है और रक्त शर्करा घटाता है। शर्करा बढ़े तो इंसुलिन बढ़ता है, गिरे तो स्राव घटता है। एड्रिनलिन अधिवृक्क से रक्त में जाकर हृदय, पेशी की ऑक्सीजन और साँस को आपात स्थिति के लिए तैयार करता है।
क्रम है ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु में रिले, प्रेरक तंत्रिका, प्रभावक पेशी। चाप मेरुरज्जु में इसलिए है कि जलन से पहले हाथ हट जाए। सोचने में कई आवेग लगते और देर होती। सूचना मस्तिष्क तक इसलिए जाती है कि बाद में हमें पता चले और हम स्थिति समझ सकें। तेज बचाव उसका इंतज़ार नहीं करता।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
मेडुला।
वमन मेडुला के अधीन अनैच्छिक है।
जहाँ विभाजन तेज हो।
फल और बीज में कोशिका विभाजन तेज होता है।
अनुमस्तिष्क मुद्रा और संतुलन रखता है।
पश्चमस्तिष्क।
जुकाम में नाक बंद होती है और घ्राण ग्राही साथ नहीं दे पाते। इसलिए भोजन का स्वाद वैसे ही फीका पड़ता है जैसे नाक दबाकर खाने पर।
टाँग में तंत्रिका आवेग और पेशी का प्रोटीन है। छुई-मुई में अलग तंत्रिका ऊतक नहीं है। पत्ते की कोशिका पानी बदलकर आकार बदलती है। टाँग की गति वृद्धि नहीं है, और पत्ते की गति भी वृद्धि नहीं है, पर तरीका अलग है।
गर्म वस्तु पर हाथ तुरंत हटना चाहिए, नहीं तो जलन होगी। प्रतिवर्ती चाप यह तेज काम करता है। डर में पूरे शरीर को तैयार करना है, जो केवल जुड़ी हुई नसों से नहीं हो पाता। एड्रिनलिन रक्त के साथ कई अंगों तक पहुँचता है। तंत्रिका तेज और सीमित है। हॉर्मोन धीमा और व्यापक है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र या past paper की प्रति नहीं हैं।
पुरानी वृद्धि पूरी हो चुकी है।
नई वृद्धि दिशा बदलती है। पानी का दूधिया होना इस प्रयोग का निष्कर्ष नहीं है।
ग्रंथि गर्दन में है।
आयोडीन के बिना थायरॉक्सिन नहीं बनता। थायरॉइड फूलकर घेघा दिखाती है।
अभिकथन (A): मधुमेह के कुछ रोगियों को इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है।
कारण (R): पर्याप्त इंसुलिन न हो तो रक्त शर्करा बढ़कर हानि करती है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): छुई-मुई का पत्ता छूते ही झुक जाता है।
कारण (R): इस गति के लिए पत्तियों की कोशिकाएँ विभाजित होकर लंबी होती हैं।
A सही है। R गलत — इस गति में वृद्धि नहीं होती। पानी की मात्रा बदलती है।
संतुलन और मुद्रा अनुमस्तिष्क रखता है। वमन, लार और रक्तचाप मेडुला रखते हैं। छात्र ने दोनों नाम उलट दिए हैं।
शर्करा बढ़ते ही अग्न्याशय की कोशिकाएँ अधिक इंसुलिन बनाती हैं। शर्करा गिरने पर स्राव घट जाता है। परिणाम खुद कारण को घटाता है, इसलिए इसे पुनर्भरण कहते हैं।
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इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| आवेग का रास्ता | dendrite → cell body → axon → synapse |
| प्रतिवर्ती चाप | receptor → sensory → spinal cord → motor → effector |
| संतुलन | cerebellum |
| वमन, लार, रक्तचाप | medulla |
| प्रकाशानुवर्तन | shoot toward light; root away |
| इंसुलिन | pancreas · blood sugar falls |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।