अलैंगिक या कायिक जनन।
कायिक वृद्धि में नकल लगभग वैसी की तैसी रहती है, इसलिए फ़र्क बहुत छोटा होता है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 8 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Heredity
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 8.1 मुक्त और जुड़े कर्णपालि · 8.2 F2 में TT:Tt:tt = 1:2:1, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. Tt × Tt का पुनेट-वर्ग वाला चित्र देखो — जीन-संयोजन 1:2:1 और दिखने वाला अनुपात 3:1।
NCERT 2026-27 में यह अध्याय 8 है और इसमें केवल आनुवंशिकता है। बिहार की 16-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय 9 है और उसमें जैव विकास भी है। अंतिम पाठ विकास का है, स्पष्ट लेबल के साथ। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Variation builds up during reproduction · NCERT 8.1 · विविधता
जनन नई संतान बनाता है। शरीर की मूल बनावट माता-पिता जैसी रहती है, पर हल्के फ़र्क भी आ जाते हैं। इन्हीं फ़र्कों को विविधता कहते हैं।
गन्ने के खेत में पौधे लगभग एक जैसे दिखते हैं, क्योंकि गन्ना अक्सर कायिक तरीके से बढ़ता है। बैक्टीरिया के एक कोशिका से दो, और उन दो से चार बनें तो चारों बहुत मिलते-जुलते रहते हैं। फ़र्क केवल डीएनए की नकल की छोटी गलती से आता है।
जंतुओं और मनुष्यों में लैंगिक जनन होता है, इसलिए व्यक्ति साफ़ अलग दिखते हैं। अगली पीढ़ी को पिछले फ़र्क भी मिलते हैं और नए फ़र्क भी जुड़ते हैं। विविधता पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमा होती जाती है।
प्रश्न: अलैंगिक जाति में लक्षण A केवल 10 प्रतिशत जीवों में है और लक्षण B 60 प्रतिशत में। कौन-सा लक्षण पहले बना होगा?
उत्तर: लक्षण B पहले बना होगा। उसे फैलने के लिए अधिक पीढ़ियाँ मिलीं, इसलिए वह आबादी के बड़े हिस्से में पहुँच गया। A नया है, अभी थोड़े जीवों तक ही सीमित है।
हर विविधता बराबर उपयोगी नहीं होती। गरमी की लहर में वही बैक्टीरिया बचते हैं जो गर्मी सह सकें। वातावरण कुछ रूपों को चुन लेता है। इसी चयन पर आगे चलकर विकास टिकता है, पर वह बात अंतिम पाठ में अलग लेबल के साथ है।
वस्तुनिष्ठ में «पहले कौन बना?» का उत्तर वही लक्षण है जो आबादी में अधिक फैला हो।
CBSE उत्तरजीविता पूछता है। एक वाक्य में गर्मी सहने वाले बैक्टीरिया का उदाहरण दे दो।
अलैंगिक या कायिक जनन।
कायिक वृद्धि में नकल लगभग वैसी की तैसी रहती है, इसलिए फ़र्क बहुत छोटा होता है।
सही — दो जनकों के डीएनए मिलते हैं, और नकल की गलती भी जुड़ती है।
जो अधिक फैल चुका, उसे अधिक समय मिला।
अधिक फैला लक्षण पहले बना माना जाता है।
हर रूप बराबर नहीं बचता।
गर्मी सहने वाली विविधता वाले जीव बचते हैं और आबादी बनी रहती है।
सभी जीव एक जैसे नहीं होते। गरमी की लहर में गर्मी सहने वाले बैक्टीरिया बच जाते हैं और बाकी मर सकते हैं। इसलिए विविधता आबादी को एक ही झटके में खत्म होने से बचाती है।
Mendel’s monohybrid cross — TT, Tt, tt · NCERT 8.2.2 · मटर · प्रभावी और अप्रभावी
मेंडल ने मटर के साफ़ लक्षण चुने — लंबा और बौना, गोल और झुर्रीदार बीज, सफ़ेद और बैंगनी फूल। उन्होंने हर पीढ़ी के पौधे गिने।
शुद्ध लंबा (TT) और शुद्ध बौना (tt) का क्रॉस करो। पहली पीढ़ी, F1, में कोई मंझोला पौधा नहीं मिला। सब लंबे थे। यानी दोनों लक्षण घुलकर बीच का रूप नहीं बनाते।
F1 के लंबे पौधे माता-पिता जैसे शुद्ध लंबे नहीं थे। उन्हें स्व-परागित किया तो दूसरी पीढ़ी, F2, में लगभग एक चौथाई पौधे बौने निकले। दोनों कारक F1 में मौजूद थे, पर दिखा केवल लंबा। कारक की दो प्रतियाँ होती हैं। आज हम उन्हें जीन कहते हैं।
TT लंबा है। Tt भी लंबा है, क्योंकि T की एक प्रति काफ़ी है। tt ही बौना है। T जैसा लक्षण प्रभावी कहलाता है। t जैसा, जो दोनों प्रतियों के बिना नहीं दिखता, अप्रभावी है।
F1 सब Tt हैं। F2 का पुनेट वर्ग नीचे है। जीन-संयोजन 1 TT : 2 Tt : 1 tt है। दिखने में TT और Tt एक जैसे लंबे हैं, इसलिए अनुपात 3 लंबा : 1 बौना हो जाता है।
लंबा-गोल और बौना-झुर्रीदार का क्रॉस F1 में सब लंबे और गोल देता है। लंबा और गोल प्रभावी हैं। F2 में पुराने जोड़े भी मिलते हैं और नए भी — लंबा-झुर्रीदार तथा बौना-गोल। दोनों लक्षण स्वतंत्र रूप से बँटते हैं। दिखने वाला अनुपात लगभग 9 : 3 : 3 : 1 होता है।
प्रश्न: Tt पौधे का स्व-परागण करने पर 400 बीजों में लगभग कितने बौने पौधे बनेंगे?
उत्तर: दिखने वाला अनुपात 3:1 है, इसलिए बौने लगभग एक चौथाई। 400 का चौथाई 100 बौने पौधे। शेष लगभग 300 लंबे, जिनमें करीब 100 TT और 200 Tt होते हैं।
BSEB में 3:1 और 1:2:1 साथ लिखो। केवल 3:1 लिखोगे तो जीन-संयोजन का अंक छूट जाएगा।
CBSE पूछता है कि F1 शुद्ध जनक जैसी क्यों नहीं। उत्तर: Tt में t छिपा है, F2 में tt बनकर बौना लौटता है।
बीच की ऊँचाई नहीं बनी थी।
F1 सब Tt और लंबे होते हैं। T प्रभावी है।
पुनेट वर्ग में एक TT, दो Tt, एक tt।
जीनोटाइप 1 TT : 2 Tt : 1 tt है। 3:1 दिखने वाला अनुपात है। 9:3:3:1 दो लक्षणों का है।
गलत — Tt लंबा होता है। t अप्रभावी है और अकेले नहीं दिखता। बौना केवल tt है।
T ऐसा ही है।
T प्रभावी है। t अप्रभावी है।
नए जोड़े भी बनते हैं, जैसे लंबा-झुर्रीदार।
दो लक्षणों का दिखने वाला F2 अनुपात 9:3:3:1 है।
TT × tt की F1 सब लंबी होती है, बीच की ऊँचाई नहीं बनती। इसलिए लंबा प्रभावी है और बौना छिप जाता है। F1 के स्व-परागण से F2 में बौना लौटता है, लगभग 3:1। जो लक्षण F1 में छिपे और F2 में दोनों प्रतियों पर दिखे, वह अप्रभावी है।
Earlobes — Activity 8.1 · NCERT 8.2.1 · क्रियाकलाप 8.1 · चित्र 8.2
कान का सबसे निचला भाग कर्णपालि है। कुछ विद्यार्थियों में यह गाल से अलग लटकी रहती है — मुक्त कर्णपालि। कुछ में सिर के पार्श्व से जुड़ी रहती है — जुड़ी कर्णपालि। ये एक ही लक्षण के दो रूप हैं, कोई बीमारी नहीं।
बच्चा माता और पिता दोनों से लगभग बराबर आनुवंशिक पदार्थ लेता है। इसलिए हर लक्षण की दो प्रतियाँ होती हैं, एक-एक प्रत्येक जनक से। कौन-सा रूप दिखेगा, यह मेंडल वाले नियम से जुड़ा है — घुलकर बीच का कान नहीं बनता।
कक्षा के हर विद्यार्थी का कर्णपालि देखो। मुक्त और जुड़े वाले की अलग सूची बनाओ। प्रत्येक का प्रतिशत निकालो: (संख्या ÷ कुल विद्यार्थी) × 100।
फिर हर विद्यार्थी के माता-पिता का प्रकार पता करो और बच्चे से मिलाओ। इसी तुलना से एक संभव नियम सुझाओ। एक कक्षा का प्रतिशत किसी पूरे देश का नियम नहीं बनता। नियम तब सुझाओ जब एक ही प्रकार के माता-पिता के कई बच्चे एक रूप बार-बार दिखाएँ।
प्रश्न: 40 विद्यार्थियों में 24 की कर्णपालि मुक्त है। प्रतिशत क्या है?
उत्तर: (24 ÷ 40) × 100 = 60 प्रतिशत मुक्त। जुड़े हुए 16 हैं, यानी 40 प्रतिशत। यह केवल इस कक्षा का आँकड़ा है। माता-पिता से मिलान किए बिना यह प्रभावी-अप्रभावी का नियम नहीं बनता।
प्रतिशत वाला अंक तभी मिलता है जब कुल से भाग दिखाओ। केवल «आधे से ज्यादा» मत लिखना।
CBSE पूछ सकता है कि एक कक्षा का आँकड़ा नियम क्यों नहीं है। उत्तर: संख्या छोटी है और माता-पिता का जीन-संयोजन अलग-अलग हो सकता है।
कान का निचला भाग।
क्रियाकलाप 8.1 कर्णपालि के दो रूप गिनता है और प्रतिशत निकालता है।
गलत — मुक्त और जुड़ी कर्णपालि मानव आबादी के दो सामान्य रूप हैं।
(12 ÷ 30) × 100।
12/30 = 0.4, इसलिए 40 प्रतिशत।
केवल कक्षा का प्रतिशत यह नहीं बताता कि लक्षण कैसे चला। बच्चे का रूप माता और पिता के रूप से मिलाओगे तभी कोई वंशानुगत नियम सुझा सकते हो। एक पीढ़ी की गिनती अकेले काफ़ी नहीं।
Confirming 1:2:1 — Activity 8.2 · NCERT क्रियाकलाप 8.2 · चित्र 8.3
चित्र 8.3 में F2 के लंबे पौधों में दो तरह के जीन छिपे हैं। TT और Tt दोनों लंबे दिखते हैं। केवल tt बौना दिखता है। इसलिए खेत में खड़े पौधों को देखकर 1:2:1 नहीं गिना जा सकता।
पुष्टि के लिए हर F2 पौधे की संतान देखनी होती है। यही क्रियाकलाप 8.2 का प्रश्न है।
F2 के हर पौधे को अलग स्व-परागित करो और उसकी संतान लिखो।
ऐसे पौधों की गिनती 1 TT : 2 Tt : 1 tt आती है। यानी दिखने वाला 3:1, जीन-संयोजन का 1:2:1 छिपाए हुए था।
प्रश्न: F2 के एक लंबे पौधे की सारी संतान लंबी है। दूसरा लंबा पौधा 3 लंबे : 1 बौना देता है। जीन लिखो।
उत्तर: पहली स्थिति TT है, क्योंकि छिपा t नहीं है। दूसरी Tt है, क्योंकि बौना tt बनकर लौट आया। बौना पौधा खुद tt होता है।
तीन पंक्तियाँ लिखो: TT केवल लंबे, Tt मिश्रित, tt केवल बौने। यही पूरा क्रियाकलाप है।
CBSE «क्या प्रयोग करें?» पूछता है। उत्तर में स्व-परागण शब्द अवश्य हो। केवल «और क्रॉस करो» अधूरा है।
क्रियाकलाप 8.2।
हर F2 पौधे की संतान बताती है कि वह TT है, Tt है या tt।
सही — उसमें छिपा t नहीं है। Tt होता तो कुछ बौने भी आते।
72:24 = 3:1।
3:1 उसी पौधे से आता है जो Tt है। TT केवल लंबे देता।
वह tt है।
tt की संतान tt ही होती है, इसलिए सब बौने।
TT और Tt दोनों लंबे दिखते हैं। खेत में तीन हिस्से लंबे और एक हिस्सा बौना दिखता है। 1 TT और 2 Tt अलग करने के लिए प्रत्येक लंबे पौधे को स्व-परागित करना पड़ता है।
Sex determination — XX and XY, the father decides · NCERT 8.2.4 · चित्र 8.6
हर जाति एक तरीका नहीं अपनाती। कुछ सरीसृपों में अंडे के आसपास का ताप नर या मादा बनाता है। घोंघे लिंग बदल सकते हैं, इसलिए वहाँ लिंग केवल जीन से तय नहीं होता।
मनुष्य में लिंग मुख्यतः आनुवंशिक है। अधिकांश गुणसूत्रों के 22 जोड़े होते हैं, एक प्रति माता से और एक पिता से। एक जोड़ा अलग होता है — लिंग गुणसूत्र। स्त्री में दोनों X होते हैं, यानी XX। पुरुष में एक सामान्य X और एक छोटा Y होता है, यानी XY।
माँ XX है, इसलिए हर अंडाणु में X ही जाता है। पिता के आधे शुक्राणु X वाले और आधे Y वाले होते हैं।
बच्चे को पिता से X मिले तो जोड़ा XX बनता है — बेटी। Y मिले तो जोड़ा XY बनता है — बेटा। इसलिए लिंग पिता तय करता है। माँ दोनों स्थितियों में X ही देती है। संभावना लगभग आधी-आधी रहती है।
प्रश्न: एक दंपति की लगातार तीन बेटियाँ हुईं। क्या चौथा बच्चा बेटा ही होगा, क्योंकि «बारी» बेटे की है?
उत्तर: नहीं। हर गर्भ नया है। पिता का शुक्राणु फिर से X या Y हो सकता है, लगभग बराबर संभावना से। पिछली बेटियाँ अगले शुक्राणु को नहीं बदलतीं।
«माता तय करती है» वाला विकल्प गलत है। वाक्य पूरा लिखो: माता X देती है, निर्णय पिता के शुक्राणु का है।
CBSE आधा-आधा पूछता है। कारण: Y और X वाले शुक्राणु बराबर बनते हैं, पिछली संतान अगली संभावना नहीं बदलती।
10-सेकंड रिवीजन
माँ के पास Y नहीं होता।
पिता का Y शुक्राणु बेटा (XY) बनाता है। X शुक्राणु बेटी (XX) बनाता है।
गलत — कुछ सरीसृपों में ताप तय करता है, और कुछ घोंघे लिंग बदल लेते हैं।
पुरुष XY है।
स्त्री XX और पुरुष XY।
अभिकथन (A): मनुष्य में बच्चे का लिंग पिता निर्धारित करता है।
कारण (R): माँ के पास कोई लिंग गुणसूत्र नहीं होता।
A सही है। R गलत — माँ XX होती है और हर अंडाणु में X देती है। निर्णय इस बात से होता है कि पिता X देता है या Y।
माँ XX है, अतः हर बच्चा माँ से X लेता है। पिता XY है, अतः उसके शुक्राणु आधे X और आधे Y वाले होते हैं। X वाला शुक्राणु XX बेटी बनाता है और Y वाला XY बेटा। दोनों प्रकार के शुक्राणु बराबर बनते हैं, इसलिए संभावना लगभग आधी-आधी है।
Use does not change the DNA of the next generation · NCERT 8.2.3 · जीन, प्रोटीन और जनन-कोशिका
कोशिका का डीएनए प्रोटीन बनाने की सूचना रखता है। डीएनए का वह टुकड़ा जो एक प्रोटीन की सूचना दे, उस प्रोटीन का जीन है।
ऊँचाई का उदाहरण लो। एक एंज़ाइम अगर बढ़िया काम करे तो वृद्धि-हार्मोन अधिक बनता है और पौधा लंबा होता है। उसी जीन में ऐसा बदलाव हो जिससे एंज़ाइम कमज़ोर पड़ जाए, तो हार्मोन कम बनेगा और पौधा बौना रहेगा। लक्षण तभी बदलता है जब जीन बदले।
दोनों जनक संतान के डीएनए में बराबर हिस्सा डालते हैं, इसलिए हर जीन की दो प्रतियाँ होती हैं। जनन-कोशिका में जोड़ों में से एक-एक प्रति जाती है। दो जनन-कोशिकाएँ मिलकर फिर पूरा जोड़ा बनाती हैं। गुणसूत्र अलग-अलग टुकड़े होते हैं, एक लंबी अटूट डोर नहीं। इसीलिए दो लक्षण स्वतंत्र रह सकते हैं।
प्रश्न: एक लोहार रोज़ हथौड़ा चलाता है और उसकी बाँह की पेशियाँ बड़ी हो जाती हैं। क्या उसके बच्चे की बाँह जन्म से वैसी ही बड़ी होगी?
उत्तर: नहीं। कसरत से पेशी बढ़ना शरीर का उपार्जित बदलाव है। वह जनन-कोशिका के डीएनए में नहीं लिखा जाता। बच्चे को बाँह का जीन मिलेगा, पिता की कमाई हुई पेशी नहीं।
कई पीढ़ियों तक चूहों की पूँछ काटते रहो। बच्चों में पूँछ फिर भी आती है। काटना डीएनए नहीं बदलता। केवल जनन-कोशिका की जीन की बदली प्रति ही अगली पीढ़ी के लक्षण बदल सकती है।
परिभाषा दो भागों में लिखो: जीन = डीएनए का खंड, काम = एक प्रोटीन की सूचना।
CBSE «समान योगदान» पूछता है। उत्तर: प्रत्येक जनन-कोशिका एक सेट ले जाती है, मिलकर दो सेट पूरे होते हैं।
10-सेकंड रिवीजन
गलत — यह उपार्जित लक्षण है। जनन-कोशिका का डीएनए इससे नहीं बदलता।
प्रोटीन लक्षण को असर तक ले जाता है।
वह खंड जीन है। एंज़ाइम प्रोटीन ही होता है, और वही हार्मोन की मात्रा बदलकर ऊँचाई बदल सकता है।
दो कोशिकाएँ मिलकर जोड़ा पूरा करती हैं।
एक प्रति जाती है, ताकि संतान में फिर दो प्रतियाँ हों — एक माता से, एक पिता से।
ऊँचाई एक प्रोटीन-एंज़ाइम की दक्षता पर निर्भर हो सकती है, जो वृद्धि-हार्मोन बनवाता है। जीन ठीक हो तो एंज़ाइम अच्छा काम करता है, हार्मोन अधिक बनता है और पौधा लंबा होता है। जीन बदल जाए और एंज़ाइम कमज़ोर हो तो हार्मोन कम बनता है और पौधा बौना रहता है। शरीर के इस्तेमाल से यह डीएनए नहीं बदलता।
BSEB extra — evolution (not an NCERT 2026-27 activity) · BSEB अतिरिक्त · पुरानी किताब का विकास वाला भाग · कोई NCERT क्रियाकलाप नहीं
स्पष्ट लेबल: NCERT 2026-27 में अध्याय 8 केवल आनुवंशिकता है। उसके क्रियाकलाप 8.1 और 8.2 यहीं समाप्त होते हैं। यह पाठ उन क्रियाकलापों में से एक नहीं है।
बिहार की 16-अध्याय वाली पुरानी किताब में आनुवंशिकता और जैव विकास एक साथ छपे थे, और वह अध्याय संख्या 9 था। बोर्ड की तैयारी के लिए वही स्कूल-स्तर का विचार यहाँ अलग से है।
उपार्जित लक्षण जीवन में कमाया जाता है — कसरत की पेशी, कटी पूँछ, सीखी हुई भाषा। वह जनन-कोशिका के डीएनए में नहीं जाता, इसलिए संतान उसे जन्म से नहीं पाती। वंशागत लक्षण जीन में होता है और जनन के साथ जाता है। विकास इन्हीं वंशागत विविधताओं पर चलता है, उपार्जित सूची पर नहीं।
एक आबादी बीच से बँट जाए — बीच में पर्वत, नदी या समुद्र आ जाए — तो दोनों ओर के जीव आपस में जनन नहीं कर पाते। प्रत्येक ओर की वंशागत विविधताएँ अलग जमा होती हैं। जो रूप उस जगह पर बेहतर बचता है, उसकी संतान अधिक होती है।
बहुत पीढ़ियों बाद दोनों समूह इतने अलग हो सकते हैं कि मिलकर जनन न कर सकें। यही स्कूल-स्तर पर जाति-उद्भवन है — एक जाति से दो। यह किसी एक जीव के अचानक बदल जाने की कहानी नहीं है।
प्रश्न: भृंगों की आबादी नदी बनने से दो टुकड़ों में बँट गई। एक ओर शिकारी चिड़ियाँ लाल भृंग देख लेती हैं, हरे घास में छिपे रह जाते हैं। दूसरी ओर ऐसा शिकारी नहीं है। आगे क्या संभव है?
उत्तर: पहली ओर हरा रंग वंशागत रूप से बढ़ सकता है, क्योंकि लाल अधिक खाए जाते हैं। दूसरी ओर रंग पर ऐसा चयन नहीं है। लाखों पीढ़ियों में दोनों समूह अलग जाति बन सकते हैं, यदि वे फिर मिलकर जनन न कर सकें। किसी भृंग के जीवन में रंगा गया रंग संतान को नहीं मिलता।
उत्तर की पहली पंक्ति में लिखो कि विकास वाला भाग पुरानी बिहार किताब का है। फिर उपार्जित और वंशागत का एक-एक उदाहरण दो।
CBSE-शैली में जाति का अर्थ «एक जीव का अचानक बदलना» मत लिखना। लिखो: आदान-प्रदान रुकना और वंशागत अंतर जमा होना।
10-सेकंड रिवीजन
लेबल BSEB अतिरिक्त है।
NCERT 2026-27 के क्रियाकलाप केवल 8.1 और 8.2 हैं। विकास वाला पाठ अतिरिक्त है।
गलत — सीखी भाषा उपार्जित है। बच्चा भाषा फिर से सीखता है।
जनन का आदान-प्रदान रुकना ज़रूरी है।
बँटी आबादी में वंशागत अंतर जमा होते हैं। जब समूह मिलकर जनन न कर सके, नई जाति का विचार बनता है।
वंशागत इसका उल्टा है।
उपार्जित लक्षण अगली पीढ़ी को नहीं मिलता। वंशागत लक्षण जीन में होता है।
उपार्जित लक्षण जीवन की घटना है, जैसे कसरत की पेशी। वह जनन-कोशिका के डीएनए में नहीं जाता, इसलिए संतान उसे नहीं पाती। वंशागत लक्षण जीन में होता है और जनन के साथ जाता है। जाति-उद्भवन के स्कूल-स्तर के विचार में आबादी बँट जाती है, दोनों ओर वंशागत विविधताएँ अलग जमा होती हैं, और अंत में समूह मिलकर जनन नहीं कर पाते। यह NCERT 2026-27 का क्रियाकलाप नहीं है।
प्रकार चुनो। पाठों के 34 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
फैलने का समय अधिक मिला।
60 प्रतिशत वाला लक्षण 10 प्रतिशत वाले से पहले बना माना जाता है।
सब पौधे लंबे दिखते हैं।
F1 सब Tt होती है। T प्रभावी होने से सब लंबे हैं।
TT और Tt दोनों लंबे हैं।
दिखने में 3 लंबे : 1 बौना। जीन-संयोजन अलग से 1:2:1 है।
चित्र में पीला खाना।
चार में एक संतान tt होती है। दो Tt और एक TT होती है।
आधी बौनी संतान का अर्थ T विषम है। सब बैंगनी का अर्थ फूल शुद्ध प्रभावी है।
लंबा जनक TtWW है। आधी संतान बौनी इसलिए Tt, और सब बैंगनी इसलिए WW।
कुल विद्यार्थी हर में आते हैं।
प्रतिशत (उस रूप की संख्या ÷ कक्षा का कुल) × 100 है।
शुद्ध लंबा बौना नहीं देगा।
बौना बच्चा तभी आता है जब जनक Tt हो और tt बन सके।
Y पिता से बेटे में जाता है।
लड़की XX होती है। XY बेटा है।
माँ XX है।
हर अंडाणु X ले जाता है, इसलिए हर बच्चा माँ से X पाता है।
एंज़ाइम उसी सूचना से बनता है।
उस खंड को जीन कहते हैं।
कसरत जनन-कोशिका नहीं बदलती।
कमाई हुई पेशी उपार्जित लक्षण है। अगली पीढ़ी के डीएनए में नहीं लिखी जाती।
नए जोड़े भी बनते हैं।
स्वतंत्र वंशानुक्रम में F2 लगभग 9:3:3:1 होता है।
एक सहसंबंध दोनों तरफ़ मेल खा सकता है।
माता-पिता और बच्चे एक रूप दिखाएँ तो भी यह अकेले प्रभावी या अप्रभावी सिद्ध नहीं करता।
यह BSEB अतिरिक्त विचार है।
बँटवारे के बाद जनन का आदान-प्रदान रुकता है और वंशागत अंतर जमा होते हैं।
गलत — मेंडल को बीच की ऊँचाई नहीं मिली। सब लंबे थे।
सही — बौनेपन के लिए t की दोनों प्रतियाँ चाहिए।
गलत — दोनों लंबे दिखते हैं। फ़र्क स्व-परागण की संतान से पड़ता है।
गलत — माँ XX होती है। लिंग पिता के X या Y शुक्राणु से तय होता है।
सही — अंडाणु X ले जाता है।
गलत — काटना डीएनए नहीं बदलता। संतान पूँछ के साथ जन्म लेती है।
सही — दो जनन-कोशिकाएँ मिलकर फिर दो प्रतियाँ पूरा करती हैं।
गलत — वह BSEB अतिरिक्त है। NCERT 2026-27 के क्रियाकलाप 8.1 और 8.2 ही हैं।
बौना पौधा tt होता है।
एक t काफ़ी नहीं।
अनुपात 1:2:1 है, अंतिम पद 1 tt।
पुनेट वर्ग का चौथा खाना।
पुरुष XY होता है।
एक बड़ा X और एक छोटा Y।
Y शुक्राणु से XY बेटा बनता है।
X मिलने पर बेटी।
उसे जीन कहते हैं।
एंज़ाइम उसी से बनता है।
ऐसा लक्षण उपार्जित कहलाता है।
कसरत की पेशी।
अनुपात 9:3:3:1 है।
नए जोड़े भी बनते हैं।
भाग कुल विद्यार्थियों से होता है, फिर 100 से गुणा।
फिर 100 से गुणा।
TT शुद्ध लंबा, Tt लंबा पर विषम, tt बौना, XY बेटा।
प्रभावी एक प्रति से दिखता है। जनन-कोशिका एक प्रति ले जाती है। उपार्जित डीएनए में नहीं जाता। जाति-उद्भवन बँटवारे का विचार है और NCERT क्रियाकलाप नहीं है।
अभिकथन (A): F1 सब लंबे होने के बाद भी F2 में बौने पौधे आते हैं।
कारण (R): F1 के Tt में t छिपा रहता है और tt में फिर दिखता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): मनुष्य में लिंग का निर्णय पिता के शुक्राणु से होता है।
कारण (R): माँ YY होती है और Y ही देती है।
A सही है। R गलत — माँ XX होती है और X देती है।
अभिकथन (A): पहलवान का बच्चा जन्म से पहलवान जैसी पेशी लेकर आता है।
कारण (R): उपार्जित लक्षण जनन-कोशिका के डीएनए में नहीं लिखा जाता।
A गलत है। R सही — कसरत की पेशी अगली पीढ़ी में नहीं जाती।
अभिकथन (A): दो लक्षणों के F2 में नए जोड़े बन सकते हैं।
कारण (R): एक-लक्षण संकरण का दिखने वाला अनुपात 3:1 है।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है। नए जोड़े इसलिए बनते हैं कि गुणसूत्र अलग टुकड़े हैं।
इस अध्याय में कोई रासायनिक समीकरण नहीं है। नीचे का ट्रे केवल गुणांक अभ्यास है, इस अध्याय का परिणाम नहीं।
TT शुद्ध प्रभावी लंबा, Tt विषम लंबा, tt शुद्ध अप्रभावी बौना।
Tt वंशागत है। पेशी उपार्जित है। बँटी आबादी जाति का स्कूल-स्तर का विचार है और NCERT क्रियाकलाप नहीं।
जो लक्षण जीन की एक प्रति से ही दिख जाए, वह प्रभावी है।
स्त्री XX। पुरुष XY।
जीन डीएनए का वह खंड है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की सूचना होती है।
प्रतिशत = (उस कर्णपालि वाले विद्यार्थियों की संख्या ÷ कुल विद्यार्थी) × 100।
रोज़ की कसरत से बढ़ी पेशी उपार्जित है। वह बच्चे के डीएनए में नहीं जाती।
TT × tt की F1 सब Tt और लंबी होती है। Tt × Tt की F2 में TT, Tt, Tt और tt बनते हैं। तीनों में T है इसलिए वे लंबे हैं, केवल tt बौना है। दिखने वाला अनुपात 3:1 है और जीन-संयोजन 1:2:1।
F2 के प्रत्येक पौधे को स्व-परागित करते हैं। केवल लंबे बच्चे देने वाला लंबा पौधा TT है। लंबे और बौने दोनों देने वाला Tt है। केवल बौने देने वाला tt है। गिनती 1:2:1 आती है।
माँ XX है और हर अंडाणु X देता है। पिता XY है। X शुक्राणु से XX बेटी बनती है और Y शुक्राणु से XY बेटा। इसलिए निर्णय पिता की ओर से होता है।
नहीं। यह जानकारी काफ़ी नहीं। सब संतानों का रक्त समूह पता नहीं। A वाला व्यक्ति AA या AO हो सकता है। एक बेटी से प्रभावी-अप्रभावी का पूरा फ़ैसला नहीं होता।
शुद्ध लंबे और शुद्ध बौने की F1 सब लंबी होती है, अतः लंबा प्रभावी है और बौना अप्रभावी। F2 में बौना 3:1 में लौटता है, जीन 1:2:1। दो लक्षणों के क्रॉस में F1 सब लंबे-गोल होते हैं, पर F2 में लंबे-झुर्रीदार और बौने-गोल जैसे नए जोड़े भी बनते हैं। अनुपात लगभग 9:3:3:1 होता है। इसलिए दोनों लक्षण स्वतंत्र बँटते हैं।
शरीर की कोशिका में गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं। जनन-कोशिका प्रत्येक जोड़े से एक प्रति ले जाती है। दो जनन-कोशिकाएँ मिलकर संतान में फिर दो पूरा सेट लाती हैं, एक माता से और एक पिता से। स्त्री XX और पुरुष XY है। माँ सदा X देती है। पिता X दे तो बेटी और Y दे तो बेटा। शेष 22 जोड़ों में योगदान बराबर ही रहता है।
वंशागत लक्षण जीन में होता है और जनन-कोशिका के साथ जाता है, जैसे मटर का TT या tt। उपार्जित लक्षण जीवन की घटना है, जैसे कसरत की पेशी या काटी हुई पूँछ, और वह अगली पीढ़ी के डीएनए को नहीं बदलता। NCERT 2026-27 का अध्याय 8 केवल आनुवंशिकता है। पुरानी बिहार किताब में विकास इसी विषय के साथ था। अंतिम पाठ उसी के लिए है, स्पष्ट BSEB अतिरिक्त लेबल के साथ, और वह NCERT 2026-27 का क्रियाकलाप नहीं है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। यह किसी वर्ष का वार्षिक प्रश्नपत्र नहीं है।
बिना गिनती के 3:1 नहीं बनता।
गिनती से ही प्रभावी-अप्रभावी और अनुपात निकले।
दोनों छोटी प्रतियाँ।
tt बौना और अप्रभावी है।
दिखने वाला अनुपात 3:1 है।
जीन-अनुपात अलग है।
दोनों एक ही मानव लक्षण के रूप हैं। क्रियाकलाप 8.1 इन्हें गिनकर प्रतिशत निकालता है और माता-पिता से मिलाता है।
आबादी के सब जीव एक जैसे नहीं होते। वातावरण बदले, जैसे गरमी की लहर आए, तो कुछ विविधताएँ बच जाती हैं। इसलिए पूरी जाति एक साथ नहीं मिटती।
दोनों जनक के युग्मक T और t हैं। चार जोड़े TT, Tt, Tt और tt बनते हैं। जीन-संयोजन 1:2:1 है। TT और दोनों Tt लंबे हैं, केवल tt बौना है, इसलिए दिखने में 3:1। क्रियाकलाप 8.2 स्व-परागण से TT और Tt को अलग पहचानता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। यह कोई पिछला प्रश्नपत्र नहीं है।
15:5 = 3:1।
यह दिखने वाला 3:1 है। अंदर का 1:2:1 बिना आगे की संतान के नहीं दिखता।
पिछली संतान अगला शुक्राणु नहीं बदलती।
हर गर्भ में X और Y की संभावना फिर से लगभग बराबर होती है।
अभिकथन (A): जनन-कोशिका में जीन का एक सेट होता है।
कारण (R): दो सेट मिलकर संतान में गुणसूत्रों की संख्या वापस लाते हैं।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण से जुड़ा है।
अभिकथन (A): चूहों की पूँछ कई पीढ़ी काटने से पूँछ का जीन मिट जाता है।
कारण (R): उपार्जित बदलाव जनन-कोशिका के डीएनए में प्रवेश नहीं करता।
A गलत है। R सही। संतान पूँछ के साथ जन्म लेती रहती है।
(10 ÷ 25) × 100 = 40 प्रतिशत जुड़ी कर्णपालि। एक कक्षा की गिनती छोटी है और माता-पिता का जीन-संयोजन अलग हो सकता है। नियम के लिए बच्चों को माता-पिता से मिलाना होगा, जैसा क्रियाकलाप 8.1 कहता है।
नहीं। चौड़े कंधे कसरत का उपार्जित परिणाम हैं। जनन-कोशिका का डीएनए इससे नहीं बदलता। बच्चा पिता के जीन लेगा, कमाई हुई पेशी नहीं। यह NCERT का वंशानुगत नियम है; विकास वाला अतिरिक्त पाठ भी इसी बात पर टिकता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| F2 दिखने वाला अनुपात | 3 tall : 1 short |
| F2 जीन-संयोजन | 1 TT : 2 Tt : 1 tt |
| प्रभावी / अप्रभावी | one T makes tall; short needs tt |
| लिंग गुणसूत्र | XX girl, XY boy |
| जनन-कोशिका | one copy from each pair |
| उपार्जित लक्षण | not passed in the DNA |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।