एक ओर हों तो आसन्न नहीं।
उभय भुजा के दो अलग ओर।
कक्षा 9 · गणित · अध्याय 6 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Lines and Angles
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1. पढ़ो — पद · रैखिक युग्म · शीर्षाभिमुख · अभ्यास 6.1 · तिर्यक · संगत · एकांतर · सह-आंतरिक · अभ्यास 6.2 · कोण योग · अभ्यास 6.3, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र दो समांतर रेखाओं को एक तिर्यक काटता दिखाता है, और एक जोड़ी एकांतर कोण बराबर अंकित हैं।
बिहार की 15-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय 6 है। NCERT 2026-27 गणित मंजरी का क्रम अलग है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Lines, angles, and adjacent angles · पाठ्यपुस्तक 6.2 · आसन्न · पूरक
दो सिरों वाला हिस्सा रेखाखंड है। एक सिरा वाली किरण है। रेखा दोनों ओर बढ़ती है। पुस्तक खंड, किरण, लंबाई और रेखा सबको AB लिख सकती है। अर्थ वाक्य से पकड़ो। एक ही रेखा पर तीन या अधिक बिंदु संरेख हैं, नहीं तो असंरेख।
दो किरणें एक छोर से निकलें तो कोण बनता है। न्यून 0° और 90° के बीच, समकोण ठीक 90°, अधिक 90° और 180° के बीच, ऋजु 180°, प्रतिवर्ती 180° और 360° के बीच। योग 90° हो तो पूरक, योग 180° हो तो संपूरक। आसन्न कोणों का शीर्ष और एक भुजा उभय होती है, और शेष भुजाएँ उभय भुजा के दो ओर होती हैं।
प्रश्न: एक कोण 35° है। उसका पूरक और संपूरक निकालो।
संबंध: पूरक = 90° − दिया कोण। संपूरक = 180° − दिया कोण।
मान: पूरक = 90° − 35° = 55°। संपूरक = 180° − 35° = 145°।
पूरक और संपूरक के 90° और 180° पलटना सबसे आम गलती है। उत्तर में दोनों शब्द लिखो।
आसन्न होने मात्र से योग 180° मत लिखना। वह रैखिक युग्म की शर्त है।
एक ओर हों तो आसन्न नहीं।
उभय भुजा के दो अलग ओर।
गलत — योग 90° पूरक है। संपूरक का योग 180° है।
समकोण 90° है।
180°।
90 में से घटाओ।
90° − 70° = 20°।
उभय शीर्ष, उभय भुजा, और शेष भुजाएँ उभय भुजा के दो ओर। नहीं। रैखिक युग्म तभी है जब शेष भुजाएँ एक रेखा बनाएँ।
The linear pair — Axioms 6.1 and 6.2 · पाठ्यपुस्तक 6.4 · रैखिक युग्म अभिगृहीत
अभिगृहीत 6.1: एक किरण रेखा पर खड़ी हो तो बने दो आसन्न कोणों का योग 180° है। ऐसे कोण रैखिक युग्म कहलाते हैं। विलोम अभिगृहीत 6.2 है: दो आसन्न कोणों का योग 180° हो तो उनकी शेष भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं। दोनों मिलकर रैखिक युग्म अभिगृहीत कहलाते हैं।
विलोम का अर्थ है दी हुई बात और निष्कर्ष को पलट देना। 6.1 में «किरण रेखा पर है» दिया है और योग निष्कर्ष है। 6.2 में योग दिया है और रेखा निष्कर्ष है। दोनों यहाँ अभिगृहीत हैं, प्रमेय नहीं।
प्रश्न: एक रैखिक युग्म में एक कोण 65° है। दूसरा निकालो।
अभिगृहीत: रैखिक युग्म का योग 180° है।
मान: दूसरा = 180° − 65° = 115°।
6.1 और 6.2 दोनों अभिगृहीत हैं। विलोम को प्रमेय लिखना इस अध्याय में गलत है।
115° वाले उत्तर में 180° − 65° दिखाओ। केवल 115° आधा अंक खो सकता है।
ऋजु कोण।
180°।
सही — यह अभिगृहीत 6.2 है।
180 में से घटाओ।
140°।
किरण रेखा पर खड़ी हो तो आसन्न कोणों का योग 180° है। विलोम: आसन्न कोणों का योग 180° हो तो शेष भुजाएँ रेखा बनाती हैं। दोनों रैखिक युग्म अभिगृहीत हैं।
Vertically opposite angles — Theorem 6.1 · पाठ्यपुस्तक 6.4 · प्रमेय 6.1 · अभ्यास 6.1
दो रेखाएँ O पर काटें तो दो जोड़ी शीर्षाभिमुख कोण बनते हैं। प्रमेय 6.1: वे बराबर होते हैं। प्रमाण रैखिक युग्म से है। एक कोण अपने दोनों पड़ोसियों के साथ 180° बनाता है। समान कोण घटाओ तो सामने वाले कोण बराबर बचते हैं।
अनुपात वाले प्रश्न में पहले रैखिक युग्म का 180° लो, फिर हिस्से बाँटो। शीर्षाभिमुख कोण उसी माप को सामने दोहराता है। नया माप नहीं बनता।
प्रश्न: दो रेखाएँ O पर काटती हैं। ∠POR : ∠ROQ = 5 : 7। चारों कोण निकालो।
रैखिक युग्म: ∠POR + ∠ROQ = 180°। हिस्से 5 + 7 = 12।
मान: ∠POR = (5/12) × 180° = 75°। ∠ROQ = (7/12) × 180° = 105°।
शीर्षाभिमुख: सामने वाले कोण भी 105° और 75° हैं।
अनुपात में हर को 180° से गुणा मत करना। पहले हिस्सों का योग 12 लो, फिर 5/12 और 7/12।
चार कोण पूछे जाएँ तो शीर्षाभिमुख दोहराव लिखो। केवल दो कोण आधा उत्तर है।
प्रमेय 6.1।
बराबर।
सही — दोनों पड़ोसी युग्म 180° के हैं।
5/12 × 180।
75°। बड़ा 105° है।
सामने वही माप।
105°। बगल वाला 75° होगा।
शीर्षाभिमुख कोण 40° है। बगल के दोनों रैखिक युग्म से 180° − 40° = 140° हैं। चारों कोण 40°, 140°, 40°, 140° हैं।
गलत — योग 180° है। कोण 75° और 105° हैं।
A transversal and corresponding angles · पाठ्यपुस्तक 6.5 · अभिगृहीत 6.3
जो रेखा दो या अधिक रेखाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटे वह तिर्यक है। हर कटाव पर चार कोण बनते हैं। पट्टी के बाहर वाले बाह्य हैं और बीच वाले अंतःकोण। एक जैसी जगह वाले कोण संगत हैं।
समांतर रेखाओं के बीच की लंब दूरी हर जगह समान होती है। अभिगृहीत 6.3: समांतर रेखाओं को तिर्यक काटे तो हर संगत जोड़ा बराबर होता है। विलोम भी चलता है: एक संगत जोड़ा बराबर हो तो रेखाएँ समांतर हैं।
कॉपी की दो पंक्तियों पर समांतर रेखाएँ खींचो और एक तिर्यक काटो। संगत कोण नापो। वे बराबर आएँगे। यह क्रमांकित क्रियाकलाप नहीं है। पुस्तक कहती है कि पिछली कक्षाओं की जाँच यहाँ दोहराओ। नाप अभिगृहीत की जगह नहीं लेती, पर चित्र समझाती है।
प्रश्न: m ∥ n और तिर्यक पर एक संगत कोण 72° है। उसका संगत साथी और सह-आंतरिक साथी निकालो।
अभिगृहीत 6.3: संगत साथी = 72°।
सह-आंतरिक: 180° − 72° = 108°।
संगत कोण एकांतर कोण नहीं हैं। एक जैसी जगह देखो, पट्टी के अंदर की क्रॉस जगह नहीं।
विलोम से समांतर सिद्ध करते समय एक जोड़ा काफी है। चारों जोड़े नापना जरूरी नहीं।
कटाव अलग-अलग।
दो या अधिक रेखाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटे।
सही — अभिगृहीत 6.3।
180 − 72।
108°।
6.3 का विलोम।
रेखाएँ समांतर हैं।
दो समांतर पंक्तियाँ और एक तिर्यक खींचकर एक संगत जोड़ा नापूँगा। बराबर माप अभिगृहीत 6.3 से जुड़ी है। नाप स्वयं प्रमाण नहीं है।
Alternate and co-interior angles · पाठ्यपुस्तक 6.5 · प्रमेय 6.2 से 6.5
रेखाओं के बीच, तिर्यक के अलग-अलग ओर के कोण एकांतर अंतःकोण हैं। पुस्तक कभी उन्हें केवल एकांतर कोण भी कहती है। उसी ओर के भीतरी कोण सह-आंतरिक हैं। इन्हें क्रमागत अंतःकोण या allied कोण भी कहते हैं।
समांतर हों तो एकांतर बराबर होते हैं और सह-आंतरिक का योग 180° होता है। प्रमेय 6.2 और 6.4 यही कहते हैं। विलोम 6.3 और 6.5 रेखाओं को समांतर सिद्ध करते हैं। एक जोड़ा काफी है।
प्रश्न: m ∥ n। एक एकांतर अंतःकोण 65° है। दूसरा एकांतर और सह-आंतरिक निकालो।
प्रमेय 6.2: दूसरा एकांतर = 65°।
प्रमेय 6.4: सह-आंतरिक = 180° − 65° = 115°।
सह-आंतरिक को बराबर मत लिखना। उनका योग 180° है। बराबर एकांतर और संगत होते हैं।
चित्र में एकांतर जोड़ा एक ही पट्टी में तिर्यक के दो ओर होता है। संगत जोड़ा एक जैसी जगह पर होता है।
10-सेकंड रिवीजन
प्रमेय 6.2।
बराबर।
सही — प्रमेय 6.4।
180 − 65।
115°।
प्रमेय 6.5।
रेखाएँ समांतर हैं।
सह-आंतरिक = 180° − 110° = 70°, प्रमेय 6.4। एकांतर साथी = 110°, प्रमेय 6.2।
गलत — एकांतर विपरीत ओर होते हैं और बराबर होते हैं। सह-आंतरिक एक ही ओर होते हैं और संपूरक होते हैं।
Lines parallel to the same line · पाठ्यपुस्तक 6.6 · प्रमेय 6.6 · अभ्यास 6.2
प्रमेय 6.6: जो रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर हों, वे आपस में समांतर होती हैं। दो से अधिक रेखाओं पर भी यही बात चलती है। बीच में एक सहायक समांतर खींचकर संगत या एकांतर कोण मिलाए जाते हैं।
अभ्यास में अक्सर एक कोण 135° और दूसरा 40° देकर बीच का कोण पूछा जाता है। सहायक रेखा दोनों समांतरों के साथ सह-आंतरिक या एकांतर संबंध बनाती है। 180° − 135° = 45°, फिर 45° + 40° = 85°। इकाई डिग्री है।
प्रश्न: PQ ∥ RS। एक सह-आंतरिक कोण 135° है और आगे एक एकांतर कोण 40° है। बीच का कोण निकालो।
चरण: 180° − 135° = 45°। यह सहायक रेखा पर बना टुकड़ा है।
जोड़: 45° + 40° = 85°।
135° को सीधे 40° में मत जोड़ना। पहले 180° − 135° = 45° निकालो, फिर 40° जोड़ो।
प्रमेय 6.6 बिना कारण के «दोनों समांतर हैं» मत लिखना। लिखो कि दोनों एक तीसरी के समांतर हैं।
10-सेकंड रिवीजन
प्रमेय 6.6।
m ∥ n।
गलत — पुस्तक कहती है कि बात दो से अधिक रेखाओं पर भी चलती है।
45 + 40।
85°।
AB ∥ EF, क्योंकि जो रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर हों वे आपस में समांतर होती हैं। यह प्रमेय 6.6 है।
The angle sum of a triangle and the exterior angle · पाठ्यपुस्तक 6.7 · प्रमेय 6.7 · प्रमेय 6.8 · अभ्यास 6.3
प्रमेय 6.7: त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° है। प्रमाण में शीर्ष से विपरीत भुजा के समांतर रेखा खींचते हैं। एकांतर कोण शेष दो कोणों के बराबर हो जाते हैं और तीनों एक ऋजु कोण बनाते हैं।
प्रमेय 6.8: भुजा बढ़ाने पर बना बाह्य कोण, दूर के दो अंतःकोणों के योग के बराबर होता है। इसलिए वह उन दोनों में से हर एक से बड़ा है। समकोण त्रिभुज में 90° + एक कोण + दूसरा = 180°।
प्रश्न: त्रिभुज में दो कोण 50° और 60° हैं। तीसरा और उसके दूर वाला बाह्य कोण निकालो।
प्रमेय 6.7: 50° + 60° + x = 180°, इसलिए x = 70°।
प्रमेय 6.8: बाह्य कोण = 50° + 60° = 110°।
बाह्य कोण को सटे अंतःकोण के बराबर मत लिखना। वह रैखिक युग्म से 180° बनाता है। दूर वाले दो जुड़ते हैं।
70° और 110° एक ही उत्तर के दो भाग हैं। केवल तीसरा कोण लिखना बाह्य कोण वाला भाग छोड़ देता है।
10-सेकंड रिवीजन
प्रमेय 6.7।
180°।
गलत — सटे कोण के साथ यह रैखिक युग्म है। बाह्य कोण दूर के दो अंतःकोणों के योग जितना है।
180 − 110।
70°।
दोनों का योग।
50° + 60° = 110°।
90° + 35° + y = 180°, इसलिए y = 55°। बाह्य कोण = 35° + 55° = 90°, प्रमेय 6.8 से।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
उभय भुजा के दो ओर।
दो ओर।
180 में से।
140°।
अभिगृहीत 6.1।
180°।
प्रमेय 6.1।
बराबर।
7/12 × 180।
105°।
अभिगृहीत 6.3।
बराबर।
प्रमेय 6.2।
बराबर।
प्रमेय 6.4।
180°।
प्रमेय 6.6।
m ∥ n।
प्रमेय 6.7।
180°।
प्रमेय 6.8।
दूर के दो अंतःकोणों का योग।
विलोम।
समांतर।
पहले 45, फिर 40 जोड़ो।
85°।
गलत — 180° रैखिक युग्म की शर्त है।
सही — दोनों रैखिक युग्म अभिगृहीत कहलाते हैं।
गलत — प्रमेय 6.1 उन्हें बराबर कहता है। संपूरक उनके पड़ोसी होते हैं।
गलत — कटाव भिन्न बिंदुओं पर होते हैं।
गलत — उनका योग 180° होता है।
सही — प्रमेय 6.6।
गलत — वह दूर के दोनों अंतःकोणों के योग के बराबर है।
सही।
90।
संपूरक 180।
115।
180 − 65।
75।
5/12 × 180।
6.3।
रैखिक युग्म 6.1 और 6.2।
115।
180 − 65।
70।
180 − 110।
110।
50 + 60।
85।
45 + 40।
संगत और एकांतर बराबर हैं, सह-आंतरिक संपूरक हैं, शीर्षाभिमुख कटान पर बराबर हैं।
6.1 रैखिक युग्म, 6.3 संगत, 6.6 समांतरता, 6.7 कोण योग।
अभिकथन (A): रैखिक युग्म का योग 180° है।
कारण (R): किरण रेखा पर खड़ी हो तो आसन्न कोण ऋजु कोण बनाते हैं।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
कारण (R): त्रिभुज के कोणों का योग 180° है।
दोनों सही हैं, पर R शीर्षाभिमुख कोण की व्याख्या नहीं करता।
अभिकथन (A): समांतर रेखाओं पर एकांतर कोण बराबर होते हैं।
कारण (R): सह-आंतरिक कोण भी बराबर होते हैं।
A सही है। R गलत — सह-आंतरिक का योग 180° है।
अभिकथन (A): बाह्य कोण सटे अंतःकोण के बराबर होता है।
कारण (R): बाह्य कोण दूर के दो अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।
A गलत है। R सही है, प्रमेय 6.8।
अभिकथन (A): m ∥ l और n ∥ l से m ∥ n निकलता है।
कारण (R): एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ आपस में समांतर होती हैं।
दोनों सही हैं और R, प्रमेय 6.6 के रूप में A की व्याख्या है।
संगत और एकांतर बराबर हैं। सह-आंतरिक और रैखिक युग्म 180° देते हैं।
रैखिक युग्म 6.1 है। समांतरता 6.6 है। कोण योग 6.7 है।
आसन्न कोण जिनकी शेष भुजाएँ एक रेखा बनाएँ, रैखिक युग्म हैं और उनका योग 180° होता है।
दो रेखाएँ काटें तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
पूरक 20°। संपूरक 110°।
जो रेखा दो या अधिक रेखाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटे, वह तिर्यक है।
त्रिभुज का बाह्य कोण दूर के दो अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।
(5/12) × 180° = 75° और (7/12) × 180° = 105°। शीर्षाभिमुख कोण भी 75° और 105° हैं।
संगत 58°, एकांतर 58°, सह-आंतरिक 180° − 58° = 122°।
तीसरा = 180° − 115° = 65°। बाह्य = 40° + 75° = 115°।
किरण रेखा पर हो तो योग 180°, और विलोम भी अभिगृहीत है। शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। (2/5) × 180° = 72° और (3/5) × 180° = 108°। चारों कोण 72°, 108°, 72°, 108°।
संगत बराबर, एकांतर बराबर, सह-आंतरिक का योग 180°। मान 70°, 70° और 110°। कोई एक संगत या एकांतर जोड़ा बराबर हो, या एक सह-आंतरिक जोड़ा 180° दे, तो रेखाएँ समांतर हैं।
एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ आपस में समांतर हैं। त्रिभुज के कोणों का योग 180° है। बाह्य कोण दूर के दो अंतःकोणों के योग जितना है। 180° − 135° = 45°, और 45° + 40° = 85°।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
रैखिक युग्म।
180° − 130° = 50°।
योग 180°।
संपूरक।
40।
180 − 140।
सही।
180° − 48° = 132°। एकांतर प्रमेय 6.2 से बराबर हैं और सह-आंतरिक प्रमेय 6.4 से संपूरक हैं।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
योग 180°।
समांतर रेखाओं पर सह-आंतरिक कोण संपूरक होते हैं।
प्रमेय 6.6।
एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ आपस में समांतर होती हैं।
अभिकथन (A): त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° है।
कारण (R): रैखिक युग्म का योग भी 180° है।
दोनों सही हैं, पर R कोण योग का कारण नहीं है। कारण समांतर और एकांतर कोण हैं।
गलत — रैखिक युग्म 180° बाँटता है, इसलिए 75° और 105°।
संगत कोण 68° और सह-आंतरिक 112°। नाप चित्र समझाती है। प्रमाण अभिगृहीत 6.3 और प्रमेय 6.4 से आता है।
तीसरा = 180° − 115° = 65°। बाह्य = 48° + 67° = 115°। 115° दोनों 48° और 67° से बड़ा है, क्योंकि वह उनका योग है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| रैखिक युग्म | 180° |
| शीर्षाभिमुख | equal |
| संगत | equal if parallel |
| एकांतर | equal if parallel |
| सह-आंतरिक | sum 180° |
| त्रिभुज | angle sum 180° |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।