लंबाई, चौड़ाई, मोटाई।
4 : 2 : 1।
कक्षा 9 · गणित · अध्याय 5 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Introduction to Euclid's Geometry
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — इतिहास · परिभाषाएँ · सात अभिगृहीत · पाँच अभिधारणाएँ · प्रमेय 5.1 · अभ्यास 5.1 · पाँचवीं के रूप · अभ्यास 5.2, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र एक बिंदु, एक किरण और दोनों ओर बढ़ती एक रेखा को अलग-अलग नाम के साथ दिखाता है।
बिहार की 15-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय 5 है। NCERT 2026-27 गणित मंजरी का क्रम अलग है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Geometry began in measuring, then asked for reasons · पाठ्यपुस्तक 5.1 · भारत और यूनान
«ज्यामिति» यूनानी शब्दों से है: धरती और माप। नील की बाढ़ खेत की सीमा मिटाती थी, इसलिए मिस्र में क्षेत्रफल के नियम बने। भारत में सिंधु घाटी की सड़कें समांतर थीं और ईंट का अनुपात 4 : 2 : 1 मिला। शुल्बसूत्र वेदि और अग्निकुंड की रचना के ग्रंथ हैं। श्रीयंत्र में नौ समद्विबाहु त्रिभुज मिलकर 43 छोटे त्रिभुज बनाते हैं।
वहाँ परिणाम बताए जाते थे, हर कदम का कारण नहीं। यूनान में थेलस ने व्यास वृत्त को समद्विभाजित करता है, इसका पहला ज्ञात प्रमाण दिया। यूक्लिड ने लगभग 300 ईसा पूर्व सारी ज्ञात बातें एलीमेंट्स की तेरह पुस्तकों में सजा दीं।
प्रश्न: ईंट 4 : 2 : 1 है और लंबाई 20 cm है। चौड़ाई और मोटाई निकालो।
अनुपात: लंबाई : चौड़ाई : मोटाई = 4 : 2 : 1
मान: 4 भाग = 20 cm, इसलिए 1 भाग = 5 cm। चौड़ाई = 2 × 5 = 10 cm। मोटाई = 1 × 5 = 5 cm।
इतिहास वाले उत्तर में केवल यूनान मत लिखना। सिंधु घाटी और शुल्बसूत्र भी इस अध्याय में हैं।
थेलस का प्रमाण व्यास और वृत्त का है। पाइथागोरस उसका शिष्य बताया गया है। नाम पलटना मत।
लंबाई, चौड़ाई, मोटाई।
4 : 2 : 1।
गलत — ये प्राचीन भारत के ज्यामिति-रचना ग्रंथ हैं।
हर एक को book कहा गया।
तेरह।
वृत्त और उसका व्यास।
व्यास वृत्त को दो बराबर भागों में काटता है।
सिंधु घाटी में समांतर सड़कें और 4 : 2 : 1 ईंटें मिलीं। शुल्बसूत्र वेदियों की रचना बताते हैं। यूनान में थेलस और यूक्लिड ने कथनों के कारण और प्रमाण पर जोर दिया।
The definitions the book still prints · पाठ्यपुस्तक 5.2 · बिंदु · रेखा · तल
पुस्तक यूक्लिड की ये बातें अभी छापती है। बिंदु वह है जिसका कोई भाग न हो। रेखा बिना चौड़ाई की लंबाई है। रेखा के सिरे बिंदु हैं। सरल रेखा अपने बिंदुओं के साथ समतल ढंग से पड़ी है। पृष्ठ में केवल लंबाई और चौड़ाई है। पृष्ठ के किनारे रेखाएँ हैं। समतल पृष्ठ अपनी सरल रेखाओं के साथ समतल ढंग से पड़ा है।
इन वाक्यों में भाग, चौड़ाई और «समतल ढंग» फिर परिभाषा माँगते हैं। इसलिए बिंदु, रेखा और तल आज अपरिभाषित हैं। ठोस की तीन विमाएँ हैं, पृष्ठ की दो, रेखा की एक, बिंदु की कोई नहीं। चित्र में बिंदु एक डॉट है, यद्यपि डॉट का आकार होता है।
प्रश्न: «रेखा बिना चौड़ाई की लंबाई है» को आज परिभाषा क्यों नहीं मानते?
उत्तर: लंबाई और चौड़ाई इस वाक्य से पहले परिभाषित नहीं हैं। एक शब्द समझाने को दूसरे शब्द की परिभाषा चाहिए, और श्रृंखला नहीं कटती। इसलिए रेखा को अपरिभाषित रखकर उसके चित्र और अभिगृहीतों से काम करते हैं।
«परिभाषा दो» पूछे तो पुस्तक वाली पंक्ति लिखो, और अगली पंक्ति में कहो कि आज इन्हें अपरिभाषित माना जाता है। एक तरफ़ मत छोड़ना।
किरण और रेखा एक चित्र में मत मिलाना। किरण का एक सिरा है। रेखा दोनों ओर बिना सिरे बढ़ती है।
तीन ज्यामितीय शब्द।
बिंदु, रेखा और तल।
गलत — «जिसका कोई भाग न हो» अभी अध्याय में है। मान आज अपरिभाषित है।
पृष्ठ की दो, बिंदु की शून्य।
1।
पुरानी छपी पंक्ति।
रेखाएँ।
गलत — डॉट का कुछ आकार होता है। वह बिंदु का चित्र मात्र है।
बिंदु वह है जिसका कोई भाग न हो। रेखा बिना चौड़ाई की लंबाई है। आज बिंदु और रेखा को अपरिभाषित माना जाता है, क्योंकि इन पंक्तियों के शब्द फिर परिभाषा माँगते हैं।
The seven common notions · पाठ्यपुस्तक 5.2 · अभिगृहीत
पुस्तक यूक्लिड के अभिगृहीत उसके क्रम में नहीं, इस रूप में देती है। जो बातें एक ही चीज के बराबर हों, वे आपस में बराबर हैं। बराबर में बराबर जोड़ा जाए तो पूर्ण बराबर हैं। बराबर में से बराबर घटाया जाए तो शेष बराबर हैं। जो एक-दूसरे से हूबहू मेल खाएँ वे बराबर हैं। पूर्ण अपने अंश से बड़ा है। एक ही चीज के दुगुने आपस में बराबर हैं। एक ही चीज के आधे आपस में बराबर हैं।
चौथा अभिगृहीत अध्यारोपण का आधार है। पाँचवाँ «बड़ा» का अर्थ देता है: A > B का मतलब है कि कोई C है जिससे A = B + C। अलग किस्म की राशियाँ नहीं जुड़तीं। रेखा में आयत नहीं जोड़ा जाता और कोण की तुलना पंचभुज से नहीं होती।
प्रश्न: AB = PQ और PQ = XY है। AB और XY में क्या संबंध है? कौन-सा अभिगृहीत?
उत्तर: दोनों एक ही लंबाई PQ के बराबर हैं, इसलिए AB = XY। यह पहला अभिगृहीत है। इकाई दोनों ओर वही रहती है, जैसे दोनों 5 cm हों तो AB भी 5 cm है।
«पूर्ण अंश से बड़ा है» पाँचवीं सामान्य धारणा है, पाँचवीं अभिधारणा नहीं। नंबर पूछने पर नाम भी लिखो।
रेखा और क्षेत्रफल को एक जोड़ में मत लिखना। समान किस्म ही जुड़ती है।
पहली सामान्य धारणा।
आपस में बराबर।
गलत — पूर्ण अंश से बड़ा होता है। यही पाँचवीं सामान्य धारणा है।
अध्यारोपण इसी पर टिका है।
बराबर।
किस्म अलग है।
रेखा और आयत अलग किस्म की राशियाँ हैं।
बराबर में बराबर जोड़ने पर पूर्ण बराबर होते हैं, इसलिए A + C = B + D। उदाहरण: 3 cm + 2 cm = 5 cm और 3 cm + 2 cm दूसरी ओर भी 5 cm।
The five postulates and the unique line · पाठ्यपुस्तक 5.2 · अभिधारणा · अभिगृहीत 5.1
पहली: किन्हीं दो बिंदुओं से एक सरल रेखा खींची जा सकती है। यह «कम से कम एक» कहती है। पुस्तक अलग से अभिगृहीत 5.1 रखती है: दो भिन्न बिंदुओं से ठीक एक रेखा गुजरती है। दूसरी: अंत वाला रेखाखंड दोनों ओर बढ़ाया जा सकता है। यूक्लिड जिसे terminated line कहता था, आज उसे रेखाखंड कहते हैं। तीसरी: किसी भी केन्द्र और किसी भी त्रिज्या से वृत्त खिंच सकता है। चौथी: सभी समकोण बराबर हैं।
पाँचवीं लंबी है। एक सरल रेखा दो सरल रेखाओं पर इस तरह गिरे कि उसके एक ही ओर के अंतःकोणों का योग दो समकोण से छोटा हो, तो वे रेखाएँ बढ़ाई जाएँ तो उसी ओर मिलती हैं। पहली चार के मुकाबले यह न तो छोटी है न सीधे स्पष्ट। फिर भी इसे शेष से सिद्ध नहीं किया जा सका, इसलिए अभिधारणा बनी रही।
प्रश्न: P और Q दो भिन्न बिंदु हैं। इनमें से कितनी सरल रेखाएँ गुजरती हैं?
उत्तर: अभिगृहीत 5.1 के अनुसार ठीक एक, रेखा PQ। पहली अभिधारणा अकेले «केवल एक» नहीं कहती। वही रेखा Q से P की ओर भी एक ही है।
«दो बिंदु, एक रेखा» वाले उत्तर में अभिगृहीत 5.1 का नंबर लिखो। केवल पहली अभिधारणा अधूरी रहती है।
सभी समकोण बराबर हैं, यह चौथी अभिधारणा है। 90° का माप बाद की सहमति है। अभिधारणा माप की तालिका नहीं है।
पुस्तक इसे अलग जोड़ती है।
अभिगृहीत 5.1। अभिधारणा 1 केवल खींचने की बात करती है।
सही — उसे दोनों ओर बढ़ाकर रेखा बनती है। यही दूसरी अभिधारणा है।
तीसरी अभिधारणा।
वृत्त।
वृत्त वाली तीसरी है।
चौथी अभिधारणा।
गलत — पुस्तक कहती है कि यह उनसे कहीं अधिक जटिल है।
पहली अभिधारणा कहती है कि दो बिंदुओं से एक सरल रेखा खींची जा सकती है। अभिगृहीत 5.1 जोड़ता है कि दो भिन्न बिंदुओं से ऐसी रेखा ठीक एक होती है।
Theorem 5.1 and the sum of segments · पाठ्यपुस्तक 5.2 · प्रमेय 5.1 · अभ्यास 5.1
अभिगृहीतों से जो बात सिद्ध होती है वह प्रमेय है। यूक्लिड ने अपनी शृंखला में 465 प्रमेय निकाले। प्रमेय 5.1: दो भिन्न रेखाओं का एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु नहीं हो सकता। अगर दो बिंदु उभय हों तो उन्हीं दो बिंदुओं से दो रेखाएँ जाएँगी, जो अभिगृहीत 5.1 के खिलाफ है।
B यदि A और C के बीच हो तो AC, AB और BC के मेल से बनता है। मेल खाने वाली चीजें बराबर हैं, इसलिए AB + BC = AC। समबाहु त्रिभुज की रचना तीसरी अभिधारणा से होती है: A और B को केन्द्र मानकर AB त्रिज्या के दो वृत्त, और कटाव C।
प्रश्न: B, A और C के बीच है। AB = 4 cm और BC = 5 cm। AC निकालो।
संबंध: AB + BC = AC, क्योंकि AC दोनों खंडों से मेल खाता है।
मान: AC = 4 cm + 5 cm = 9 cm।
प्रमेय 5.1 में «अधिकतम एक» लिखो। «ठीक एक» गलत हो सकता है, क्योंकि समांतर रेखाएँ मिलती ही नहीं।
AB + BC = AC तभी जब B बीच में हो। चित्र में बीच का बिंदु चिह्नित करो।
10-सेकंड रिवीजन
अद्वितीय रेखा से टकराहट।
एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु नहीं।
सही — मेल वाली सामान्य धारणा से।
चार सौ पैंसठ।
465।
AC = AB + BC = 6 cm + 3 cm = 9 cm। यह मेल की सामान्य धारणा और बीच के बिंदु वाले परिणाम से आता है।
Equivalent forms of the fifth postulate · पाठ्यपुस्तक 5.3 · अभ्यास 5.2
पाँचवीं को पहली चार से सिद्ध करने की कोशिशें असफल रहीं। असफलता से कई अन्य ज्यामितियाँ निकलीं, जिन्हें अयूक्लिडीय कहते हैं। पुस्तक दो तुल्य रूप देती है। पहला, प्लेफेयर वाला: हर रेखा l और उस पर न होने वाले हर बिंदु P से ठीक एक रेखा m जाती है जो l के समांतर हो। दूसरा: दो भिन्न प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर नहीं हो सकतीं।
अभिगृहीतों का निकाय संगत है जब उनसे ऐसा वाक्य न निकले जो किसी अभिगृहीत या पहले सिद्ध बात से टकराए। आज अभिगृहीत और अभिधारणा शब्द एक ही अर्थ में भी चलते हैं।
प्रश्न: रेखा l पर बिंदु P नहीं है। P से l के समांतर कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं?
उत्तर: प्लेफेयर वाले तुल्य रूप के अनुसार ठीक एक। यह पाँचवीं अभिधारणा के बराबर की बात है, कोई नया अलग नियम नहीं। दो खींचोगे तो वे एक-दूसरे को काटेंगी या दोनों l के समांतर नहीं रहेंगी।
प्लेफेयर को नई अभिधारणा मत कहना। लिखो कि यह पाँचवीं के तुल्य रूपों में से एक है।
संगत निकाय का अर्थ «आसान निकाय» नहीं है। अर्थ है: भीतरी विरोध न निकले।
10-सेकंड रिवीजन
प्लेफेयर।
ठीक एक। यह पाँचवीं के तुल्य है।
गलत — कोशिशें असफल रहीं। इसी से अयूक्लिडीय ज्यामितियाँ खुलीं।
विरोध न हो।
संगत।
दूसरा तुल्य रूप।
वे एक ही रेखा के समांतर नहीं हो सकतीं।
पहला: रेखा के बाहर के बिंदु से ठीक एक समांतर। दूसरा: दो भिन्न प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर नहीं हो सकतीं। असफल प्रमाणों से अयूक्लिडीय ज्यामितियाँ विकसित हुईं।
प्रकार चुनो। पाठों के 31 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
465 प्रमेयों की संख्या है।
13।
लंबाई सबसे बड़ी।
4 : 2 : 1।
पुरानी पंक्तियाँ छपी रहती हैं।
बिंदु, रेखा और तल।
बिंदु की शून्य, पृष्ठ की दो।
1।
अभिधारणा ज्यामिति की है।
पाँचवीं सामान्य धारणा।
कोई केन्द्र, कोई त्रिज्या।
तीसरी अभिधारणा।
अभिगृहीत 5.1।
ठीक एक।
मिलना एक बिंदु पर चल सकता है।
एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु नहीं।
प्लेफेयर रूप।
ठीक एक।
पहली चार काफी नहीं पड़ीं।
असफल प्रमाणों से।
टकराहट न हो।
निगमित विरोध न हो।
चौथी सामान्य धारणा।
मेल खाने वाली चीजें बराबर हैं।
दोनों खंड मिलकर पूरा।
AB + BC।
सही — इसे पहला ज्ञात प्रमाण माना गया है।
गलत — बिंदु अपरिभाषित है। पंक्ति पुस्तक में उदाहरण के रूप में छपी है।
गलत — रेखा और आयत एक जोड़ में नहीं आते।
गलत — अद्वितीयता अभिगृहीत 5.1 में अलग कही गई है।
सही — चौथी अभिधारणा।
गलत — प्रमेय 5.1 एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु मना करता है।
सही — बाहर के बिंदु से ठीक एक समांतर।
गलत — अभिगृहीत बिना प्रमाण के माना जाता है। प्रमेय सिद्ध होता है।
13।
प्रमेय 465 हैं।
0।
रेखा की एक।
वृत्त।
कोई केन्द्र, कोई त्रिज्या।
1।
अभिगृहीत 5.1।
9।
4 + 5।
1।
प्लेफेयर।
संगत।
आसान का पर्याय नहीं।
465।
पुस्तकें 13 हैं।
समकोण अभिधारणा है, पूर्ण सामान्य धारणा है, उभय बिंदु प्रमेय है, बिंदु वाली पंक्ति पुरानी परिभाषा है।
13 पुस्तकें, 465 प्रमेय, 5.1 अद्वितीय रेखा, पृष्ठ की दो विमाएँ।
अभिकथन (A): दो भिन्न बिंदुओं से ठीक एक रेखा जाती है।
कारण (R): अभिगृहीत 5.1 यह अद्वितीयता अलग से कहता है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): बिंदु आज अपरिभाषित है।
कारण (R): सभी समकोण बराबर हैं।
दोनों सही हैं, पर R बिंदु के अपरिभाषित होने की व्याख्या नहीं करता।
अभिकथन (A): AB + BC = AC जब B, A और C के बीच हो।
कारण (R): रेखा की लंबाई और आयत का क्षेत्रफल एक ही जोड़ में रखे जाते हैं।
A सही है। R गलत — अलग किस्म की राशियाँ नहीं जुड़तीं।
अभिकथन (A): पाँचवीं अभिधारणा पहली चार से सिद्ध हो चुकी है।
कारण (R): असफल कोशिशों से अयूक्लिडीय ज्यामितियाँ खुलीं।
A गलत है। R सही है।
अभिकथन (A): दो भिन्न रेखाएँ तीन बिंदु साझा नहीं कर सकतीं।
कारण (R): दो साझा बिंदु भी अभिगृहीत 5.1 से टकराएँगे।
दोनों सही हैं और R, प्रमेय 5.1 की व्याख्या है।
पूर्ण अभिगृहीत है। समकोण और वृत्त अभिधारणाएँ हैं। उभय बिंदु प्रमेय 5.1 है।
ईंट और शुल्बसूत्र भारत के हैं। तेरह पुस्तकें एलीमेंट्स की हैं। एक समांतर प्लेफेयर है।
जो कथन परिभाषा, अभिगृहीत और पहले सिद्ध बातों से सिद्ध हो, वह प्रमेय है।
दो भिन्न बिंदुओं से ठीक एक रेखा गुजरती है।
दो भिन्न रेखाओं का एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु नहीं हो सकता।
सभी समकोण एक-दूसरे के बराबर हैं।
रेखा के बाहर के बिंदु से उस रेखा के समांतर ठीक एक रेखा जाती है।
AC = 7 cm + 2 cm = 9 cm। मेल खाने वाली चीजें बराबर हैं, और बीच का बिंदु दोनों खंडों को पूरा बनाता है।
बिंदु वह है जिसका कोई भाग न हो। «भाग» फिर परिभाषा माँगता है, इसलिए श्रृंखला नहीं कटती। आज बिंदु अपरिभाषित है।
दो बिंदुओं से एक रेखा खिंच सकती है। रेखाखंड दोनों ओर बढ़ाया जा सकता है। किसी केन्द्र और त्रिज्या से वृत्त खिंच सकता है। सभी समकोण बराबर हैं।
एक ही चीज के बराबर बातें आपस में बराबर हैं। मेल खाने वाली चीजें बराबर हैं। पूर्ण अंश से बड़ा है। रेखा और आयत अलग किस्म हैं, इसलिए उनका जोड़ नहीं बनता। AB और PQ दोनों 5 cm हैं, इसलिए AB = PQ।
अभिधारणा 1 कहती है कि रेखा खींची जा सकती है। अभिगृहीत 5.1 कहता है कि वह ठीक एक है। अगर दो रेखाएँ दो बिंदु साझा करें तो उन दो बिंदुओं से दो रेखाएँ जाएँगी, जो 5.1 के खिलाफ है। इसलिए उभय बिंदु एक से अधिक नहीं।
तिर्यक के एक ओर अंतःकोणों का योग 180° से छोटा हो तो रेखाएँ उसी ओर मिलती हैं। तुल्य रूप: बाहर के बिंदु से ठीक एक समांतर, और दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर नहीं। इसे पहली चार से सिद्ध न कर पाने पर अयूक्लिडीय ज्यामितियाँ खुलीं।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
अभिधारणा 1 काफी नहीं।
अभिगृहीत 5.1।
रेखा की एक, ठोस की तीन।
2।
बीच।
सिरे पर हो तो योग ऐसा नहीं।
गलत — यह पाँचवीं के दूसरे तुल्य रूप के खिलाफ है।
4 भाग = 12 cm, 1 भाग = 3 cm। चौड़ाई 6 cm और मोटाई 3 cm।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
अद्वितीयता अलग अभिगृहीत है।
अभिगृहीत 5.1 ठीक एक रेखा कहता है।
प्रमेय 5.1।
दो भिन्न रेखाओं का एक से अधिक उभयनिष्ठ बिंदु नहीं होता।
अभिकथन (A): रेखाखंड को दोनों ओर बढ़ाकर रेखा मिलती है।
कारण (R): यह बढ़ाव प्रमेय 5.1 है।
A सही है, दूसरी अभिधारणा। R गलत — 5.1 उभय बिंदु के बारे में है।
गलत — संगत का अर्थ है कि निकाय से विरोध न निकले।
दो खूँटे दो भिन्न बिंदु हैं। अभिगृहीत 5.1 कहता है कि उनसे ठीक एक रेखा जाती है, इसलिए सीमा की सरल रेखा एक ही खिंचेगी। पहली अभिधारणा केवल यह कहती है कि रेखा खींची जा सकती है।
अलग किस्म की राशियाँ नहीं जुड़तीं। कोण और लंबाई एक जोड़ नहीं हैं। सही जोड़: 4 cm + 5 cm = 9 cm, या 30° + 60° = 90°।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| अपरिभाषित | point, line, plane |
| अभिगृहीत | seven common notions |
| अभिधारणा 1–4 | line, extension, circle, right angles |
| अभिधारणा 5 | lines meet if interior sum < 180° |
| अभिगृहीत 5.1 | unique line through two points |
| प्रमेय 5.1 | at most one common point |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।