द्रव्यमान 6.9, 23.0, 39.0।
Na बीच में है और उसका द्रव्यमान औसत के पास है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 5 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Periodic Classification of Elements
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 5.1 हाइड्रोजन · 5.2 समस्थानिक · 5.3 कोबाल्ट-निकल · 5.4 समूह 1 · 5.5 आवर्त 2 · 5.6 संयोजकता · 5.7–5.8 आकार · 5.9 धातु-अधातु · 5.10 छोड़ना · 5.11 पाना, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र समूह 1 और 17 की छोटी पट्टी है — आवर्त 2 और 3 में बाएँ धातु और दाएँ हैलोजन बैठे हैं।
बिहार की 16-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय 5 है। NCERT 2026-27 की 13-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय नहीं है। उस किताब का अध्याय 5 जैव प्रक्रम है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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The first sorting and Dobereiner’s triads · खंड 5.1 · सारणी 5.1 और 5.2
जब तत्व बढ़ते गए तो गुणों को एक जगह रखना कठिन हो गया। सबसे पहला छाँटना धातु और अधातु था। 1817 में जर्मन रसायनज्ञ डोबेराइनर ने समान गुण वाले तीन तत्वों की टोली बनाई। इन्हें त्रिक कहा।
बढ़ते परमाणु द्रव्यमान में बीच वाले का द्रव्यमान शेष दो के द्रव्यमान का लगभग औसत होता है। Li 6.9, Na 23.0 और K 39.0 एक साफ त्रिक है। उस समय के ज्ञात तत्वों में केवल तीन त्रिक बन पाए, इसलिए यह तरीका सब तत्वों पर नहीं चला।
अंग्रेज़ी छपाई 118 तत्व लिखती है, जिनमें 98 प्राकृतिक हैं। हिंदी छपाई 114 लिखती है और सन् 1800 तक लगभग 30। परीक्षा में अपनी किताब का अंक लिखो।
प्रश्न: सारणी 5.1 के तीनों समूह जाँचो। कौन-से त्रिक हैं?
सूत्र: बीच का द्रव्यमान ≈ (पहले + तीसरे) / 2
गणना: समूह B, Ca और Ba: (40.1 + 137.3) / 2 = 177.4 / 2 = 88.7। Sr 87.6 के पास है। त्रिक है।
समूह C, Cl और I: (35.5 + 126.9) / 2 = 162.4 / 2 = 81.2। Br 79.9 के पास है। त्रिक है।
समूह A, N और As: (14.0 + 74.9) / 2 = 44.45। P का 31.0 इससे दूर है। त्रिक नहीं। इकाई u है।
| समूह | तत्व और द्रव्यमान | निर्णय |
|---|---|---|
| A | N 14.0, P 31.0, As 74.9 | त्रिक नहीं |
| B | Ca 40.1, Sr 87.6, Ba 137.3 | त्रिक |
| C | Cl 35.5, Br 79.9, I 126.9 | त्रिक |
औसत का सूत्र लिखो, फिर संख्या रखो, फिर u लगाओ। केवल «लगभग बराबर» अधूरा रहता है।
समूह A को त्रिक मत लिखना। 44.45 और 31.0 मेल नहीं खाते।
द्रव्यमान 6.9, 23.0, 39.0।
Na बीच में है और उसका द्रव्यमान औसत के पास है।
गलत — औसत 44.45 है और P का द्रव्यमान 31.0 है।
उन्नीसवीं सदी की शुरुआत।
1817।
त्रिक इससे बाद का प्रयास है।
सबसे पहले ज्ञात तत्वों को धातु और अधातु में रखा गया।
मध्य द्रव्यमान = (6.9 + 39.0) / 2 = 45.9 / 2 = 22.95 u। Na का दिया द्रव्यमान 23.0 u है, इसलिए यह त्रिक है।
Newlands’ law of octaves · खंड 5.1.2 · सारणी 5.3
1866 में अंग्रेज़ वैज्ञानिक न्यूलैंड्स ने ज्ञात तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान में रखा। शुरू हाइड्रोजन से था और अंत 56वें तत्व थोरियम पर। उन्होंने देखा कि गुण संगीत के सुरों की तरह दोहराते हैं। भारतीय सुर सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि हैं। आठवाँ सुर अगली पंक्ति का पहला सुर बनता है।
गिनती ऐसे करो: Li को पहला मानो, फिर Be, B, C, N, O, F, और आठवाँ Na। Na, Li वाले ही सुर के नीचे आता है। Be और Mg भी एक सुर में हैं। इसे अष्टक का नियम कहते हैं।
नियम कैल्सियम तक ही ठीक चला। उसके बाद हर आठवाँ तत्व पहले जैसा नहीं रहा। न्यूलैंड्स ने मान लिया कि प्रकृति में केवल 56 तत्व हैं। बाद के नए तत्व इस नियम में नहीं बैठे।
प्रश्न: सारणी 5.3 में कोबाल्ट और निकल को एक ही खाने में क्यों गलत माना गया?
उत्तर: Co और Ni एक ही खाने में रखे गए और वह खाना F, Cl, Br वाले सुर में है। Co और Ni के गुण उन हैलोजनों जैसे नहीं हैं। Fe गुणों में Co और Ni के पास है, पर उसे दूर रख दिया गया। इसलिए अष्टक हल्के तत्वों तक ही चले।
«आठवाँ» की गिनती में पहला तत्व भी शामिल है। Li के बाद सातवाँ Na नहीं, गिनती का आठवाँ Na है।
सीमा तीन लिखो: केवल Ca तक, केवल 56 तत्व मान लिए, और असमान तत्वों को एक सुर में रख दिया।
आठवीं गिनती।
Li, Be, B, C, N, O, F, Na। आठवाँ Na है।
गलत — कैल्सियम के बाद हर आठवाँ तत्व पहले जैसा नहीं रहा।
थोरियम उस गिनती का अंतिम था।
56।
नियम केवल कैल्सियम तक ठीक चला। Co और Ni को एक खाने में F, Cl, Br के साथ रख दिया गया, जबकि गुण अलग हैं।
Mendeleev’s law and Activity 5.1 · खंड 5.2 · सारणी 5.4 · क्रियाकलाप 5.1
जब मेंडलीफ ने काम शुरू किया तब 63 तत्व ज्ञात थे। उन्होंने 63 कार्ड पर गुण लिखे और समान कार्ड दीवार पर साथ पिन किए। आधार दो थे: बढ़ता परमाणु द्रव्यमान, और ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन के साथ बने यौगिक का सूत्र। ये दोनों बहुत सक्रिय हैं।
नियम: तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्त फलन होते हैं। खड़े स्तंभ समूह हैं और पड़ी पंक्तियाँ आवर्त। सारणी 1872 में एक जर्मन पत्रिका में छपी। समूह के ऊपर R उस समूह के किसी भी तत्व का स्थान लेता है। कार्बन का CH4, RH4 लिखा गया और CO2, RO2।
कभी-कभी भारी तत्व को हल्के से पहले रखना पड़ा ताकि गुण मिलें। Co का द्रव्यमान 58.9 है और Ni का 58.7, फिर भी Co पहले है। दूसरी ऐसी जगह Te (127.60) है, जो I (126.90) से पहले है।
| समूह | ऑक्साइड | हाइड्राइड |
|---|---|---|
| I | R2O | RH |
| II | RO | RH2 |
| III | R2O3 | RH3 |
| IV | RO2 | RH4 |
| V | R2O5 | RH3 |
| VI | RO3 | RH2 |
| VII | R2O7 | RH |
| VIII | RO4 | सारणी में नहीं |
हाइड्रोजन क्षार धातुओं जैसी भी है और हैलोजन कुल जैसी भी। क्षार धातुओं की तरह यह हैलोजन, ऑक्सीजन और सल्फर से मिलती है: HCl और NaCl, H2O और Na2O, H2S और Na2S।
हैलोजन की तरह यह भी द्विपरमाणुक अणु H2 बनाती है और धातु तथा अधातु दोनों से सहसंयोजक यौगिक बनाती है।
मेंडलीफ की सारणी में हाइड्रोजन का कोई एक तय स्थान नहीं है। यही पहली कमी है। समूह और आवर्त पूछने पर एक ही उत्तर नहीं बनता।
प्रश्न: K, C, Al, Si और Ba के ऑक्साइड का सूत्र लिखो।
उत्तर: K समूह I में है, ऑक्साइड R2O, अतः K2O। C समूह IV, RO2, अतः CO2। Al समूह III, R2O3, अतः Al2O3। Si समूह IV, RO2, अतः SiO2। Ba समूह II, RO, अतः BaO।
ऑक्साइड का सूत्र समूह से निकालो। K2O और KO को एक मत लिखना। समूह I का ऑक्साइड R2O है।
Co–Ni और Te–I दोनों जगह भारी तत्व पहले है। एक ही उदाहरण से उत्तर अधूरा लगता है।
आधुनिक नियम संख्या वाला है।
गुण परमाणु द्रव्यमान के आवर्त फलन हैं।
हाइड्राइड RH4 है।
CO2 को RO2 लिखा गया। CH4 को RH4।
सही — द्रव्यमान 58.9 और 58.7 हैं, क्रम गुणों के लिए उलटा है।
उतने ही कार्ड बने।
63।
क्षार धातु और हैलोजन, दोनों से समानता है।
कोई एक समूह और एक आवर्त तय नहीं हो सका। यही पहली कमी है।
Al समूह III में है, ऑक्साइड R2O3, अतः Al2O3। Si समूह IV में है, ऑक्साइड RO2, अतः SiO2।
The predictions, noble gases and Activity 5.2 · सारणी 5.5 · क्रियाकलाप 5.2 · कमियाँ
मेंडलीफ ने कुछ घर खाली छोड़ दिए। संस्कृत शब्द एका का अर्थ एक है। खाली घर का नाम ऊपर वाले तत्व में एका जोड़कर रखा गया। बाद में स्कैंडियम एका-बोरॉन जैसा निकला, गैलियम एका-ऐलुमिनियम जैसा, और जर्मेनियम एका-सिलिकॉन जैसा।
पुस्तक संख्या केवल एका-ऐलुमिनियम की देती है। अनुमानित द्रव्यमान 68, गैलियम 69.7। ऑक्साइड E2O3 और Ga2O3। क्लोराइड ECl3 और GaCl3। एका-सिलिकॉन के लिए अलग संख्या-सारणी नहीं छपी। वह समूह IV की खाली जगह थी, और जर्मेनियम ने उसे भरा। समूह IV का ऑक्साइड RO2 लिखा जाता है।
हीलियम, निऑन और आर्गन बहुत बाद में मिले क्योंकि वे निष्क्रिय हैं और हवा में बहुत कम हैं। इन्हें एक नया समूह दे दिया गया और पुराना क्रम नहीं टूटा।
क्लोरीन के समस्थानिक Cl-35 और Cl-37 लो। द्रव्यमान अलग है। क्या इन्हें दो अलग घर मिलेंगे? रासायनिक गुण एक जैसे हैं। क्या दोनों एक ही स्थान पर रहेंगे?
मेंडलीफ का नियम द्रव्यमान पर टिका था, इसलिए समस्थानिक एक चुनौती बन गए। एक और कमी यह है कि एक तत्व से अगले तक द्रव्यमान नियमित कदम से नहीं बढ़ता। भारी तत्वों के बीच कितने तत्व और मिल सकते हैं, यह द्रव्यमान से नहीं कहा जा सकता।
प्रश्न: Cl-35 और Cl-37 को मेंडलीफ अलग घर क्यों नहीं दे पाते, और आधुनिक सारणी क्या करती है?
उत्तर: गुण एक जैसे हैं, इसलिए अलग घर रासायनिक परिवार तोड़ देता। द्रव्यमान अलग है, इसलिए द्रव्यमान वाला नियम भी दोनों को एक घर नहीं समझा पाता। आधुनिक सारणी परमाणु संख्या 17 देखती है। दोनों का Z एक है, अतः एक ही स्थान।
गैलियम वाली तीन पंक्तियाँ याद रखो: द्रव्यमान 68 और 69.7, ऑक्साइड E2O3 और Ga2O3, क्लोराइड ECl3 और GaCl3।
उत्कृष्ट गैसों को «पुराना क्रम टूटा» मत लिखना। नया समूह जुड़ा और पुराने समूह अपनी जगह रहे।
ऑक्साइड Ga2O3।
गैलियम। स्कैंडियम एका-बोरॉन है और जर्मेनियम एका-सिलिकॉन।
गलत — समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं, द्रव्यमान अलग होता है।
समूह IV की खाली जगह।
जर्मेनियम।
वे निष्क्रिय हैं और देर से मिलीं।
नया समूह जुड़ गया और पहले से रखे तत्व नहीं हिले।
हाइड्रोजन को एक तय स्थान नहीं मिला। समस्थानिकों के गुण समान और द्रव्यमान अलग होते हैं, इसलिए द्रव्यमान वाला नियम उन्हें नहीं सँभाल पाया। द्रव्यमान नियमित कदम से भी नहीं बढ़ता।
The modern periodic law — Activity 5.3 · खंड 5.3 · मोज़ले 1913 · क्रियाकलाप 5.3
1913 में हेनरी मोज़ले ने दिखाया कि परमाणु संख्या, द्रव्यमान से अधिक मूल गुण है। परमाणु संख्या नाभिक के प्रोटॉनों की गिनती है और अगले तत्व पर एक बढ़ती है।
आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं। बढ़ती परमाणु संख्या Z से जो सारणी बनती है वही आधुनिक आवर्त सारणी है। गुणों का अनुमान अब अधिक साफ लगता है।
कोबाल्ट और निकल का स्थान अब परमाणु संख्या से तय है। Co का Z = 27 और Ni का Z = 28। भारी द्रव्यमान वाले Co को पहले रखने की जरूरत नहीं रही। क्रम अपने आप Z के साथ सही है।
समस्थानिकों का स्थान भी Z से तय होता है। Cl-35 और Cl-37 दोनों का Z = 17 है, इसलिए एक ही घर।
हाइड्रोजन और हीलियम के बीच Z = 1.5 वाला तत्व नहीं हो सकता, क्योंकि प्रोटॉन पूरी संख्या में बढ़ते हैं। हाइड्रोजन आधुनिक सारणी में भी अटका है। आवर्त 1 में इसे समूह 1 या समूह 17, दोनों में सोचा जा सकता है। कारण आगे के क्रियाकलाप में खुलता है।
प्रश्न: Z = 1.5 क्यों असंभव है?
उत्तर: परमाणु संख्या प्रोटॉनों की गिनती है। एक तत्व से अगले पर यह 1 बढ़ती है। 1 और 2 के बीच कोई पूरी संख्या नहीं है, इसलिए हाइड्रोजन और हीलियम के बीच कोई तत्व नहीं बैठता।
मेंडलीफ वाला वाक्य द्रव्यमान कहता है। आधुनिक वाक्य संख्या कहता है। उत्तर में दोनों शब्द अलग रखो।
Z = 1.5 वाले प्रश्न में «प्रोटॉन पूरी संख्या» लिखो। केवल «नहीं» काफी नहीं।
10-सेकंड रिवीजन
मोज़ले, 1913।
गुण परमाणु संख्या के आवर्त फलन हैं।
गलत — दोनों का परमाणु क्रमांक 17 है, इसलिए एक ही स्थान।
निकल 28 है।
27। निकल 28 है, इसलिए Ni बाद में आता है।
क्रम अब परमाणु संख्या का है। Co का Z 27 और Ni का 28 है, इसलिए द्रव्यमान उलटने की जरूरत नहीं। Cl-35 और Cl-37 का Z एक ही 17 है, इसलिए दोनों एक स्थान पर रहते हैं।
Groups and periods — Activities 5.4 and 5.5 · खंड 5.3.1 · क्रियाकलाप 5.4 · 5.5
आधुनिक सारणी में 18 खड़े समूह और 7 पड़ी आवर्त हैं। एक समूह के तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। नीचे जाते हुए कोश बढ़ते हैं। एक आवर्त के तत्वों में भरे हुए कोशों की संख्या समान होती है। बाएँ से दाएँ परमाणु संख्या एक बढ़े तो संयोजी इलेक्ट्रॉन भी एक बढ़ता है।
मेंडलीफ का यौगिक-सूत्र वाला आधार इसलिए अच्छा था क्योंकि समान संयोजी इलेक्ट्रॉन वाले तत्व समान तरह के बंध बनाते हैं और एक समूह में आते हैं।
समूह 1 के तत्व हैं: H, Li, Na, K, Rb, Cs, Fr। पहले तीन, परमाणु संख्या के क्रम में, H, Li और Na हैं।
विन्यास: H है 1। Li है 2, 1। Na है 2, 8, 1। तीनों में 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन है। यही समानता है। कोशों की संख्या नीचे बढ़ती है।
हाइड्रोजन फिर भी अटका रहता है। एक संयोजी इलेक्ट्रॉन उसे समूह 1 में ले जाता है। बाह्य कोश भरने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की कमी उसे समूह 17 की याद दिलाती है। आवर्त पहले वाला ही है।
आवर्त 2: Li, Be, B, C, N, O, F, Ne। विन्यास 2,1 से 2,8 तक। संयोजी इलेक्ट्रॉन समान नहीं हैं। कोश दो-दो हैं। F समूह 17 में है, विन्यास 2, 7। Cl भी समूह 17 में है, विन्यास 2, 8, 7। दोनों के बाह्य कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।
आवर्त 3: Na, Mg, Al, Si, P, S, Cl, Ar। इनके इलेक्ट्रॉन K, L और M कोश में हैं। हर आवर्त एक नया कोश भरते हुए दिखाता है।
प्रश्न: पहले तीन आवर्तों में तत्वों की संख्या 2n² से निकालो।
सूत्र: कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²। n नाभिक से कोश का नंबर है।
K, n = 1: 2 × (1)² = 2। पहले आवर्त में 2 तत्व।
L, n = 2: 2 × (2)² = 8। दूसरे आवर्त में 8 तत्व।
M, n = 3: 2 × (3)² = 18। पर बाह्यतम कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रहते, इसलिए तीसरे आवर्त में भी 8 तत्व। चौथे आवर्त में 18 तत्व हैं।
F और Cl दोनों के बाह्य इलेक्ट्रॉन 7 लिखो। केवल «समूह 17» नाम अधूरा रहता है।
2n² में n = 3 पर 18 आता है, फिर भी तीसरा आवर्त 8 का है। यह कदम छोड़ने पर अंक कटते हैं।
10-सेकंड रिवीजन
आवर्त 7 हैं।
18 समूह और 7 आवर्त।
सही — नीचे केवल कोशों की संख्या बढ़ती है।
L कोश, 2 × 4।
8।
समूह 1, आवर्त 3।
2, 8, 1। एक संयोजी इलेक्ट्रॉन है।
विन्यास 2, 7 और 2, 8, 7।
दोनों के बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं। Cl आवर्त 3 में है।
अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²। K में n = 1, 2 × 1 = 2, अतः आवर्त 1 में 2 तत्व। L में n = 2, 2 × 4 = 8, अतः आवर्त 2 में 8 तत्व।
Valency — Activity 5.6 · खंड 5.3.2 · क्रियाकलाप 5.6
संयोजकता बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों से निकलती है। यदि संयोजी इलेक्ट्रॉन 4 या उससे कम हों तो संयोजकता उतनी ही है। यदि 4 से अधिक हों तो संयोजकता 8 में से घटाकर निकलती है। भरा हुआ बाह्य कोश संयोजकता 0 देता है।
आवर्त में बाएँ से दाएँ संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 0 तक घटती है। समूह में नीचे संयोजकता नहीं बदलती, क्योंकि संयोजी इलेक्ट्रॉन वही रहते हैं।
मैग्नीशियम का परमाणु क्रमांक 12 है। विन्यास 2, 8, 2। संयोजी इलेक्ट्रॉन 2 हैं, जो 4 से कम हैं। संयोजकता 2।
सल्फर का परमाणु क्रमांक 16 है। विन्यास 2, 8, 6। संयोजी इलेक्ट्रॉन 6 हैं। संयोजकता 8 − 6 = 2।
पहले बीस तत्वों पर यही नियम चलता है। आवर्त 2 में Li से Ne तक संयोजकता 1, 2, 3, 4, 3, 2, 1, 0 है। आवर्त 3 में Na से Ar तक वही क्रम है। नीचे एक समूह में संख्या वही रहती है।
प्रश्न: विन्यास 2, 8, 7 वाले तत्व की संयोजकता और समूह बताओ।
गणना: संयोजी इलेक्ट्रॉन = 7। संयोजकता = 8 − 7 = 1। सात बाहरी इलेक्ट्रॉन समूह 17 का चिह्न हैं। परमाणु क्रमांक 2 + 8 + 7 = 17, अर्थात् क्लोरीन।
S की संयोजकता 6 मत लिखना। 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं, संयोजकता 2 है।
आवर्त में संयोजकता एक सीधी चढ़ाई नहीं है। 4 के बाद घटती है। Ne और Ar पर 0 है।
10-सेकंड रिवीजन
विन्यास 2, 8, 2।
संयोजी इलेक्ट्रॉन 2 हैं, अतः संयोजकता 2।
गलत — संयोजी इलेक्ट्रॉन वही रहते हैं, इसलिए संयोजकता वही रहती है।
8 − 6।
2। विन्यास 2, 8, 6 है।
N का विन्यास 2, 5।
C की संयोजकता 4 है। N में 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं, संयोजकता 8 − 5 = 3।
Z = 12 का विन्यास 2, 8, 2 है। संयोजी इलेक्ट्रॉन 2 हैं, संयोजकता 2। Z = 16 का विन्यास 2, 8, 6 है। संयोजकता 8 − 6 = 2।
Atomic size — Activities 5.7 and 5.8 · खंड 5.3.2 · क्रियाकलाप 5.7 · 5.8
परमाणु आकार अलग पड़े परमाणु की त्रिज्या है: नाभिक के केंद्र से बाह्यतम कोश तक। हाइड्रोजन की त्रिज्या 37 pm है। 1 pm = 10⁻¹² m।
आवर्त में बाएँ से दाएँ नाभिकीय आवेश बढ़ता है। वह इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर खींचता है और आकार घटता है। समूह में नीचे नया कोश जुड़ता है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं, इसलिए आवेश बढ़ने पर भी आकार बढ़ता है।
दी गई त्रिज्याएँ आवर्त के क्रम में नहीं हैं। B 88 pm, Be 111 pm, O 66 pm, N 74 pm, Li 152 pm, C 77 pm।
घटता क्रम: Li 152, Be 111, B 88, C 77, N 74, O 66। यही आवर्त 2 का बायाँ-से-दायाँ क्रम है। इस सूची में सबसे बड़ा परमाणु Li है और सबसे छोटा O। बाएँ से दाएँ त्रिज्या घटती है।
Na 186 pm, Li 152 pm, Rb 244 pm, Cs 262 pm, K 231 pm।
बढ़ता क्रम: Li 152, Na 186, K 231, Rb 244, Cs 262। सबसे छोटा Li और सबसे बड़ा Cs। समूह में नीचे आकार बढ़ता है, क्योंकि नया कोश जुड़ता है।
प्रश्न: हाइड्रोजन की 37 pm त्रिज्या को मीटर में लिखो।
सूत्र: मीटर में आकार = (pm में त्रिज्या) × 10⁻¹²
गणना: 37 × 10⁻¹² m = 3.7 × 10⁻¹¹ m।
इसी इकाई में आवर्त 2 का घटता क्रम Li से O तक है, और समूह 1 का बढ़ता क्रम Li से Cs तक।
5.7 की सूची को ज्यों का त्यों मत उतारना। घटता क्रम Li, Be, B, C, N, O है।
कारण अलग हैं। आवर्त में नाभिकीय खिंचाव। समूह में नया कोश। एक ही वाक्य में मत मिलाना।
10-सेकंड रिवीजन
152 pm।
Li, 152 pm। सबसे छोटा O, 66 pm।
262 pm।
Cs, 262 pm। सबसे छोटा Li, 152 pm।
गलत — नाभिकीय आवेश बढ़ने से त्रिज्या घटती है।
1 pm = 10⁻¹² m।
37 pm।
बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं।
नया कोश जुड़ता है, इसलिए नाभिक और बाहरी इलेक्ट्रॉन की दूरी बढ़ती है।
Li 152, Be 111, B 88, C 77, N 74, O 66 pm। बाएँ से दाएँ नाभिकीय आवेश बढ़ता है और इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के पास खींचता है, इसलिए आकार घटता है।
Metals and non-metals — Activities 5.9 to 5.11 · क्रियाकलाप 5.9 · 5.10 · 5.11
आवर्त 3 में Na और Mg बाईं ओर धातु हैं। सल्फर और क्लोरीन दाईं ओर अधातु हैं। बीच का सिलिकॉन धातु और अधातु दोनों के कुछ गुण दिखाता है। इसे उपधातु कहते हैं।
टेढ़ी रेखा के किनारे बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, ऐन्टिमनी, टेल्यूरियम और पोलोनियम उपधातु हैं। धातु इलेक्ट्रॉन छोड़ती हैं, अर्थात् विद्युत-धनात्मक होती हैं। अधातु इलेक्ट्रॉन लेती हैं। धातुओं के ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं और अधातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय।
Na, Mg और Al धातु हैं और सारणी की बाईं ओर हैं। Si उपधातु है। P, S और Cl अधातु हैं और दाईं ओर हैं। Ar उत्कृष्ट गैस है। धातु बाएँ, अधातु दाएँ।
आवर्त में दाईं ओर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन छोड़ना कठिन होता जाता है। समूह में नीचे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हैं, आवेश का प्रभाव घटता है, और इलेक्ट्रॉन आसानी से छूटते हैं।
इसीलिए धात्विक गुण आवर्त में घटता है और समूह में नीचे बढ़ता है।
आवर्त में बाएँ से दाएँ इलेक्ट्रॉन पाने की प्रवृत्ति बढ़ती है। समूह में नीचे यह प्रवृत्ति घटती है। अधातुएँ दाईं ओर और ऊपर की ओर मिलती हैं। ये प्रवृत्तियाँ ऑक्साइड की प्रकृति भी बताती हैं: धातु का ऑक्साइड क्षारकीय, अधातु का सामान्यतः अम्लीय।
प्रश्न: Ga, Ge, As, Se और Be में सबसे अधिक धात्विक गुण किसमें होगा?
उत्तर: धात्विक गुण बाईं ओर और नीचे अधिक होता है। Be आवर्त 2 में ऊपर है। Ge, As और Se, Ga से दाईं ओर हैं। Ga इस सूची में सबसे बाएँ-नीचे की धातु है, इसलिए धात्विक गुण सबसे अधिक उसी में है।
उपधातुओं की सूची में सात नाम हैं। केवल सिलिकॉन लिखोगे तो आवर्त 3 का उदाहरण बनेगा, पूरी रेखा नहीं।
इलेक्ट्रॉन छोड़ना और पाना उलटी दिशा में चलते हैं। धात्विक गुण छोड़ने वाली दिशा है।
10-सेकंड रिवीजन
धातु और अधातु के बीच।
सिलिकॉन उपधातु है। Na धातु है, S और Cl अधातु।
गलत — इलेक्ट्रॉन छोड़ना कठिन होता है, इसलिए धात्विक गुण घटता है।
धातुओं के ऑक्साइड क्षारकीय हैं।
अम्लीय।
समूह में नीचे बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर होता है, इसलिए छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ती है। आवर्त में दाएँ प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इसलिए छोड़ना कठिन होता है। धात्विक गुण समूह में बढ़ता है और आवर्त में घटता है।
प्रकार चुनो। पाठों के 45 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
(पहले + तीसरे) / 2।
बीच वाला द्रव्यमान शेष दो का लगभग औसत होता है।
औसत 44.45, P का द्रव्यमान 31।
N, P, As त्रिक नहीं बनाते।
56वाँ तत्व।
थोरियम, 56वाँ तत्व।
हल्के तत्व।
कैल्सियम तक। उसके बाद हर आठवाँ तत्व पहले जैसा नहीं रहा।
एक जर्मन पत्रिका।
1872 में।
K2O इसी रूप का है।
R2O। हाइड्राइड RH है।
समूह II, RO।
BaO।
गैलियम एका-ऐलुमिनियम है।
स्कैंडियम।
समूह 18 हैं।
7 आवर्त।
M कोश 18 समा सकता है, बाह्य कोश 8।
8 तत्व।
यह Mg है।
2।
नाभिकीय खिंचाव बढ़ता है।
घटता है।
छोड़ना कठिन होता है।
इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से छोड़ना गलत है। प्रवृत्ति घटती है।
संयोजकता 2।
Mg। क्लोराइड XCl2 समूह II जैसा है।
गलत — केवल तीन त्रिक पहचाने गए।
सही — गिनती का आठवाँ Na है।
गलत — Te 127.60 है और I 126.90। भारी Te को गुणों के कारण पहले रखा गया।
गलत — वे निष्क्रिय हैं और हवा में बहुत कम हैं, इसलिए देर से मिलीं।
सही — और आवर्त 7 हैं।
गलत — संयोजी इलेक्ट्रॉन 1 से 8 तक बढ़ते हैं। कोश समान हैं।
सही — नया कोश जुड़ता है।
सही — अधातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय होते हैं।
22.95 u।
(6.9 + 39.0) / 2।
1866।
डोबेराइनर 1817 है।
परमाणु द्रव्यमान।
आधुनिक नियम संख्या कहता है।
69.7।
अनुमान 68 था।
1913।
परमाणु संख्या।
2n²।
n कोश का नंबर है।
7।
विन्यास 2,7 और 2,8,7।
Li।
152 pm।
डोबेराइनर त्रिक, न्यूलैंड्स अष्टक, मेंडलीफ द्रव्यमान, मोज़ले संख्या।
I का ऑक्साइड R2O, IV का हाइड्राइड RH4, III का ऑक्साइड R2O3, II का ऑक्साइड RO।
अभिकथन (A): मेंडलीफ ने कुछ भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखा।
कारण (R): समान गुण वाले तत्व एक समूह में रहें, इसके लिए क्रम उलटना पड़ा।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है। Co–Ni और Te–I ऐसे जोड़े हैं।
अभिकथन (A): गैलियम की खोज एका-ऐलुमिनियम के अनुमान से मेल खाती है।
कारण (R): उत्कृष्ट गैसें मेंडलीफ के काम से पहले ही सारणी में भरी हुई थीं।
A सही है। R गलत — उत्कृष्ट गैसें बहुत बाद में मिलीं।
अभिकथन (A): Cl-35 और Cl-37 आधुनिक सारणी में दो समूहों में रखे जाते हैं।
कारण (R): दोनों की परमाणु संख्या 17 है।
A गलत है। R सही है — समान Z का अर्थ एक ही स्थान है।
अभिकथन (A): आवर्त में बाएँ से दाएँ परमाणु आकार घटता है।
कारण (R): नाभिकीय आवेश बढ़ता है और इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के पास खींचता है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): समूह में नीचे धात्विक गुण बढ़ता है।
कारण (R): मेंडलीफ की सारणी 1872 में छपी थी।
दोनों सही हैं, पर R, धात्विक गुण की व्याख्या नहीं करता।
Li–Na–K, Ca–Sr–Ba और Cl–Br–I त्रिक हैं। N–P–As का औसत P से नहीं मिलता।
Na धातु है, Si उपधातु, S और Cl अधातु।
समान गुण वाले तीन तत्व, जिनमें बीच का परमाणु द्रव्यमान शेष दो के औसत के पास हो, त्रिक कहलाते हैं।
तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं।
एका-ऐलुमिनियम का ऑक्साइड E2O3 और क्लोराइड ECl3 है। गैलियम का ऑक्साइड Ga2O3 और क्लोराइड GaCl3 है।
आधुनिक सारणी का खड़ा स्तंभ समूह है। एक समूह के तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
जो तत्व धातु और अधातु दोनों के कुछ गुण दिखाए वह उपधातु है। सिलिकॉन उदाहरण है।
अनुमान = (40.1 + 137.3) / 2 = 177.4 / 2 = 88.7 u। Sr का द्रव्यमान 87.6 u है, जो पास है। अतः Ca, Sr, Ba त्रिक है।
नियम केवल कैल्सियम तक ठीक चला। उन्होंने मान लिया कि केवल 56 तत्व हैं। Co और Ni को एक खाने में उन तत्वों के साथ रखा जिनके गुण अलग हैं, और Fe को Co तथा Ni से दूर रख दिया।
बढ़ता परमाणु द्रव्यमान और रासायनिक गुण, विशेषकर ऑक्साइड तथा हाइड्राइड का सूत्र। R समूह के किसी भी तत्व का स्थान लेता है। उदाहरण: CH4 को RH4 और CO2 को RO2।
Ca का विन्यास 2, 8, 8, 2 है। Z = 12 मैग्नीशियम है, विन्यास 2, 8, 2। Z = 38 स्ट्रॉन्शियम है, बाहरी इलेक्ट्रॉन 2। दोनों उसी समूह में हैं। Z = 19 में एक संयोजी इलेक्ट्रॉन है और Z = 21 अलग विन्यास है, इसलिए वे Ca जैसे नहीं।
उपलब्धियाँ: तत्वों को द्रव्यमान और गुण के साथ व्यवस्थित किया; खाली जगह से एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम और एका-सिलिकॉन का अनुमान किया; उत्कृष्ट गैसों के लिए नया समूह जोड़ा। प्रमाण: एका-ऐलुमिनियम का द्रव्यमान 68 और गैलियम 69.7, ऑक्साइड E2O3 और Ga2O3, क्लोराइड ECl3 और GaCl3। सीमाएँ: हाइड्रोजन का स्थान तय नहीं हुआ, और समस्थानिक तथा अनियमित द्रव्यमान नियम के लिए चुनौती बने।
परमाणु संख्या से Co (27) Ni (28) से पहले आ गया और समान Z वाले समस्थानिक एक घर में रहे। Z = 1.5 संभव नहीं। समूह समान संयोजी इलेक्ट्रॉन से तय होता है और आवर्त समान कोशों से। 2n²: n = 1 पर 2, n = 2 पर 8, n = 3 पर 18 परंतु बाह्य कोश 8 तक, इसलिए आवर्त 1, 2, 3 में 2, 8 और 8 तत्व।
आवर्त 2 घटता क्रम: Li 152, Be 111, B 88, C 77, N 74, O 66 pm। समूह 1 बढ़ता क्रम: Li 152, Na 186, K 231, Rb 244, Cs 262 pm। आवर्त में नाभिकीय आवेश इलेक्ट्रॉनों को खींचता है इसलिए आकार घटता है। समूह में नया कोश जुड़ता है इसलिए आकार बढ़ता है। धात्विक गुण आवर्त में घटता है और समूह में नीचे बढ़ता है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
उतने कार्ड।
63।
एक इलेक्ट्रॉन, या एक की कमी।
समूह 1 या समूह 17, आवर्त 1।
एक।
खाली घर के नाम में लगा।
क्षार धातुओं की तरह यह HCl, H2O और H2S बनाती है, जो NaCl, Na2O और Na2S जैसे सूत्रों के पास हैं। हैलोजन की तरह यह H2 द्विपरमाणुक अणु बनाती है और सहसंयोजक यौगिक भी। इसलिए एक तय स्थान नहीं बनता।
अष्टक परमाणु द्रव्यमान और हर आठवें तत्व पर टिका है, और केवल कैल्सियम तक चला। आधुनिक सारणी परमाणु संख्या पर है, 18 समूह और 7 आवर्त हैं। क्रियाकलाप 5.3: Co का Z 27 और Ni का 28 होने से क्रम सुलझता है, और Z = 1.5 वाला तत्व संभव नहीं।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
सूत्र (14.0 + 74.9) / 2।
44.45 u, P के 31.0 u से मेल नहीं खाता। समूह A त्रिक नहीं है।
नीचे नया कोश।
Li 152, Na 186, K 231, Rb 244, Cs 262 pm।
अभिकथन (A): विन्यास 2, 8, 7 वाला तत्व फ्लोरीन जैसा व्यवहार करता है।
कारण (R): दोनों के बाह्य कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।
दोनों सही हैं और R सही कारण है। तत्व क्लोरीन है, समूह 17।
अभिकथन (A): आवर्त में दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन पाने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
कारण (R): धात्विक गुण भी उसी दिशा में बढ़ता है।
A सही है। R गलत — धात्विक गुण दाईं ओर घटता है।
चार कोश हैं, इसलिए आवर्त 4। संयोजी इलेक्ट्रॉन 2 हैं, इसलिए संयोजकता 2 और यह मैग्नीशियम वाले समूह में है। Be और Mg, या Mg और Sr, इसी तरह के हैं। यह तत्व कैल्सियम है, Z = 20।
N का विन्यास 2, 5 है और P का 2, 8, 5। दोनों में 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। N अधिक विद्युत-ऋणात्मक है क्योंकि यह छोटा है और संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक पास हैं। समूह में नीचे यह प्रवृत्ति घटती है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| Li–Na–K | (6.9 + 39.0) / 2 = 22.95 u |
| अष्टक की सीमा | works up to Ca; Co and Ni share a slot |
| एका-ऐलुमिनियम | mass 68; oxide E2O3; chloride ECl3 |
| आधुनिक नियम | periodic function of atomic number |
| कोश की सीमा | 2n²; period 1 has 2, periods 2 and 3 have 8 |
| आकार | falls left to right; rises down a group |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।