वृत्त पर एक ही बिन्दु छूने वाली रेखा।
केन्द्र की ओर बल हटते ही पत्थर स्पर्शरेखा पर चला जाता है।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 10 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Gravitation
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 10.1 धागा · 10.2 पत्थर ऊपर · 10.3 कागज · 10.4 बोतल · 10.5 कील · 10.6 कॉर्क · 10.7 तुला, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र एक ही वस्तु पर द्रव्यमान का लेबल और नीचे की ओर भार का तीर साथ दिखाता है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 10 है। NCERT 2026-27 अन्वेषण में इस पाठ की अध्याय संख्या वही नहीं है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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The motion of the Moon — Activity 10.1 · अनुभाग 10.1 · क्रियाकलाप 10.1
ऊपर फेंकी वस्तु लौट कर गिरती है। चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। न्यूटन ने पूछा: जो पृथ्वी सेब को खींचती है, क्या वह चन्द्रमा को भी खींच सकती है?
वृत्त पर चलते पत्थर की चाल का परिमाण स्थिर रह सकता है, पर दिशा हर बिन्दु पर बदलती है। दिशा बदलना त्वरण है। इस त्वरण का बल केन्द्र की ओर होता है। इसे अभिकेन्द्र बल कहते हैं। धागा छोड़ते ही पत्थर वृत्त की स्पर्शरेखा पर सीधा निकल जाता है।
चन्द्रमा को सीधी रेखा पर भागने से रोकने वाला अभिकेन्द्र बल पृथ्वी का आकर्षण है। सेब भी पृथ्वी को खींचता है, पर पृथ्वी का द्रव्यमान इतना बड़ा है कि उसका त्वरण दिखाई नहीं देता। पिछला अध्याय 8.11 इसी वृत्तीय गति की याद दिलाता है। वह इस अध्याय का क्रियाकलाप नहीं है।
धागे के एक सिरे पर छोटा पत्थर बाँधो। दूसरा सिरा पकड़कर पत्थर को घुमाओ। पत्थर वृत्त में चलता है। धागा छोड़ो। पत्थर स्पर्शरेखा की सीधी दिशा में निकलता है। केन्द्र की ओर बल हटा तो वृत्त नहीं बचता।
प्रश्न: सेब पृथ्वी को खींचता है, फिर पृथ्वी सेब की ओर क्यों नहीं दौड़ती?
उत्तर: तृतीय नियम से बल बराबर हैं। द्वितीय नियम से a = F/m। पृथ्वी का द्रव्यमान सेब से बहुत बड़ा है, इसलिए पृथ्वी का त्वरण न के बराबर है।
स्पर्शरेखा और अभिकेन्द्र बल दोनों शब्द लिखो। केवल «घूमता है» अधूरा है।
सेब और पृथ्वी का जोड़ा तृतीय और द्वितीय नियम से जोड़ो।
वृत्त पर एक ही बिन्दु छूने वाली रेखा।
केन्द्र की ओर बल हटते ही पत्थर स्पर्शरेखा पर चला जाता है।
सही — नहीं तो चन्द्रमा सीधी रेखा पर निकल जाता।
क्रियाकलाप 10.1।
अभिकेन्द्र बल।
a = F/m।
बल बराबर है। पृथ्वी का m बड़ा है, इसलिए a बहुत छोटा है।
पहले पत्थर वृत्त में चलता है और केन्द्र की ओर बल दिशा बदलता रहता है। धागा छोड़ते ही पत्थर स्पर्शरेखा पर सीधा निकलता है। चन्द्रमा को इसी तरह पृथ्वी का आकर्षण वृत्त पर रखता है।
The universal law of gravitation · अनुभाग 10.1.1 · F = GMm/d²
ब्रह्माण्ड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को आकर्षित करती है। बल दोनों द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती है और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है। दिशा केन्द्रों को जोड़ने वाली रेखा पर है।
F = G M m / d²। G सार्वत्रिक गुरुत्व स्थिरांक है। कैवेंडिश की माप से स्वीकार मान 6.673 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² है। नियम सार्वत्रिक इसलिए है कि वह छोटे-बड़े, आकाश और पृथ्वी, सब पर लागू होता है।
दूरी 6 गुना हो तो बल 36 गुना छोटा हो जाता है। यही व्युत्क्रम-वर्ग है। दो मित्र पास बैठें तो उनके बीच का बल इतना छोटा है कि महसूस नहीं होता। बड़ा द्रव्यमान ही इस बल को रोजमर्रा में दिखाता है। यह नियम हमें पृथ्वी से बाँधता है, चन्द्रमा की गति, ग्रहों की गति और ज्वार समझाता है।
प्रश्न: पृथ्वी का द्रव्यमान 6 × 10²⁴ kg, चन्द्रमा का 7.4 × 10²² kg, दूरी 3.84 × 10⁸ m। G = 6.7 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻²। बल निकालो।
सूत्र: F = G M m / d²
प्रतिस्थापन: F = (6.7 × 10⁻¹¹ × 6 × 10²⁴ × 7.4 × 10²²) / (3.84 × 10⁸)²
उत्तर: F = 2.01 × 10²⁰ N।
सूत्र में d² लिखना मत भूलना। d लिखोगे तो व्युत्क्रम-वर्ग कट जाता है।
दूरी आधी हो तो बल 4 गुना। यह अनुपात प्रश्न में बार-बार आता है।
1/d²।
(2d)² = 4d², इसलिए बल 1/4 रह जाता है।
सही — F d² / (M m) से यही मात्रक आता है।
व्युत्क्रम-वर्ग।
d²।
F, M m के समानुपाती है।
गुणनफल दोगुना, इसलिए बल दोगुना।
G, M, m और d²।
F = 2.01 × 10²⁰ N।
बल दोनों द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है, F = GMm/d²। दूरी आधी हो तो d² चौथाई होता है, इसलिए बल 4 गुना हो जाता है।
Free fall and g — Activities 10.2 and 10.3 · अनुभाग 10.2 · g = 9.8 m s⁻²
10.2 पत्थर ऊपर फेंको। वह एक ऊँचाई तक जाकर गिरने लगता है। केवल पृथ्वी के गुरुत्व से गिरना मुक्त पतन है। दिशा नहीं बदलती, चाल बदलती है, इसलिए त्वरण है। इसी त्वरण को g कहते हैं।
10.3 कागज और पत्थर एक साथ गिराओ। कागज बाद में पहुँचता है, क्योंकि हवा का घर्षण कागज पर अधिक है। हवा निकाला हुआ बर्तन हो तो दोनों साथ गिरते हैं। गैलीलियो की पीसा वाली कथा भी यही बात कहती है।
पत्थर पर बल F = m g। पृथ्वी के लिए g = G M / R²। M = 6 × 10²⁴ kg, R = 6.4 × 10⁶ m, G = 6.7 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² रखने पर g = 9.8 m s⁻²। सूत्र में गिरती वस्तु का द्रव्यमान नहीं है, इसलिए खोखला या ठोस, बड़ा या छोटा, त्वरण एक जैसा है।
पृथ्वी के पास एकसमान त्वरण के समीकरण में a की जगह g लिखो: v = u + gt, s = ut + ½ gt², v² = u² + 2gs। चाल की दिशा में त्वरण धन, विरोध में ऋण। ऊँचाई पर और भूमध्य रेखा की ओर g थोड़ा घटता है।
प्रश्न: एक कार किनारे से गिरकर 0.5 s में जमीन तक पहुँचती है। g = 10 m s⁻² लो। चाल और दूरी निकालो।
सूत्र: v = u + gt और s = ut + ½ gt²। u = 0।
प्रतिस्थापन: v = 0 + 10 × 0.5 = 5। s = 0 + ½ × 10 × (0.5)² = 5 × 0.25।
उत्तर: v = 5 m s⁻¹ नीचे की ओर, s = 1.25 m।
g का मात्रक m s⁻² है, न्यूटन नहीं। न्यूटन भार का मात्रक है।
कागज देर से गिरे तो कारण हवा लिखो, द्रव्यमान नहीं।
त्वरण का मात्रक।
g = 9.8 m s⁻²।
सही — हवा का प्रतिरोध हट जाए तो द्रव्यमान दर नहीं बदलता।
पृथ्वी की त्रिज्या का वर्ग।
R²।
सूत्र v² = u² + 2gs। u = 0। v² = 2 × 9.8 × 19.6 = 384.16। v = 19.6 m s⁻¹ नीचे की ओर।
Mass and weight · अनुभाग 10.3 और 10.4 · W = mg
द्रव्यमान जड़त्व की माप है। पृथ्वी, चन्द्रमा या अन्तरिक्ष में यह नहीं बदलता। भार वह बल है जिससे पृथ्वी वस्तु को खींचती है।
W = m g। मात्रक न्यूटन है और दिशा ऊर्ध्वाधर नीचे है। किसी जगह g स्थिर हो तो भार द्रव्यमान के समानुपाती है, इसलिए तुला द्रव्यमान पढ़ाती हुई भी वास्तव में भार नापती है।
चन्द्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी से कम है। सार्वत्रिक नियम से चन्द्रमा पर भार पृथ्वी के भार का लगभग 1/6 निकलता है। द्रव्यमान नहीं बदलता।
| बात | द्रव्यमान | भार |
|---|---|---|
| क्या है | जड़त्व की माप | गुरुत्व बल |
| मात्रक | kg | N |
| जगह बदले तो | नहीं बदलता | g के साथ बदलता है |
प्रश्न: वस्तु का द्रव्यमान 10 kg है। पृथ्वी पर भार निकालो, g = 9.8 m s⁻²। चन्द्रमा पर भार कितना होगा?
सूत्र: W = m g, और चन्द्रमा पर W_m = W / 6।
प्रतिस्थापन: W = 10 kg × 9.8 m s⁻² = 98 N। W_m = 98 / 6।
उत्तर: पृथ्वी पर 98 N, चन्द्रमा पर लगभग 16.3 N। द्रव्यमान दोनों जगह 10 kg है।
तुला kg दिखाए तब भी उत्तर में लिखो कि वह भार से अंशांकित है।
10 N पृथ्वी पर हो तो चन्द्रमा पर 10/6 = 1.67 N। भिन्न मत भूलना।
जड़त्व की माप।
द्रव्यमान नहीं बदलता। भार लगभग 1/6 हो जाता है।
सही — W = mg।
W = mg।
98 N।
1/6।
10/6 = 1.67 N।
द्रव्यमान जड़त्व की माप है, अदिश है, मात्रक kg है और जगह बदलने पर नहीं बदलता। भार गुरुत्व बल है, सदिश है, मात्रक न्यूटन है और g के साथ बदलता है। W = mg।
Thrust and pressure · अनुभाग 10.5 · पास्कल
पोस्टर की पिन नुकीली हो तो बोर्ड में आसानी से घुसती है। खड़े होने पर पैर रेत में धँसते हैं, लेटने पर शरीर उतना नहीं धँसता। दोनों बार बल तुम्हारा भार ही है।
सतह के लम्बवत् बल को प्रणोद कहते हैं। दाब = प्रणोद / क्षेत्रफल। SI मात्रक N m⁻² है, जिसे पास्कल (Pa) कहते हैं। छोटा क्षेत्र बड़ा दाब देता है। इसलिए कील की नोक, चाकू की धार और इमारत की चौड़ी नींव समझ में आती है।
द्रव और गैस तरल हैं। बंद तरल में दाब हर दिशा में बिना घटे पहुँचता है।
प्रश्न: 5 kg लकड़ी का गुटका 40 cm × 20 cm × 10 cm है। 20 cm × 10 cm वाले फलक और 40 cm × 20 cm वाले फलक पर दाब निकालो। g = 9.8 m s⁻²।
सूत्र: प्रणोद F = m g, दाब = F / क्षेत्रफल।
प्रतिस्थापन: F = 5 × 9.8 = 49 N। छोटा क्षेत्र = 0.20 × 0.10 = 0.02 m²। बड़ा क्षेत्र = 0.40 × 0.20 = 0.08 m²।
उत्तर: P₁ = 49 / 0.02 = 2450 Pa। P₂ = 49 / 0.08 = 612.5 Pa।
cm² को m² में 10⁻⁴ से गुणा करो। 200 cm² = 0.02 m²।
एक ही प्रणोद, दो क्षेत्र। छोटा क्षेत्र बड़ा दाब देता है — यही वाक्य लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
N/m²।
पास्कल। 1 Pa = 1 N m⁻²।
सही — दाब = बल / क्षेत्र।
Pa = N/m²।
क्षेत्रफल।
F = mg।
5 × 9.8 = 49 N।
क्षेत्र बड़ा।
क्षेत्र बड़ा होने से दाब घटता है और जमीन नहीं धँसती।
बस्ते का भार प्रणोद है। पतली पट्टी का क्षेत्र छोटा है, इसलिए दाब = प्रणोद/क्षेत्र बड़ा हो जाता है और कंधा दर्द करता है।
Buoyancy — Activities 10.4, 10.5 and 10.6 · अनुभाग 10.5.2 · 10.5.3
तालाब में शरीर हल्का लगता है। कुएँ से निकली बाल्टी पानी के बाहर भारी लगती है। लोहे का जहाज तैरता है, वही लोहा चादर बनकर डूब सकता है। कारण उत्प्लावन है।
तरल में डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर बल लगता है। यह बल हटाए गए तरल के भार जितना होता है। वस्तु का घनत्व तरल से कम हो तो वह तैरती है। घनत्व अधिक हो तो डूबती है। घनत्व = द्रव्यमान / आयतन, मात्रक kg m⁻³।
10.4 खाली प्लास्टिक बोतल का मुँह हवाबंद बन्द कर पानी की बाल्टी में रखो। बोतल तैरती है। उसे नीचे धक्का दो। जितना गहरा धक्का, उतना ऊपर का बल बढ़ता है, जब तक बोतल पूरी न डूबे। छोड़ते ही वह सतह पर लौटती है। भार नीचे खींचता है, पानी ऊपर धकेलता है।
10.5 लोहे की कील पानी की सतह पर रखो। कील डूबती है। नीचे का भार पानी के उत्प्लावन से बड़ा है।
10.6 बराबर द्रव्यमान का कॉर्क और लोहे की कील रखो। कॉर्क तैरता है, कील डूबती है। कॉर्क का घनत्व पानी से कम है, कील का अधिक।
प्रश्न: 50 g पदार्थ का आयतन 20 cm³ है। पानी का घनत्व 1 g cm⁻³ है। वस्तु तैरेगी या डूबेगी?
सूत्र: घनत्व = द्रव्यमान / आयतन।
प्रतिस्थापन: घनत्व = 50 g / 20 cm³ = 2.5 g cm⁻³।
उत्तर: 2.5, पानी के 1 से बड़ा है, इसलिए वस्तु डूबती है।
तैरने-डूबने का फैसला घनत्व से लिखो, केवल लोहा या लकड़ी से नहीं।
जहाज लोहे का होकर भी तैरता है, क्योंकि औसत घनत्व पानी से कम रह जाता है।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 10.5 और 10.6।
कील का घनत्व पानी से अधिक है, इसलिए वह डूबती है।
सही — पूरी डूबने तक उत्प्लावन बढ़ता है।
मात्रक kg m⁻³।
आयतन।
कॉर्क का घनत्व पानी से कम है, इसलिए उत्प्लावन उसके भार से बड़ा है और वह तैरता है। कील का घनत्व पानी से अधिक है, इसलिए वह डूबती है।
Archimedes and relative density — Activity 10.7 · अनुभाग 10.6 · 10.7 · क्रियाकलाप 10.7
पत्थर को रबर की डोरी या स्प्रिंग तुला से लटकाओ। हवा में लम्बाई या पाठ्यांक नोट करो। पत्थर को पानी में धीरे डालो। डोरी का खिंचाव या तुला का पाठ्यांक घटता है। पत्थर पूरा डूब जाए तो उसके बाद और कमी नहीं आती, क्योंकि हटाया गया आयतन फिर नहीं बढ़ता।
खिंचाव भार के कारण था। कमी का अर्थ है कि पानी ऊपर की ओर बल लगा रहा है। यही उत्प्लावन है।
पूरी या अधूरी डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है। यही आर्किमिडीज़ का सिद्धांत है। जहाज, पनडुब्बी, दुग्धमापी और हाइड्रोमीटर इसी पर टिके हैं।
आपेक्षिक घनत्व = पदार्थ का घनत्व / पानी का घनत्व। दोनों घनत्व एक ही मात्रक में हों तो अनुपात का कोई मात्रक नहीं। चाँदी का आपेक्षिक घनत्व 10.8 और पानी का घनत्व 10³ kg m⁻³ हो तो चाँदी का घनत्व 10.8 × 10³ kg m⁻³ है।
तुला 42 kg दिखाए तो हवा का उत्प्लावन पाठ्यांक को थोड़ा कम कर देता है, इसलिए वास्तविक द्रव्यमान 42 kg से थोड़ा अधिक है। बराबर पाठ्यांक पर रुई का गट्ठर लोहे की छड़ से वास्तव में भारी होता है, क्योंकि रुई का आयतन बड़ा है और हवा का उत्प्लावन अधिक है।
प्रश्न: चाँदी का आपेक्षिक घनत्व 10.8 है। पानी का घनत्व 10³ kg m⁻³ है। चाँदी का घनत्व SI में निकालो।
सूत्र: घनत्व = आपेक्षिक घनत्व × पानी का घनत्व।
प्रतिस्थापन: घनत्व = 10.8 × 10³ kg m⁻³।
उत्तर: 1.08 × 10⁴ kg m⁻³। आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नहीं।
10.7 में «और कमी क्यों नहीं» का उत्तर आयतन लिखो, भार नहीं।
आपेक्षिक घनत्व के उत्तर के साथ kg या N मत लिखना।
10-सेकंड रिवीजन
द्रव का भार, द्रव का आयतन नहीं।
ऊपर का बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर है।
गलत — हटाया गया आयतन रुक जाता है, इसलिए और कमी नहीं।
समान राशियों का अनुपात।
कोई मात्रक नहीं।
पानी 10³ kg m⁻³।
10.8 × 10³ = 1.08 × 10⁴ kg m⁻³।
हवा ऊपर की ओर थोड़ा बल लगाती है, इसलिए पाठ्यांक वास्तविक भार से थोड़ा कम है। वास्तविक द्रव्यमान 42 kg से अधिक है।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
क्रियाकलाप 10.1।
स्पर्शरेखा पर सीधी गति।
(3d)² = 9d²।
बल 1/9 रह जाता है।
कैवेंडिश।
6.673 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻²।
पृथ्वी के पास 9.8।
g।
क्रियाकलाप 10.3।
हवा का घर्षण कागज पर बड़ा है। निर्वात में दोनों साथ गिरते हैं।
बल का मात्रक।
न्यूटन।
1/6।
60/6 = 10 N।
P = F/A।
छोटा क्षेत्र, बड़ा दाब।
mg।
49 N।
क्रियाकलाप 10.6।
कम घनत्व तैरे, अधिक घनत्व डूबे।
समान राशियों का अनुपात।
कोई मात्रक नहीं।
पानी 1 g cm⁻³।
2.5 > 1, इसलिए डूबती है।
s = ½ gt²।
½ × 10 × 0.25 = 1.25 m।
हवा का उत्प्लावन ऊपर की ओर।
वास्तविक द्रव्यमान 42 kg से थोड़ा अधिक है।
गलत — नियम सब वस्तुओं पर है। हल्की वस्तुओं में बल बहुत छोटा होता है।
गलत — g = GM/R² में गिरता द्रव्यमान नहीं है।
सही — बदलता है भार।
सही — 1 Pa = 1 N m⁻²।
गलत — उत्प्लावन ऊपर की ओर है।
गलत — अनुपात का कोई मात्रक नहीं। kg m⁻³ घनत्व का मात्रक है।
गलत — पूरा डूबने के बाद आयतन नहीं बढ़ता, इसलिए पाठ्यांक रुक जाता है।
सही — गुणनफल 4 गुना।
केन्द्र।
वृत्त का केन्द्र।
G।
सार्वत्रिक स्थिरांक।
9.8।
GM/R²।
mg।
न्यूटन में।
पास्कल।
N/m²।
आयतन।
kg m⁻³।
10800 या 1.08 × 10⁴।
1.08 × 10⁴।
1/6।
द्रव्यमान नहीं बदलता।
G का N m² kg⁻², g का m s⁻², भार का N, दाब का Pa।
10.1 स्पर्शरेखा, 10.3 कागज, 10.5 कील, 10.7 पाठ्यांक।
अभिकथन (A): दूरी दोगुनी होने पर गुरुत्व बल चौथाई रह जाता है।
कारण (R): बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): निर्वात में भारी और हल्की वस्तु एक ही दर से गिरती हैं।
कारण (R): g गिरती वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती है।
A सही है। R गलत — g = GM/R² द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
अभिकथन (A): चन्द्रमा पर भार घटता है।
कारण (R): द्रव्यमान जड़त्व की माप है।
दोनों सही हैं, पर R यह नहीं बताता कि भार क्यों घटता है। भार इसलिए घटता है कि चन्द्रमा का g छोटा है।
अभिकथन (A): आपेक्षिक घनत्व का मात्रक kg m⁻³ है।
कारण (R): आपेक्षिक घनत्व दो घनत्वों का अनुपात है।
A गलत है। R सही है — अनुपात का मात्रक नहीं होता।
अभिकथन (A): लोहे की कील पानी में डूबती है।
कारण (R): कील का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
kg और स्थिर रहना द्रव्यमान है। W = mg और 1/6 भार है।
कील और 2.5 g cm⁻³ डूबते हैं। कॉर्क और कम घनत्व तैरते हैं।
F = G M m / d²।
जब वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्व बल से गिरे, तो वह गति मुक्त पतन है। त्वरण g है।
द्रव्यमान जगह बदलने पर नहीं बदलता और मात्रक kg है। भार W = mg जगह के साथ बदल सकता है और मात्रक न्यूटन है।
दाब प्रणोद प्रति एकांक क्षेत्रफल है। SI मात्रक पास्कल है, 1 Pa = 1 N m⁻²।
डूबी वस्तु पर ऊपर का बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।
g = (6.7 × 10⁻¹¹ × 6 × 10²⁴) / (6.4 × 10⁶)² = 4.02 × 10¹⁴ / 4.096 × 10¹³ = 9.8 m s⁻²।
शीर्ष पर v = 0। 0 = 49² + 2(−9.8)s। s = 2401/19.6 = 122.5 m। ऊपर का समय = 49/9.8 = 5 s। वापसी का कुल समय = 10 s।
प्रणोद = 5 × 9.8 = 49 N। क्षेत्र = 0.40 × 0.20 = 0.08 m²। दाब = 49/0.08 = 612.5 Pa।
रुई भारी है। उसका आयतन बड़ा है, इसलिए हवा का उत्प्लावन अधिक है। समान पाठ्यांक के लिए रुई का वास्तविक भार, और द्रव्यमान, लोहे से अधिक होना चाहिए।
F = GMm/d²। उपयोग: हमें पृथ्वी से बाँधना, चन्द्रमा की गति, ग्रहों की गति, और चन्द्रमा व सूर्य के ज्वार। दूरी d/2 हो तो हर d² की जगह d²/4 आती है। बल 1/(d²/4) = 4/d² के अनुपात में हो जाता है, यानी 4 गुना।
द्रव्यमान जड़त्व है, kg, स्थिर। भार बल है, W = mg, न्यूटन, नीचे की ओर। W = 10 × 9.8 = 98 N। चन्द्रमा पर 98/6 ≈ 16.3 N। चित्र में लेबल m = 10 kg दोनों जगह वही रहेगा और नीचे का तीर पृथ्वी पर 98 N तथा चन्द्रमा पर लगभग 16.3 N होगा।
उत्प्लावन तरल का ऊपर की ओर बल है। आर्किमिडीज़: यह बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर है। पानी ऊपर धकेलता है इसलिए तुला का पाठ्यांक घटता है। पूरा डूबने पर हटाया गया आयतन नहीं बढ़ता, इसलिए और कमी नहीं। घनत्व तरल से कम हो तो वस्तु तैरती है, अधिक हो तो डूबती है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है।
1/d²।
बल 4 गुना हो जाता है।
F और m दोनों बढ़ते हैं।
a = F/m = g, द्रव्यमान कट जाता है।
भार।
W = mg।
उत्प्लावन बल ऊपर की ओर लगता है।
प्लास्टिक का घनत्व पानी से कम होता है। उत्प्लावन उसके भार से बड़ा है, इसलिए वह ऊपर उठकर तैरता है।
घनत्व = 500/350 = 1.43 g cm⁻³। यह 1 g cm⁻³ से बड़ा है, इसलिए पैकेट डूबता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
दाब = भार / क्षेत्र।
बड़ा क्षेत्र, छोटा दाब।
W = mg।
m स्थिर है। W चन्द्रमा पर लगभग 1/6 है।
अभिकथन (A): कील की नोक नुकीली रखी जाती है।
कारण (R): छोटे क्षेत्र पर वही बल बड़ा दाब देता है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): पानी में डूबी वस्तु पर उत्प्लावन नीचे की ओर लगता है।
कारण (R): आर्किमिडीज़ के अनुसार यह बल हटाए गए द्रव के भार के बराबर है।
A गलत है — उत्प्लावन ऊपर की ओर है। R सही है।
द्रव्यमान 10 kg ही है। ऊँचाई पर g थोड़ा कम है, इसलिए भार W = mg थोड़ा घटता है। तुला भार नापकर kg में अंशांकित होती है, इसलिए पहाड़ पर पाठ्यांक थोड़ा कम आ सकता है। अनाज कम नहीं हुआ।
नाव का आकार बहुत सा पानी हटाता है। औसत घनत्व पानी से कम रह जाता है, इसलिए उत्प्लावन भार से बड़ा या बराबर होकर नाव को तैराता है। ठोस पिण्ड का घनत्व पानी से अधिक है और हटाया गया पानी कम है, इसलिए वह डूबता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| सार्वत्रिक बल | F = GMm/d² |
| G | 6.673 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² |
| g | 9.8 m s⁻² near the Earth |
| भार | W = mg, unit N |
| चन्द्रमा | weight about 1/6 of Earth |
| आपेक्षिक घनत्व | no unit |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।