कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 13: महत्वपूर्ण व पिछले वर्ष के प्रश्न – बिहार बोर्ड
बिहार बोर्ड · NCERT · CBSE
यहाँ केवल वही बोर्ड प्रश्न हैं जिन पर पहले से सत्यापित वर्ष लिखा है — BSEB वार्षिक परीक्षा के प्रश्न (पिछले वर्ष) और बोर्ड के आधिकारिक मॉडल सेट के प्रश्¨ (अलग से चिह्नित, वार्षिक नहीं)। कोई वर्ष अनुमान से नहीं जोड़ा गया। उत्तर Study With Me ने लिखे हैं, यह बोर्ड की आधिकारिक उत्तर-कुंजी नहीं है।
🏛️ BSEB 2025 · वार्षिक माध्यमिक परीक्षा (पिछले वर्ष के प्रश्न)
1BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q78 · पेज 251 अंक
सूक्ष्म उपभोक्ता का उदाहरण है—
(a) जीवाणु
(b) कवक
(c) शैवाल
(d) (A) और (B) दोनों
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सही उत्तर: (d) (A) और (B) दोनों
जीवाणु और कवक मृत जीवों और अपशिष्ट को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं — इन्हें अपघटक (सूक्ष्म उपभोक्ता) कहते हैं। शैवाल हरे होते हैं, वे उत्पादक हैं (पाठ 1)।
2BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q79 · पेज 251 अंक
मांसाहारी जीवों को कहा जाता है—
(a) प्राथमिक उपभोक्ता
(b) द्वितीयक उपभोक्ता
(c) तृतीयक उपभोक्ता
(d) (A) और (B) दोनों
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सही उत्तर: (b) द्वितीयक उपभोक्ता
शाकाहारी = प्राथमिक उपभोक्ता। उन्हें खाने वाले मांसाहारी = द्वितीयक उपभोक्ता (बड़े मांसाहारी तृतीयक स्तर पर भी हो सकते हैं, पर इस प्रश्न का अपेक्षित उत्तर (B) है)। (A) गलत है, इसलिए (D) भी गलत (पाठ 2)।
3BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q80 · पेज 261 अंक
खाद्य शृंखला के प्रत्येक पोषी स्तर पर कुल ऊर्जा का कितना प्रतिशत अगले पोषी स्तर को स्थानांतरित होता है?
(a) 0.1%
(b) 01%
(c) 10%
(d) 100%
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सही उत्तर: (c) 10%
दस प्रतिशत नियम: औसतन खाए गए भोजन का लगभग 10% ही अगले स्तर के शरीर में जाता है; बाकी ऊष्मा, पाचन और काम में (पाठ 2)।
4BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q28 · पेज 302 अंक
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें?
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अगले स्तर को भोजन नहीं मिलेगा — वे भूखे मरेंगे या घटेंगे।
पिछले स्तर के जीवों की संख्या बढ़ जाएगी (जैसे मांसाहारी हटें तो शाकाहारी बढ़ें और पौधे घटें)।
ऊर्जा का प्रवाह टूटेगा और पारितंत्र का संतुलन बिगड़ेगा। उत्पादक हटें तो पूरी शृंखला ही गिर जाएगी (पाठ 7, NCERT अभ्यास 4)।
5BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q30 · पेज 315 अंक
पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है?
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स्रोत: सूर्य। हरे पौधे (उत्पादक) पत्तियों पर पड़ने वाली सौर ऊर्जा का लगभग 1% प्रकाश-संश्लेषण से भोजन (रासायनिक ऊर्जा) में बदलते हैं।
खाद्य शृंखला से ऊर्जा आगे जाती है: उत्पादक → शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) → छोटा मांसाहारी (द्वितीयक) → बड़ा मांसाहारी (तृतीयक)। उदाहरण: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप।
दस प्रतिशत नियम: हर स्तर पर खाए गए भोजन का केवल ~10% अगले स्तर के शरीर में जाता है; बाकी ऊष्मा, पाचन और काम में ख़र्च।
इसलिए शृंखला में प्रायः 3–4 कड़ियाँ होती हैं और निचले स्तर पर जीव सबसे अधिक होते हैं।
प्रवाह एकदिशी है — शाकाहारी को गई ऊर्जा पौधों को नहीं लौटती, न पौधों की ऊर्जा सूर्य को।
अपघटक मृत शरीर तोड़कर पदार्थ मिट्टी को लौटाते हैं (पदार्थ चक्रित, ऊर्जा नहीं)।
सूर्य → उत्पादक (1000 J) → प्राथमिक (100 J) → द्वितीयक (10 J) → तृतीयक (1 J)
📄 BSEB मॉडल सेट 2026 (बोर्ड का आधिकारिक मॉडल पेपर, वार्षिक परीक्षा नहीं) — महत्वपूर्ण
वे जीव जो सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफ़िल की सहायता से अकार्बनिक पदार्थों (CO₂, जल) से अपना भोजन — शर्करा और मंड — स्वयं बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं। उदाहरण: सभी हरे पौधे और कुछ जीवाणु। ये खाद्य शृंखला के पहले पोषी स्तर पर होते हैं और पूरे पारितंत्र में ऊर्जा लाते हैं (पाठ 1, 2)।