कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12: महत्वपूर्ण व पिछले वर्ष के प्रश्न – बिहार बोर्ड
बिहार बोर्ड · NCERT · CBSE
यहाँ केवल वही बोर्ड प्रश्न हैं जिन पर पहले से सत्यापित वर्ष लिखा है — BSEB वार्षिक परीक्षा के प्रश्न (पिछले वर्ष) और बोर्ड के आधिकारिक मॉडल सेट के प्रश्न (अलग से चिह्नित, वार्षिक नहीं)। कोई वर्ष अनुमान से नहीं जोड़ा गया। उत्तर Study With Me ने लिखे हैं, यह बोर्ड की आधिकारिक उत्तर-कुंजी नहीं है।
🏛️ BSEB 2025 · वार्षिक माध्यमिक परीक्षा (पिछले वर्ष के प्रश्न)
1BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q18 · पेज 91 अंक
«दाएँ हाथ के अँगूठे» के नियम को किसने प्रतिपादित किया था?
(a) मैक्सवेल
(b) आइंस्टीन
(c) फ्लेमिंग
(d) ओर्स्टेड
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सही उत्तर: (a) मैक्सवेल
सीधे धारावाही तार के क्षेत्र की दिशा बताने वाला दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहलाता है। फ्लेमिंग के नियम बल और प्रेरित धारा के हैं; ओर्स्टेड ने धारा का चुंबकीय प्रभाव खोजा (पाठ 3)।
2BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q4 · पेज 272 अंक
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से संबंधित «दक्षिण हस्त अंगूठा» के नियम को लिखें।
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धारावाही सीधे चालक को दाएँ हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करे। तब चालक के चारों ओर लिपटी उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा बताती हैं। इसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं (पाठ 3)।
3BSEB 2025 · बोर्ड प्रश्न · Q10 · पेज 286 अंक
डायनमो क्या है? स्वच्छ चित्र की सहायता से इसके सिद्धांत और कार्यविधि का वर्णन करें।
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डायनमो (विद्युत जनित्र): वह युक्ति जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण — चुंबकीय क्षेत्र में घूमती कुंडली से जुड़ा क्षेत्र बदलता है, तो कुंडली में प्रेरित धारा बहती है। दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम से।
भाग: प्रबल चुंबक के ध्रुवों (N, S) के बीच आयताकार कुंडली ABCD; धुरी; सर्पी वलय (AC के लिए) या विभक्त वलय (DC के लिए); कार्बन ब्रश; बाहरी परिपथ में गैल्वेनोमीटर।
कार्यविधि: धुरी घुमाने पर भुजा AB ऊपर और CD नीचे चलती है — दोनों में प्रेरित धारा; आधे चक्कर बाद भुजाएँ स्थान बदलती हैं और धारा की दिशा उलट जाती है। सर्पी वलय से प्रत्यावर्ती धारा (AC) मिलती है; विभक्त वलय से एक दिशा वाली दिष्ट धारा (DC)।
(चित्र: चुंबक के ध्रुव, कुंडली ABCD, वलय, ब्रश, गैल्वेनोमीटर नामांकित करें।) यह भाग वर्तमान NCERT पुस्तक में नहीं है; बिहार बोर्ड पूछता है (पाठ 7)।
📄 BSEB मॉडल सेट 2026 (बोर्ड का आधिकारिक मॉडल पेपर, वार्षिक परीक्षा नहीं) — महत्वपूर्ण
लघुपथन में विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे छूते हैं, प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है, इसलिए धारा बहुत बढ़ जाती है (NCERT अभ्यास 2 में यही धारा पूछी गई है) (पाठ 8)।
जब किसी कुंडली (चालक) से संबद्ध चुंबकीय क्षेत्र बदलता है — चुंबक को कुंडली की ओर या दूर ले जाने से, या चालक को क्षेत्र में चलाने से — तो कुंडली में प्रेरित विभवांतर और प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। इस परिघटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं (फैराडे)। धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम से (पाठ 7)।
यदि धारावाही सीधे चालक को दाएँ हाथ में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो चालक के चारों ओर मुड़ी उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं। (इसे दक्षिण-हस्त अंगूठा नियम या कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं।) (पाठ 3)