इसके दो सिरे उत्तर और दक्षिण दिखाते हैं।
सुई एक छोटा छड़ चुंबक है। उत्तर की ओर वाला सिरा उत्तर ध्रुव है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 12 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Magnetic Effects of Electric Current
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 12.1 दिक्सूचक · 12.2–12.3 क्षेत्र रेखाएँ · 12.4–12.5 सीधा तार · 12.6 कुंडली · 12.7 बल, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. दाएँ हाथ के नियम वाला चित्र देखो — अँगूठा धारा की दिशा में है और उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में मुड़ती हैं।
NCERT 2026-27 में यह अध्याय 12 है। बिहार की पुरानी किताब में यही पाठ अध्याय 13 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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The compass and a straight wire — Activity 12.1 · NCERT अध्याय 12 की भूमिका · क्रियाकलाप 12.1
दिक्सूचक की सुई एक छोटी छड़ चुंबक है। उत्तर की ओर रहने वाला सिरा उत्तर ध्रुव कहलाता है और दक्षिण की ओर रहने वाला दक्षिण ध्रुव। समान ध्रुव दूर हटते हैं, असमान ध्रुव पास आते हैं।
छड़ चुंबक के पास लाने पर सुई मुड़ती है, क्योंकि चुंबक के आस-पास एक क्षेत्र होता है जिसमें उसका बल पकड़ा जा सकता है।
मोटा सीधा ताँबे का तार परिपथ के बिन्दु X और Y के बीच रखो, कागज़ के तल के लम्बवत। पास में एक छोटा दिक्सूचक क्षैतिज रखो और सुई की स्थिति लिखो। प्लग में कुंजी लगाकर धारा भेजो।
सुई मुड़ जाती है। ताँबे के तार की धारा ने चुंबकीय प्रभाव पैदा किया। बिजली और चुंबकत्व जुड़े हुए हैं।
प्रश्न: छड़ चुंबक के पास दिक्सूचक क्यों मुड़ता है?
उत्तर: सुई खुद एक छोटा चुंबक है। छड़ चुंबक का क्षेत्र उस पर बल लगाता है, इसलिए सुई नई दिशा में रुकती है।
हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने 1820 में देखा कि पास के धातु के तार में धारा बहते ही दिक्सूचक मुड़ जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता के मात्रक का नाम उन्हीं पर ओर्स्टेड पड़ा।
वस्तुनिष्ठ में «सुई क्यों मुड़ी?» का उत्तर क्षेत्र है, तार का गर्म होना नहीं।
कारण-प्रश्न में ऑर्स्टेड का नाम और यह बात दोनों लिखो कि धारा बंद होते ही यह प्रभाव हट जाता है।
इसके दो सिरे उत्तर और दक्षिण दिखाते हैं।
सुई एक छोटा छड़ चुंबक है। उत्तर की ओर वाला सिरा उत्तर ध्रुव है।
सही — यही क्रियाकलाप 12.1 और ऑर्स्टेड का अवलोकन है।
उत्तर-उत्तर या दक्षिण-दक्षिण।
समान ध्रुव दूर हटते हैं। असमान ध्रुव पास आते हैं।
1820 वाली खोज।
मात्रक का नाम ऑर्स्टेड है।
कुंजी लगने पर ताँबे के तार में धारा बहती है। यह धारा तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। दिक्सूचक की सुई एक छोटा चुंबक होने से उस क्षेत्र में मुड़ जाती है।
Field lines — Activities 12.2 and 12.3 · NCERT 12.1 · क्रियाकलाप 12.2, 12.3
ड्राइंग बोर्ड पर सफेद कागज़ चिपकाओ। बीच में छड़ चुंबक रखो। चारों ओर लोहचूर्ण बुरको। नमक वाली छिड़कन वाली डिब्बी काम आती है। बोर्ड को हौले से थपथपाओ।
चूर्ण एक पैटर्न में जम जाता है। चुंबक अपने आस-पास बल लगाता है। जिस क्षेत्र में यह बल पकड़ा जाए, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र है। चूर्ण जिन रेखाओं पर जमता है वे क्षेत्र रेखाएँ हैं।
कागज़ पर चुंबक की सीमा अंकित करो। उत्तर ध्रुव के पास दिक्सूचक रखो। सुई का दक्षिण ध्रुव चुंबक के उत्तर ध्रुव की ओर रहता है और सुई का उत्तर ध्रुव दूर की ओर। दोनों सिरों की जगह निशान लगाओ।
सुई को आगे खिसकाओ ताकि उसका दक्षिण ध्रुव वहाँ आए जहाँ अभी उत्तर ध्रुव था। ऐसे करते हुए चुंबक के दक्षिण ध्रुव तक जाओ। निशानों को चिकने वक्र से जोड़ो। यही एक क्षेत्र रेखा है। और रेखाएँ भी खींचो। ध्रुवों की ओर सुई का विक्षेप बढ़ता है।
क्षेत्र की दिशा वह है जिधर स्वतंत्र उत्तर ध्रुव चलना चाहे। इसलिए बाहर रेखाएँ उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में मिलती हैं। चुंबक के अंदर दिशा दक्षिण से उत्तर है। रेखाएँ बंद वक्र हैं।
रेखाएँ जहाँ पास-पास हैं क्षेत्र प्रबल है। कोई दो रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं। काटतीं तो उस बिन्दु पर सुई को दो दिशाएँ दिखानी पड़तीं, जो संभव नहीं।
| जगह | दिशा |
|---|---|
| चुंबक के बाहर | उत्तर से दक्षिण |
| चुंबक के अंदर | दक्षिण से उत्तर |
| घनी रेखाएँ | प्रबल क्षेत्र |
| दो रेखाएँ | नहीं कटतीं |
प्रश्न: दो क्षेत्र रेखाएँ क्यों नहीं कट सकतीं?
उत्तर: कटान के बिन्दु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जातीं। दिक्सूचक एक समय एक ही दिशा दिखाता है। इसलिए कटान संभव नहीं।
«बाहर की दिशा» पूछी जाए तो उत्तर से दक्षिण लिखो। अंदर की दिशा उलटी है, उसे अलग पंक्ति में लिखो।
कारण-प्रश्न में केवल «नहीं कटतीं» मत लिखना। सुई की एक दिशा वाला कारण पूरा करो।
स्वतंत्र उत्तर ध्रुव बाहर किस ओर चले।
बाहर रेखाएँ उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं। अंदर दिशा दक्षिण से उत्तर है।
गलत — कटान पर सुई को दो दिशाएँ दिखानी पड़तीं।
ध्रुवों के पास सुई अधिक मुड़ती है।
घनी रेखाएँ प्रबल क्षेत्र दिखाती हैं।
दिशा वह है जिस ओर उस बिन्दु पर रखा स्वतंत्र उत्तर ध्रुव चलना चाहे। बाहर यह उत्तर से दक्षिण है। रेखाएँ बंद वक्र होती हैं, क्योंकि अंदर दिशा दक्षिण से उत्तर हो जाती है।
A straight wire and the right hand — Activities 12.4, 12.5 · NCERT 12.2.1–12.2.2 · क्रियाकलाप 12.4, 12.5
लंबा सीधा ताँबे का तार, 1.5 V के दो या तीन सेल और एक प्लग कुंजी श्रेणी में जोड़ो। तार को दिक्सूचक की सुई के समान्तर और उसके ऊपर रखो।
धारा उत्तर से दक्षिण बहे तो सुई का उत्तर ध्रुव पूर्व की ओर मुड़ता है। सेलों के सिरे बदल दो ताकि धारा दक्षिण से उत्तर हो जाए। अब सुई पश्चिम की ओर मुड़ती है। धारा की दिशा पलटने से क्षेत्र की दिशा भी पलट जाती है।
12 V की बैटरी, धारा नियंत्रक, 0–5 A का ऐमीटर, कुंजी और मोटा ताँबे का तार लो। तार को आयताकार गत्ते के बीच से लंबवत निकालो। गत्ता फिसले नहीं। लोहचूर्ण छिड़को, धारा नियत रखो और कुंजी बंद करो। गत्ते को हौले से थपथपाओ।
चूर्ण तार के चारों ओर संकेंद्र वृत्तों में जम जाता है। ये क्षेत्र रेखाएँ हैं। किसी बिन्दु P पर दिक्सूचक का उत्तर ध्रुव क्षेत्र की दिशा बताता है। धारा पलटो तो वृत्तों की दिशा भी पलटती है।
धारा बढ़ाओ तो सुई का विक्षेप बढ़ता है — क्षेत्र प्रबल होता है। सुई को दूर ले जाओ, जैसे बिन्दु Q पर, तो विक्षेप घटता है। दूरी बढ़ने पर क्षेत्र घटता है और वृत्त बड़े होते जाते हैं।
धारा वाले सीधे तार को दाएँ हाथ में ऐसे पकड़ो कि अँगूठा धारा की दिशा में रहे। तब उँगलियाँ तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाओं की दिशा में मुड़ती हैं। इसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं: कॉर्कस्क्रू को धारा की दिशा में पेंच की तरह घुमाओ, घुमाव क्षेत्र की दिशा है।
कागज़ से बाहर आती धारा (केंद्र में बिंदु) पर उँगलियाँ वामावर्त मुड़ती हैं। धारा अंदर जाए (केंद्र में क्रॉस) तो दिशा दक्षिणावर्त हो जाती है।
प्रश्न: एक क्षैतिज बिजली के तार में धारा पूर्व से पश्चिम बहती है। तार के ठीक नीचे और ठीक ऊपर क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर: अँगूठा पश्चिम की ओर रखो। पूर्व सिरे से देखने पर क्षेत्र तार के लम्बवत तल में दक्षिणावर्त घूमता है। पश्चिम सिरे से देखने पर वामावर्त। ऊपर और नीचे दोनों जगह यही घुमाव है। धारा पलटोगे तो घुमाव भी पलटेगा।
12.4 का दिशा-युग्म रट लो: उत्तर→दक्षिण धारा, सुई पूर्व। धारा पलटो, सुई पश्चिम।
CBSE चित्र में बिंदु और क्रॉस पूछता है। बिंदु कागज़ से बाहर है और दाएँ हाथ से वामावर्त।
क्रियाकलाप 12.5 का लोहचूर्ण।
क्षेत्र संकेंद्र वृत्तों का होता है। दूरी बढ़ने पर वृत्त बड़े होते हैं।
गलत — धारा बढ़ाने पर सुई का विक्षेप बढ़ता है, क्षेत्र प्रबल होता है।
उँगलियाँ दूसरी राशि की हैं।
अँगूठा धारा की दिशा में होता है और उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा में।
क्रियाकलाप 12.4 का पहला केस।
उत्तर से दक्षिण धारा पर उत्तर ध्रुव पूर्व की ओर मुड़ता है। धारा पलटने पर पश्चिम की ओर।
किसी दी हुई धारा का चुंबकीय क्षेत्र तार से दूरी बढ़ने पर घटता है। इसलिए सुई का विक्षेप भी घटता है। क्षेत्र रेखाओं के वृत्त तार से दूर बड़े होते जाते हैं।
सही — दाएँ हाथ का अँगूठा बाहर की ओर हो तो उँगलियाँ वामावर्त मुड़ती हैं।
A circular coil — Activity 12.6 · NCERT 12.2.3 · क्रियाकलाप 12.6
सीधे तार का क्षेत्र दूरी बढ़ने पर घटता है और वृत्त बड़े होते हैं। तार को मोड़कर वृत्ताकार लूप बना दो तो हर छोटे टुकड़े के बड़े वृत्त केंद्र पर लगभग सीधी रेखाएँ दिखते हैं।
दायाँ हाथ लगाओ। लूप के हर हिस्से का योगदान केंद्र के अंदर एक ही दिशा में जुड़ता है। फेरों की संख्या n हो तो क्षेत्र एक फेरे का n गुना होता है, क्योंकि हर फेरे की धारा एक ही दिशा में है।
आयताकार गत्ते में दो छेद करो। बहुत फेरों वाली वृत्ताकार कुंडली को छेदों में से निकालो, गत्ते के तल के लम्बवत। सिरों को बैटरी, कुंजी और धारा नियंत्रक से श्रेणी में जोड़ो। लोहचूर्ण छिड़को, कुंजी लगाओ और गत्ते को हौले से थपथपाओ।
चूर्ण कुंडली के चुंबकीय क्षेत्र का पैटर्न दिखाता है। केंद्र के पास रेखाएँ घनी और लगभग सीधी होती हैं।
प्रश्न: मेज पर रखा वृत्ताकार लूप में धारा ऊपर से देखने पर दक्षिणावर्त है। लूप के अंदर और बाहर क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर: दाएँ हाथ की उँगलियाँ दक्षिणावर्त मोड़ो। अँगूठा मेज के अंदर की ओर, नीचे को, रहता है। इसलिए लूप के अंदर क्षेत्र नीचे की ओर है। बाहर क्षेत्र लौटकर ऊपर की ओर आता है।
n गुना वाला वाक्य परिभाषा के साथ लिखो: हर फेरे की धारा एक ही दिशा में जुड़ती है।
घड़ी की दिशा वाले प्रश्न में पहले उँगलियाँ मोड़ो, फिर अँगूठे को अंदर या बाहर पढ़ो।
हर फेरा एक ही दिशा में जोड़ता है।
n फेरों का क्षेत्र एक फेरे का n गुना होता है।
सही — बड़े वृत्तों के चाप केंद्र पर सीधे लगते हैं। लंबी कुंडली के केंद्र पर वे समान्तर सीधी रेखाएँ होती हैं।
अँगूठा उँगलियों के घुमाव से तय होता है।
दक्षिणावर्त धारा पर अंदर का क्षेत्र नीचे की ओर होता है। बाहर वह ऊपर की ओर होता है।
गत्ते को थपथपाने के बाद पैटर्न उभरता है।
लोहचूर्ण क्षेत्र रेखाओं के पैटर्न में जम जाता है।
तार के हर छोटे हिस्से का क्षेत्र केंद्र पर लगभग सीधी रेखा जैसा होता है। दाएँ हाथ के नियम से हर हिस्से की ये रेखाएँ लूप के अंदर एक ही दिशा में होती हैं, इसलिए वे जुड़ जाती हैं। n फेरों में यह योग n गुना हो जाता है।
The solenoid and the electromagnet · NCERT 12.2.4 · परिनालिका
पास-पास लिपटे विद्युतरोधी ताँबे के तार के कई वृत्ताकार फेरे जब बेलन का आकार लें, तो वह परिनालिका है। धारा बहने पर एक सिरा उत्तर ध्रुव और दूसरा दक्षिण ध्रुव बनता है। पैटर्न छड़ चुंबक जैसा है।
अंदर क्षेत्र रेखाएँ समान्तर सीधी रेखाएँ होती हैं। इसका अर्थ है कि अंदर हर बिन्दु पर क्षेत्र समान है, यानी क्षेत्र एकसमान है।
परिनालिका के अंदर नरम लोहे जैसा चुंबकीय पदार्थ रखो तो प्रबल क्षेत्र उसे चुंबक बना देता है। इसी चुंबक को विद्युत चुंबक कहते हैं। धारा रहे तभी नरम लोहा चुंबक की तरह काम करता है। पुस्तक का चित्र स्टील की छड़ को भी इसी कुंडली से चुंबकित करता दिखाता है।
प्रश्न: लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र कैसा होता है — शून्य, सिरे की ओर घटता, या हर बिन्दु पर समान?
उत्तर: हर बिन्दु पर समान। प्रमाण यह है कि अंदर रेखाएँ समान्तर और सीधी हैं। शून्य नहीं है, और आदर्श लंबी परिनालिका में सिरे की ओर घटता भी नहीं माना जाता।
चार विकल्प वाले प्रश्न का उत्तर «हर बिन्दु पर समान» है। «शून्य» वाला विकल्प मत चुनना।
विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक का अंतर एक पंक्ति में: धारा बंद होते ही नरम लोहा लगभग सामान्य हो जाता है।
10-सेकंड रिवीजन
अंदर रेखाएँ समान्तर और सीधी हैं।
अंदर क्षेत्र एकसमान है, हर बिन्दु पर समान।
सही — क्षेत्र का पैटर्न छड़ चुंबक जैसा होता है।
धारा के चुंबकीय प्रभाव से बना चुंबक।
इसे विद्युत चुंबक कहते हैं।
विद्युतरोधी ताँबे के तार के कई पास-पास लिपटे वृत्ताकार फेरे जब बेलन का आकार लें तो वह परिनालिका है। अंदर क्षेत्र रेखाएँ समान्तर सीधी रेखाएँ होती हैं, इसलिए क्षेत्र हर बिन्दु पर समान, यानी एकसमान, होता है। एक सिरा उत्तर ध्रुव और दूसरा दक्षिण ध्रुव बनता है।
Force on a conductor — Activity 12.7 · NCERT 12.3 · क्रियाकलाप 12.7 · फ्लेमिंग का बायाँ हाथ
धारा वाला तार पास के चुंबक पर बल लगाता है। आंद्रे मैरी ऐम्पियर ने कहा कि चुंबक भी धारा वाले चालक पर उतना ही और विपरीत बल लगाएगा।
बल की दिशा धारा और क्षेत्र दोनों पर निर्भर करती है। बल सबसे बड़ा तब होता है जब धारा और क्षेत्र एक-दूसरे के लम्बवत हों। तब बल दोनों के लम्बवत होता है।
लगभग 5 cm की ऐलुमिनियम छड़ AB को दो तारों से स्टैंड पर क्षैतिज लटकाओ। नाल चुंबक ऐसे रखो कि क्षेत्र ऊपर की ओर हो: उत्तर ध्रुव छड़ के नीचे और दक्षिण ध्रुव ऊपर। छड़ को बैटरी, कुंजी और धारा नियंत्रक से श्रेणी में जोड़ो।
धारा B से A भेजो। छड़ बाईं ओर खिसकती है। धारा पलटो तो खिसकाव दाईं ओर हो जाता है। ध्रुव बदलकर क्षेत्र नीचे की ओर करो तो बल की दिशा फिर पलट जाती है।
धारा बढ़ाओ, चुंबक मजबूत करो, या छड़ लंबी करो — तीनों में विस्थापन बढ़ता है।
बाएँ हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा एक-दूसरे के लम्बवत फैलाओ। तर्जनी क्षेत्र की दिशा में, मध्यमा धारा की दिशा में। तब अँगूठा बल या गति की दिशा बताता है।
मोटर, जनित्र, लाउडस्पीकर, माइक्रोफोन और कई मापी यंत्र धारा वाले चालक और चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं।
प्रश्न: एक तार में धारा पूर्व की ओर है और चुंबकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर है। बल किधर लगेगा?
उत्तर: बायाँ हाथ खोलो। मध्यमा पूर्व की ओर (धारा), तर्जनी नीचे की ओर (क्षेत्र)। अँगूठा उत्तर की ओर खुलता है। बल उत्तर की ओर है। धारा पश्चिम कर दो तो बल दक्षिण की ओर हो जाएगा।
प्रोटॉन स्वतंत्र रूप से क्षेत्र में चले तो उसका द्रव्यमान और चाल नहीं बदलते। वेग की दिशा बदलती है, इसलिए वेग और संवेग बदल सकते हैं। इलेक्ट्रॉन पर नियम लगाते समय धारा को इलेक्ट्रॉन की गति के विपरीत लो।
बायाँ हाथ बल के लिए है। दायाँ हाथ इस प्रश्न का उत्तर नहीं है।
ऐल्फा कण पश्चिम जाता है और उत्तर को मुड़ता है तो क्षेत्र ऊपर की ओर है। धन आवेश की गति ही धारा की दिशा है।
10-सेकंड रिवीजन
तीनों दिशाएँ एक-दूसरे के लम्बवत।
बल सबसे बड़ा तब होता है जब धारा चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत हो।
सही — B से A पर छड़ बाईं ओर जाती है, धारा पलटने पर दाईं ओर।
तर्जनी क्षेत्र है, मध्यमा धारा।
अँगूठा बल या गति दिखाता है। प्रेरित धारा दाएँ हाथ की मध्यमा है।
धन आवेश की गति धारा है। मध्यमा पश्चिम, अँगूठा उत्तर।
क्षेत्र ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर है।
वेग और संवेग बदल सकते हैं, क्योंकि बल दिशा बदल देता है। द्रव्यमान नहीं बदलता और चाल भी नहीं बदलती, क्योंकि यह बल गति के लम्बवत होता है।
Electromagnetic induction and Fleming right hand · प्रेरित धारा · अभ्यास का नियम (iii)
चुंबकीय क्षेत्र में चालक चले, या कुंडली से जुड़ा क्षेत्र बदले, तो चालक में विद्युत वाहक बल और धारा पैदा हो सकती है। इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं।
अभ्यास पूछता है कि चुंबकीय क्षेत्र में घूमती कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा कौन-सा नियम देता है। वह नियम फ्लेमिंग का दायाँ हाथ है। जनित्र इसी विचार पर चलता है: कुंडली क्षेत्र में घूमती है और धारा प्रेरित होती है।
| नियम | हाथ | उँगली |
|---|---|---|
| अँगूठा नियम | दायाँ | अँगूठा धारा, उँगलियाँ क्षेत्र |
| फ्लेमिंग बल | बायाँ | तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अँगूठा बल |
| फ्लेमिंग प्रेरण | दायाँ | तर्जनी क्षेत्र, अँगूठा गति, मध्यमा प्रेरित धारा |
दाएँ हाथ की तीन उँगलियाँ लम्बवत रखो। तर्जनी क्षेत्र, अँगूठा चालक की गति, मध्यमा प्रेरित धारा। बाएँ हाथ वाले बल के साथ इसे मत मिलाना। अँगूठा नियम भी दायाँ हाथ है, पर वह सीधे तार के क्षेत्र के लिए है, प्रेरित धारा के लिए नहीं।
प्रश्न: एक चालक पूर्व की ओर चल रहा है और क्षेत्र ऊपर की ओर है। प्रेरित धारा की दिशा कैसे निकालोगे?
उत्तर: दायाँ हाथ लो। तर्जनी ऊपर (क्षेत्र), अँगूठा पूर्व (गति)। मध्यमा जो दिशा दिखाए वही प्रेरित धारा है। इस जोड़े में मध्यमा दक्षिण की ओर रहती है, इसलिए प्रेरित धारा दक्षिण की ओर है। बल पूछा होता तो बायाँ हाथ लगाते।
तीन नियमों की तालिका एक साथ याद रखो। परीक्षा अक्सर तीनों एक प्रश्न में पूछती है।
जनित्र का नाम लिखो जब कुंडली के घूमने से प्रेरित धारा पूछी जाए। मोटर बल वाली युक्ति है।
10-सेकंड रिवीजन
अँगूठा चालक की गति है।
प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग का दायाँ हाथ देता है।
गलत — बायाँ हाथ बल बताता है। प्रेरित धारा दायाँ हाथ है।
अँगूठा गति है, तर्जनी क्षेत्र।
मध्यमा प्रेरित धारा दिखाती है।
पुस्तक जनित्र को उन युक्तियों में गिनती है जो क्षेत्र और चालक का उपयोग करती हैं।
जनित्र में कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है और धारा प्रेरित होती है।
सीधे तार का क्षेत्र दाएँ हाथ के अँगूठा नियम से: अँगूठा धारा, उँगलियाँ क्षेत्र। बल फ्लेमिंग के बाएँ हाथ से: तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अँगूठा बल। प्रेरित धारा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ से: तर्जनी क्षेत्र, अँगूठा गति, मध्यमा प्रेरित धारा।
The domestic circuit, the fuse and AC–DC · NCERT 12.4 · 220 V · 50 Hz
घर में बिजली खंभों या भूमिगत केबल से आती है। लाल आवरण वाला तार लाइन (लाइव) है और काला उदासीन। हमारे देश में दोनों के बीच विभवांतर 220 V है। यह आपूर्ति प्रत्यावर्ती (AC) है और आवृत्ति 50 Hz है, यानी दिशा हर चक्र में पलटती है और एक चक्र 1/50 सेकंड का है। सेल की धारा दिष्ट (DC) है, वह एक ही दिशा में बहती है।
मीटर बोर्ड पर मुख्य फ्यूज के बाद मुख्य स्विच आता है। अक्सर दो परिपथ होते हैं: गीजर और कूलर जैसे बड़े उपकरण 15 A पर, बल्ब और पंखा 5 A पर। उपकरण लाइन और उदासीन के बीच समांतर जुड़े होते हैं, ताकि हर एक को समान विभवांतर मिले। हर उपकरण का अपना स्विच होता है।
हरा भू-संपर्क तार घर के पास धरती में गड़ी धातु की प्लेट से जुड़ा होता है। प्रेस, टोस्टर, पंखा या फ्रिज की धातु की देह इसी से जुड़ी रहती है। रिसती धारा का कम प्रतिरोध वाला रास्ता धरती बन जाता है, देह का विभव धरती के बराबर रहता है, और उपयोगकर्ता को तेज झटका नहीं लगता।
फ्यूज अतिभार या लघुपथन में परिपथ बचाता है। जूल तापन से फ्यूज पिघलकर परिपथ तोड़ देता है। लघुपथन में लाल और काला तार सीधे मिल जाते हैं, जब आवरण टूटा हो या उपकरण में दोष हो, और धारा अचानक बहुत बढ़ जाती है। अतिभार बहुत सारे उपकरण एक सॉकेट पर लगाने से, या आपूर्ति वोल्टता के अचानक बढ़ने से भी होता है।
| तार | रंग | काम |
|---|---|---|
| लाइन | लाल | आपूर्ति |
| उदासीन | काला | वापसी |
| भू-संपर्क | हरा | रिसाव का सुरक्षित रास्ता |
प्रश्न: 2 kW का ओवन 220 V के उस घरेलू परिपथ पर चलाया जाता है जिसकी धारा सीमा 5 A है। क्या होगा?
सूत्र: P = VI, इसलिए I = P / V।
रखो: P = 2 kW = 2000 W, V = 220 V।
I = 2000 / 220 = 100/11 = 9.09 A, लगभग 9.1 A।
9.1 A, 5 A की सीमा से बड़ा है। फ्यूज पिघलेगा और परिपथ टूटेगा। इतना ओवन 15 A वाले परिपथ पर चलना चाहिए, 5 A वाले बल्ब-पंखा वाले परिपथ पर नहीं।
हरा तार लाइव नहीं है। यह भूल वस्तुनिष्ठ में अक्सर फँसाती है।
ओवन वाले संख्या-प्रश्न में I = P/V लिखो, वाट और वोल्ट रखो, और उत्तर की तुलना 5 A से करो।
10-सेकंड रिवीजन
लाल लाइन है, काला उदासीन।
हरा तार भू-संपर्क है। यह लाइव नहीं है।
सही — लाइन और उदासीन सीधे मिलने पर धारा अचानक बढ़ती है।
लाइन और उदासीन के बीच।
विभवांतर 220 V है और आवृत्ति 50 Hz।
I = P/V और P को वाट में लिखो।
I = 2000/220 = 9.09 A, लगभग 9.1 A। यह 5 A की सीमा से अधिक है।
हरा तार धरती में गड़ी धातु की प्लेट से जुड़ा होता है। उपकरण की धातु की देह इसी से जुड़ी रहती है, ताकि रिसी हुई धारा का कम प्रतिरोध वाला रास्ता धरती बन जाए। देह का विभव धरती जितना रहता है और उपयोगकर्ता को तेज झटका नहीं लगता।
प्रकार चुनो। पाठों के 39 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
लोहचूर्ण वृत्तों में जमता है।
क्षेत्र संकेंद्र वृत्तों का होता है।
लाइन और उदासीन सीधे मिलते हैं।
धारा अचानक बहुत बढ़ जाती है।
अँगूठा धारा है।
उँगलियाँ क्षेत्र रेखाओं की दिशा में मुड़ती हैं।
रेखाएँ समान्तर हैं।
अंदर क्षेत्र एकसमान होता है।
मध्यमा धारा, अँगूठा बल।
तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र दिखाती है।
लाल लाइन है।
हरा भू-संपर्क है।
वोल्ट 220 है, हर्ट्ज अलग है।
आवृत्ति 50 Hz है।
अध्याय 11 वाला तापन।
अधिक धारा पर जूल तापन फ्यूज को पिघला देता है।
सुई एक दिशा दिखाती है।
दो रेखाएँ नहीं कटतीं।
तीनों दिशाएँ लम्बवत।
लम्बवत स्थिति में बल सबसे बड़ा होता है।
परिनालिका के अंदर।
नरम लोहा विद्युत चुंबक की क्रोड बनता है।
हर एक को समान विभवांतर चाहिए।
उपकरण समांतर जोड़े जाते हैं।
अँगूठा अपनी ओर।
बाहर आती धारा पर क्षेत्र वामावर्त होता है।
5 A बल्ब और पंखे के लिए है।
बड़े उपकरण 15 A परिपथ पर होते हैं।
क्रियाकलाप 12.1 और 12.4।
क्षेत्र रेखाएँ तार के केंद्र वाले वृत्त होती हैं। दिशा अँगूठा नियम से मिलती है।
अंगूठा बल, तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा।
बायाँ हाथ बल की दिशा देता है। दायाँ हाथ प्रेरित धारा की दिशा देता है।
गलत — हरा भू-संपर्क है। लाल लाइन है।
सही — केंद्र पर चाप सीधे लगते हैं और लंबी कुंडली में वे समान्तर होते हैं।
गलत — अंदर दिशा दक्षिण से उत्तर है। बाहर उत्तर से दक्षिण।
गलत — बल बायाँ हाथ है। दायाँ हाथ प्रेरित धारा है।
सही — दिशा हर चक्र में पलटती है।
गलत — उदासीन काला है। लाल लाइन है।
सही — सुई का विक्षेप भी बढ़ता है।
गलत — बाहर N से S और अंदर S से N मिलकर बंद वक्र बनाते हैं।
अँगूठा धारा की दिशा में होता है।
उँगलियाँ क्षेत्र हैं।
हरा।
लाल नहीं।
220 V।
आवृत्ति 50 Hz अलग है।
अँगूठा बल या गति देता है।
तर्जनी क्षेत्र है।
50 Hz।
वोल्ट वाली संख्या नहीं।
जूल तापन।
I²R वाला ताप।
उत्तर ध्रुव से।
स्वतंत्र उत्तर ध्रुव की दिशा।
विद्युत चुंबक।
धारा बंद होते ही नरम लोहा लगभग छोड़ देता है।
लाल लाइन, काला उदासीन, हरा भू-संपर्क, 15 A बड़े उपकरण।
अँगूठा क्षेत्र, बायाँ हाथ बल, दायाँ हाथ प्रेरित धारा, रेखा बंद वक्र।
अभिकथन (A): धारा वाले तार के पास दिक्सूचक मुड़ता है।
कारण (R): विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ नहीं कटतीं।
कारण (R): कटान पर दिक्सूचक को एक साथ दो दिशाएँ दिखानी पड़तीं।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): फ्यूज परिपथ को अतिभार से बचाता है।
कारण (R): फ्यूज धारा को और बढ़ा देता है।
A सही है। R गलत — फ्यूज पिघलकर धारा रोकता है।
अभिकथन (A): घर की आपूर्ति 50 Hz की AC है।
कारण (R): हरा तार लाइन तार होता है।
A सही है। R गलत — हरा तार भू-संपर्क है, लाइन नहीं।
अभिकथन (A): परिनालिका के अंदर क्षेत्र शून्य होता है।
कारण (R): अंदर क्षेत्र रेखाएँ समान्तर होने से क्षेत्र हर बिन्दु पर समान होता है।
A गलत है। R सही है — क्षेत्र शून्य नहीं, एकसमान है।
क्षेत्र अँगूठा नियम, बल बायाँ हाथ, प्रेरित धारा दायाँ हाथ।
मेन्स AC है, 220 V और 50 Hz। सेल DC देती है।
चुंबक के आस-पास का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल को पकड़ा जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है।
दाएँ हाथ से धारा वाले सीधे तार को ऐसे पकड़ो कि अँगूठा धारा की ओर हो। उँगलियाँ क्षेत्र रेखाओं की दिशा में मुड़ती हैं।
फ्यूज और भू-संपर्कन। फ्यूज अधिक धारा पर पिघलता है। हरा तार धातु की देह को धरती से जोड़ता है।
जब लाइन और उदासीन तार सीधे संपर्क में आ जाएँ। ऐसा आवरण टूटने या उपकरण की खराबी से होता है और धारा अचानक बढ़ जाती है।
धारा वाली परिनालिका के अंदर नरम लोहे जैसी क्रोड रखने से बना चुंबक विद्युत चुंबक है।
बाहर वे उत्तर से दक्षिण जाती हैं और अंदर दक्षिण से उत्तर, इसलिए बंद वक्र हैं। पास-पास रेखाएँ प्रबल क्षेत्र दिखाती हैं। दो रेखाएँ नहीं कटतीं।
छड़ में धारा बढ़ाने पर, नाल चुंबक मजबूत करने पर, और छड़ की लंबाई बढ़ाने पर विस्थापन बढ़ता है।
I = P/V = 1000 W / 220 V = 4.55 A। 4.55 A, 5 A से कम है, इसलिए यह 5 A परिपथ पर चल सकता है। 2 kW का ओवन 9.1 A लेता है और 5 A परिपथ पर नहीं चलना चाहिए।
बहुत सारे उपकरण एक सॉकेट पर लगाना, या आपूर्ति वोल्टता का अचानक बढ़ना। सावधानी: एक सॉकेट पर अधिक उपकरण मत जोड़ो और सही धारा सीमा का फ्यूज लगाओ।
सीधे तार का क्षेत्र संकेंद्र वृत्त होता है। धारा बढ़ाने पर क्षेत्र बढ़ता है और दूरी बढ़ाने पर घटता है। वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर रेखाएँ लगभग सीधी होती हैं और n फेरों पर क्षेत्र n गुना होता है। परिनालिका छड़ चुंबक जैसी होती है; अंदर रेखाएँ समान्तर होती हैं और क्षेत्र एकसमान होता है। दिशा दाएँ हाथ के अँगूठा नियम से मिलती है।
बायाँ हाथ: तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अँगूठा बल। दायाँ हाथ: तर्जनी क्षेत्र, अँगूठा चालक की गति, मध्यमा प्रेरित धारा। मोटर बल का उपयोग करती है इसलिए बायाँ हाथ; जनित्र में कुंडली घूमकर धारा प्रेरित होती है इसलिए दायाँ हाथ।
लाल लाइन और काला उदासीन मीटर में मुख्य फ्यूज से होकर मुख्य स्विच तक जाते हैं। 15 A का परिपथ गीजर जैसे उपकरण लेता है और 5 A का परिपथ बल्ब व पंखा। उपकरण समांतर होते हैं। फ्यूज जूल तापन से पिघलकर 9 A जैसी अधिक धारा को रोक देता है, जैसे 2 kW ओवन 5 A परिपथ पर। हरा तार धातु की देह को धरती से जोड़ता है ताकि रिसाव पर झटका न लगे।
फ्यूज श्रेणी में लगता है और अधिक धारा पर पिघलकर परिपथ खोल देता है। अर्थ-तार धातु के खोल से जुड़ी होती है, ताकि रिसाव की धारा जमीन में चली जाए और झटका न लगे। फ्यूज लाइन तार में होता है, अर्थ-तार खोल पर।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
अँगूठा गति है।
फ्लेमिंग का दायाँ हाथ प्रेरित धारा देता है।
धारा सीमा से अधिक भार।
एक सॉकेट पर अधिक उपकरण अतिभार कर सकते हैं।
लाल।
काला उदासीन है।
परिनालिका का प्रबल क्षेत्र नरम लोहे को चुंबक बना देता है। धारा के रहते यह विद्युत चुंबक काम करता है।
अँगूठा नियम: अँगूठा धारा, उँगलियाँ क्षेत्र। उपयोग: सीधे तार या लूप के क्षेत्र की दिशा। बायाँ हाथ: तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अँगूठा बल। उपयोग: मोटर में चालक पर बल। दायाँ हाथ: तर्जनी क्षेत्र, अँगूठा गति, मध्यमा प्रेरित धारा। उपयोग: जनित्र में घूमती कुंडली की धारा।
क्रियाकलाप 12.5 के बाद का उपयोग।
नरम लोहे की क्रोड पर लपेटा तार विद्युत चुंबक बनाता है। धारा बंद होते ही चुंबकत्व लगभग हट जाता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
I = P/V।
I = 2000/220 ≈ 9.1 A, जो 5 A से अधिक है, इसलिए फ्यूज पिघलता है।
उँगलियाँ वामावर्त, अँगूठा ऊपर।
वामावर्त धारा पर अंदर का क्षेत्र ऊपर की ओर होता है। दक्षिणावर्त पर नीचे की ओर।
अभिकथन (A): धातु की देह वाले फ्रिज को भू-संपर्क करना चाहिए।
कारण (R): हरा तार रिसी धारा को कम प्रतिरोध के रास्ते धरती में ले जाता है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): इलेक्ट्रॉन पर फ्लेमिंग का बायाँ हाथ लगाते समय धारा की दिशा ध्यान से लेनी होती है।
कारण (R): धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन की गति की दिशा ही मानी जाती है।
A सही है। R गलत — धारा इलेक्ट्रॉन की गति के विपरीत ली जाती है।
अँगूठा पश्चिम की ओर है। पूर्व सिरे से, यानी धारा की दिशा में देखने पर, क्षेत्र तार के लम्बवत तल में दक्षिणावर्त घूमता है। पश्चिम सिरे से देखने पर वही क्षेत्र वामावर्त दिखेगा।
I = P/V = 1500/220 = 6.82 A। यह 5 A से अधिक और 15 A से कम है, इसलिए कूलर 15 A परिपथ पर चलना चाहिए। 5 A परिपथ पर फ्यूज पिघल सकता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| दायाँ अँगूठा | thumb = current, fingers = field |
| फ्लेमिंग बायाँ | forefinger field, middle finger current, thumb force |
| फ्लेमिंग दायाँ | forefinger field, thumb motion, middle finger induced current |
| परिनालिका के अंदर | parallel lines, same field at every point |
| मेन्स | 220 V, 50 Hz, AC |
| तारों के रंग | live red, neutral black, earth green |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।