प्रतिबिंब सदा सीधा और छोटा रहता है।
बाहर उभरी सतह उत्तल दर्पण जैसी है। अंदर धँसी सतह अवतल जैसी है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 9 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
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1. पढ़ो — क्रियाकलाप 9.1 से 9.13 · चम्मच, दर्पण, सिक्का, सिल्ली और लेंस, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. चिह्न-परिपाटी वाला चित्र देखो — वस्तु बाईं ओर है, और दूरियाँ ध्रुव या प्रकाशिक केन्द्र से नापी जाती हैं।
NCERT 2026-27 में यह अध्याय 9 है। बिहार की पुरानी 16-अध्याय वाली किताब में यही पाठ अध्याय 10 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Two faces of a spoon — Activity 9.1 · NCERT 9.1 · क्रियाकलाप 9.1
अँधेरे कमरे में वस्तु नहीं दिखती। प्रकाश पड़े तो वस्तु उसे लौटाती है और वही प्रकाश आँख में पहुँचकर वस्तु दिखाता है। पारदर्शी माध्यम से प्रकाश आर-पार निकल जाता है।
इस अध्याय में हम किरण को सीधी रेखा मानकर चलेंगे। परावर्तन के दो नियम हर चमकदार सतह पर लागू होते हैं, गोलीय सतह पर भी। आपतन कोण = परावर्तन कोण। आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं।
समतल दर्पण का प्रतिबिंब सदा आभासी और सीधा होता है, वस्तु जितना बड़ा, और उतना ही पीछे जितना वस्तु आगे है। साथ में वह पार्श्व-उलटा होता है।
बड़ी चमकदार चम्मच लो। पहले अंदर धँसी सतह में अपना चेहरा देखो। पास रखने पर प्रतिबिंब सीधा और बड़ा दिखता है। चम्मच को धीरे दूर ले जाओ। एक दूरी के बाद चेहरा उलटा और छोटा पड़ने लगता है।
अब चम्मच उलटा करो, बाहर उभरी सतह में देखो। प्रतिबिंब सदा सीधा और छोटा रहता है। अंदर की सतह अवतल दर्पण जैसी है, बाहर की उत्तल जैसी। गोलीय दर्पण किसी गोले के पृष्ठ का भाग होता है। चित्र में दर्पण की पीछे की ओर छायांकित रहती है — वही ओर नहीं चमकती।
प्रश्न: चम्मच की कौन-सी सतह दाढ़ी बनाने वाले दर्पण जैसी है, और क्यों?
उत्तर: अंदर धँसी सतह। पास लाने पर वह सीधा और बड़ा प्रतिबिंब देती है, जैसे अवतल दर्पण तब देता है जब चेहरा ध्रुव और फोकस के बीच हो।
वस्तुनिष्ठ में चम्मच की सतह का नाम लिखो — केवल «चमकदार» अधूरा है।
CBSE नियम पूछता है तो दोनों लिखो: कोण बराबर, और तीनों एक तल में। एक नियम आधा अंक छोड़ देता है।
प्रतिबिंब सदा सीधा और छोटा रहता है।
बाहर उभरी सतह उत्तल दर्पण जैसी है। अंदर धँसी सतह अवतल जैसी है।
गलत — यही नियम गोलीय सतहों पर भी लागू होते हैं।
पहला नियम।
आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।
पास रखने पर चेहरा सीधा और बड़ा दिखता है। चम्मच दूर करने पर एक स्थिति के बाद प्रतिबिंब उलटा और छोटा हो जाता है। बाहर की सतह पर ऐसा उलटना नहीं होता।
Focal length of a concave mirror — Activity 9.2 · NCERT 9.2 · क्रियाकलाप 9.2 · सावधानी
सावधानी: सूर्य को सीधे मत देखो, और सूर्य का प्रकाश लौटा रहे दर्पण में भी मत देखो। आँख खराब हो सकती है। कागज पर बना चमकीला धब्बा ही देखो।
अवतल दर्पण को हाथ में लो और उसका चमकदार पृष्ठ सूर्य की ओर करो। परावर्तित प्रकाश को दर्पण के पास रखे कागज पर डालो। कागज को आगे-पीछे खिसकाओ जब तक एक तीखा चमकीला बिंदु न बने।
उसी स्थिति पर कुछ मिनट रखो। कागज पहले धुआँ देता है और फिर जल सकता है। सूर्य की किरणें उस बिंदु पर सिमटती हैं। यही बिंदु दर्पण का फोकस है, और यह सूर्य का छोटा वास्तविक प्रतिबिंब है। दर्पण से इस बिंदु तक की दूरी फोकस दूरी का लगभग मान है।
दर्पण के चमकदार पृष्ठ का मध्य बिंदु ध्रुव P है। यह दर्पण पर ही होता है। जिस गोले का यह पृष्ठ भाग है, उसका केन्द्र वक्रता केन्द्र C है। C दर्पण पर नहीं होता। अवतल में C सामने होता है, उत्तल में पीछे। PC ही वक्रता त्रिज्या R है।
P और C से जाने वाली रेखा मुख्य अक्ष है। यह ध्रुव पर दर्पण के अभिलंब होती है। मुख्य अक्ष के समांतर किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद अक्ष पर एक बिंदु से गुजरती हैं। वह मुख्य फोकस F है। उत्तल में परावर्तित किरणें ऐसे बिंदु से आती हुई दिखती हैं। PF = f।
छोटे द्वारक के दर्पण में R = 2f। फोकस, ध्रुव और वक्रता केन्द्र के बीचों-बीच होता है। द्वारक चमकदार पृष्ठ का व्यास है।
प्रश्न: एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। फोकस दूरी क्या है?
सूत्र: f = R / 2
रखो: f = 20 cm / 2 = 10 cm
चिह्न बाद में लगेंगे। यदि दर्पण अवतल है तो फोकस सामने है और f = −10 cm। यदि उत्तल है तो f = +10 cm।
सावधानी वाला अंक अलग मिलता है। उत्तर में «आँख खराब हो सकती है» लिखो।
CBSE R = 20 cm पर 10 cm लिखता है। चिह्न तभी लगाओ जब प्रश्न अवतल या उत्तल कहे।
तीखा चमकीला बिंदु।
किरणें एक बिंदु पर सिमटती हैं। वही फोकस है और ऊष्मा कागज जला देती है।
गलत — सावधानी है कि सूर्य को सीधे या दर्पण के रास्ते मत देखो।
f = R/2।
f = 32 cm / 2 = 16 cm। उत्तल दर्पण हो तो चिह्न के साथ f = +16 cm।
R = 2f।
F, ध्रुव और वक्रता केन्द्र के बीचों-बीच होता है।
समांतर किरणें परावर्तन के बाद फोकस पर मिलती हैं। वहीं ऊष्मा जमा होकर कागज जलाती है। सूर्य को सीधे या दर्पण में मत देखो, आँख खराब हो सकती है।
Centre of curvature and the candle — Activity 9.3 · NCERT 9.2.1 · क्रियाकलाप 9.3 · सारणी 9.1
क्रियाकलाप 9.2 वाली दूरी ही लगभग f है। छोटे द्वारक में F, ध्रुव और वक्रता केन्द्र के मध्य होता है, इसलिए C की दूरी 2f है। अवतल दर्पण का प्रतिबिंब वस्तु की जगह पर निर्भर करता है — कभी वास्तविक, कभी आभासी; कभी बड़ा, कभी छोटा।
अवतल दर्पण का लगभग f निकालो। मेज पर एक रेखा खींचो और दर्पण का ध्रुव उसी पर रखो। फिर f के बराबर अंतर पर दो और समांतर रेखाएँ खींचो। ये P, F और C की जगह बनेंगी।
जलती मोमबत्ती पहले C से बहुत दूर रखो। पर्दा आगे-पीछे करो जब तक लौ का तीखा प्रतिबिंब न मिले। फिर मोमबत्ती को (a) C से ठीक आगे, (b) C पर, (c) F और C के बीच, (d) F पर, (e) P और F के बीच रखो।
एक स्थिति में पर्दे पर प्रतिबिंब नहीं मिलता। वह जगह P और F के बीच है। तब प्रतिबिंब दर्पण में ही देखो — आभासी, सीधा और बड़ा। F पर किरणें समांतर निकलती हैं, इसलिए सीमित दूरी पर प्रतिबिंब नहीं बनता।
| वस्तु | प्रतिबिंब | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत | F पर | बिंदु-समान | वास्तविक, उलटा |
| C से दूर | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| C पर | C पर | बराबर | वास्तविक, उलटा |
| C और F के बीच | C से दूर | बड़ा | वास्तविक, उलटा |
| F पर | अनंत | नहीं बनता | — |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
प्रश्न: दाढ़ी का दर्पण चेहरा बड़ा और सीधा दिखाता है। चेहरा कहाँ है?
उत्तर: ध्रुव और फोकस के बीच। सारणी में केवल यही एक जगह आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब देती है। दाँत देखने वाला दंत-दर्पण भी इसी जगह काम करता है।
सारणी की अंतिम पंक्ति सबसे अधिक पूछी जाती है। छह पंक्तियों में केवल वही आभासी है।
CBSE «वास्तविक का अर्थ» पूछता है। वास्तविक पर्दे पर मिलता है और उलटा होता है। आभासी केवल दर्पण में दिखता है।
पर्दे पर नहीं मिलता।
यही एक स्थिति आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब देती है।
सही — और वह वास्तविक तथा उलटा होता है।
समांतर किरणें फोकस से जुड़ी हैं। उलटा रास्ता भी चलता है।
फोकस से चली किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है। इसी से शक्तिशाली पुंज मिलता है।
किरणें समांतर निकलती हैं।
प्रतिबिंब अनंत पर बनता है, सीमित पर्दे पर नहीं।
जब मोमबत्ती P और F के बीच होती है, परावर्तित किरणें सामने नहीं मिलतीं। वे पीछे से मिलती हुई लगती हैं। प्रतिबिंब आभासी होता है और दर्पण में देखना पड़ता है। पर्दा उसे पकड़ नहीं पाता।
Ray diagrams and the mirror formula — Activity 9.4 · NCERT 9.2.2–9.2.4 · क्रियाकलाप 9.4 · चिह्न परिपाटी
सारणी 9.1 की हर वस्तु-स्थिति का साफ़ किरण आरेख बनाओ। प्रतिबिंब पकड़ने के लिए निम्न में से कोई दो किरणें लो।
अपना आरेख पुस्तक के आरेख से मिलाओ और प्रकृति, जगह तथा आकार लिखो।
ध्रुव को मूल बिंदु मानो। वस्तु हमेशा बाईं ओर रखी जाती है, ताकि प्रकाश बाएँ से पड़े। दूरियाँ ध्रुव से नापो। बाईं ओर (आपतित प्रकाश की दिशा) ऋणात्मक है, दाईं ओर धनात्मक। अक्ष के ऊपर धनात्मक, नीचे ऋणात्मक।
इसलिए u सदा ऋणात्मक है। अवतल का f ऋणात्मक, उत्तल का धनात्मक। दर्पण के सामने बना वास्तविक प्रतिबिंब ऋणात्मक v देता है। पीछे का आभासी प्रतिबिंब धनात्मक v देता है।
| संबंध | रूप | याद रखने की बात |
|---|---|---|
| दर्पण सूत्र | 1/v + 1/u = 1/f | हर गोलीय दर्पण, हर जगह |
| आवर्धन | m = −v/u | ऋण चिह्न = वास्तविक उलटा |
| ऊँचाई से | m = h′/h | वस्तु की ऊँचाई धनात्मक लो |
प्रश्न: 4.0 cm ऊँची वस्तु अवतल दर्पण से 25 cm दूर है। फोकस दूरी 15 cm है। पर्दा कहाँ रखें? प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति क्या है?
दिया है: h = +4.0 cm, u = −25 cm, f = −15 cm। अवतल है, इसलिए f ऋणात्मक। वस्तु बाईं ओर है, इसलिए u ऋणात्मक।
सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f
रखो: 1/v = 1/f − 1/u = 1/(−15) − 1/(−25) = −1/15 + 1/25
= −5/75 + 3/75 = −2/75
v = −37.5 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(−37.5 cm)/(−25 cm) = −1.5
h′ = m × h = (−1.5) × (+4.0 cm) = −6.0 cm
पर्दा दर्पण के सामने 37.5 cm पर रखो। प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और बड़ा है।
संख्या में तीन पंक्तियाँ अनिवार्य हैं: सूत्र, मान रखकर चरण, और इकाई cm के साथ उत्तर।
CBSE चिह्न का कारण पूछता है। «ऋणात्मक लिखा क्योंकि अवतल है» आधा है। लिखो: फोकस दर्पण के सामने है, और सामने की दूरी ऋणात्मक है।
यही फोकस की परिभाषा है।
समांतर किरण अवतल दर्पण के फोकस से होकर जाती है।
गलत — वस्तु बाईं ओर होती है, इसलिए u ऋणात्मक है।
ऊँचाई वाला रूप h′/h भी है।
m = −v/u। ऋण चिह्न वास्तविक उलटा प्रतिबिंब बताता है।
v ऋणात्मक है।
v = −37.5 cm का अर्थ दर्पण के सामने 37.5 cm है। प्रतिबिंब वास्तविक है।
अभिकथन (A): अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक लिखी जाती है।
कारण (R): चिह्न परिपाटी में दर्पण के सामने की दूरी ऋणात्मक होती है और फोकस सामने होता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
वह किरण दर्पण पर अभिलंब की दिशा में पड़ती है। आपतन कोण शून्य होता है, इसलिए परावर्तन कोण भी शून्य रहता है और किरण वापस उसी रास्ते चली जाती है।
Convex mirror — Activity 9.5 · NCERT सारणी 9.2 · क्रियाकलाप 9.5
उत्तल दर्पण एक हाथ में लो और सीधी पेंसिल दूसरे हाथ में। दर्पण में प्रतिबिंब सीधा और छोटा है। पेंसिल को धीरे दूर ले जाओ। प्रतिबिंब और छोटा होता है।
वस्तु जितनी दूर जाती है, प्रतिबिंब ध्रुव से हटकर फोकस की ओर बढ़ता है। अनंत पर वस्तु हो तो प्रतिबिंब फोकस पर, बिंदु जैसा, दर्पण के पीछे, आभासी और सीधा होता है।
| वस्तु | प्रतिबिंब | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत | F पर, पीछे | बिंदु-समान | आभासी, सीधा |
| अनंत और P के बीच | P और F के बीच, पीछे | छोटा | आभासी, सीधा |
उत्तल दर्पण वाहन के पार्श्व में लगता है। प्रतिबिंब सदा सीधा रहता है, भले छोटा हो। बाहर की ओर मुड़ा पृष्ठ चौड़ा क्षेत्र दिखाता है। चालक पीछे का बड़ा हिस्सा एक साथ देख लेता है। सौर भट्टी या हेडलाइट का काम यह नहीं है — वे अवतल के हैं।
प्रश्न: पेंसिल दर्पण से दूर जा रही है। उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब फोकस की ओर जाएगा या ध्रुव की ओर?
उत्तर: फोकस की ओर। पास की वस्तु का प्रतिबिंब ध्रुव के निकट होता है। वस्तु अनंत की ओर बढ़े तो प्रतिबिंब F की ओर बढ़ता है, पर F को पार नहीं करता।
«सदा उलटा» उत्तल के लिए गलत विकल्प है। उलटा अवतल की अधिकांश जगहों का है।
CBSE दो कारण माँगता है: सीधा प्रतिबिंब और चौड़ा क्षेत्र। एक कारण अधूरा रहता है।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 9.5।
प्रतिबिंब सीधा और छोटा होता है, दर्पण के पीछे।
गलत — हेडलाइट में अवतल दर्पण होता है। उत्तल पीछे देखने के लिए होता है।
दूर वस्तु का प्रतिबिंब F के पास होता है।
अनंत पर प्रतिबिंब F पर है। वस्तु पास आए तो प्रतिबिंब F से हटकर P की ओर आता है।
प्रतिबिंब सदा सीधा और छोटा होता है, इसलिए पीछे की वस्तु पहचान में रहती है। दर्पण बाहर की ओर मुड़ा है, इसलिए देखने का क्षेत्र समतल दर्पण से चौड़ा होता है।
Plane mirror — Activity 9.6 · NCERT क्रियाकलाप 9.6 · समतल दर्पण
दूर के पेड़ का प्रतिबिंब समतल दर्पण में देखो। क्या पूरी लंबाई दिखी? अलग-अलग आकार के समतल दर्पण आज़माओ। छोटा दर्पण पूरे ऊँचे पेड़ को एक साथ नहीं समेटता।
वही पेड़ अवतल दर्पण में देखो। पूरी लंबाई का सीधा प्रतिबिंब वहाँ भी आसान नहीं। अब उत्तल दर्पण लो। छोटा उत्तल दर्पण पूरे पेड़ को दिखा देता है, क्योंकि क्षेत्र चौड़ा है और प्रतिबिंब छोटा बनता है। आगरा के किले की दीवार पर लगा ऐसा दर्पण ताज का पूरा प्रतिबिंब दिखाता है।
प्रतिबिंब आभासी और सीधा होता है। आकार वस्तु जितना होता है, इसलिए आवर्धन m = +1। धन चिह्न कहता है कि प्रतिबिंब सीधा है। प्रतिबिंब उतना ही पीछे बनता है जितना वस्तु आगे है। वह पार्श्व-उलटा होता है — दायाँ बायाँ दिखता है।
आप कितनी भी दूर खड़े रहो, समतल दर्पण का प्रतिबिंब सीधा ही रहता है। उत्तल भी ऐसा ही करता है। अवतल केवल P और F के बीच सीधा प्रतिबिंब देता है। इसलिए «जितनी भी दूर हो, सीधा» वाले दर्पण समतल या उत्तल हैं।
प्रश्न: समतल दर्पण का आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: प्रतिबिंब वस्तु जितना बड़ा है। धन चिह्न का अर्थ सीधा प्रतिबिंब है, उलटा नहीं। दूरी भी बराबर है: वस्तु 30 cm आगे हो तो प्रतिबिंब 30 cm पीछे।
m = +1 के दोनों भाग लिखो — आकार बराबर और सीधा। केवल «बड़ा» गलत है।
CBSE विकल्प «केवल समतल» और «समतल या उत्तल» में दूसरा सही है, जब दूरी कोई भी हो।
10-सेकंड रिवीजन
आकार बराबर और सीधा।
m = +1। आकार बराबर है और धन चिह्न सीधा प्रतिबिंब बताता है।
गलत — क्रियाकलाप 9.6 में पूरी लंबाई छोटे उत्तल दर्पण में दिखती है।
अवतल हर जगह सीधा नहीं रहता।
समतल और उत्तल दोनों हर दूरी पर सीधा प्रतिबिंब देते हैं।
आकार नहीं बदलता, बायाँ-दायाँ बदलता है।
इसे पार्श्व उत्क्रमण कहते हैं।
उत्तल दर्पण बाहर की ओर मुड़ा होता है, इसलिए देखने का क्षेत्र चौड़ा होता है और प्रतिबिंब छोटा बनता है। छोटा दर्पण भी ऊँचे पेड़ का पूरा सीधा प्रतिबिंब समेट लेता है। समतल दर्पण का क्षेत्र उतना चौड़ा नहीं होता।
The coin and apparent depth — Activities 9.7 and 9.8 · NCERT 9.3 · क्रियाकलाप 9.7 और 9.8
एक माध्यम में प्रकाश सीधा चलता है। तिरछा होकर दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाए तो दिशा बदल जाती है। इसी को अपवर्तन कहते हैं। कारण यह है कि प्रकाश की चाल दोनों माध्यमों में अलग होती है।
तालाब का तल उठा हुआ लगता है। काँच की सिल्ली के नीचे अक्षर उठे लगते हैं। गिलास में आधी डूबी पेंसिल सतह पर मुड़ी लगती है। नींबू पानी में बगल से बड़ा लगता है। पानी की जगह मिट्टी का तेल लें तो मुड़ाव उतना नहीं रहता — प्रभाव माध्यम की जोड़ी पर निर्भर है।
पानी भरी बाल्टी की तली पर सिक्का रखो। आँख को पानी के ऊपर एक ओर रखो और एक ही बार में सिक्का उठाने की कोशिश करो। प्रायः हाथ खाली रह जाता है।
सिक्का अपनी असली जगह पर नहीं दिखता। अपवर्तन के कारण वह थोड़ा ऊपर उठा लगता है। हाथ उसी आभासी जगह पर जाता है। दोबारा करो और मित्रों से भी करवाओ — अनुभव एक जैसा रहता है।
छिछली बड़ी कटोरी में सिक्का रखो। धीरे पीछे हटो। जहाँ सिक्का ठीक ओझल हो जाए, रुक जाओ। मित्र से कहो कि सिक्के को हिलाए बिना कटोरी में धीरे पानी डाले।
उसी जगह से सिक्का फिर दिखने लगता है। पानी भरने पर सिक्का आभासी रूप से ऊपर उठता है, इसलिए किरण अब आँख तक पहुँचती है। यह जादू नहीं, अपवर्तन है।
प्रश्न: खाली कटोरी में सिक्का ओझल हो चुका है। पानी डालते ही वही सिक्का फिर दिखता है। सिक्का सच में ऊपर उठा या नहीं?
उत्तर: सिक्का नहीं उठा। पानी में से आई किरण मुड़कर आँख में पहुँची, इसलिए सिक्का अपनी जगह से ऊपर दिखा। असली गहराई अधिक है, आभासी गहराई कम।
उत्तर में लिखो कि सिक्का नहीं हिला। हिली किरण।
CBSE आभासी गहराई को परावर्तन मत कहना। यहाँ माध्यम बदलने से मुड़ाव है, दर्पण नहीं।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 9.7।
आभासी स्थिति असली स्थिति से ऊपर होती है, इसलिए उँगली गलत जगह जाती है।
गलत — सिक्का नहीं हिलता। अपवर्तन उसे उठा हुआ दिखाता है।
परावर्तन दर्पण का है।
इस मुड़ाव को अपवर्तन कहते हैं।
पानी डालने से सिक्के की ओर से आई किरण सतह पर मुड़ती है और आँख तक पहुँच जाती है। सिक्का आभासी रूप से ऊपर दिखता है, हालाँकि वह कटोरी की तली पर ही रहता है।
Glass slab and Snell — Activities 9.9 and 9.10 · NCERT 9.3.1–9.3.2 · क्रियाकलाप 9.9, 9.10
सफ़ेद कागज पर स्याही की मोटी सीधी रेखा खींचो। काँच की सिल्ली को ऐसे रखो कि एक किनारा रेखा से कोण बनाए। बगल से देखो। सिल्ली के नीचे की रेखा किनारों पर मुड़ी लगती है।
अब सिल्ली को रेखा के अभिलंब रखो। नीचे का भाग किनारों पर मुड़ा नहीं लगता। ऊपर से देखो तो रेखा का वही भाग उठा हुआ लगता है। लंबवत आपतन पर किरण नहीं मुड़ती; तिरछे आपतन पर मुड़ती है।
ड्रॉइंग बोर्ड पर कागज लगाओ। बीच में आयताकार सिल्ली रखो और पेंसिल से घेरा ABCD बनाओ। दो पिन E और F ऐसे गाड़ो कि EF किनारे AB पर तिरछी पड़े। विपरीत किनारे से E और F के प्रतिबिंब देखो और दो पिन G तथा H ऐसे गाड़ो कि चारों एक सीध में दिखें।
सिल्ली और पिन हटाओ। EF को AB तक बढ़ाओ, मिलन O। HG को CD तक बढ़ाओ, मिलन O′। O और O′ जोड़ो। निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर है, पर पार्श्व में खिसकी हुई। हवा से काँच (विरल से सघन) में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। काँच से हवा में अभिलंब से दूर मुड़ती है। दोनों फलकों पर मुड़ाव बराबर और विपरीत है।
अपवर्तन के दो नियम हैं। आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक तल में होते हैं। दिए रंग और दी जोड़ी के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है। यही स्नेल का नियम है। यह स्थिर मान दूसरे माध्यम का पहले के सापेक्ष अपवर्तनांक है।
n = sin i / sin r। निरपेक्ष अपवर्तनांक n = c / v, जहाँ c निर्वात में चाल है और v माध्यम में। c = 3 × 108 m/s। जल का n लगभग 1.33 है, क्राउन काँच का 1.52, हीरे का 2.42। अधिक n वाला माध्यम प्रकाशीय रूप से सघन है। यह द्रव्यमान घनत्व नहीं है — मिट्टी का तेल जल से प्रकाशीय सघन है, पर द्रव्यमान में हल्का है। प्रकाश विरल माध्यम में तेज चलता है।
| माध्यम | n |
|---|---|
| वायु | 1.0003 |
| बर्फ | 1.31 |
| जल | 1.33 |
| मिट्टी का तेल | 1.44 |
| क्राउन काँच | 1.52 |
| हीरा | 2.42 |
प्रश्न: वायु से काँच में प्रकाश जाता है। काँच का अपवर्तनांक 1.50 है। निर्वात में चाल 3 × 108 m/s है। काँच में चाल क्या है?
सूत्र: n = c / v, इसलिए v = c / n
रखो: v = (3 × 108 m/s) / 1.50 = 2 × 108 m/s
काँच प्रकाशीय सघन है, इसलिए चाल घटती है और तिरछी किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
पार्श्व विस्थापन और मुड़ाव अलग शब्द हैं। किरण समांतर रहकर भी खिसकती है।
CBSE जल, तेल और तारपीन में सबसे तेज चाल जल में है, क्योंकि n सबसे कम है। याद रखने की पूरी सारणी ज़रूरी नहीं।
10-सेकंड रिवीजन
विरल से सघन।
काँच सघन है, चाल घटती है और किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
सही — दोनों फलकों पर मुड़ाव बराबर और विपरीत है। किरण पार्श्व में खिसकती है।
यह जोड़ी के लिए स्थिर है।
यह अपवर्तनांक है। n = c/v भी वही विचार चाल से कहता है।
सबसे छोटा n। जल 1.33, तेल 1.44, तारपीन 1.47।
जल का अपवर्तनांक सबसे कम है, इसलिए चाल सबसे अधिक है।
n = c/v, इसलिए v = c/n।
प्रकाश हीरे में धीमा है। वायु की चाल हीरे की चाल से 2.42 गुनी है।
सिल्ली के दो फलक समांतर हैं। पहले फलक पर हवा से काँच में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। दूसरे फलक पर काँच से हवा में उतनी ही, विपरीत दिशा में, अभिलंब से दूर मुड़ती है। इसलिए निर्गत किरण आपतित के समांतर रहती है और थोड़ी पार्श्व दिशा में खिसक जाती है।
Convex lens, image positions and the lens formula — Activities 9.11 and 9.12 · NCERT 9.3.3–9.3.8 · क्रियाकलाप 9.11, 9.12
सावधानी: इस क्रियाकलाप में या अन्यथा सूर्य को सीधे या लेंस के रास्ते मत देखो। आँख खराब हो सकती है। कागज पर बना बिंदु ही देखो।
लेंस कम से कम एक गोलीय पृष्ठ से घिरा पारदर्शी पदार्थ है। उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और किरणें समेटता है। अवतल किनारे पर मोटा होता है और किरणें फैलाता है। दोनों वक्रता केन्द्रों से जाने वाली रेखा मुख्य अक्ष है। मध्य बिंदु प्रकाशिक केन्द्र O है। O से गई किरण बिना मुड़े निकलती है।
लेंस के दो फोकस होते हैं, F1 और F2। दूरियाँ प्रकाशिक केन्द्र से नापो, उसी चिह्न परिपाटी से। उत्तल का f धनात्मक, अवतल का ऋणात्मक।
लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f है। आवर्धन m = v/u = h′/h। दर्पण वाला ऋण चिह्न यहाँ नहीं है। वास्तविक प्रतिबिंब लेंस की दूसरी ओर बनता है, इसलिए v धनात्मक। उसी ओर का आभासी प्रतिबिंब ऋणात्मक v देता है।
क्षमता P = 1/f, f मीटर में। मात्रक डायोप्टर। +2.0 D का अर्थ उत्तल लेंस और f = +0.50 m। संपर्क के लेंसों में P = P1 + P2।
उत्तल लेंस को सूर्य की ओर करो और कागज पर तीखा चमकीला बिंदु बनाओ। कुछ देर में कागज धुआँ देता है और जल सकता है। सूर्य की समांतर किरणें लेंस के फोकस पर सिमटीं। लेंस से उस बिंदु तक की दूरी लगभग फोकस दूरी है। अवतल दर्पण वाले क्रियाकलाप 9.2 जैसी ही सावधानी है।
लगभग f निकालो। लंबी मेज पर पाँच समांतर रेखाएँ खींचो, क्रमागत दूरी f के बराबर। लेंस बीच वाली रेखा पर रखो ताकि प्रकाशिक केन्द्र रेखा पर हो। दोनों ओर की रेखाएँ F और 2F हैं: 2F1, F1, F2, 2F2।
मोमबत्ती पहले 2F1 से बहुत दूर बाईं ओर रखो और दाईं ओर पर्दे पर तीखा प्रतिबिंब लो। फिर मोमबत्ती को 2F1 के ठीक आगे, F1 और 2F1 के बीच, F1 पर, तथा F1 और O के बीच रखो। F1 और O के बीच प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं मिलता — वह उसी ओर, सीधा और बड़ा होता है।
| वस्तु | प्रतिबिंब | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत | F2 | बिंदु | वास्तविक, उलटा |
| 2F1 से दूर | F2 और 2F2 के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| 2F1 पर | 2F2 पर | बराबर | वास्तविक, उलटा |
| F1 और 2F1 के बीच | 2F2 से दूर | बड़ा | वास्तविक, उलटा |
| F1 पर | अनंत | नहीं | — |
| F1 और O के बीच | उसी ओर | बड़ा | आभासी, सीधा |
प्रश्न: 2.0 cm ऊँची वस्तु उत्तल लेंस से 15 cm दूर है। फोकस दूरी 10 cm है। प्रतिबिंब कहाँ है, कैसा है, और कितना ऊँचा है?
दिया है: h = +2.0 cm, u = −15 cm, f = +10 cm। उत्तल है, इसलिए f धनात्मक। वस्तु बाईं ओर है, इसलिए u ऋणात्मक।
सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f
रखो: 1/v = 1/f + 1/u = 1/10 + 1/(−15) = 1/10 − 1/15
= 3/30 − 2/30 = 1/30
v = +30 cm
आवर्धन: m = v/u = (+30 cm)/(−15 cm) = −2
h′ = m × h = (−2) × (+2.0 cm) = −4.0 cm
प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 30 cm पर है। वह वास्तविक, उलटा और दुगुना बड़ा है।
दर्पण और लेंस के सूत्र का चिह्न अदला-बदली मत करना। लेंस में बीच में ऋण है: 1/v − 1/u।
CBSE इकाई माँगता है। दूरी cm में दो, और क्षमता पूछे तो f को मीटर में बदलकर डायोप्टर लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 9.11।
आँख खराब हो सकती है। कागज पर का बिंदु देखो, सूर्य नहीं।
सही — और वह वास्तविक तथा उलटा होता है।
दर्पण में दोनों पद जुड़ते हैं।
लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f है।
m = −2 और h = +2.0 cm।
h′ = −4.0 cm। ऋण चिह्न उलटा प्रतिबिंब बताता है। जगह v = +30 cm है।
1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो। P = 1/f। +1.5 D उत्तल, अभिसारी लेंस है। f = 1/1.5 = 0.67 m, लगभग 67 cm।
Concave lens — Activity 9.13 · NCERT सारणी 9.5 · क्रियाकलाप 9.13
अवतल लेंस को स्टैंड पर रखो। एक ओर जलती मोमबत्ती रखो। दूसरी ओर से लेंस में देखो। प्रतिबिंब को पर्दे पर लाने की कोशिश करो।
पर्दा खाली रहता है। प्रतिबिंब लेंस में ही दिखता है — आभासी, सीधा और छोटा। मोमबत्ती दूर ले जाओ तो प्रतिबिंब और छोटा होता है। बहुत दूर ले जाने पर वह बिंदु-समान होकर फोकस की ओर लगने लगता है। जगह चाहे जो हो, अवतल लेंस बड़ा या उलटा प्रतिबिंब नहीं देता।
| वस्तु | प्रतिबिंब | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत | F1 पर | बिंदु-समान | आभासी, सीधा |
| अनंत और O के बीच | F1 और O के बीच | छोटा | आभासी, सीधा |
अवतल लेंस किरणें फैलाता है। चिह्न परिपाटी में इसका f ऋणात्मक है, इसलिए क्षमता भी ऋणात्मक है। P = −2.0 D का अर्थ f = 1/(−2.0) = −0.50 m = −50 cm। यह अपसारी लेंस है।
आधी काली की हुई उत्तल लेंस भी पूरा प्रतिबिंब बनाती है, केवल कम चमकीला, क्योंकि बची आधी से भी हर बिंदु की किरणें आती हैं। मिट्टी अपारदर्शी है, इसलिए लेंस नहीं बनती। छोटे अक्षर पढ़ने के लिए कम फोकस दूरी का उत्तल लेंस चुनो, अवतल नहीं।
प्रश्न: अवतल लेंस के दूसरी ओर पर्दा रखने पर मोमबत्ती का तीखा प्रतिबिंब क्यों नहीं मिलता?
उत्तर: लेंस किरणें फैलाता है। वे दूसरी ओर मिलती नहीं, उसी ओर फोकस से आती हुई लगती हैं। प्रतिबिंब आभासी है। आभासी प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं पकड़ा जाता।
उत्तल और अवतल लेंस की सारणी अदला-बदली मत करना। अवतल की केवल दो पंक्तियाँ हैं, दोनों आभासी।
CBSE f = −15 cm वाले दर्पण और लेंस दोनों अवतल हैं। ऋण चिह्न दोनों में सामने या अपसारी पक्ष बताता है।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 9.13। पर्दा खाली रहता है।
हर जगह प्रतिबिंब आभासी, सीधा और छोटा होता है।
गलत — f ऋणात्मक है, इसलिए P = 1/f भी ऋणात्मक है।
f = 1/P, और P ऋणात्मक है।
f = 1/(−2.0) = −0.50 m। यह अवतल लेंस है।
आवर्धक उत्तल होता है, कम f पर अधिक क्षमता।
5 cm का उत्तल लेंस अधिक क्षमता का आवर्धक है। अवतल छोटा प्रतिबिंब देता है।
दोनों अवतल हैं। दर्पण में ऋण चिह्न कहता है कि फोकस सामने है। लेंस में ऋण चिह्न कहता है कि लेंस अपसारी है। उत्तल दर्पण और उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
प्रकार चुनो। पाठों के 49 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
क्रियाकलाप 9.1।
पास की अवतल सतह सीधा और बड़ा प्रतिबिंब देती है।
R = 2f।
f = R/2 = 10 cm।
सारणी की अंतिम पंक्ति।
केवल P और F के बीच प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा होता है।
समांतर पुंज चाहिए।
अवतल दर्पण फोकस पर रखे बल्ब से समांतर पुंज बनाता है।
क्रियाकलाप 9.5 और 9.6।
सीधा छोटा प्रतिबिंब और चौड़ा क्षेत्र, दोनों कारण हैं।
धन चिह्न सीधा प्रतिबिंब है।
आकार बराबर है और प्रतिबिंब सीधा है।
अवतल हर दूरी पर सीधा नहीं रहता।
समतल और उत्तल दोनों हर दूरी पर सीधा प्रतिबिंब देते हैं।
क्रियाकलाप 9.8।
सिक्का नहीं हिलता। किरण मुड़कर आँख तक पहुँचती है।
दोनों फलकों पर मुड़ाव विपरीत है।
निर्गत किरण समांतर रहती है और पार्श्व में खिसकती है।
v = c/n।
v = 3 × 10^8 / 1.50 = 2 × 10^8 m/s।
अपारदर्शी पदार्थ।
मिट्टी अपारदर्शी है, इसलिए लेंस नहीं बनती।
सारणी में समान आकार वाली पंक्ति।
वस्तु 2F1 पर हो तो प्रतिबिंब 2F2 पर और उसी आकार का होता है।
ऋण चिह्न।
दोनों अवतल हैं। उत्तल की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
आवर्धक उत्तल है और छोटी f पर क्षमता अधिक है।
5 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस उचित है।
गलत — आँख खराब हो सकती है। कागज का धब्बा देखो।
सही — क्योंकि R = 2f।
गलत — प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा और छोटा होता है।
सही — और आकार बराबर होता है।
गलत — वह अभिलंब से दूर मुड़ती है। अभिलंब की ओर तब जब विरल से सघन में जाए।
सही — क्रियाकलाप 9.9 में रेखा किनारों पर मुड़ी नहीं लगती। ऊपर से वह उठी लगती है।
गलत — उत्तल लेंस का f धनात्मक है। अवतल लेंस का f ऋणात्मक है।
सही — क्रियाकलाप 9.13 में पर्दे पर प्रतिबिंब नहीं मिलता।
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f है।
लेंस में बीच का चिह्न ऋण है।
m = −v/u।
ऋण चिह्न सूत्र का हिस्सा है।
m = v/u।
यहाँ दर्पण वाला ऋण नहीं है।
मात्रक डायोप्टर है।
f मीटर में हो।
n = sin i / sin r।
r अपवर्तन कोण है।
जल का n लगभग 1.33 है।
सारणी में बर्फ 1.31 और जल 1.33।
f = 1/2.0 = 0.50 m। लेंस उत्तल है।
f = 1/P।
वह बिना मुड़े निकलती है।
O से सीधी निकलती है।
हेडलाइट अवतल, पीछे का दर्पण उत्तल, आवर्धक उत्तल लेंस, सदा छोटा प्रतिबिंब अवतल लेंस।
पहला दर्पण सूत्र, दूसरा दर्पण का m, तीसरा लेंस सूत्र, चौथा अपवर्तनांक।
अभिकथन (A): उत्तल दर्पण को पीछे का दर्पण बनाया जाता है।
कारण (R): वह सीधा प्रतिबिंब और चौड़ा क्षेत्र देता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): क्रियाकलाप 9.2 में कागज जल सकता है।
कारण (R): फोकस देखने के लिए सूर्य को दर्पण में आँख से देखना चाहिए।
A सही है। R गलत — सूर्य को दर्पण में मत देखो। कागज का धब्बा देखो।
अभिकथन (A): सिल्ली की निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है।
कारण (R): दो समांतर फलकों पर मुड़ाव बराबर और विपरीत होता है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): अवतल लेंस पर्दे पर वास्तविक बड़ा प्रतिबिंब बना देता है।
कारण (R): अवतल लेंस किरणें फैलाता है।
A गलत है। R सही — प्रतिबिंब आभासी, सीधा और छोटा रहता है।
इस अध्याय में कोई रासायनिक समीकरण नहीं है। नीचे का ट्रे केवल गुणांक अभ्यास है, प्रकाश का परिणाम नहीं।
सौर भट्टी अवतल, पार्श्व दर्पण उत्तल, m = +1 समतल।
C पर वास्तविक। P और F के बीच आभासी बड़ा। उत्तल सदा आभासी छोटा।
R = 2f। छोटे द्वारक में फोकस ध्रुव और वक्रता केन्द्र के मध्य होता है।
1/v + 1/u = 1/f।
1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता 1 डायोप्टर होती है। P = 1/f, f मीटर में।
दिए रंग और दी माध्यम-जोड़ी के लिए sin i / sin r स्थिर रहता है। इसी स्थिर मान को अपवर्तनांक कहते हैं।
सूर्य को सीधे या सूर्य का प्रकाश लौटा रहे दर्पण में मत देखो, आँख खराब हो सकती है।
u = −10 cm, f = +15 cm। सूत्र 1/v + 1/u = 1/f। 1/v = 1/15 − 1/(−10) = 1/15 + 1/10 = 2/30 + 3/30 = 5/30 = 1/6। v = +6 cm। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm पर है, आभासी और सीधा। m = −v/u = −(6)/(−10) = +0.6, इसलिए छोटा भी है।
f = −15 cm, v = −10 cm, क्योंकि अवतल लेंस का प्रतिबिंब वस्तु वाली ओर होता है। 1/v − 1/u = 1/f। 1/u = 1/v − 1/f = 1/(−10) − 1/(−15) = −1/10 + 1/15 = −3/30 + 2/30 = −1/30। u = −30 cm। वस्तु लेंस से 30 cm दूर है। m = v/u = (−10)/(−30) = +1/3।
9.7 में बाल्टी का सिक्का अपवर्तन से ऊपर लगा, इसलिए हाथ एक बार में नहीं उठा पाया। 9.8 में ओझल सिक्का पानी डालने पर आभासी रूप से ऊपर उठकर फिर दिखने लगा। दोनों में असली जगह नहीं बदली।
वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच हो, यानी दर्पण से 0 और 15 cm के बीच। प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा होगा, दर्पण के पीछे।
u = −25 cm, f = −15 cm, h = +4.0 cm। 1/v + 1/u = 1/f। 1/v = 1/(−15) − 1/(−25) = −1/15 + 1/25 = −5/75 + 3/75 = −2/75। v = −37.5 cm। पर्दा सामने 37.5 cm पर। m = −v/u = −(−37.5)/(−25) = −1.5। h′ = −1.5 × 4.0 cm = −6.0 cm। प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा और बड़ा है।
अक्ष के समांतर किरण अपवर्तन के बाद दूसरी ओर के फोकस से जाती है। फोकस से आने वाली किरण अपवर्तन के बाद अक्ष के समांतर हो जाती है। प्रकाशिक केन्द्र से जाने वाली किरण नहीं मुड़ती। आधा भाग काला हो तो भी बची सतह से हर बिंदु की किरणें आती हैं, इसलिए पूरा प्रतिबिंब बनता है, केवल प्रकाश कम होने से वह धुँधला होता है।
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f है और m = −v/u। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f है और m = v/u। वस्तु दोनों में बाईं ओर होती है, इसलिए u ऋणात्मक है। दूरियाँ दर्पण में ध्रुव से और लेंस में प्रकाशिक केन्द्र से नापते हैं। अवतल दर्पण और अवतल लेंस का f ऋणात्मक होता है; उत्तल दोनों का f धनात्मक।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। यह किसी वर्ष का वार्षिक प्रश्नपत्र नहीं है।
बड़ा सीधा चेहरा।
अवतल दर्पण P और F के बीच चेहरा बड़ा और सीधा दिखाता है।
जल 1.33, तेल 1.44।
कम अपवर्तनांक पर चाल अधिक होती है। जल में प्रकाश तेज है।
f = 15 cm।
आधा करो।
काँच की सिल्ली से निकली किरण आपतित किरण के समांतर रहती है, पर बगल की ओर खिसक जाती है। इसी खिसकाव को पार्श्व विस्थापन कहते हैं।
हेडलाइट में फोकस पर रखा स्रोत समांतर तेज पुंज देता है। दाढ़ी के दर्पण में चेहरा P और F के बीच होने से सीधा और बड़ा दिखता है। सौर भट्टी सूर्य की किरणें फोकस पर समेटकर ऊष्मा बनाती है।
वस्तु बाईं ओर रखी जाती है। दूरियाँ दर्पण में ध्रुव से और लेंस में प्रकाशिक केन्द्र से नापी जाती हैं। बाईं ओर ऋणात्मक और दाईं ओर धनात्मक है। अक्ष के ऊपर धनात्मक, नीचे ऋणात्मक। अवतल दर्पण का फोकस सामने, यानी बाईं ओर, होता है। इसलिए f ऋणात्मक लिखा जाता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। यह कोई पिछला प्रश्नपत्र नहीं है।
सावधानी 9.2।
कागज जलाना प्रयोग का हिस्सा है। आँख को सूर्य की परावर्तित किरण में नहीं लगाना चाहिए।
बची सतह से भी किरणें आती हैं।
पूरा प्रतिबिंब बनता है, क्योंकि वस्तु के हर बिंदु से किरणें शेष आधे लेंस से निकलती हैं। प्रकाश कम होने से प्रतिबिंब धुँधला है।
अभिकथन (A): मिट्टी से लेंस नहीं बनता।
कारण (R): लेंस के लिए पदार्थ पारदर्शी होना चाहिए।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है।
कारण (R): हीरा प्रकाशीय रूप से वायु से सघन है।
दोनों सही हैं, पर R अकेला संख्या 2.42 की पूरी व्याख्या नहीं है। संख्या कहती है कि वायु की चाल हीरे की चाल की 2.42 गुनी है। सघन होना दिशा बताता है, गुणक नहीं।
संपर्क में P = P1 + P2 = +2.0 + +0.25 = +2.25 D। f = 1/P = 1/2.25 m = 0.44 m। क्षमता धनात्मक है, इसलिए संयोजन उत्तल, अभिसारी लेंस की तरह है।
नहीं। पानी से हवा में आती किरण मुड़ती है, इसलिए सिक्का आभासी रूप से ऊपर दिखता है। असली गहराई अधिक होती है। क्रियाकलाप 9.7 में बाल्टी का सिक्का इसी कारण एक बार में नहीं उठता।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| दर्पण सूत्र | 1/v + 1/u = 1/f |
| दर्पण का आवर्धन | m = −v/u |
| फोकस और त्रिज्या | R = 2f |
| लेंस सूत्र | 1/v − 1/u = 1/f |
| लेंस का आवर्धन | m = v/u |
| स्नेल | n = sin i / sin r |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।