स्वरित्र द्विभुज।
कंपन करती वस्तु ध्वनि पैदा करती है।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 12 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Sound
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 12.1 स्वरित्र · 12.2 जल · 12.3 वाद्य · 12.4 स्लिंकी · 12.5 परावर्तन, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र एक तरंग है, जिसमें दो पास की शिखाओं के बीच तरंगदैर्घ्य λ अंकित है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 12 है, जबकि Exploration की किताब में ध्वनि अध्याय 10 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
पिछले 7 दिन:
सब कुछ इसी फ़ोन/ब्राउज़र में सेव होता है — कोई लॉगिन नहीं।
इस अध्याय का कोई Short अभी चैनल पर नहीं है, इसलिए दस खाली कार्ड नहीं दिखाए गए। नोट्स, चित्र और जाँच-प्रश्न पूरे हैं।
How sound is produced — Activities 12.1, 12.2, 12.3 · अनुभाग 12.1 · क्रियाकलाप 12.1 से 12.3
ध्वनि कंपन करती वस्तु से पैदा होती है। रबर पैड पर स्वरित्र द्विभुज मारो और कान के पास लाओ। भुजा को उँगली से छुओ तो कंपन और ध्वनि दोनों रुकते हैं।
खिंची रबर की पट्टी भी झनझनाकर ध्वनि देती है। वाद्य यंत्र में ढोल का चमड़ा, सितार का तार या बाँसुरी की वायु का स्तंभ हिलता है। जो भाग नहीं हिलता, वह स्रोत नहीं है।
12.1 में धागे से लटकी टेबल-टेनिस गेंद को कंपित भुजा से छुओ। गेंद उछलती है। यह उछाल दिखाती है कि भुजा सच में हिल रही है, केवल आवाज़ की कल्पना नहीं।
12.2 में भरे गिलास के जल को भुजा से छुओ। सतह काँपती है। भुजा को जल में डुबोओ तो छींटे उठते हैं। 12.3 में वाद्यों की सूची बनाओ और हर एक में हिलने वाला भाग लिखो।
प्रश्न: कंपित स्वरित्र को गेंद छूकर शांत हो गई। ध्वनि क्यों बंद हुई?
उत्तर: गेंद और उँगली ने कंपन सोख लिए। स्रोत हिलना बंद हुआ, इसलिए ध्वनि भी बंद हुई। ध्वनि का कारण कंपन है, केवल धातु का नाम नहीं।
उत्तर में वस्तु का नाम और हिलने वाला भाग दोनों लिखो।
जल के छींटे भी कंपन दिखाते हैं। केवल कान वाली बात अधूरी है।
स्वरित्र द्विभुज।
कंपन करती वस्तु ध्वनि पैदा करती है।
सही — कंपन रुकते ही ध्वनि भी रुकती है।
क्रियाकलाप 12.1।
गेंद उछलती है।
क्रियाकलाप 12.3।
बाँसुरी में वायु का स्तंभ कंपन करता है।
कंपित भुजा जल को हिलाती है। छींटे इस बात का प्रमाण हैं कि भुजा कंपन कर रही है।
Sound needs a medium · अनुभाग 12.2 · घंटी जार
जिस पदार्थ से ध्वनि गुजरती है उसे माध्यम कहते हैं। वह ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। स्रोत के पास का कण अपनी जगह के आसपास हिलता है और अगले कण को धक्का देता है। कण कान तक की पूरी यात्रा नहीं करते।
आगे बढ़ता स्रोत पास की वायु को दबाकर संपीडन बनाता है, उच्च दाब का क्षेत्र। पीछे हटने पर विरलन बनता है, निम्न दाब। इन्हीं की कड़ी ध्वनि तरंग है।
बंद काँच के जार में विद्युत घंटी लटकाओ और जार को निर्वात पंप से जोड़ो। स्विच दबाने पर घंटी सुनाई देती है। पंप चलाओ तो हवा घटने के साथ आवाज़ धीमी होती है, जबकि धारा वही रहती है।
इसका अर्थ है कि ध्वनि निर्वात में नहीं चलती। चाँद पर दो मित्र एक-दूसरे की आवाज़ नहीं सुन सकते, क्योंकि वहाँ वायु माध्यम नहीं है। यह प्रयोग अलग क्रियाकलाप संख्या नहीं है। अंक 12.4 स्लिंकी का है।
प्रश्न: जार में हवा कम होने पर घंटी की आवाज़ क्यों घटती है?
उत्तर: माध्यम के कण कम हो गए। विक्षोभ को आगे बढ़ाने वाले कण घटते हैं, इसलिए ध्वनि क्षीण होती है। घंटी कंपन करना नहीं छोड़ती, क्योंकि धारा वही है।
चाँद वाले उत्तर में माध्यम की कमी लिखो, दूरी नहीं।
कण यात्रा नहीं करते। यह वाक्य अनुदैर्घ्य तरंग से पहले चाहिए।
घंटी जार।
निर्वात में माध्यम नहीं होता।
गलत — कण अपनी जगह के पास हिलते हैं। विक्षोभ आगे बढ़ता है।
विरलन उसका उलटा है।
संपीडन।
चाँद पर वायु नहीं है। ध्वनि को माध्यम चाहिए, इसलिए आवाज़ नहीं पहुँचती।
Reading a wave — Activity 12.4 · अनुभाग 12.2.2–12.2.4 · क्रियाकलाप 12.4
मित्र स्लिंकी का एक सिरा पकड़े। दूसरा सिरा खींचकर मित्र की ओर जोर से धक्का दो। छल्ले पास-पास होकर एक संपीडन बनाते हैं और फिर दूर होकर विरलन। बिंदु लगाओ तो वह आगे-पीछे हिलता है, विक्षोभ के समांतर।
यही अनुदैर्घ्य तरंग है। ध्वनि भी माध्यम में संपीडन और विरलन की अनुदैर्घ्य तरंग है।
एक बिंदु से प्रति सेकंड गुजरने वाले कंपनों की संख्या आवृत्ति है। इकाई हर्ट्ज़ है। मस्तिष्क आवृत्ति को तारत्व के रूप में पढ़ता है। अधिक आवृत्ति, अधिक तारत्व।
आयाम प्रबलता तय करता है। हल्की चोट से मृदु ध्वनि, जोर की चोट से प्रबल। समान तारत्व और प्रबलता की दो ध्वनियों को गुणता अलग करती है। एक आवृत्ति का स्वर टोन है। कई आवृत्तियों का मिश्रण नोट है।
दो पास के संपीडनों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य λ है। एक कंपन का समय आवर्तकाल T है। चाल v = fλ। पुस्तक f की जगह ν भी लिखती है।
प्रश्न: किसी माध्यम में आवृत्ति 220 Hz है और चाल 440 m/s। तरंगदैर्घ्य निकालो।
सूत्र: v = fλ, इसलिए λ = v / f।
स्थापन: λ = 440 m/s ÷ 220 Hz = 2 m।
वायु में 0°C पर चाल लगभग 331 m/s और 22°C पर 344 m/s है। तालिका के हर पदार्थ की चाल रटनी जरूरी नहीं।
220 Hz और 440 m/s पर उत्तर 2 m है। वर्ग मत लगाना।
हर्ट्ज़ आवृत्ति की इकाई है। जूल से मिलाकर मत लिखना।
λ = v / f।
440 / 220 = 2 m।
सही — कण विक्षोभ के समांतर हिलते हैं। स्लिंकी यही दिखाती है।
तारत्व आवृत्ति है।
आयाम।
मस्तिष्क आवृत्ति पढ़ता है।
अधिक आवृत्ति का अर्थ अधिक तारत्व है।
λ = v / f = 344 / 172 = 2 m।
सही — इसी से दो वाद्य अलग पहचान में आते हैं।
Reflection, echo, reverberation — Activity 12.5 · अनुभाग 12.3 · क्रियाकलाप 12.5
चार्ट की दो लंबी एक-सी नलियाँ मेज़ पर दीवार के पास रखो। एक के खुले सिरे पर घड़ी रखो और दूसरी से टिक-टिक सुनो। नलियों को ऐसा जमाओ कि आवाज़ सबसे साफ आए।
आपतन कोण और परावर्तन कोण नापो। संबंध देखो। दाहिनी नली को थोड़ा ऊपर उठाओ तो आवाज़ बिगड़ती है, क्योंकि परावर्तित किरण कान तक नहीं रहती।
दीवार या पहाड़ से लौटी वही ध्वनि प्रतिध्वनि है। सुनने की संवेदना लगभग 0.1 s तक रहती है। स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए इतना अंतर चाहिए।
चाल 344 m/s हो तो कुल रास्ता = 344 × 0.1 = 34.4 m। स्रोत से दीवार की दूरी इसकी आधी, 17.2 m। ताप बदलें तो चाल और यह दूरी बदलती है। कई बार की प्रतिध्वनि बादलों और धरती से गरज का लुढ़कना बनाती है।
बड़े हॉल में बार-बार परावर्तन से ध्वनि देर तक बनी रहे तो वह अनुरणन है। छत और दीवारों पर अवशोषक पदार्थ लगाकर इसे घटाते हैं। मेगाफोन, स्टेथॉस्कोप, मुड़ी छत और साउंडबोर्ड बहुपरावर्तन के उपयोग हैं।
प्रश्न: वायु में चाल 344 m/s है। स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए दीवार की न्यूनतम दूरी निकालो।
सूत्र: d = v t / 2।
स्थापन: d = 344 m/s × 0.1 s / 2 = 34.4 / 2 = 17.2 m।
17.2 m आधी दूरी है। 34.4 m पूरा रास्ता है। दोनों को एक मत लिखना।
अनुरणन और प्रतिध्वनि अलग हैं। हॉल की गूँज अनुरणन है।
पूरे रास्ते की आधी।
d = 344 × 0.1 / 2 = 17.2 m।
गलत — अनुरणन बार-बार परावर्तन से ध्वनि का बने रहना है।
प्रतिध्वनि का समय।
0.1 s।
नली में बार-बार टकराना।
हृदय की ध्वनि बहुपरावर्तन से कान तक पहुँचती है।
छत और दीवारों पर ध्वनि सोखने वाले पदार्थ लगाए जाते हैं, ताकि बार-बार परावर्तन कम हो।
The audible range and ultrasound · अनुभाग 12.4–12.5 · SONAR
मनुष्य लगभग 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक सुनता है। इससे कम आवृत्ति अवश्रव्य है। गैंडा इसी से संवाद करता है। इससे अधिक पराश्रव्य है। चमगादड़, डॉल्फिन और पॉरपॉइज़ इसे निकालते हैं।
पराश्रव्य रुकावटों के बीच भी साफ रास्ते पर चलती है। सफाई के घोल में गंदगी झाड़ती है। धातु के ब्लॉक में दरार से लौटती है। हृदय का चित्र इकोकार्डियोग्राफी है। यकृत, पित्ताशय और गुर्दे के पत्थर भी इसी से देखे जाते हैं।
SONAR का अर्थ Sound Navigation And Ranging है। यह पराश्रव्य तरंग भेजकर पानी के नीचे दूरी, दिशा और चाल नापता है।
प्रश्न: 25 kHz और 15 Hz को श्रव्य, अवश्रव्य या पराश्रव्य में रखो।
उत्तर: 25 kHz = 25000 Hz, जो 20 kHz से अधिक है, इसलिए पराश्रव्य। 15 Hz, 20 Hz से कम है, इसलिए अवश्रव्य। 500 Hz बीच में है, इसलिए श्रव्य है।
चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनि भेजता है और लौटी तरंग से शिकार या रुकावट की दूरी पढ़ता है। यही विचार SONAR में है।
20 kHz को 20 Hz मत लिखना। किलो का अर्थ हजार है।
एंटीबायोटिक इस अध्याय में नहीं है। सफाई और दरार पराश्रव्य के उपयोग हैं।
10-सेकंड रिवीजन
नीचे अवश्रव्य, ऊपर पराश्रव्य।
लगभग 20 Hz से 20 kHz।
सही — 20 Hz से कम अवश्रव्य है।
दूरी नापना।
Ranging।
दरार से तरंग लौटती है।
पराश्रव्य दरार से परावर्तित हो जाती है।
कठिन जगह की सफाई, और धातु में दरार ढूँढना। हृदय का चित्र या SONAR भी सही उपयोग हैं।
गलत — वह पराश्रव्य ध्वनि की प्रतिध्वनि से दूरी पढ़ता है।
The human ear · अनुभाग 12.6 · कर्णपटह से मस्तिष्क
बाहरी कान पिन्ना आसपास की ध्वनि समेटता है। वह श्रवण नलिका से होकर कर्णपटह पर पड़ती है। संपीडन पटह को अंदर धकेलता है और विरलन बाहर। इस तरह पटह कंपन करता है।
मध्य कान की तीन हड्डियाँ — हथौड़ा, निहाई और रकाब — इन कंपनों को कई गुना कर भीतरी कान तक ले जाती हैं। कर्णावर्त दाब के बदलाव को विद्युत संकेतों में बदलता है। श्रवण तंत्रिका उन्हें मस्तिष्क तक ले जाती है और मस्तिष्क उन्हें ध्वनि मानता है।
प्रश्न: कर्णपटह क्यों हिलता है, और संकेत मस्तिष्क तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर: संपीडन और विरलन पटह पर दाब बदलते हैं, इसलिए वह हिलता है। तीन हड्डियाँ कंपन बढ़ाती हैं। कर्णावर्त विद्युत संकेत बनाता है और श्रवण तंत्रिका उसे मस्तिष्क को देती है।
पिन्ना, नलिका, कर्णपटह, तीन हड्डियाँ, कर्णावर्त, तंत्रिका, मस्तिष्क। कर्णावर्त हड्डियों से पहले नहीं आता।
हथौड़ा, निहाई, रकाब तीनों के नाम लिखो। केवल मध्य कान अधूरा है।
मस्तिष्क व्याख्या करता है। कर्णपटह स्वयं अर्थ नहीं निकालता।
10-सेकंड रिवीजन
बाहरी कान।
पिन्ना आसपास की ध्वनि समेटता है।
सही — फिर श्रवण तंत्रिका संकेत मस्तिष्क को ले जाती है।
तीसरी हड्डी।
रकाब।
पिन्ना, श्रवण नलिका, कर्णपटह, हथौड़ा-निहाई-रकाब, कर्णावर्त, श्रवण तंत्रिका, मस्तिष्क।
प्रकार चुनो। पाठों के 30 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
स्वरित्र।
कंपन करती वस्तु।
माध्यम घटता है।
आवाज़ धीमी पड़ती है।
विरलन उलटा है।
उच्च दाब का क्षेत्र।
दो संपीडनों के बीच।
तरंगदैर्घ्य।
भाग।
2 m।
तेज कंपन।
आवृत्ति पर।
vt/2।
17.2 m।
बार-बार परावर्तन कम हो।
अवशोषक पदार्थ से।
ऊपर वाली पट्टी।
पराश्रव्य।
पानी के नीचे।
दूरी, दिशा और चाल।
भीतरी कान।
दाब को विद्युत संकेत में बदलना।
तीन।
हथौड़ा, निहाई और रकाब।
प्रतिध्वनि वाला अंक इसी चाल से है।
344 m/s।
गलत — निर्वात में माध्यम नहीं है।
सही — तरंग अनुदैर्घ्य है।
सही।
गलत — कम से कम लगभग 0.1 s चाहिए।
सही — बहुपरावर्तन आगे की ओर।
गलत — यह अवश्रव्य है।
गलत — पिन्ना बाहरी कान है।
सही।
अनुदैर्घ्य।
स्लिंकी।
हर्ट्ज़।
कंपन प्रति सेकंड।
λ।
तरंगदैर्घ्य।
344।
प्रतिध्वनि वाला अंक।
17.2 m।
आधा रास्ता।
kHz।
हजार हर्ट्ज़।
पिन्ना।
समेटना।
श्रवण तंत्रिका।
कान के बाद।
तारत्व आवृत्ति, प्रबलता आयाम, तरंगदैर्घ्य दूरी, अनुरणन बार-बार परावर्तन।
15 अवश्रव्य, 500 श्रव्य, 20 kHz के ऊपर पराश्रव्य, 20 Hz निचली सीमा।
अभिकथन (A): चाँद पर ध्वनि नहीं सुनाई देती।
कारण (R): ध्वनि को भौतिक माध्यम चाहिए।
दोनों सही हैं और R कारण है।
अभिकथन (A): स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए लगभग 0.1 s का अंतर चाहिए।
कारण (R): ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है।
दोनों सही हैं, पर R इस अंतर का कारण नहीं है। कारण संवेदना का बने रहना है।
अभिकथन (A): प्रबल ध्वनि का आयाम अधिक होता है।
कारण (R): प्रबलता आवृत्ति का दूसरा नाम है।
A सही है। R गलत — आवृत्ति तारत्व है।
अभिकथन (A): पराश्रव्य ध्वनि 20 Hz से कम होती है।
कारण (R): 20 kHz से अधिक आवृत्ति पराश्रव्य कहलाती है।
A गलत है। R सही है।
अभिकथन (A): कर्णपटह कंपन करता है।
कारण (R): संपीडन और विरलन उस पर दाब बदलते हैं।
दोनों सही हैं और R व्याख्या है।
15 अवश्रव्य, 500 और 20 kHz श्रव्य सीमा में, 40 kHz पराश्रव्य।
पिन्ना और कर्णपटह बाहरी मार्ग में, रकाब मध्य में, कर्णावर्त भीतरी में।
कंपन करती वस्तु से।
संपीडन उच्च दाब है। विरलन निम्न दाब है।
v चाल है, f आवृत्ति है और λ तरंगदैर्घ्य है।
Sound Navigation And Ranging।
लगभग 20 Hz से 20 kHz।
λ = v / f = 344 / 172 = 2 m।
d = vt / 2 = 344 × 0.1 / 2 = 17.2 m।
बार-बार परावर्तन से ध्वनि का बने रहना अनुरणन है। दीवारों पर अवशोषक लगाओ।
हथौड़ा, निहाई और रकाब कर्णपटह के कंपन को कई गुना कर भीतरी कान तक ले जाते हैं।
ध्वनि कंपन से पैदा होती है। माध्यम के कण विक्षोभ आगे बढ़ाते हैं, स्वयं पूरी यात्रा नहीं करते। स्लिंकी में बिंदु समांतर हिलता है, इसलिए तरंग अनुदैर्घ्य है। जार से हवा निकालने पर आवाज़ घटती है, अतः निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
प्रतिध्वनि एक साफ लौटी ध्वनि है। अनुरणन बार-बार परावर्तन से ध्वनि का टिके रहना है। d = 344 × 0.1 / 2 = 17.2 m। स्टेथॉस्कोप बहुपरावर्तन का उपयोग है।
20 Hz से 20 kHz श्रव्य है। उससे कम अवश्रव्य और अधिक पराश्रव्य है। उपयोग: धातु की दरार और SONAR। मार्ग: पिन्ना, नलिका, कर्णपटह, तीन हड्डियाँ, कर्णावर्त, तंत्रिका, मस्तिष्क।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है।
क्रियाकलाप 12.1।
कंपन का प्रमाण।
22°C पर 344।
331 m/s।
20 Hz।
ऊपरी सीमा 20 kHz है।
परावर्तित ध्वनि अब दूसरी नली में नहीं आती, इसलिए घड़ी की टिक साफ नहीं सुनाई देती।
चित्र में दो शिखाओं के बीच λ है। v = fλ। λ = 440 / 220 = 2 m।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
प्रयोग का निष्कर्ष।
माध्यम के बिना विक्षोभ नहीं बढ़ता।
जाना और लौटना।
रास्ता 68.8 m। समय = 68.8 / 344 = 0.2 s।
अभिकथन (A): कर्णावर्त बाहरी कान है।
कारण (R): पिन्ना आसपास की ध्वनि समेटता है।
A गलत है। कर्णावर्त भीतरी कान में है। R सही है।
गुणता वह लक्षण है जो समान तारत्व और प्रबलता की ध्वनियों को अलग पहचान देता है। मिश्रित आवृत्तियों का नोट अलग बनता है।
दीवार और छत पर अवशोषक लगाओ ताकि अनुरणन घटे। मंच के पीछे साउंडबोर्ड रखो ताकि ध्वनि हॉल में समान फैले।
अभिकथन (A): चमगादड़ अंधेरे में रुकावट की दूरी पढ़ सकता है।
कारण (R): वह प्रकाश की किरण कान से भेजता है।
A सही है। R गलत — वह पराश्रव्य ध्वनि भेजता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| उत्पत्ति | vibration |
| चाल | v = fλ |
| वायु, 22°C | 344 m/s |
| प्रतिध्वनि | at least 17.2 m |
| श्रव्य | 20 Hz to 20 kHz |
| SONAR | Sound Navigation And Ranging |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।