समय कम है, जीव बहुत हैं।
समानता से समूह बनता है और पूरा समूह एक साथ पढ़ा जाता है।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 7 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Diversity in Living Organisms
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 7.1 गाय · 7.2 बीज · 7.3 भाषाएँ · 7.4 वैज्ञानिक नाम, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र जगत से जाति तक की सीढ़ी है — ऊपर जीव अधिक हैं और नीचे जाति में समानता सबसे अधिक है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 7 है; NCERT 2026-27 की Exploration में विविधता अध्याय 12 है और पदानुक्रम के नाम अलग हैं, इसलिए यहाँ इसी बिहार किताब का क्रम पढ़ाया गया है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Diversity and the need to classify — Activity 7.1 · बिहार अध्याय 7 · क्रियाकलाप 7.1
दोस्त से अपनी ऊँचाई, नाक और हाथ का फैलाव मिलाओ तो थोड़ा फर्क मिलेगा। बंदर जोड़ो तो इंसान आपस में अधिक मिलते हैं। गाय और जोड़ो तो बंदर इंसान के अधिक पास है, गाय के नहीं।
जीवन का फैलाव बहुत बड़ा है। कुछ बैक्टीरिया कुछ माइक्रोमीटर के होते हैं। ब्लू व्हेल लगभग 30 मीटर और कैलिफोर्निया के रेडवुड लगभग 100 मीटर। कुछ चीड़ हजारों वर्ष जीते हैं, मच्छर कुछ दिन में मर जाता है। यह विविधता लाखों वर्षों में बनी है। हम इतना समय नहीं रखते कि हर जीव अलग देखें, इसलिए समानता चुनकर समूह बनाते हैं।
देसी गाय और जर्सी गाय एक जैसी दिखती हैं या नहीं? क्या हर देसी गाय एक जैसी है? जो देसी गायें आपस में नहीं मिलतीं, उनकी भीड़ में जर्सी गाय को पहचान लोगे या नहीं? पहचान का आधार क्या है?
इसमें तय करना पड़ता है कि इच्छित समूह के लिए कौन सा लक्षण अधिक जरूरी है और कौन सा छोड़ सकते हैं। रंग या सींग का छोटा फर्क जाति को नहीं बदलता। दूध, शरीर की बनावट और नस्ल के स्थिर लक्षण पहचान में काम आते हैं।
प्रश्न: वर्गीकरण का एक फायदा लिखो।
उत्तर: समान जीव एक समूह में आ जाते हैं, इसलिए हर जीव को अलग याद नहीं करना पड़ता। समूह का एक लक्षण पूरे समूह पर लागू होता है और नया जीव देखने पर उसे सही जगह रखना आसान होता है।
फायदे पूछें तो तीन बात लिखो: अध्ययन आसान, समूह का लक्षण सब पर, नए जीव को जगह।
उदाहरण में आकार, आयु और रंग तीनों तरह की विविधता दो। केवल जानवर मत लिखना।
समय कम है, जीव बहुत हैं।
समानता से समूह बनता है और पूरा समूह एक साथ पढ़ा जाता है।
सही — क्रियाकलाप 7.1 में जरूरी लक्षण चुनते हैं और बाकी छोड़ते हैं।
रेडवुड का अंक 100 है।
लगभग 30 मीटर। रेडवुड लगभग 100 मीटर।
एक कुछ दिन, दूसरा हजारों वर्ष।
यह आयु का फैलाव है। आकार का उदाहरण बैक्टीरिया और व्हेल है।
आकार: बैक्टीरिया बहुत छोटा और ब्लू व्हेल लगभग 30 मीटर। आयु: मच्छर कुछ दिन, कुछ चीड़ हजारों वर्ष। रंग: रंगहीन कृमि से चमकीले पक्षी और फूल तक।
The basis of classification — the cell comes first · अनुभाग 7.1 · लक्षणों की सीढ़ी
अरस्तू ने जंतुओं को जमीन, पानी और हवा के अनुसार बाँटा। यह आसान है पर भ्रामक है। समुद्र में मूंगा, व्हेल, ऑक्टोपस, स्टारफिश और शार्क साथ रहते हैं, पर उनकी बनावट अलग है। उनमें केवल निवास स्थान समान है।
लक्षण का अर्थ रूप या कार्य है। हाथ में पाँच उँगलियाँ एक लक्षण है। हम दौड़ सकते हैं और बरगद नहीं, यह भी लक्षण है। दीवार के सबसे नीचे के पत्थर ऊपर की पंक्ति तय करते हैं। वैसे ही सबसे मौलिक लक्षण सबसे चौड़े समूह बनाते हैं। अगला लक्षण पिछले पर निर्भर करता है।
आज वर्गीकरण कोशिका से शुरू होता है। सुकेन्द्रकी कोशिका में झिल्ली से घिरे अंगक और केंद्रक होते हैं। बिना स्पष्ट केंद्रक वाले जीव का पूरा रासायनिक रास्ता अलग होता है। फिर देखते हैं कि कोशिका अकेली है या समूह में श्रम-विभाजन करती है। अमीबा और कृमि की बनावट इसीलिए अलग है। फिर अपना भोजन बनाना है या बाहर से लेना है। पौधे में शरीर का संगठन और जंतु में अंगों का विकास इसके बाद आते हैं। कंकाल जैसे लक्षण चौड़े समूह नहीं, उपसमूह बनाते हैं।
प्रश्न: रहने की जगह और कोशिका का प्रकार, कौन अधिक मौलिक है? एक कारण दो।
उत्तर: कोशिका का प्रकार अधिक मौलिक है। समुद्र में शार्क और मूंगा एक जगह रहते हैं पर कोशिका और शरीर की बनावट अलग है। केंद्रक का होना या न होना हर आगे के लक्षण को बदल देता है। निवास स्थान ऐसा नहीं करता।
दीर्घ उत्तर में क्रम लिखो: केंद्रक, एक या बहुकोशिक, पोषण, फिर पौधे का संगठन या जंतु के अंग।
कंकाल को पहला आधार मत लिखना। किताब उसे उपसमूह का लक्षण मानती है।
समुद्र वाले उदाहरण को याद करो।
कोशिका का प्रकार अधिक मौलिक है। निवास स्थान एक जगह बहुत अलग जीवों को मिला देता है।
गलत — निवास स्थान के अलावा ये बहुत अलग हैं। यह अरस्तू वाली भूल है।
कंकाल बाद का लक्षण है।
पहला बँटवारा कोशिका की प्रकृति पर है। कंकाल उपसमूह बनाता है।
पौधे अपना भोजन प्रकाश-संश्लेषण से बनाते हैं और जंतु भोजन बाहर से लेते हैं। इसी जरूरत से शरीर की मूल बनावट अलग हो जाती है, इसलिए दोनों के आगे के लक्षण भी अलग होते हैं।
Classification and evolution · अनुभाग 7.2 · पुराना और नया शरीर
शरीर की बनावट और काम के आधार पर जीव पहचाने जाते हैं। कुछ लक्षण शरीर को दूर तक बदलते हैं। समय भी मायने रखता है। एक बनावट आ जाए तो उसके बाद के सारे बदलाव उसी पर टिके रहते हैं। इसलिए पहले आया लक्षण बाद वाले से अधिक मौलिक होता है।
विकास का अर्थ है शरीर की बनावट में ऐसे बदलावों का जुड़ना जिससे जीव बेहतर बच सके। चार्ल्स डार्विन ने यह विचार 1859 में अपनी पुस्तक The Origin of Species में रखा। वर्गीकरण विकास से जुड़ जाता है। कुछ समूहों की बनावट पुरानी है और अधिक नहीं बदली। कुछ की बनावट अपेक्षाकृत नई है।
पुरानी बनावट वाले को अक्सर आदिम या निम्न और नई बनावट वाले को उन्नत या उच्च कह देते हैं। किताब कहती है कि ये शब्द ठीक नहीं बैठते। अधिक ठीक बात यह है कि कुछ जीव पुराने हैं और कुछ नए। समय के साथ बनावट की जटिलता बढ़ सकती है, इसलिए पुराने जीव प्रायः सरल और नए प्रायः जटिल होते हैं। उन्नत होना जटिल होने की परिभाषा नहीं है, पर दोनों अक्सर साथ चलते हैं।
प्रश्न: आदिम और उन्नत शब्द क्यों अधूरे हैं?
उत्तर: ये शब्द ऊँचा-नीचा मान बैठा देते हैं। किताब के अनुसार फर्क समय का है: कुछ शरीर-रचनाएँ पुरानी हैं और कुछ नई। जटिलता समय के साथ बढ़ सकती है, पर आदिम का अर्थ बेकार नहीं है।
जैव विविधता किसी क्षेत्र के जीवन-रूपों की विविधता है। ये रूप एक-दूसरे को प्रभावित कर एक स्थिर समुदाय बनाते हैं। हाल में मनुष्य ने इस संतुलन को बदला है। भूमि, जल और जलवायु भी विविधता को प्रभावित करते हैं।
मोटा अनुमान है कि ग्रह पर लगभग एक करोड़ जातियाँ हैं, पर हम केवल लगभग दस लाख से बीस लाख ही जानते हैं। कर्क और मकर रेखा के बीच का गर्म नम उष्णकटिबंध मेगाडायवर्सिटी का क्षेत्र है। ग्रह की आधी से अधिक विविधता कुछ देशों में है, जिनमें भारत भी है: ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू, मेक्सिको, ज़ायर, मेडागास्कर, ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया और मलेशिया।
डार्विन वाला उत्तर में वर्ष 1859 और पुस्तक का नाम दोनों रखो।
मेगाडायवर्सिटी में भारत लिखना न भूलो। अनुमान एक करोड़ जातियाँ, जानी हुई लगभग दस से बीस लाख।
पुस्तक The Origin of Species है।
1859। 1959 व्हिटेकर का वर्ष है और 1894 हेकेल का।
गलत — पहले आया लक्षण अधिक मौलिक है क्योंकि बाद के बदलाव उसी पर टिकते हैं।
जटिलता समय के साथ बढ़ सकती है।
शब्द अधूरे हैं। कहो कि कुछ जीव पुराने हैं और कुछ नए।
पुस्तक एक या दो मिलियन कहती है।
लगभग दस लाख से बीस लाख, यानी एक या दो मिलियन।
सही — भारत उस सूची में है, कर्क और मकर रेखा के बीच के उष्णकटिबंध के साथ।
पूरी तरह एक परिभाषा नहीं है। उन्नत शब्द नई शरीर-रचना के लिए ढीला शब्द है। समय के साथ जटिलता बढ़ सकती है, इसलिए नए जीव अक्सर अधिक जटिल होते हैं।
The five kingdoms and the ladder of the hierarchy · अनुभाग 7.3 · व्हिटेकर
अर्न्स्ट हेकेल (1894), रॉबर्ट व्हिटेकर (1959) और कार्ल वूज़ (1977) ने जीवों को जगत नाम के चौड़े समूहों में रखा। व्हिटेकर के पाँच जगत व्यापक रूप से चलते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया। आधार है कोशिका की संरचना, पोषण का तरीका और स्रोत, तथा शरीर का संगठन। वूज़ ने मोनेरा को आर्कीबैक्टीरिया (आर्किया) और यूबैक्टीरिया में बाँटा। इस किताब के प्रश्न पाँच जगत पर ही पूछे जाते हैं।
मोनेरा: स्पष्ट केंद्रक और अंगक नहीं, न ही बहुकोशिक शरीर। कुछ की कोशिका भित्ति होती है, कुछ की नहीं। पोषण स्वपोषी या विषमपोषी। उदाहरण बैक्टीरिया, नील-हरित शैवाल यानी सायनोबैक्टीरिया, और माइकोप्लाज्मा।
प्रोटिस्टा: एककोशिक सुकेन्द्रकी। कुछ सिलिया या फ्लैजेला से चलते हैं। पोषण स्वपोषी या विषमपोषी। उदाहरण एककोशिक शैवाल, डायटम और प्रोटोजोआ — अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना।
फंजाई: विषमपोषी सुकेन्द्रकी। सड़े कार्बनिक पदार्थ खाते हैं, इसलिए मृतोपजीवी। कोशिका भित्ति काइटिन की होती है। यीस्ट और मशरूम उदाहरण हैं। कुछ फफूँद नील-हरित शैवाल के साथ स्थायी परस्पर संबंध में रहती हैं। इसे सहजीविता कहते हैं और ऐसे रूप लाइकेन हैं।
प्लांटी: बहुकोशिक सुकेन्द्रकी, कोशिका भित्ति, क्लोरोफिल से स्वपोषी। एनिमेलिया: बहुकोशिक सुकेन्द्रकी, कोशिका भित्ति नहीं, विषमपोषी।
जगत के बाद जंतुओं में संघ और पौधों में प्रभाग आता है, फिर वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति। हर कदम पर समूह छोटा होता है और समान लक्षण बढ़ते हैं। जाति वर्गीकरण की मूल इकाई है। मोटे तौर पर एक जाति में वे जीव आते हैं जो इतने समान हों कि प्रजनन कर वंश चला सकें।
सबसे कम जीव और सबसे अधिक समानता जाति में है। सबसे अधिक जीव जगत में हैं। एककोशिक, सुकेन्द्रकी और प्रकाश-संश्लेषी जीव प्रोटिस्टा में रखो, प्लांटी में नहीं, क्योंकि प्लांटी बहुकोशिक है। नील-हरित शैवाल शैवाल जैसे दिखें तो भी मोनेरा है।
प्रश्न: एक जीव एककोशिक है, सुकेन्द्रकी है और प्रकाश-संश्लेषण करता है। जगत कौन सा है?
उत्तर: प्रोटिस्टा। मोनेरा में सुकेन्द्रकी कोशिका नहीं होती। प्लांटी बहुकोशिक होते हैं। यूग्लीना जैसा जीव इसी जगत की मिसाल है।
मोनेरा और प्रोटिस्टा का फर्क एक शब्द में लिखो: प्रोकैरियोटिक और सुकेन्द्रकी। दोनों में एककोशिक जीव हैं।
यूग्लीना को पौधा मत लिखना। एककोशिक सुकेन्द्रकी प्रकाश-संश्लेषी जीव प्रोटिस्टा है।
1959 वाला वर्गीकरण।
पाँच: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया।
बैक्टीरिया इसी में हैं।
मोनेरा में न स्पष्ट केंद्रक, न बहुकोशिक शरीर।
मशरूम और यीस्ट।
काइटिन। पोषण मृतोपजीवी होता है।
गलत — लाइकेन फफूँद और नील-हरित शैवाल का सहजीवी रूप है।
सबसे छोटा समूह जाति है और सबसे बड़ा जगत। एक जाति के जीव इतने समान होते हैं कि प्रजनन कर अगली पीढ़ी चला सकें। जाति में समान लक्षण सबसे अधिक होते हैं।
Plantae — Thallophyta to angiosperms — Activity 7.2 · अनुभाग 7.4 · क्रियाकलाप 7.2
पहला स्तर: शरीर स्पष्ट अंगों में बँटा है या नहीं। अगला: जल और पदार्थ ले जाने वाला ऊतक है या नहीं। फिर बीज है या नहीं, और बीज फल के अंदर है या नहीं।
थैलोफाइटा: शरीर अलग-अलग अंगों में नहीं बँटता। इन्हें शैवाल कहते हैं और ये मुख्यतः जलीय हैं। उदाहरण स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स, क्लैडोफोरा और कारा। सबसे सरल पादप प्रभाग यही है।
ब्रायोफाइटा: पादप जगत के उभयचर। तने और पत्ती जैसी रचनाएँ बनती हैं, पर जल ले जाने वाला विशेष ऊतक नहीं होता। उदाहरण मॉस फ्यूनेरिया, मार्केंशिया और रिक्सिया।
टेरिडोफाइटा: जड़, तना और पत्ती, तथा संवहन ऊतक। उदाहरण मार्सीलिया, फर्न और हॉर्स-टेल। इन तीनों समूहों के भ्रूण नग्न बीजाणु होते हैं और जनन अंग छिपे रहते हैं, इसलिए इन्हें क्रिप्टोगैम कहते हैं।
जिनमें स्पष्ट जनन ऊतक बीज बनाते हैं वे फैनरोगैम हैं। बीज में भ्रूण और संचित भोजन होता है। जिम्नोस्पर्म: जिम्नो का अर्थ नग्न और स्पर्मा का अर्थ बीज। नग्न बीज, प्रायः बहुवर्षी, सदाबहार और काष्ठीय। उदाहरण पाइन, देवदार और साइकस। एंजियोस्पर्म: एंजियो का अर्थ ढका हुआ। बीज फल में बनते हैं। ये पुष्पी पौधे हैं। बीजपत्र एक हो तो एकबीजपत्री, दो हों तो द्विबीजपत्री।
मूंग, गेहूँ, मक्का, मटर और इमली के बीज भिगोओ। नरम हों तो बीच से फाड़ो। जो दो लगभग बराबर हिस्सों में बँटें वे द्विबीजपत्री हैं। जो न बँटें वे एकबीजपत्री हैं। गेहूँ और मक्का एकबीजपत्री रहते हैं। मूंग, मटर और इमली द्विबीजपत्री।
फिर जड़, पत्ती और फूल देखो। जड़ मूसला है या रेशेदार? शिराविन्यास जाल जैसा है या समांतर? फूल में कितनी पंखुड़ियाँ हैं? आमतौर पर द्विबीजपत्री में मूसला जड़ और जालिका शिराविन्यास मिलता है, एकबीजपत्री में रेशेदार जड़ और समांतर शिराएँ। अपनी देखी हुई और बातें भी लिखो। नील-हरित शैवाल को इस गतिविधि का शैवाल मत समझना। वह मोनेरा है।
प्रश्न: टेरिडोफाइटा और फैनरोगैम में एक फर्क लिखो। जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में एक फर्क लिखो।
उत्तर: टेरिडोफाइटा बीजाणु से बढ़ते हैं और जनन अंग छिपे होते हैं। फैनरोगैम बीज बनाते हैं। जिम्नोस्पर्म का बीज नग्न होता है, जैसे पाइन। एंजियोस्पर्म का बीज फल के अंदर बनता है।
पौधों के उत्तर में आधार का क्रम मत छोड़ो: शरीर का बँटवारा, संवहन ऊतक, बीज, फिर फल।
ब्रायोफाइटा को उभयचर इसलिए कहते हैं कि ये नम जगह चाहते हैं, क्योंकि संवहन ऊतक नहीं है।
10-सेकंड रिवीजन
शरीर अंगों में नहीं बँटता।
थैलोफाइटा। शैवाल जैसे स्पाइरोगाइरा इसी में हैं।
गलत — तना और पत्ती जैसी रचना हो सकती है, संवहन ऊतक नहीं। वह टेरिडोफाइटा में आता है।
पाइन और देवदार।
जिम्नोस्पर्म। एंजियोस्पर्म में बीज फल के अंदर होता है।
मक्का भी इसी तरफ है। मटर दूसरी तरफ।
गेहूँ और मक्का एकबीजपत्री हैं। मटर, मूंग और इमली द्विबीजपत्री।
Animalia — Porifera to Protochordata · अनुभाग 7.5.1 से 7.5.9
एनिमेलिया के जीव सुकेन्द्रकी, बहुकोशिक और विषमपोषी हैं। कोशिका भित्ति नहीं होती। अधिकांश चलते हैं। किताब इन्हें दस समूहों में बाँटती है। अंतिम समूह वर्टीब्रेटा अगले पाठ में है।
| समूह | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| पोरिफेरा | छिद्र, नाल तंत्र, ऊतक कम | स्पंज, साइकॉन |
| सीलेन्टरेटा | दो परत, देहगुहा, दंश कोशिका | हाइड्रा, जेलीफिश |
| प्लेटीहेल्मिन्थीज | चपटे, त्रिस्तरीय, वास्तविक देहगुहा नहीं | प्लैनेरिया, यकृत कृमि |
| निमेटोडा | बेलनाकार, कूटगुहा | ऐस्केरिस, वुचेरेरिया |
| ऐनेलिडा | सच्ची देहगुहा, खंड | केंचुआ, जोंक |
| आर्थ्रोपोडा | संधित पैर, खुला परिसंचरण | झींगा, मक्खी, मकड़ी |
| मोलस्का | घटी देहगुहा, पेशीय पाद | घोंघा, शम्बुक |
| इकाइनोडर्मेटा | काँटेदार त्वचा, जल-संवहन | स्टारफिश, समुद्री अर्चिन |
| प्रोटोकॉर्डेटा | किसी अवस्था में नोटोकॉर्ड | बैलानोग्लोसस |
पोरिफेरा जगह से चिपके रहते हैं। छिद्र नाल तंत्र में खुलते हैं जो भोजन और ऑक्सीजन वाला पानी घुमाता है। बाहर कठोर परत या कंकाल होता है। ऊतकों का बँटवारा बहुत कम है। साइकॉन, यूफ्लेक्टेला और स्पंजिला उदाहरण हैं।
सीलेन्टरेटा को निडेरिया भी कहते हैं। शरीर की दो कोशिका-परतें होती हैं। कुछ कॉलोनी में रहते हैं, जैसे मूंगा। हाइड्रा अकेला रहता है। जेलीफिश और सी-एनीमोन आम उदाहरण हैं।
प्लेटीहेल्मिन्थीज द्विपार्श्व होते हैं: बायाँ और दायाँ आधा एक जैसा। तीन स्तरों से ऊतक बनते हैं, इसलिए त्रिस्तरブラスト। सच्ची देहगुहा नहीं होती और शरीर ऊपर से नीचे चपटा होता है। निमेटोडा भी त्रिस्तर और द्विपार्श्व हैं, पर शरीर बेलनाकार है और कूटगुहा है। वुचेरेरिया फाइलेरिया कृमि है जो एलिफैंटियासिस से जुड़ा है।
ऐनेलिडा में सच्ची देहगुहा होने से अंग पैक हो पाते हैं और खंड सिर से पूँछ तक जुड़े रहते हैं। आर्थ्रोपोडा संभवतः सबसे बड़ा जंतु समूह है। खुला परिसंचरण मतलब रक्त निश्चित वाहिकाओं में नहीं बहता। मोलस्का में देहगुहा घटी हुई है और चलने के लिए पाद है। इकाइनोडर्मेटा केवल समुद्री हैं। जल से चलने वाली नाल और कैल्सियम कार्बोनेट का कंकाल उनकी पहचान है। प्रोटोकॉर्डेटा में नोटोकॉर्ड कम से कम जीवन की किसी अवस्था में होता है। यह पीठ के सहारे की छड़ है जो तंत्रिका ऊतक को आहारनाल से अलग रखती है। उदाहरण बैलानोग्लोसस, हर्डमेनिया और एम्फिऑक्सस। नोटोकॉर्ड हर समय और पूरी लंबाई में जरूरी नहीं।
प्रश्न: पोरिफेरा और सीलेन्टरेटा में दो फर्क लिखो। ऐनेलिडा और आर्थ्रोपोडा में एक फर्क लिखो।
उत्तर: पोरिफेरा में छिद्र और नाल तंत्र है तथा ऊतक बहुत कम हैं। सीलेन्टरेटा में देहगुहा और दो कोशिका-परतें हैं, और हाइड्रा जैसे जीव अधिक बने-बनाए शरीर वाले हैं। ऐनेलिडा में बंद खंडों वाला शरीर और सच्ची देहगुहा है। आर्थ्रोपोडा में संधित पैर और खुला परिसंचरण है।
देहगुहा वाले तीन उत्तर अलग रखो: प्लेटी में नहीं, निमेटोडा में कूट, ऐनेलिडा में सच्ची।
इकाइनोडर्मेटा को समुद्री लिखो। जल-संवहन तंत्र और काँटेदार त्वचा दोनों अंक माँगते हैं।
10-सेकंड रिवीजन
नाम का अर्थ छिद्र वाला है।
पोरिफेरा। स्पंज, साइकॉन, यूफ्लेक्टेला।
गलत — सच्ची देहगुहा नहीं होती। शरीर चपटा होता है। सच्ची देहगुहा ऐनेलिडा में है।
वुचेरेरिया।
निमेटोडा। वुचेरेरिया फाइलेरिया कृमि है। ऐस्केरिस भी इसी समूह में है।
सबसे बड़ा जंतु समूह।
आर्थ्रोपोडा। परिसंचरण खुला होता है।
गलत — इकाइनोडर्मेटा केवल स्वतंत्र जीवी समुद्री जंतु हैं।
नोटोकॉर्ड पीठ के सहारे की छड़नुमा रचना है जो तंत्रिका ऊतक को आहारनाल से अलग रखती है। प्रोटोकॉर्डेटा में यह कम से कम किसी अवस्था में होती है। उदाहरण बैलानोग्लोसस है।
Vertebrata and binomial names — Activities 7.3 and 7.4 · अनुभाग 7.5.10 और 7.6 · क्रियाकलाप 7.3, 7.4
वर्टीब्रेटा में सच्ची मेरुदंड और भीतरी कंकाल होता है। सभी कॉर्डेट में नोटोकॉर्ड, पृष्ठीय तंत्रिका रज्जु, त्रिस्तर शरीर, युग्मित क्लोम थैली और देहगुहा होती है। पाँच वर्ग हैं।
| वर्ग | त्वचा और श्वसन | हृदय |
|---|---|---|
| पिसीज | शल्क, क्लोम | दो कक्ष, असमतापी |
| एम्फीबिया | शल्क नहीं, श्लेष्मा; क्लोम या फेफड़ा | तीन कक्ष |
| रेप्टिलिया | शल्क, फेफड़ा | प्रायः तीन; मगरमच्छ में चार |
| एवीज | पर, फेफड़ा, उड़ान के लिए अग्रपाद | चार कक्ष, समतापी |
| मैमेलिया | बाल, दुग्ध ग्रंथि | चार कक्ष, समतापी |
मछली केवल जल में रहती है। शार्क का कंकाल उपास्थि का है, रोहू या टूना में हड्डी और उपास्थि दोनों। एम्फीबिया जल और जमीन दोनों में मिलते हैं। मेंढक, टोड और सैलामैंडर उदाहरण हैं। ये अंडे देते हैं। सरीसृप के अंडे सख्त आवरण वाले होते हैं और उन्हें जल में देना जरूरी नहीं। साँप, कछुआ, छिपकली और मगरमच्छ इसी में हैं।
पक्षी अंडे देते हैं। स्तनधारी बच्चों को दूध पिलाते हैं। अधिकांश बच्चे जनते हैं। प्लैटिपस और एकिडना अंडे देते हैं। कंगारू बहुत अपरिपक्व बच्चा जनता है।
क्रियाकलाप 7.3: बाघ, मोर, चींटी, नीम, कमल और आलू के नाम जितनी भाषाओं में मिलें लिखो। अलग भाषा बोलने वाला यह नहीं जान पाता कि बात उसी जीव की है। इसलिए दुनिया ने एक वैज्ञानिक नाम मान लिया, जैसे पदार्थों के रासायनिक प्रतीक।
यह पद्धति अठारहवीं शताब्दी में कैरोलस लीनियस ने दी। पूरा पदानुक्रम नाम में नहीं लिखा जाता। केवल वंश और जाति लिखते हैं, लैटिन रूप में। नियम: वंश बड़े अक्षर से, जाति छोटे अक्षर से, छपाई में तिरछा, हाथ से लिखते समय दोनों को अलग-अलग रेखांकित करो। उदाहरण: Homo sapiens, Mangifera indica, Panthera tigris।
क्रियाकलाप 7.4: किन्हीं पाँच आम जंतुओं और पौधों के वैज्ञानिक नाम निकालो। देखो कि ये नाम उस शब्द से मिलते हैं या नहीं जिसे तुम रोज बोलते हो। प्रायः नहीं मिलते, क्योंकि स्थानीय नाम जगह-जगह बदलता है और वैज्ञानिक नाम नहीं।
प्रश्न: Homo sapiens को हाथ से कैसे लिखोगे? पक्षी और स्तनधारी में दो फर्क लिखो।
उत्तर: Homo और sapiens को अलग-अलग रेखा से रेखांकित करो। H बड़ा और s छोटा। पक्षी के पर होते हैं और वे अंडे देते हैं। स्तनधारी के बाल और दुग्ध ग्रंथियाँ होती हैं और अधिकांश बच्चे जनते हैं। दोनों समतापी हैं और हृदय चार कक्ष का है, इसलिए ये बातें फर्क नहीं हैं।
एम्फीबिया और रेप्टिलिया में अंडे का स्थान लिखो: मेंढक जल चाहता है, सरीसृप का अंडा सख्त आवरण वाला है।
वैज्ञानिक नाम में पूरा जगत-संघ-वर्ग मत लिखना। केवल दो शब्द। तिरछा या अलग रेखांकन बताना जरूरी है।
10-सेकंड रिवीजन
बाकी सरीसृप तीन कक्ष।
अधिकांश सरीसृपों का हृदय तीन कक्ष का है। मगरमच्छ में चार कक्ष हैं।
गलत — प्लैटिपस और एकिडना अंडे देते हैं। कंगारू बहुत अपरिपक्व बच्चा जनता है।
दूसरा शब्द जाति है।
वंश। जाति छोटे अक्षर से शुरू होती है।
बाघ, मोर, नीम, आलू।
स्थानीय नाम भाषा के साथ बदलते हैं। वैज्ञानिक नाम एक रहता है।
एम्फीबिया की त्वचा पर शल्क नहीं होते, श्लेष्मा ग्रंथियाँ होती हैं। रेप्टिलिया में शल्क होते हैं। मेंढक का हृदय तीन कक्ष का है। अधिकांश सरीसृपों का भी तीन है, पर मगरमच्छ का चार। एम्फीबिया अंडे जल से जोड़कर देते हैं। सरीसृप के अंडे सख्त आवरण वाले होते हैं और जल में देना जरूरी नहीं।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
यह आसान पर भ्रामक है।
जमीन, पानी और हवा। समुद्र के जीव इस आधार पर एक लगते हैं पर हैं नहीं।
सीढ़ी का सबसे निचला डंडा।
जाति। समानता प्रजनन तक पहुँचती है।
सायनोबैक्टीरिया।
मोनेरा। स्पाइरोगाइरा थैलोफाइटा है, नील-हरित शैवाल नहीं।
यीस्ट और मशरूम।
फंजाई। ये मृतोपजीवी हैं।
संवहन ऊतक नहीं होता।
ब्रायोफाइटा। फ्यूनेरिया और मार्केंशिया।
संवहन ऊतक और बीजाणु।
टेरिडोफाइटा। मार्सीलिया और हॉर्स-टेल भी।
मटर बँटता है, गेहूँ नहीं।
दो लगभग बराबर हिस्से। एकबीजपत्री नहीं बँटता।
संधित पैर।
आर्थ्रोपोडा। झींगा, तितली, मक्खी, मकड़ी, बिच्छू, केकड़ा।
मछली असमतापी है।
दो कक्ष। मेंढक में तीन। पक्षी और स्तनधारी में चार।
बाल भी होते हैं।
मैमेलिया। अधिकांश बच्चे जनते हैं।
छपाई में तिरछा।
वंश और जाति अलग-अलग रेखांकित। वंश बड़ा अक्षर, जाति छोटा।
अमीबा इसी में है।
प्रोटिस्टा। मोनेरा में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता।
बीज और फल वाले फैनरोगैम हैं।
एंजियोस्पर्म। क्रिप्टोगैम तीन हैं और बीजाणु वाले हैं।
रक्त निश्चित वाहिकाओं में नहीं बहता।
आर्थ्रोपोडा। मोलस्का में भी खुला परिसंचरण है।
गलत — मूंगा, व्हेल, ऑक्टोपस, स्टारफिश और शार्क केवल निवास साझा करते हैं।
सही — न स्पष्ट केंद्रक, न बहुकोशिक शरीर।
गलत — वे मृतोपजीवी विषमपोषी हैं। स्वपोषी पौधे क्लोरोफिल से भोजन बनाते हैं।
सही — फर्न, मार्सीलिया, हॉर्स-टेल।
गलत — बीज नग्न होता है। फल के अंदर बीज एंजियोस्पर्म का लक्षण है।
सही — केंचुआ और जोंक। सच्ची देहगुहा भी होती है।
गलत — पक्षी समतापी हैं और हृदय चार कक्ष का है।
सही — हाथ से लिखते समय वंश और जाति अलग-अलग रेखांकित होते हैं।
व्हिटेकर।
हेकेल 1894, वूज़ 1977।
फंजाई।
काइटिन भी याद रखो।
ब्रायोफाइट या मॉस।
संवहन ऊतक नहीं।
जिम्नोस्पर्म।
बीज नग्न है।
ऐनेलिडा।
खंड और सच्ची देहगुहा।
उपास्थि।
रोहू में हड्डी भी है।
लीनियस।
अठारहवीं शताब्दी।
थैलोफाइटा।
शैवाल।
थैलोफाइटा अविभाजित, ब्रायोफाइटा बिना संवहन ऊतक, टेरिडोफाइटा बीजाणु और संवहन, जिम्नोस्पर्म नग्न बीज।
स्पंज पोरिफेरा, ऐस्केरिस निमेटोडा, मक्खी आर्थ्रोपोडा, चमगादड़ स्तनधारी।
अभिकथन (A): जीवों का वर्गीकरण जरूरी है।
कारण (R): समानता से बने समूह को एक साथ पढ़ा जा सकता है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): मोनेरा में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता।
कारण (R): व्हिटेकर ने पाँच जगत प्रस्तावित किए।
दोनों सही हैं, पर R, केंद्रक वाली बात की व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A): जिम्नोस्पर्म के बीज नग्न होते हैं।
कारण (R): इनके बीज फल के अंदर बंद होते हैं।
A सही है। R गलत — फल के अंदर बीज एंजियोस्पर्म में होता है।
अभिकथन (A): हर स्तनधारी अंडे देता है।
कारण (R): प्लैटिपस और एकिडना अंडे देने वाले स्तनधारी हैं।
A गलत है क्योंकि अधिकांश स्तनधारी बच्चे जनते हैं। R सही है।
अभिकथन (A): जाति में जीवों की संख्या जगत से कम होती है।
कारण (R): हर अगले स्तर पर समूह छोटा होता है और समान लक्षण बढ़ते हैं।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
जीवाणु मोनेरा, अमीबा प्रोटिस्टा, मशरूम फंजाई, फर्न प्लांटी का टेरिडोफाइट।
गेहूँ और मक्का नहीं बँटते। मटर और मूंग दो हिस्सों में बँटते हैं।
जाति ऐसे जीवों का समूह है जो इतने समान हों कि प्रजनन कर अगली पीढ़ी चला सकें।
एक ही जगह बहुत अलग जीव रहते हैं। समुद्र में मूंगा और शार्क केवल पानी साझा करते हैं, शरीर की बनावट नहीं।
मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया।
जीव का वैज्ञानिक नाम दो शब्दों का होता है, वंश और जाति। यह लीनियस की पद्धति है और पूरे संसार में एक रहती है।
पोरिफेरा में पूरे शरीर पर छिद्र और नाल तंत्र होता है तथा ऊतक बहुत कम होते हैं। सीलेन्टरेटा में दो कोशिका-परतें और एक देहगुहा होती है।
तीन आधार हैं: कोशिका की संरचना, पोषण का तरीका और स्रोत, तथा शरीर का संगठन। इसी से मोनेरा से एनिमेलिया तक के समूह अलग होते हैं।
क्रिप्टोगैम में जनन अंग छिपे होते हैं और भ्रूण बीजाणु होता है। थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा इसी में हैं। फैनरोगैम बीज बनाते हैं। जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होता है और एंजियोस्पर्म में फल के अंदर।
एम्फीबिया की त्वचा बिना शल्क और श्लेष्मा वाली होती है। रेप्टिलिया में शल्क होते हैं। एम्फीबिया के अंडे जल से जुड़े होते हैं। सरीसृप के अंडे सख्त आवरण वाले होते हैं।
वंश बड़े अक्षर से शुरू हो। जाति छोटे अक्षर से शुरू हो। छपाई में नाम तिरछा हो। हाथ से लिखते समय वंश और जाति अलग-अलग रेखांकित हों।
थैलोफाइटा: शरीर अंगों में नहीं बँटता, जैसे स्पाइरोगाइरा। ब्रायोफाइटा: तना-पत्ती जैसी रचना, संवहन ऊतक नहीं, जैसे फ्यूनेरिया। टेरिडोफाइटा: जड़, तना, पत्ती और संवहन ऊतक, बीजाणु, जैसे फर्न। जिम्नोस्पर्म: नग्न बीज, जैसे पाइन। एंजियोस्पर्म: बीज फल के अंदर, एक या दो बीजपत्र। पहले तीन क्रिप्टोगैम हैं, अंतिम दो फैनरोगैम।
पिसीज: शल्क, क्लोम, दो कक्ष, अंडे, केवल जल। एम्फीबिया: शल्क नहीं, तीन कक्ष, अंडे जल में, जैसे मेंढक। रेप्टिलिया: शल्क, प्रायः तीन कक्ष, मगरमच्छ में चार, सख्त अंडे। एवीज: पर, चार कक्ष, समतापी, अंडे। मैमेलिया: बाल और दुग्ध ग्रंथि, चार कक्ष, समतापी, प्रायः बच्चे; प्लैटिपस और एकिडना अंडे देते हैं।
क्रम है जगत, संघ या प्रभाग, वर्ग, गण, कुल, वंश, जाति। नीचे समूह छोटा होता है। पहले आई शरीर-रचना बाद के सारे बदलावों की नींव बन जाती है, इसलिए वह अधिक मौलिक है। मनुष्य का नाम Homo sapiens है। Homo वंश है और बड़े अक्षर से शुरू होता है। sapiens जाति है और छोटे अक्षर से। छपाई में तिरछा, हाथ से दोनों शब्द अलग रेखांकित।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
क्रियाकलाप 7.1।
जरूरी लक्षण चुनते हैं। कुछ लक्षण पहचान के लिए छोड़ दिए जाते हैं।
एककोशिक सुकेन्द्रकी।
प्रोटिस्टा।
प्रभाग।
सीढ़ी का दूसरा डंडा।
प्लेटीहेल्मिन्थीज में सच्ची देहगुहा नहीं होती और शरीर चपटा होता है। निमेटोडा में कूटगुहा होती है और शरीर बेलनाकार होता है। ऐनेलिडा में सच्ची देहगुहा और खंड होते हैं।
फायदे: अध्ययन आसान होता है और नए जीव को समूह में रखा जा सकता है। पौधे अपना भोजन बनाते हैं इसलिए शरीर के बँटवारे, संवहन ऊतक और बीज को आधार बनाते हैं, जैसे फर्न में संवहन ऊतक। जंतु भोजन बाहर से लेते हैं इसलिए देहगुहा, खंड और अंगों को आधार बनाते हैं, जैसे केंचुए में सच्ची देहगुहा। कंकाल पहला आधार नहीं है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
सायनोबैक्टीरिया में स्पष्ट केंद्रक नहीं।
नील-हरित शैवाल मोनेरा है। स्पाइरोगाइरा थैलोफाइटा है।
गेहूँ भी इसी तरफ है।
एकबीजपत्री। मटर उलटा व्यवहार करता है और द्विबीजपत्री है।
अभिकथन (A): आर्थ्रोपोडा में परिसंचरण खुला होता है।
कारण (R): इनका रक्त हमेशा बंद वाहिकाओं में बहता है।
A सही है। R गलत — खुले परिसंचरण में रक्त निश्चित वाहिकाओं में नहीं बहता।
अभिकथन (A): स्थानीय नाम से जीव की दुनिया भर में पहचान मुश्किल होती है।
कारण (R): एक ही जीव की अलग भाषाओं में अलग संज्ञाएँ होती हैं।
दोनों सही हैं और R, क्रियाकलाप 7.3 के रूप में A की व्याख्या है।
स्पष्ट केंद्रक न होना मोनेरा की पहचान है। प्रोटिस्टा सुकेन्द्रकी होता है। उदाहरण बैक्टीरिया या नील-हरित शैवाल। माइकोप्लाज्मा भी मोनेरा है और उसकी कोशिका भित्ति नहीं होती।
उड़ना पहला आधार नहीं है। पक्षी एवीज है: पर, अंडे, चौकक्षीय हृदय। चमगादड़ मैमेलिया है: बाल, दुग्ध ग्रंथि, प्रायः जीवित बच्चा, चौकक्षीय हृदय। दोनों समतापी हैं, पर त्वचा और प्रजनन अलग हैं।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| पाँच जगत | Monera, Protista, Fungi, Plantae, Animalia |
| पदानुक्रम | Kingdom, Phylum/Division, Class, Order, Family, Genus, Species |
| क्रिप्टोगैम | Thallophyta, Bryophyta, Pteridophyta |
| नग्न बीज | gymnosperms: pine, deodar, Cycas |
| दस जंतु समूह | Porifera to Vertebrata |
| द्विनाम | Genus capital, species small, italics in print |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।