दूध वैज्ञानिक के लिए मिश्रण है।
सारे कण एक जैसी रासायनिक प्रकृति के हों तो पदार्थ शुद्ध है।
कक्षा 9 · विज्ञान · अध्याय 2 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Is Matter Around Us Pure?
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — 2.1 समांगी · 2.2 टॉर्च · 2.3 संतृप्त · 2.4 स्याही · 2.5 क्रीम · 2.6 कीप · 2.7 क्रोमैटोग्राफी · 2.8 आसवन · 2.9 क्रिस्टल · 2.10 लोहा-गंधक, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. विलयन, निलंबन और कोलाइड का याद रखने वाला चित्र देखो — टॉर्च का रास्ता निलंबन और कोलाइड में दिखता है और विलयन में छिपा रहता है।
बिहार की किताब में यह अध्याय 2 है। NCERT 2026-27 की नई किताब अन्वेषण में मिश्रण अध्याय 5 है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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A pure substance and a mixture — Activity 2.1 · अनुभाग 2.1 · समांगी और विषमांगी
दूध, घी, मक्खन, नमक, मसाले, मिनरल वाटर और जूस के पैकेट पर शुद्ध लिखा होता है। खरीदार के लिए इसका अर्थ मिलावट रहित है। वैज्ञानिक के लिए शुद्ध पदार्थ के सारे कण रासायनिक रूप से एक जैसे होते हैं। स्रोत बदलने पर भी उसके लक्षण नहीं बदलते।
पानी में घोला सोडियम क्लोराइड वाष्पन से अलग हो जाता है। पर सोडियम क्लोराइड स्वयं एक पदार्थ है। भौतिक विधि से उसके तत्त्व अलग नहीं होते। चीनी भी ऐसा ही पदार्थ है। मृदु पेय और मिट्टी एक पदार्थ नहीं हैं। समुद्री पानी, खनिज और मिट्टी मिश्रण हैं।
मिश्रण में एक से अधिक शुद्ध पदार्थ होते हैं। अनुपात बदल सकता है। नए पदार्थ की रचना केवल मिलाने से नहीं होती।
कक्षा को समूह A, B, C और D में बाँटो। समूह A 50 mL पानी में कॉपर सल्फेट का एक स्पैचुला घोलता है। समूह B उसी 50 mL में दो स्पैचुला घोलता है। दोनों का मिश्रण हर जगह एक-सा है। ऐसे मिश्रण को समांगी या विलयन कहते हैं। नमक-पानी और चीनी-पानी भी ऐसे हैं। दोनों घोल कॉपर सल्फेट के हैं, पर रंग की गहराई अलग है। इसलिए समांगी मिश्रण का संघटन बदल सकता है।
समूह C और D कॉपर सल्फेट के साथ पोटाशियम परमैंगनेट या नमक अलग-अलग मात्रा में मिलाकर मिश्रण बनाते हैं। इनमें आँख से अलग-अलग भाग दिखते हैं और संघटन एक-सा नहीं होता। इन्हें विषमांगी कहते हैं। सोडियम क्लोराइड और लोहे का चूरा, नमक और गंधक, तथा तेल और पानी इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न: सोडा वाटर, लकड़ी, हवा, मिट्टी, सिरका और छना चाय — किसे समांगी रखोगे?
उत्तर: सोडा वाटर, हवा, सिरका और छना चाय समांगी हैं। लकड़ी और मिट्टी विषमांगी हैं। हवा कई गैसों का समांगी मिश्रण है।
पदार्थ और मिश्रण की परिभाषा में «भौतिक विधि से अलग होना» वाला वाक्य लिखो।
हवा समांगी है, मिट्टी विषमांगी। दोनों को एक वर्ग में मत रखना।
दूध वैज्ञानिक के लिए मिश्रण है।
सारे कण एक जैसी रासायनिक प्रकृति के हों तो पदार्थ शुद्ध है।
गलत — क्रियाकलाप 2.1 में एक और दो स्पैचुला दोनों समांगी हैं, पर रंग अलग है। अनुपात बदल सकता है।
भाग अलग दिखते हैं।
विषमांगी।
गैस में गैस।
हवा समांगी है। मिट्टी, लकड़ी और तेल-पानी विषमांगी हैं।
पदार्थ में एक ही प्रकार के कण होते हैं और भौतिक विधि से वह दूसरे पदार्थों में नहीं बँटता। मिश्रण में एक से अधिक पदार्थ होते हैं और अनुपात बदल सकता है।
Solution, suspension, colloid — Activity 2.2 · अनुभाग 2.2 · टिंडल · 1 nm
विलयन दो या अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है। जो घटक दूसरे को घोलता है, प्रायः अधिक मात्रा में, वह विलायक है। जो घुलता है, प्रायः कम मात्रा में, वह विलेय है। शरबत में चीनी विलेय और पानी विलायक है। आयोडीन का एल्कोहॉल में घोल टिंक्चर आयोडीन है। सोडा में कार्बन डाइऑक्साइड विलेय और पानी विलायक है। हवा गैस में गैस है। उसके मुख्य भाग लगभग 21 प्रतिशत ऑक्सीजन और 78 प्रतिशत नाइट्रोजन हैं।
मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं का, या धातु और अधातु का मिश्रण है। भौतिक विधि से घटक नहीं छूटते, फिर भी वह मिश्रण है, क्योंकि घटकों के गुण दिखते हैं और संघटन बदल सकता है। पीतल लगभग 30 प्रतिशत जस्ता और 70 प्रतिशत ताँबा है।
विलयन के कण 1 nm से छोटे होते हैं। आँख से नहीं दिखते, प्रकाश नहीं बिखेरते, छनते नहीं और बैठते नहीं। निलंबन विषमांगी है। कण दिखते हैं, प्रकाश बिखेरते हैं, बैठ जाते हैं और छन जाते हैं। बैठने के बाद प्रकाश बिखेरना बंद हो जाता है। कोलाइड देखने में समांगी लगता है, पर विषमांगी है, जैसे दूध। कण आँख से नहीं दिखते, पर प्रकाश बिखेरते हैं। यह टिंडल प्रभाव है। कोलाइड स्थिर है और साधारण छानने से अलग नहीं होता। अपकेंद्रण, यानी क्रियाकलाप 2.5, कोलाइड कण अलग कर सकता है।
समूह A को कॉपर सल्फेट के कुछ क्रिस्टल दो। समूह B को एक स्पैचुला भरा कॉपर सल्फेट। समूह C को चाक का चूर्ण या गेहूँ का आटा। समूह D को दूध या स्याही की कुछ बूँदें। हर समूह अपना नमूना पानी में डालकर काँच की छड़ से हिलाए।
कण दिखते हैं या नहीं, लिखो। टॉर्च की किरण बीकर में भेजो और सामने से देखो। रास्ता दिखता है या नहीं। कुछ मिनट बिना हिलाए रखो। कण बैठते हैं या मिश्रण टिकता है। फिर छानो। छानक पत्र पर अवशेष है या नहीं।
A और B को विलयन मिलता है। रंग की गहराई अलग हो सकती है। C को निलंबन मिलता है। D को कोलाइड मिलता है। कमरे में छेद से आती धूल भरी किरण, और घने जंगल की धुंध में सूरज की किरण, भी टिंडल प्रभाव हैं।
| परिक्षिप्त | माध्यम | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| द्रव | गैस | ऐरोसॉल | कोहरा, बादल |
| ठोस | गैस | ऐरोसॉल | धुआँ |
| द्रव | द्रव | इमल्शन | दूध |
| ठोस | द्रव | सॉल | मैगनीशिया का दूध, कीचड़ |
प्रश्न: नमक का घोल, दूध, कॉपर सल्फेट का घोल और स्टार्च का घोल — टिंडल कौन दिखाएगा?
उत्तर: दूध और स्टार्च का घोल कोलाइड हैं, इसलिए टिंडल दिखाएँगे। नमक और कॉपर सल्फेट के विलयन नहीं दिखाएँगे।
सॉल को विलयन मत कहना। सॉल ठोस-द्रव कोलाइड है, जैसे कीचड़।
पीतल मिश्रण है, यौगिक नहीं। 70 प्रतिशत ताँबा और 30 प्रतिशत जस्ता लगभग हैं।
आयोडीन ठोस विलेय है।
एल्कोहॉल विलायक है और आयोडीन विलेय।
गलत — विलयन के कण 1 nm से छोटे हैं और प्रकाश नहीं बिखेरते।
चाक निलंबन है।
कोलाइड।
अस्थिर मिश्रण।
कण बैठ जाते हैं। उसके बाद प्रकाश बिखेरना भी रुक जाता है।
विलयन समांगी है और कण 1 nm से छोटे हैं। सॉल ठोस का द्रव में कोलाइड है, टिंडल दिखाता है और स्थिर रहता है। निलंबन के कण आँख से दिखते हैं, बैठते हैं और छन जाते हैं।
लगभग 70 प्रतिशत ताँबा।
भौतिक विधि से न छूटे, फिर भी अनुपात बदल सकता है, इसलिए मिश्रण है।
A saturated solution and percentage — Activity 2.3 · अनुभाग 2.2.1 · 11.1 प्रतिशत · सारणी
किसी ताप पर विलायक जितना विलेय घोल सकता है, उतना घुल जाए तो विलयन संतृप्त है। उससे कम विलेय हो तो असंतृप्त है। उस ताप पर संतृप्त विलयन में विलेय की मात्रा विलेयता है। एक ही ताप पर अलग-अलग पदार्थों की विलेयता अलग होती है। संतृप्त विलयन को धीरे ठंडा करो तो कुछ विलेय क्रिस्टल बनकर निकल सकता है।
सान्द्रता विलेय की मात्रा है, विलयन की दी हुई मात्रा में या विलायक की दी हुई मात्रा में। यहाँ दो तरीके हैं। द्रव्यमान प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100। द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का आयतन) × 100। विलयन का द्रव्यमान = विलेय + विलायक।
293 K पर 100 g पानी में संतृप्त घोल के लिए सारणी: पोटाशियम नाइट्रेट 32 g, सोडियम क्लोराइड 36 g, पोटाशियम क्लोराइड 35 g, अमोनियम क्लोराइड 37 g। 313 K पर पोटाशियम नाइट्रेट 62 g है। 353 K पर पोटाशियम क्लोराइड 54 g है और 293 K पर 35 g। ताप बढ़ने पर इन लवणों की विलेयता बढ़ती है। नमक लगभग स्थिर रहता है।
दो बीकरों में लगभग 50 mL पानी लो। एक में नमक डालो और दूसरे में चीनी या बेरियम क्लोराइड, लगातार हिलाते हुए। जब और विलेय न घुले, तब बीकर को इतना गर्म करो कि ताप लगभग 5°C बढ़ जाए। फिर विलेय डालो।
उसी ताप पर नमक और चीनी या बेरियम क्लोराइड की घुलने वाली मात्रा समान नहीं है। गर्म करने पर और विलेय घुलता है। क्रियाकलाप 2.2 में भी समूह A के कुछ क्रिस्टल और समूह B का एक स्पैचुला अलग गहराई देते हैं। A, B की तुलना में पतला है। पतला और गाढ़ा निश्चित संख्याएँ नहीं हैं।
प्रश्न: 320 g पानी में 40 g नमक घोला गया है। द्रव्यमान प्रतिशत निकालो।
सूत्र: द्रव्यमान प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100।
प्रतिस्थापन: विलयन = 40 g + 320 g = 360 g।
प्रतिशत = (40 / 360) × 100 = 11.1%।
प्रतिशत में विलयन का द्रव्यमान लिखो, केवल पानी का नहीं। 40/320 गलत है।
25 K वाला अंतर आसवन का है। 5°C क्रियाकलाप 2.3 की आँच का है। दोनों मत मिलाना।
पहले 360 g बनाओ।
(40/360) × 100 = 11.1%। 40/320 प्रतिशत नहीं है।
गलत — क्रियाकलाप 2.3 दिखाता है कि अलग पदार्थों की विलेयता अलग है।
50 g पानी के लिए आधा।
62 g। इसलिए 50 g पानी में 31 g।
विलयन का द्रव्यमान = 36 g + 100 g = 136 g। प्रतिशत = (36/136) × 100 = 26.47%।
37 g प्रति 100 g पानी।
अमोनियम क्लोराइड 37 g। नमक 36 g, पोटाशियम क्लोराइड 35 g, पोटाशियम नाइट्रेट 32 g।
Evaporation, cream and the funnel — Activities 2.4, 2.5, 2.6 · अनुभाग 2.3.1 से 2.3.3
अधिकतर प्राकृतिक चीजें रासायनिक रूप से शुद्ध नहीं होतीं। विषमांगी मिश्रण अक्सर हाथ से चुनकर, छानकर या चलनी से अलग होते हैं। बहुत छोटे कणों के लिए अलग तकनीक चाहिए।
वाष्पन से वाष्पशील विलायक, अनवाष्पशील विलेय से अलग होता है। अपकेंद्रण में तेज घुमाने पर भारी कण नीचे जाते हैं और हल्के ऊपर रह जाते हैं। अमिश्रणीय द्रव घनत्व के अनुसार परत बनाते हैं। नीचे की परत स्टॉपकॉक से निकाली जाती है।
2.4। बीकर आधा पानी से भरो। मुँह पर वाच ग्लास रखो। उस पर स्याही की कुछ बूँदें डालो। स्याही को सीधे मत जलाओ। बीकर गर्म करो। वाच ग्लास से वाष्पन होता है। जब और बदलाव न दिखे, आँच रोक दो। पानी उड़ जाता है और रंग का अवशेष रह जाता है। स्याही पानी में रंग का मिश्रण है।
2.5। परखनली में फुल-क्रीम दूध लो। अपकेंद्रण मशीन में दो मिनट घुमाओ। मशीन न हो तो घर के मथनी से करो। पास की डेयरी से पूछो कि क्रीम कैसे अलग होती है और पनीर कैसे बनता है। मथने पर क्रीम ऊपर आती है। यही तरीका रक्त और मूत्र की जाँच, मक्खन और गीले कपड़े निचोड़ने वाली वाशिंग मशीन में है।
2.6। मिट्टी के तेल और पानी का मिश्रण पृथक्करण कीप में डालो। परतें बनने तक रखो। स्टॉपकॉक खोलकर नीचे का पानी सावधानी से निकालो। तेल स्टॉपकॉक तक पहुँचे तो बंद कर दो। तेल-पानी अलग करने और भट्ठी में हल्की धातुमल को पिघले लोहे के ऊपर से हटाने में यही सिद्धांत है।
प्रश्न: दही से मक्खन, चाय से पत्ती, और पानी से तेल — तीनों के तरीके अलग-अलग लिखो।
उत्तर: दही से मक्खन अपकेंद्रण से। चाय की पत्ती छानने से, अवशेष पत्र पर और निस्यंद चाय। तेल और पानी अमिश्रणीय हैं, इसलिए पृथक्करण कीप।
अपकेंद्रण और पृथक्करण कीप अलग हैं। एक घुमाता है, दूसरी परत निकालती है।
स्याही को सीधे गर्म नहीं करते। बीकर का पानी वाच ग्लास को गरम करता है।
क्रियाकलाप 2.4।
पानी वाष्पित होता है और रंग रुकता है। स्याही मिश्रण है।
गलत — भारी कण नीचे जाते हैं और हल्के ऊपर रह जाते हैं।
नीचे की परत पानी है।
पृथक्करण कीप।
पानी विलायक है। चीनी घुलनशील विलेय है। चाय की पत्ती अघुलनशील है। छानने पर पत्ती अवशेष है और कप में आई चाय निस्यंद है।
Sublimation, colours and distillation — Activities 2.7, 2.8 · 2.6 के बाद ऊर्ध्वपातन · 2.7 · 2.8 · हवा
अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नैफ्थालीन और एन्थ्रासीन गर्म करने पर सीधे वाष्प बनते हैं। नमक नहीं बनता। इसलिए नमक और अमोनियम क्लोराइड का मिश्रण ऊर्ध्वपातन से अलग होता है। यह 2.6 के बाद और 2.7 से पहले आता है। इसका अपना क्रियाकलाप नंबर नहीं है।
क्रोमैटोग्राफी उन विलेयों को अलग करती है जो एक ही विलायक में घुलते हैं। ग्रीक में क्रोमा का अर्थ रंग है। अधिक घुलनशील रंग कागज पर तेज चढ़ता है। उपयोग: रंग, प्राकृतिक वर्णक, रक्त से दवा।
दो मिश्रणीय द्रव बिना टूटे उबलें और क्वथनांक में पर्याप्त अंतर हो तो आसवन। अंतर 25 K से कम हो तो प्रभाजी आसवन। स्तम्भ में काँच की गोलियाँ वाष्प को बार-बार ठंडा करती हैं। हवा का प्रवाह: दाब बढ़ाकर और ताप घटाकर द्रव हवा, फिर स्तम्भ में धीरे गरम। चित्र की सारणी: ऑक्सीजन का क्वथनांक −183°C और 20.9 प्रतिशत, आर्गन −186°C और 0.9 प्रतिशत, नाइट्रोजन −196°C और 78.1 प्रतिशत। बढ़ता क्वथनांक: नाइट्रोजन, आर्गन, ऑक्सीजन। ठंडा करने पर पहले द्रव ऑक्सीजन बनती है।
2.7। छानक पत्र की पतली पट्टी लो। निचले किनारे से लगभग 3 cm ऊपर पेंसिल से रेखा खींचो। रेखा के बीच में पानी में घुलने वाली स्याही की एक छोटी बूँद रखो, स्केच पेन या फाउंटेन पेन की। सूखने दो। पट्टी को पानी वाले जार में ऐसा लटकाओ कि स्याही की बूँद जल-स्तर के ठीक ऊपर रहे। पानी पट्टी पर चढ़ता है और रंग साथ ले जाता है। प्रायः दो या अधिक रंग अलग दिखते हैं।
2.8। एसीटोन और पानी का मिश्रण आसवन फ्लास्क में लो। थर्मामीटर लगाओ। धीरे गर्म करो। एसीटोन पहले वाष्प बनता है, संघनित्र में द्रव बनता है और बाहर इकट्ठा होता है। पानी फ्लास्क में रुकता है। थर्मामीटर कुछ देर जिस ताप पर रुके, वह एसीटोन का क्वथनांक है। वह पानी के क्वथनांक से कम है, इसलिए दोनों अलग होते हैं। मिट्टी का तेल और पेट्रोल का अंतर 25°C से अधिक हो और वे मिश्रणीय हों तो साधारण आसवन काफी है।
प्रश्न: हवा ठंडी करते समय कौन-सी गैस पहले द्रव बनती है? क्रम भी लिखो।
उत्तर: क्वथनांक अधिक हो तो पहले द्रव बनता है। क्रम: नाइट्रोजन −196°C, आर्गन −186°C, ऑक्सीजन −183°C। पहले द्रव ऑक्सीजन बनती है।
कपूर और नमक का उत्तर ऊर्ध्वपातन है। आसवन मत लिखना।
ऑक्सीजन का क्वथनांक −183°C है, नाइट्रोजन का −196°C। पहले द्रव ऑक्सीजन है।
10-सेकंड रिवीजन
कपूर सीधे वाष्प बनता है।
ऊर्ध्वपातन। नमक नहीं उड़ता।
गलत — अधिक घुलनशील रंग तेज चढ़ता है।
बूँद जल-स्तर के ऊपर रहे।
3 cm।
हवा और पेट्रोलियम।
प्रभाजी आसवन। साधारण आसवन तब जब अंतर पर्याप्त हो।
हवा को दाब बढ़ाकर और ताप घटाकर द्रव बनाते हैं। फिर प्रभाजी स्तम्भ में धीरे गरम करते हैं। क्वथनांक का बढ़ता क्रम नाइट्रोजन −196°C, आर्गन −186°C, ऑक्सीजन −183°C है। ऑक्सीजन पहले द्रव बनती है।
जिसका क्वथनांक कम हो।
एसीटोन पहले वाष्प बनता है। पानी फ्लास्क में रहता है।
Crystals and physical or chemical change — Activity 2.9 · अनुभाग 2.3.8 और 2.4 · जल-केंद्र
रंग, कठोरता, दृढ़ता, बहाव, घनत्व, गलनांक और क्वथनांक भौतिक गुण हैं। बर्फ, पानी और भाप दिखने में अलग हैं, पर रासायनिक रूप से एक ही पानी हैं। अवस्था का बदलना भौतिक परिवर्तन है, क्योंकि संघटन नहीं बदलता।
तेल जलता है और पानी आग बुझाता है। यह रासायनिक गुण है। जलने में नया पदार्थ बनता है। इसे रासायनिक परिवर्तन या रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। मोमबत्ती में दोनों होते हैं: मोम का पिघलना भौतिक है और मोम का जलना रासायनिक।
पेड़ काटना, मक्खन पिघलना, पानी उबलना, नमक घुलना और फलों का सलाद भौतिक हैं। अलमारी में जंग, पानी का विद्युत से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटना, तथा कागज या लकड़ी का जलना रासायनिक हैं।
चीनी डिश में लगभग 5 g अशुद्ध कॉपर सल्फेट लो। कम से कम पानी में घोलो। अशुद्धि छान दो। पानी इतना उड़ाओ कि विलयन संतृप्त हो जाए। छानक पत्र से ढककर कमरे के ताप पर एक दिन धीरे ठंडा होने दो। डिश में कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल मिलते हैं। इन्हें द्रव से अलग कर लो।
क्रिस्टलीकरण साधारण वाष्पन से बेहतर है। कुछ ठोस सूखने तक गर्म करने पर टूट जाते हैं। चीनी जल सकती है। कुछ अशुद्धि घुली रहकर सूखने पर ठोस में मिल जाती है। समुद्री नमक की सफाई और फिटकरी के क्रिस्टल इसी विधि से होते हैं।
शहर के जल-केंद्र का क्रम चित्र में है: जलाशय, अवसादन टैंक जहाँ ठोस बैठते हैं, लोडिंग टैंक जहाँ निलंबित अशुद्धि बैठाई जाती है, छानने का टैंक जिसमें बारीक रेत, मोटी रेत और बजरी है, फिर क्लोरीन से जीवाणु मारकर घर तक।
प्रश्न: 353 K पर संतृप्त पोटाशियम क्लोराइड को 293 K तक ठंडा किया। 100 g पानी पर क्या दिखेगा?
उत्तर: 353 K पर विलेयता 54 g है और 293 K पर 35 g। अंतर 54 g − 35 g = 19 g क्रिस्टल बनकर अलग होता है, प्रति 100 g पानी।
समुद्री पानी से नमक के लिए वाष्पन भी सही है। शुद्ध क्रिस्टल माँगो तो क्रिस्टलीकरण लिखो।
पेड़ काटना भौतिक है क्योंकि लकड़ी का संघटन नहीं बदलता। जंग रासायनिक है।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 2.9।
क्रिस्टलीकरण। लगभग 5 g नमूना, संतृप्त घोल, धीरे ठंडा।
गलत — संघटन नहीं बदलता, इसलिए भौतिक है।
छानने के बाद।
क्लोरीनन।
नया पदार्थ बनता है।
जंग रासायनिक है। पिघलना, घुलना और जमना भौतिक हैं।
कुछ ठोस, जैसे चीनी, सूखने तक गर्म करने पर जल सकते हैं। घुली अशुद्धि वाष्पन के बाद ठोस में मिल जाती है। क्रिस्टल धीरे ठंडा करने से शुद्ध ठोस देते हैं।
Elements, compounds and iron-sulphur — Activity 2.10 · अनुभाग 2.5 · क्रियाकलाप 2.10 · समूह मॉडल
क्रियाकलाप 2.10 शिक्षक की देखरेख में करो। तनु सल्फ्यूरिक या हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और कार्बन डाइसल्फाइड खतरनाक हैं। समूह I से निकली हाइड्रोजन ज्वलनशील है। कक्षा में उसका दहन परीक्षण मत करना। मिश्रण को लाल गर्म करने के बाद ठंडा होने दो। चखो मत।
रॉबर्ट बॉयल ने 1661 में तत्त्व शब्द का प्रयोग किया। लाव्वाजिए ने तत्त्व को ऐसा मूल रूप कहा जिसे रासायनिक अभिक्रिया से सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता। ज्ञात तत्त्व 100 से अधिक हैं। 92 प्राकृतिक हैं, शेष मानव-निर्मित। अधिकांश ठोस हैं। कमरे के ताप पर 11 तत्त्व गैस हैं। दो द्रव हैं: पारा और ब्रोमीन। गैलियम और सीजियम 303 K के थोड़ा ऊपर द्रव बन जाते हैं।
धातु चमकती है, ऊष्मा और विद्युत चलाती है, तार खिंचती है, चादर बनती है और चोट से बजती है। पारा कमरे के ताप पर एकमात्र द्रव धातु है। अधातु प्रायः ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती है और चमक, बजना या चादर नहीं देती। बोरॉन, सिलिकॉन और जर्मेनियम उपधातु हैं।
यौगिक दो या अधिक तत्त्वों का निश्चित अनुपात में रासायनिक मेल है। मिश्रण के गुण घटकों जैसे रहते हैं। यौगिक के गुण नए होते हैं। मिश्रण भौतिक विधि से छूटता है। यौगिक केवल रासायनिक या विद्युत-रासायनिक विधि से।
दोनों समूहों को चीनी डिश में 5 g लोहे का चूरा और 3 g गंधक का चूर्ण दो। समूह I केवल मिलाए और कूटे। समूह II मिलाकर तेज गर्म करे, जब तक लाल न हो, फिर आँच से हटाकर ठंडा करे।
चुंबक पास लाओ। बनावट और रंग देखो। एक भाग में कार्बन डाइसल्फाइड डालो, हिलाओ और छानो। दूसरे भाग में तनु सल्फ्यूरिक या हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालो। यही कदम लोहे और गंधक पर अलग-अलग भी करो।
समूह I का पदार्थ मिश्रण है। चुंबक लोहा खींचता है। अम्ल से रंगहीन, गंधहीन हाइड्रोजन निकलती है। समूह II का पदार्थ यौगिक आयरन सल्फाइड है। अम्ल से सड़े अंडे जैसी हाइड्रोजन सल्फाइड निकलती है। गर्म करने पर Fe और S मिलकर FeS देते हैं।
समूह मॉडल। नंबर वाले क्रियाकलाप के बाद मिट्टी का मटका, कंकड़ और रेत से गंदा पानी साफ करने का छोटा संयंत्र बनाओ। यह जल-केंद्र की छानने वाली परत का घरेलू रूप है।
प्रश्न: समूह I और समूह II में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से कौन-सी गैस निकलती है?
उत्तर: समूह I से हाइड्रोजन। समीकरण Fe + 2HCl → FeCl2 + H2। समूह II से हाइड्रोजन सल्फाइड। समीकरण FeS + 2HCl → FeCl2 + H2S। गंध से पहचान होती है: हाइड्रोजन गंधहीन है, हाइड्रोजन सल्फाइड सड़े अंडे जैसी है। कक्षा में हाइड्रोजन जलाकर मत देखना।
यौगिक का अनुपात निश्चित लिखो। मिश्रण का अनुपात बदलता है। एक वाक्य में दोनों मत उलटना।
पारा धातु है और द्रव है। ब्रोमीन अधातु है और द्रव है। दोनों द्रव हैं, एक वर्ग नहीं।
10-सेकंड रिवीजन
ब्रोमीन अधातु है।
पारा एकमात्र ऐसी धातु है। ब्रोमीन द्रव अधातु है।
गलत — समूह I हाइड्रोजन देता है, जो गंधहीन है। सड़े अंडे वाली गैस समूह II की हाइड्रोजन सल्फाइड है।
5 g और 3 g।
आयरन सल्फाइड, FeS।
मिश्रण में नया पदार्थ नहीं बनता, अनुपात बदल सकता है, गुण घटकों जैसे रहते हैं और भौतिक विधि से अलगाव होता है। यौगिक में तत्त्व प्रतिक्रिया करते हैं, अनुपात निश्चित होता है, गुण नए होते हैं और अलगाव रासायनिक होता है। केवल मिला लोहा चुंबक से छूटता है। लाल गर्म करने पर बना FeS चुंबक से उस तरह नहीं छूटता और अम्ल से H2S देता है।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
दूध में वसा और प्रोटीन हैं।
दूध मिश्रण है। शुद्ध नमक और आसुत जल पदार्थ हैं।
छना चाय भी।
सिरका समांगी है। मिट्टी, लकड़ी और तेल-पानी विषमांगी हैं।
10^-9 मीटर।
1 nm से छोटे। इसलिए टिंडल नहीं।
कोलाइड।
दूध कोलाइड है और टिंडल दिखाता है। विलयन नहीं दिखाते।
गैस द्रव में।
कार्बन डाइऑक्साइड विलेय है और पानी विलायक।
360 g विलयन।
11.1%। यह 40 g नमक और 320 g पानी का द्रव्यमान प्रतिशत है।
क्रियाकलाप 2.5 का सिद्धांत।
अपकेंद्रण।
घनत्व की परतें।
पृथक्करण कीप। नीचे प्रायः पानी।
एक ही विलायक में घुलने वाले विलेय।
क्रोमैटोग्राफी।
−183°C सबसे ऊँचा इन तीन में।
ऑक्सीजन। क्रम नाइट्रोजन, आर्गन, ऑक्सीजन है।
शुद्ध पदार्थ का क्वथनांक निश्चित होता है।
100°C या 373 K पर उबलना शुद्ध पानी का लक्षण है।
धातु।
चाँदी तत्त्व है। नमक का घोल, हवा और मिट्टी मिश्रण हैं।
यौगिक H2S देता है।
मिश्रण हाइड्रोजन देता है। यौगिक सड़े अंडे वाली H2S देता है।
बोरॉन और जर्मेनियम भी।
सिलिकॉन उपधातु है।
गलत — अनुपात बदल सकता है और घटकों के गुण दिखते हैं, इसलिए मिश्रण है।
गलत — बैठने के बाद बिखराव रुक जाता है।
सही — 40 g + 320 g = 360 g।
गलत — बूँद जल-स्तर के ठीक ऊपर हो।
सही — इसलिए क्रिस्टलीकरण बेहतर है।
गलत — नए पदार्थ बनते हैं, इसलिए रासायनिक है।
सही — पारा धातु है और ब्रोमीन अधातु।
गलत — हाइड्रोजन का दहन परीक्षण कक्षा में नहीं करना। पहचान गंध और गुणों से होती है। H2S सड़े अंडे जैसी है।
नाइट्रोजन लगभग 78 है।
लगभग 21 प्रतिशत। चित्र में ऑक्सीजन 20.9 प्रतिशत है।
विलयन नहीं दिखाता।
टिंडल प्रभाव। कोलाइड और निलंबन दिखाते हैं।
62 का आधा।
31 g। क्योंकि 100 g पानी में 62 g है।
डेयरी भी पूछो।
मथनी। दो मिनट मशीन का समय है।
काँच की गोलियाँ।
प्रभाजी आसवन। अंतर 25 K से कम होने पर।
चीनी डिश।
5 g। फिर कम पानी और एक दिन की ठंडक।
दोनों समूहों को यही दो।
5 g लोहा और 3 g गंधक।
मिश्रण हाइड्रोजन देता है।
हाइड्रोजन सल्फाइड। गंध सड़े अंडे जैसी है।
घोल वाष्पन, कपूर ऊर्ध्वपातन, तेल कीप, रंग क्रोमैटोग्राफी।
चाँदी तत्त्व, वायु मिश्रण, कैल्सियम कार्बोनेट यौगिक, रक्त कोलाइड मिश्रण।
अभिकथन (A): दूध टिंडल प्रभाव दिखाता है।
कारण (R): कोलाइड के कण प्रकाश बिखेरते हैं, पर आँख से अलग नहीं दिखते।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): 40 g नमक और 320 g पानी का द्रव्यमान प्रतिशत 11.1 है।
कारण (R): निलंबन के कण छानक पत्र पर रुक जाते हैं।
दोनों सही हैं, पर R प्रतिशत की व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A): प्रभाजी आसवन तब होता है जब क्वथनांक का अंतर 25 K से कम हो।
कारण (R): एसीटोन और पानी अमिश्रणीय हैं, इसलिए कीप से अलग होते हैं।
A सही है। R गलत — एसीटोन और पानी मिश्रणीय हैं और आसवन से अलग होते हैं।
अभिकथन (A): लोहे और गंधक का केवल मिश्रण चुंबक से नहीं छूटता।
कारण (R): मिश्रण अपने घटकों के गुण दिखाता है।
A गलत है। मिश्रण का लोहा चुंबक से छूटता है। R सही है।
अभिकथन (A): क्रिस्टलीकरण समुद्री नमक की सफाई में वाष्पन से सुरक्षित हो सकता है।
कारण (R): कुछ ठोस तेज गर्म करने पर टूटते या जलते हैं और घुली अशुद्धि सूखने पर मिल जाती है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
सोडियम तत्त्व है। मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड यौगिक हैं। कोयला मिश्रण है।
मिलाना और जमना भौतिक हैं। जंग और पकना रासायनिक हैं।
जिसके सारे कण एक जैसी रासायनिक प्रकृति के हों, वह शुद्ध पदार्थ है।
कोलाइड या निलंबन के कणों द्वारा प्रकाश की किरण का बिखरना टिंडल प्रभाव है। विलयन में रास्ता नहीं दिखता।
किसी निश्चित ताप पर जिसमें और विलेय न घुल सके, वह संतृप्त विलयन है।
तत्त्व पदार्थ का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक अभिक्रिया से सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता।
चुंबक से। लोहा चुंबक की ओर खिंचता है और रेत नहीं।
विलयन = 36 + 100 = 136 g। प्रतिशत = (36/136) × 100 = 26.47%।
निलंबन के कण दिखते हैं, बैठते हैं और छनते हैं। कोलाइड के कण नहीं दिखते, नहीं बैठते और साधारण छानने से नहीं छूटते, पर टिंडल दिखाते हैं।
धातु के टुकड़े छानकर। गेहूँ फटककर। नमक वाष्पन से, और शुद्ध क्रिस्टल चाहिए तो क्रिस्टलीकरण से।
मोम का पिघलना भौतिक है, क्योंकि मोम वही रहता है। मोम का जलकर नए पदार्थ बनाना रासायनिक है।
A को कुछ क्रिस्टल, B को एक स्पैचुला कॉपर सल्फेट, C को चाक या आटा, D को दूध या स्याही दो। पानी में हिलाओ, टॉर्च सामने से देखो, बैठने दो और छानो। विलयन के कण 1 nm से छोटे, टिंडल नहीं, स्थिर। निलंबन के कण दिखते हैं, टिंडल तब तक जब तक न बैठें, अस्थिर, छनते हैं। कोलाइड नहीं दिखता, टिंडल दिखाता है, स्थिर, साधारण छानने से नहीं छूटता।
स्याही का पानी वाष्पन से उड़ता है। क्रीम अपकेंद्रण से। मिट्टी का तेल और पानी कीप से। कपूर और नमक ऊर्ध्वपातन से। स्याही के रंग क्रोमैटोग्राफी से, रेखा 3 cm ऊपर। एसीटोन और पानी आसवन से। अशुद्ध कॉपर सल्फेट, लगभग 5 g, क्रिस्टलीकरण से। क्वथनांक का अंतर 25 K से कम हो तो प्रभाजी आसवन।
दोनों को 5 g लोहे का चूरा और 3 g गंधक मिलता है। समूह I केवल मिलाता है। समूह II लाल गर्म करता है। मिश्रण चुंबक से खिंचता है और तनु अम्ल से गंधहीन हाइड्रोजन देता है। यौगिक FeS नए गुण दिखाता है और अम्ल से सड़े अंडे जैसी H2S देता है। हाइड्रोजन ज्वलनशील है, इसलिए कक्षा में दहन परीक्षण नहीं करते। शिक्षक की देखरेख जरूरी है।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
बर्फ पानी का शुद्ध रूप है।
बर्फ शुद्ध पदार्थ है। हवा, दूध और ईंट मिश्रण हैं।
लोहा खिंचता है।
चुंबक।
पहले द्रव यही बनती है।
−183°C। नाइट्रोजन −196°C है।
100 g पानी में 62 g घुलता है। 50 g पानी में (62/100) × 50 = 31 g।
जलाशय, अवसादन टैंक, लोडिंग टैंक, रेत-बजरी वाला छानने का टैंक, फिर क्लोरीनन और घर। मटके में कंकड़ और रेत छानने की परतें हैं। क्लोरीन जीवाणु मारती है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
क्रियाकलाप 2.7।
बूँद पानी के अंदर डूबे तो रंग बह जाता है। वह जल-स्तर के ठीक ऊपर होनी चाहिए।
54 में से 35।
54 − 35 = 19 g क्रिस्टल।
अभिकथन (A): स्टार्च का घोल टिंडल दिखाता है, नमक का घोल नहीं।
कारण (R): स्टार्च कोलाइड है और नमक का घोल सच्चा विलयन है।
दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): समूह II से निकली गैस गंधहीन हाइड्रोजन है।
कारण (R): यौगिक के गुण उसके तत्त्वों से भिन्न होते हैं।
A गलत है। समूह II हाइड्रोजन सल्फाइड देता है। R सही है।
कण आँख से दिखें, टॉर्च का रास्ता दिखे और कुछ मिनट में कण बैठ जाएँ तो वह निलंबन है। नीला घोल विलयन है: कण नहीं दिखते, रास्ता नहीं दिखता और वह स्थिर रहता है। छानने पर चाक पत्र पर रुकता है।
गलती यह है कि प्रतिशत विलयन के द्रव्यमान पर होता है, केवल पानी पर नहीं। विलयन = 360 g। (40/360) × 100 = 11.1%।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| विलयन के कण | smaller than 1 nm |
| हवा | about 21 percent oxygen, 78 percent nitrogen |
| पीतल | about 70 percent copper, 30 percent zinc |
| प्रभाजी आसवन | boiling points differ by less than 25 K |
| उदाहरण 2.1 | 40 g salt in 320 g water is 11.1 percent |
| लोहा और गंधक | 5 g filings and 3 g sulphur |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।