1 C/s का नाम।
धारा का मात्रक ऐम्पियर है। 1 A = 1 C/s।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 11 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Electricity
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — क्रियाकलाप 11.1 से 11.6, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र ओम-ग्राफ़ है — V ऊर्ध्वाधर अक्ष पर, I क्षैतिज अक्ष पर, मूलबिंदु से सीधी रेखा।
NCERT में यह अध्याय 11 है। बिहार की पुरानी किताब में यही पाठ अध्याय 12 कहलाता है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Charge and current — I = Q/t · NCERT 11.1 · कूलॉम · ऐम्पियर
चालक में आवेश बहे तो उसमें विद्युत धारा है। टॉर्च में सेल आवेश का प्रवाह देते हैं और बल्ब जलता है। स्विच सेल और बल्ब के बीच चालक कड़ी जोड़ता है। धारा का अविरत और बंद पथ विद्युत परिपथ कहलाता है। रास्ता कहीं टूटे या स्विच खुल जाए तो धारा रुकती है और बल्ब बुझ जाता है।
धातु के तार में आवेश इलेक्ट्रॉन ले जाते हैं। धारा को पहले धन आवेश का प्रवाह माना गया था। इसलिए परिपथ में धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन की दिशा के विपरीत ली जाती है — सेल के धन सिरे से ऋण सिरे की ओर।
किसी अनुप्रस्थ काट से समय t में नेट आवेश Q गुज़रे तो धारा I = Q/t। आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है। एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6 × 10⁻¹⁹ C है, इसलिए 1 C में लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन होते हैं।
1 ऐम्पियर वह धारा है जिसमें हर सेकंड 1 कूलॉम आवेश बहे: 1 A = 1 C/s। छोटी धारा मिलीऐम्पियर (1 mA = 10⁻³ A) या माइक्रोऐम्पियर (1 µA = 10⁻⁶ A) में लिखी जाती है। धारा नापने वाला ऐमीटर श्रेणी में लगता है।
प्रश्न: एक तार में 0.40 A धारा 5 मिनट तक बहती है। प्रवाहित आवेश ज्ञात करो।
सूत्र: Q = It
स्थापन: t = 5 × 60 = 300 s। Q = 0.40 A × 300 s = 120 C।
BSEB में सूत्र के साथ मात्रक लिखो। केवल «ऐम्पियर» बिना 1 C/s के अधूरा रहता है।
CBSE इलेक्ट्रॉन की संख्या पूछता है। 1 C ÷ 1.6 × 10⁻¹⁹ C लगभग 6 × 10¹⁸ देता है।
1 C/s का नाम।
धारा का मात्रक ऐम्पियर है। 1 A = 1 C/s।
सही — धारा को धन आवेश के प्रवाह की दिशा में माना जाता है।
एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10⁻¹⁹ C।
लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन मिलकर 1 C आवेश देते हैं।
उसी धारा को नापना है जो यंत्र से गुज़रे।
ऐमीटर हमेशा श्रेणी में लगता है। वोल्टमीटर समांतर में लगता है।
Q = It। t = 300 s। Q = 0.40 A × 300 s = 120 C।
Potential difference — V = W/Q · NCERT 11.2 · वोल्ट · वोल्टमीटर समांतर में
समतल नली में पानी अपने आप नहीं बहता। एक सिरा ऊँचे टैंक से जुड़ जाए तो दाब का अंतर पानी को ढकेलता है। धातु के तार में इलेक्ट्रॉन तभी चलते हैं जब तार के अनुदिश विभवांतर हो। यह अंतर एक या अधिक सेलों की बैटरी बनाती है। सेल के अंदर रासायनिक क्रिया सिरों के बीच विभवांतर बनाए रखती है, चाहे धारा न भी खींची जाए। धारा बनाए रखने के लिए सेल अपनी रासायनिक ऊर्जा खर्च करता है।
दो बिंदुओं के बीच विभवांतर, एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया गया कार्य है। V = W/Q। SI मात्रक वोल्ट है। 1 वोल्ट वह विभवांतर है जब 1 कूलॉम आवेश को ले जाने में 1 जूल कार्य हो: 1 V = 1 J/C। विभवांतर वोल्टमीटर से नापते हैं और वह उन बिंदुओं के समांतर लगता है।
प्रश्न: 2 C आवेश को 15 V के दो बिंदुओं के बीच ले जाने में कितना कार्य होता है? 6 V की बैटरी हर कूलॉम को कितनी ऊर्जा देती है?
सूत्र: W = VQ
स्थापन: W = 15 V × 2 C = 30 J।
6 V बैटरी में हर 1 C के लिए W = 6 V × 1 C = 6 J।
BSEB परिभाषा में «एकांक आवेश» और «कार्य» दोनों शब्द आने चाहिए।
CBSE यंत्र की जोड़ी पूछता है। ऐमीटर श्रेणी, वोल्टमीटर समांतर — इस जोड़ी को अदला-बदली मत करना।
कार्य प्रति आवेश।
1 V = 1 J/C। धारा का 1 A = 1 C/s अलग बात है।
सही — ऐमीटर श्रेणी में होता है, वोल्टमीटर समांतर में।
कार्य बटा आवेश।
V = W/Q। मात्रक वोल्ट है।
W = VQ = 6 V × 1 C = 6 J। अतः हर कूलॉम को 6 J ऊर्जा मिलती है।
Ohm law — Activity 11.1 · NCERT 11.4 · क्रियाकलाप 11.1 · V = IR
परिपथ में नाइक्रोम का तार XY रखो, लंबाई लगभग 0.5 m। साथ में ऐमीटर, वोल्टमीटर और 1.5 V के चार सेल। नाइक्रोम निकैल, क्रोमियम, मैंगनीज़ और लोहे की मिश्रधातु है। वोल्टमीटर तार XY के सिरों पर समांतर लगता है। ऐमीटर श्रेणी में धारा नापता है।
पहले एक सेल से ऐमीटर का पाठ I और वोल्टमीटर का पाठ V लिखो। फिर दो, तीन और चार सेल लगाकर हर जोड़ी का अनुपात V/I निकालो। हर बार अनुपात लगभग समान मिलता है। V को ऊर्ध्वाधर अक्ष और I को क्षैतिज अक्ष पर अंकित करो। ग्राफ़ मूलबिंदु से गुज़रती सीधी रेखा है।
1827 में जॉर्ज साइमन ओम ने पाया कि किसी धातु के तार के सिरों का विभवांतर उसमें बहती धारा के समानुपाती होता है, बशर्ते ताप न बदले। इसे ओम का नियम कहते हैं। V ∝ I, या V = IR। R उस तार का प्रतिरोध है।
प्रतिरोध आवेश के प्रवाह में रुकावट है। मात्रक ओम (Ω) है। 1 Ω = 1 V/1 A। धारा I = V/R, इसलिए प्रतिरोध दुगुना हो तो धारा आधी हो जाती है। स्रोत का वोल्टेज बदले बिना धारा घटाने-बढ़ाने वाले अवयव को परिवर्ती प्रतिरोध कहते हैं। परिपथ में इसके लिए अक्सर धारा नियंत्रक (rheostat) लगता है।
प्रश्न: नाइक्रोम तार पर 6.0 V विभवांतर है और धारा 0.50 A है। प्रतिरोध ज्ञात करो।
सूत्र: R = V/I
स्थापन: R = 6.0 V / 0.50 A = 12 Ω।
चार सेल 1.5 V के मिलकर 6.0 V देते हैं। ताप वही रहे तो V/I इसी 12 Ω पर टिका रहता है।
BSEB ग्राफ़ में अक्षों के नाम लिखो। I को ऊपर और V को आड़े लिखना अंक काटता है।
CBSE नियम के साथ शर्त माँगता है। «ताप समान रहे» वाक्य के बिना उत्तर अधूरा है।
क्रियाकलाप 11.1 का ग्राफ़।
ग्राफ़ मूल से सीधी रेखा है। विभवांतर V ऊर्ध्वाधर अक्ष पर और धारा I क्षैतिज अक्ष पर है।
सही — ताप बदलने पर R भी बदल सकता है।
क्रियाकलाप 11.1 का तार।
नाइक्रोम में निकैल, क्रोमियम, मैंगनीज़ और लोहा होते हैं।
R = V/I।
1 Ω = 1 V/1 A। 1 A = 1 C/s धारा का मात्रक है, ओम की परिभाषा नहीं।
R = V/I = 6.0 V / 0.50 A = 12 Ω। ताप समान हो तो यही अनुपात ओम के नियम में स्थिर रहता है।
What resistance depends on — Activities 11.2 and 11.3 · NCERT 11.5 · क्रियाकलाप 11.2, 11.3 · R = ρl/A
नाइक्रोम तार, टॉर्च का बल्ब, 10 W का बल्ब, 0–5 A का ऐमीटर, प्लग कुंजी और जोड़ने वाले तार लो। चार शुष्क सेल, प्रत्येक 1.5 V, ऐमीटर के साथ श्रेणी में जोड़ो और परिपथ में जगह XY खाली छोड़ो।
जगह XY में पहले नाइक्रोम तार लगाओ, कुंजी दबाओ और ऐमीटर पढ़ो। सावधानी: धारा नापने के बाद कुंजी का प्लग निकाल दो। फिर टॉर्च बल्ब और बाद में 10 W बल्ब लगाकर धारा पढ़ो। हर अवयव पर धारा अलग मिलती है। कम प्रतिरोध वाला अवयव अच्छा चालक है। जिस चालक का प्रतिरोध स्पष्ट हो उसे प्रतिरोधक कहते हैं। उसी आकार का कुचालक और भी बड़ा प्रतिरोध देता है।
सेल, ऐमीटर, लंबाई l का नाइक्रोम तार (1) और प्लग कुंजी का परिपथ बनाओ। धारा नोट करो। उसी मोटाई का दुगुनी लंबाई 2l वाला तार (2) लगाओ। ऐमीटर का पाठ आधा रह जाता है।
उतनी ही लंबाई l का मोटा नाइक्रोम तार (3) लगाने पर धारा बढ़ती है, क्योंकि अनुप्रस्थ क्षेत्रफल बड़ा है। समान लंबाई और समान क्षेत्रफल का ताँबे का तार (4) लगाने पर धारा फिर बदलती है। अतः धारा लंबाई, क्षेत्रफल और पदार्थ तीनों पर निर्भर करती है।
एकसमान धातु के तार का प्रतिरोध लंबाई l के समानुपाती और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A के व्युत्क्रमानुपाती होता है। R = ρl/A। ρ (रो) को प्रतिरोधकता कहते हैं। इसका SI मात्रक Ω m है। धातु और मिश्रधातु की प्रतिरोधकता लगभग 10⁻⁸ Ω m से 10⁻⁶ Ω m होती है। रबर और काँच जैसे कुचालकों की कोटि 10¹² से 10¹⁷ Ω m है। प्रतिरोध और प्रतिरोधकता दोनों ताप के साथ बदलते हैं।
मिश्रधातु की प्रतिरोधकता अपनी धातुओं से प्रायः अधिक होती है और वे ऊँचे ताप पर जल्दी ऑक्सीकृत नहीं होतीं। इसलिए इस्तरी और टोस्टर के तार मिश्रधातु के होते हैं। बल्ब के तंतु के लिए टंगस्टन है। संचरण लाइनों में ताँबा और ऐलुमिनियम लगते हैं। सारणी के मान रटने ज़रूरी नहीं। तुलना चाहिए तो चाँदी की प्रतिरोधकता सबसे कम है, फिर ताँबा। लोहे की प्रतिरोधकता पारे से कम है, इसलिए लोहा पारे से अच्छा चालक है।
प्रश्न: एक तार का प्रतिरोध 8 Ω है। उसी पदार्थ के दूसरे तार की लंबाई आधी और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल दुगुना है। नया प्रतिरोध ज्ञात करो।
सूत्र: R = ρl/A। पदार्थ वही है तो ρ वही है।
स्थापन: R2/R1 = (l2/l1) × (A1/A2) = (1/2) × (1/2) = 1/4।
R2 = 8 Ω × 1/4 = 2 Ω।
BSEB में तीन कारक लिखो — लंबाई, क्षेत्रफल, पदार्थ। केवल «मोटा तार» आधा उत्तर है।
CBSE अच्छा चालक कम प्रतिरोधकता से पहचानता है। लोहा पारे से अच्छा चालक है क्योंकि ρ कम है।
R, A के व्युत्क्रम में है।
मोटे तार का क्षेत्रफल बड़ा है, इसलिए प्रतिरोध कम है। प्रतिरोधकता पदार्थ का गुण है, मोटाई से नहीं बदलती।
सही — क्रियाकलाप 11.3 में प्रतिरोध दुगुना होता है और उसी सेल पर धारा आधी रह जाती है।
R = ρl/A से ρ = RA/l।
प्रतिरोधकता का मात्रक ओम मीटर (Ω m) है।
ऊँचे ताप पर जलना नहीं चाहिए।
मिश्रधातु की प्रतिरोधकता अधिक होती है और वह ऊँचे ताप पर आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होती।
R = ρl/A। R2/R1 = (l2/l1) × (A1/A2) = (1/2) × (1/2) = 1/4। R2 = 8 Ω × 1/4 = 2 Ω।
Resistors in series — Activities 11.4 and 11.5 · NCERT 11.6.1 · क्रियाकलाप 11.4, 11.5 · Rs = R1 + R2 + R3
तीन अलग प्रतिरोध श्रेणी में जोड़ो। उन्हें बैटरी, ऐमीटर और प्लग कुंजी से जोड़ो। अभ्यास के लिए 1 Ω, 2 Ω, 3 Ω और 6 V की बैटरी ले सकते हो। कुंजी लगाकर ऐमीटर पढ़ो।
ऐमीटर को प्रतिरोधों के बीच कहीं भी खिसकाओ। हर जगह पाठ समान रहता है। श्रेणीक्रम में हर भाग में धारा समान होती है। एक अवयव टूटे तो पूरा परिपथ खुल जाता है और कोई अवयव काम नहीं करता।
उसी श्रेणी संयोजन के सिरों X और Y पर वोल्टमीटर लगाओ। कुंजी दबाकर विभवांतर V पढ़ो और बैटरी के सिरों के विभवांतर से मिलाओ। फिर वोल्टमीटर को पहले प्रतिरोध के सिरों पर लगाकर V1, दूसरे पर V2 और तीसरे पर V3 नापो।
मिलता है V = V1 + V2 + V3। हर प्रतिरोध में धारा I समान है, इसलिए V1 = IR1, V2 = IR2, V3 = IR3। जोड़ने पर IR = IR1 + IR2 + IR3, अतः Rs = R1 + R2 + R3। तुल्य प्रतिरोध हर एक प्रतिरोध से बड़ा होता है।
प्रश्न: 1 Ω, 2 Ω और 3 Ω श्रेणी में 6 V की बैटरी से जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध, धारा और हर प्रतिरोध पर विभवांतर निकालो।
सूत्र: Rs = R1 + R2 + R3, फिर I = V/Rs, और V1 = IR1।
स्थापन: Rs = 1 Ω + 2 Ω + 3 Ω = 6 Ω। I = 6 V / 6 Ω = 1 A।
V1 = 1 A × 1 Ω = 1 V, V2 = 1 A × 2 Ω = 2 V, V3 = 1 A × 3 Ω = 3 V। जोड़ 1 + 2 + 3 = 6 V, जो बैटरी के बराबर है।
BSEB संख्या में पहले Rs, फिर I, फिर अलग-अलग V लिखो। सीधे उत्तर बिना जोड़ के कमजोर रहता है।
CBSE पूछता है कि बल्ब और हीटर श्रेणी में क्यों नहीं जोड़ते। दोनों को अलग धारा चाहिए, और एक टूटे तो दूसरा भी रुक जाता है।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 11.4।
श्रेणी में हर भाग की धारा समान होती है। ऐमीटर की जगह बदलने से पाठ नहीं बदलता।
सही — V = V1 + V2 + V3। यही क्रियाकलाप 11.5 का परिणाम है।
तीनों प्रतिरोध जुड़ते हैं।
Rs = R1 + R2 + R3। यह हर एक प्रतिरोध से बड़ा होता है।
पहले जोड़ 6 Ω।
Rs = 6 Ω। I = 6 V / 6 Ω = 1 A।
धारा 1 A है। V = IR।
V3 = 1 A × 3 Ω = 3 V। तीनों वोल्ट 1 V, 2 V और 3 V मिलकर 6 V देते हैं।
Rs = 1 + 2 + 3 = 6 Ω। I = V/Rs = 6 V / 6 Ω = 1 A। 2 Ω पर V2 = IR2 = 1 A × 2 Ω = 2 V।
Resistors in parallel — Activity 11.6 · NCERT 11.6.2 · क्रियाकलाप 11.6 · 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3
R1, R2 और R3 का समांतर संयोजन XY बनाओ। इसे बैटरी, प्लग कुंजी और ऐमीटर से जोड़ो। संयोजन के समांतर वोल्टमीटर लगाओ। कुंजी दबाकर कुल धारा I और विभवांतर V पढ़ो। वोल्टमीटर को हर प्रतिरोध पर अलग-अलग लगाने से भी वही V मिलता है। समांतर में हर प्रतिरोध पर विभवांतर समान होता है।
कुंजी निकालो। ऐमीटर को बारी-बारी से R1, R2 और R3 की शाखा में लगाओ। शाखा धाराएँ I1, I2, I3 मिलती हैं और I = I1 + I2 + I3। ओम के नियम से I = V/Rp और I1 = V/R1। इसलिए 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3। तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
श्रेणी में धारा सब जगह एक होती है। बल्ब और हीटर को अलग-अलग धारा चाहिए, इसलिए उन्हें श्रेणी में जोड़ना व्यावहारिक नहीं। एक बल्ब फ्यूज हो जाए तो पूरी लड़ी बुझ जाती है — त्योहार की सीरीज लाइट में खराब बल्ब ढूँढने में समय लगता है।
समांतर जोड़ में हर उपकरण को स्रोत का पूरा विभवांतर मिलता है और हर एक अपनी जरूरत की धारा लेता है। एक उपकरण बंद हो तो बाकी चलते रहते हैं। कुल प्रतिरोध घटता है, इसलिए स्रोत से कुल धारा बढ़ सकती है।
प्रश्न: 2 Ω, 3 Ω और 6 Ω समांतर में 6 V की बैटरी से जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध, कुल धारा और हर शाखा की धारा निकालो।
सूत्र: 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3, फिर I = V/Rp और I1 = V/R1।
स्थापन: 1/Rp = 1/2 + 1/3 + 1/6 = 3/6 + 2/6 + 1/6 = 1/1। अतः Rp = 1 Ω।
I = 6 V / 1 Ω = 6 A। I1 = 6/2 = 3 A, I2 = 6/3 = 2 A, I3 = 6/6 = 1 A। जोड़ 3 + 2 + 1 = 6 A।
BSEB में पहले 1/Rp का जोड़ दिखाओ, फिर उलटकर Rp लिखो। केवल «1 ओम» बिना भिन्न के अधूरा है।
CBSE समांतर के दो लाभ पूछता है — पूरा वोल्ट हर उपकरण को, और एक के बंद होने पर बाकी चलते रहें।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 11.6 में वोल्टमीटर हर शाखा पर वही पाठ देता है।
समांतर में विभवांतर समान होता है। धाराएँ जुड़ती हैं: I = I1 + I2 + I3।
सही — 2 Ω, 3 Ω और 6 Ω का समांतर तुल्य 1 Ω है, जो 2 Ω से भी कम है।
प्रतिरोध नहीं, उनके व्युत्क्रम जुड़ते हैं।
1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3।
1/2 + 1/3 + 1/6 = 1।
1/Rp = 1/2 + 1/3 + 1/6 = 1, इसलिए Rp = 1 Ω।
1/Rp = 1/2 + 1/3 + 1/6 = 1, अतः Rp = 1 Ω। I = V/Rp = 6 V / 1 Ω = 6 A।
Heating effect and power — H = I²Rt · NCERT 11.7–11.8 · जूल · वाट · किलोवाट घंटा
सेल धारा बनाए रखने के लिए ऊर्जा खर्च करता है। पंखे में इसका कुछ भाग काम बनता है और बाकी ऊष्मा। केवल प्रतिरोधकों वाले परिपथ में सारी ऊर्जा ऊष्मा बन जाती है। इसे धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। हीटर, इस्तरी, टोस्टर और केतली इसी पर चलते हैं।
प्रतिरोध R में धारा I समय t तक बहे और विभवांतर V हो तो स्रोत द्वारा दी गई ऊर्जा VIt है। यही ऊष्मा है। ओम के नियम से V = IR रखने पर H = I²Rt। यह जूल का तापन नियम है। ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती है, दिए गए I पर R के समानुपाती है, और समय के समानुपाती है। मात्रक जूल है।
शक्ति ऊर्जा की दर है। P = VI = I²R = V²/R। मात्रक वाट है। 1 W = 1 V × 1 A। व्यावसायिक मात्रक किलोवाट घंटा है। 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10⁶ J। हम बोर्ड को इलेक्ट्रॉन की कीमत नहीं, ऊर्जा की कीमत देते हैं। इलेक्ट्रॉन परिपथ में खर्च नहीं होते।
प्रश्न: 44 Ω की इस्तरी 220 V पर 10 s तक चलती है। धारा, शक्ति और उत्पन्न ऊष्मा ज्ञात करो।
सूत्र: I = V/R, P = VI = I²R = V²/R, H = I²Rt।
स्थापन: I = 220 V / 44 Ω = 5 A।
P = 220 V × 5 A = 1100 W। जाँच: I²R = 25 × 44 = 1100 W, और V²/R = 48400 / 44 = 1100 W।
H = I²Rt = (5 A)² × 44 Ω × 10 s = 11000 J। यही H = VIt = 220 × 5 × 10 = 11000 J।
BSEB में तीनों रूप P = VI, I²R और V²/R एक साथ लिखो। एक रूप से अंक कटते हैं।
CBSE ऊष्मा में I का वर्ग छूट जाए तो संख्या गलत हो जाती है। 5 A पर I² = 25 लिखकर आगे बढ़ो।
10-सेकंड रिवीजन
H = I²Rt।
ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती है, और दिए गए समय तथा प्रतिरोध पर I²Rt से निकलती है।
सही — 1 W = 1 V × 1 A।
1000 W × 3600 s।
1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
पहले I = V/R = 5 A, फिर P = VI।
I = 220/44 = 5 A। P = 220 × 5 = 1100 W।
I = V/R = 220 V / 44 Ω = 5 A। P = VI = 220 × 5 = 1100 W। H = I²Rt = 25 × 44 × 10 = 11000 J।
The fuse and household safety · NCERT 11.7.1 · फ्यूज · 5 A · गीला हाथ नहीं
बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है। इसका गलनांक 3380 °C है, इसलिए यह पिघले बिना बहुत गर्म होकर प्रकाश देता है। तंतु को ऊष्मारोधी आधार पर रखते हैं। बल्ब में निष्क्रिय नाइट्रोजन और आर्गन भरी होती है ताकि तंतु अधिक देर चले। तंतु की अधिकतर शक्ति ऊष्मा बनती है और थोड़ा अंश प्रकाश।
फ्यूज परिपथ की रक्षा करता है। यह उपकरण के साथ श्रेणी में लगता है। तार ऐसी धातु या मिश्रधातु का होता है जो उचित ताप पर पिघले, जैसे ऐलुमिनियम, ताँबा, लोहा या सीसा। धारा निर्धारित मान से बढ़े तो तार पिघलता है और परिपथ टूट जाता है। घरेलू फ्यूज 1 A, 2 A, 3 A, 5 A, 10 A के होते हैं।
हीटर की डोरी नहीं चमकती और तापक अवयव चमकता है, क्योंकि दोनों में धारा समान है पर अवयव का प्रतिरोध बहुत अधिक है। H = I²Rt में बड़ा R अधिक ऊष्मा देता है।
फ्यूज की जगह मोटा ताँबे का तार लगाने पर वह समय पर नहीं पिघलता। अधिक धारा तारों को गर्म करती रहती है और आग लग सकती है। निर्धारित दर का ही फ्यूज लगाओ।
गीले हाथ से स्विच मत छुओ। क्रियाकलाप में धारा नापने के बाद प्लग कुंजी निकालते रहो। 220 V पर 1 kW की इस्तरी लगभग 4.55 A लेती है, इसलिए 5 A का फ्यूज लगता है, 2 A या 3 A का नहीं।
प्रश्न: 220 V पर 1000 W की इस्तरी के लिए कौन-सा फ्यूज चुनोगे?
सूत्र: I = P/V
स्थापन: I = 1000 W / 220 V = 4.55 A।
4.55 A, 5 A से थोड़ा कम है और 3 A से अधिक है। अतः रेटेड फ्यूजों में 5 A का फ्यूज लगाना है। फ्यूज इस्तरी के साथ श्रेणी में होगा।
BSEB में फ्यूज का स्थान लिखो — श्रेणी में। समांतर लिखोगे तो उत्तर गलत हो जाएगा।
CBSE डोरी और तापक अवयव की तुलना I²R से करवाता है। धारा समान है, प्रतिरोध अलग है।
10-सेकंड रिवीजन
पिघले तो पूरी धारा रुकनी चाहिए।
फ्यूज उपकरण के साथ श्रेणी में लगता है, ताकि पिघलने पर परिपथ टूट जाए।
गलत — मोटा तार समय पर नहीं पिघलता और अधिक धारा आग का कारण बन सकती है।
I = P/V लगभग 4.55 A।
I = 1000/220 = 4.55 A। इससे थोड़ा ऊपर का रेटेड फ्यूज 5 A है।
दोनों में धारा I समान है। तापक अवयव का प्रतिरोध डोरी से बहुत अधिक है। H = I²Rt में बड़ा R अधिक ऊष्मा देता है, इसलिए अवयव गर्म होकर चमकता है और डोरी नहीं।
प्रकार चुनो। पाठों के 39 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
आवेश की दर।
I = Q/t। 1 A = 1 C/s।
धन आवेश की पुरानी दिशा।
धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन के प्रवाह के विपरीत मानी जाती है।
जिन बिंदुओं का विभवांतर नापना हो।
वोल्टमीटर समांतर में लगता है। ऐमीटर श्रेणी में लगता है।
कार्य बटा आवेश।
1 V = 1 J/C।
ग्राफ़ की ढाल।
V/I = R स्थिर रहता है। ग्राफ़ मूल से सीधी रेखा है।
क्रियाकलाप 11.1।
V ऊर्ध्वाधर अक्ष पर और I क्षैतिज अक्ष पर है।
R = ρl/A।
R लंबाई के समानुपाती है, इसलिए दुगुना हो जाता है।
ρ = RA/l।
प्रतिरोधकता का SI मात्रक Ω m है।
क्रियाकलाप 11.5।
श्रेणी में प्रतिरोध जुड़ते हैं: Rs = R1 + R2 + R3।
क्रियाकलाप 11.6।
समांतर में विभवांतर समान होता है और धाराएँ जुड़ती हैं।
व्युत्क्रमों का जोड़ 1 है।
1/Rp = 1/2 + 1/3 + 1/6 = 1, इसलिए Rp = 1 Ω।
धारा का वर्ग।
H = I²Rt। शक्ति P = VI = I²R = V²/R।
1000 × 3600।
1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
I = P/V लगभग 4.55 A।
धारा लगभग 4.55 A है, इसलिए 5 A का फ्यूज लगता है।
H = I²Rt और I समान है।
धारा समान है। अवयव का प्रतिरोध अधिक होने से वहीं अधिक ऊष्मा बनती है।
गलत — ऐमीटर श्रेणी में लगता है। समांतर में वोल्टमीटर लगता है।
सही — यही ओम की परिभाषा है।
गलत — नियम की शर्त है कि ताप समान रहे।
सही — R क्षेत्रफल के व्युत्क्रम में है।
गलत — श्रेणी का Rs हर एक से बड़ा होता है। छोटा तुल्य समांतर का गुण है।
सही — I = I1 + I2 + I3।
गलत — इलेक्ट्रॉन खर्च नहीं होते। बिल ऊर्जा का होता है।
सही — पिघलने पर वह धारा का रास्ता तोड़ देता है।
मात्रक ऐम्पियर है।
1 C/s।
V = IR।
ताप समान रहे।
R = ρl/A।
लंबाई ऊपर, क्षेत्रफल नीचे।
Rs = 6 Ω। 6 V पर धारा 1 A होती है।
सीधा जोड़।
Rp = 1 Ω।
व्युत्क्रमों का जोड़ 1 है।
H = I²Rt।
धारा का वर्ग।
1 W = 1 V × 1 A।
P = VI।
नाइक्रोम निकैल, क्रोमियम, मैंगनीज़ और लोहे की मिश्रधातु है।
क्रियाकलाप 11.1 की मिश्रधातु।
धारा ऐम्पियर, विभवांतर वोल्ट, प्रतिरोध ओम, शक्ति वाट।
ओम V = IR, श्रेणी योग, समांतर व्युत्क्रमों का योग, जूल I²Rt।
अभिकथन (A): किसी धातु के तार का V–I ग्राफ़ मूल से सीधी रेखा होता है।
कारण (R): ताप समान रहे तो विभवांतर धारा के समानुपाती होता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): श्रेणीक्रम में हर प्रतिरोध में धारा समान होती है।
कारण (R): श्रेणी का तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से कम होता है।
A सही है। R गलत — श्रेणी का तुल्य हर एक से बड़ा होता है। कम तुल्य समांतर का है।
अभिकथन (A): घर के पंखे और बल्ब समांतर जोड़े जाते हैं।
कारण (R): समांतर में हर उपकरण को पूरा विभवांतर मिलता है और एक के बंद होने पर बाकी चलते रहते हैं।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): मोटा तार फ्यूज से अधिक सुरक्षित होता है।
कारण (R): फ्यूज निर्धारित धारा से अधिक पर पिघलकर परिपथ तोड़ता है।
A गलत है। R सही है — इसीलिए पतला रेटेड फ्यूज लगाया जाता है।
अभिकथन (A): ऐमीटर श्रेणी में लगाया जाता है।
कारण (R): 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता।
समान धारा और प्रतिरोधों का योग श्रेणी के हैं। समान वोल्ट और व्युत्क्रमों का योग समांतर के हैं।
तंतु टंगस्टन, तापक तार मिश्रधातु, संचरण लाइन ताँबा या ऐलुमिनियम।
एक सेकंड में एक कूलॉम आवेश बहे तो धारा एक ऐम्पियर होती है। 1 A = 1 C/s।
ताप समान रहे तो किसी चालक के सिरों का विभवांतर उसमें बहने वाली धारा के समानुपाती होता है, V = IR।
R = ρl/A में ρ पदार्थ की प्रतिरोधकता है। मात्रक Ω m है। यह पदार्थ का गुण है।
शक्ति ऊर्जा के खर्च की दर है। P = VI। मात्रक वाट है और 1 W = 1 V × 1 A।
फ्यूज उपकरण के साथ श्रेणी में लगता है। धारा निर्धारित मान से अधिक हो तो वह पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
Q = It। t = 10 × 60 = 600 s। Q = 0.50 A × 600 s = 300 C।
R = ρl/A। लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है और क्षेत्रफल बढ़ने पर घटता है। क्रियाकलाप 11.3 में लंबाई दुगुनी करने पर ऐमीटर का पाठ आधा हो गया।
श्रेणी में हर उपकरण को अलग धारा नहीं मिल सकती और एक उपकरण टूटे तो सब रुक जाते हैं। समांतर में हर उपकरण को पूरा विभवांतर मिलता है और एक के बंद होने पर बाकी चलते रहते हैं।
H = I²Rt = (2 A)² × 5 Ω × 10 s = 4 × 5 × 10 = 200 J।
परिपथ में लगभग 0.5 m नाइक्रोम तार XY, ऐमीटर, वोल्टमीटर और 1.5 V के चार सेल होते हैं। नाइक्रोम निकैल, क्रोमियम, मैंगनीज़ और लोहे की मिश्रधातु है। एक-एक सेल बढ़ाकर V और I नोट करते हैं। V/I लगभग स्थिर रहता है। V को ऊर्ध्वाधर और I को क्षैतिज अक्ष पर रखने से मूल से सीधी रेखा मिलती है। ताप समान हो तो V = IR। 1 Ω = 1 V/1 A।
Rs = R1 + R2 + R3 = 1 + 2 + 3 = 6 Ω। I = V/Rs = 6 V / 6 Ω = 1 A। V1 = IR1 = 1 V, V2 = 2 V, V3 = 3 V। जोड़ 6 V बैटरी के बराबर है।
I = V/R = 220/44 = 5 A। P = VI = 1100 W। I²R = 25 × 44 = 1100 W। V²/R = 48400/44 = 1100 W। H = I²Rt = 25 × 44 × 10 = 11000 J। 2 घंटे में ऊर्जा = 1.1 kW × 2 h = 2.2 kWh। 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। यह किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न-पत्र नहीं है।
क्रियाकलाप 11.1 की बैटरी।
4 × 1.5 V = 6 V।
कम ρ अच्छा चालक।
लोहे की प्रतिरोधकता पारे से कम है, इसलिए लोहा अच्छा चालक है।
इसे धारा नियंत्रक या rheostat कहते हैं।
वोल्टेज स्रोत बदले बिना प्रतिरोध बदलता है।
W = VQ = 6 V × 1 C = 6 J।
हर शाखा पर 6 V है। I1 = 6/2 = 3 A, I2 = 6/3 = 2 A, I3 = 6/6 = 1 A। कुल I = 3 + 2 + 1 = 6 A। Rp = 1 Ω।
V = IR: ताप समान हो तो विभवांतर धारा के समानुपाती है। Rs = R1 + R2 + R3: श्रेणी में प्रतिरोध जुड़ते हैं और धारा समान रहती है। 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3: समांतर में व्युत्क्रम जुड़ते हैं और विभवांतर समान रहता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। ये किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति या पुराना पेपर नहीं हैं।
पुस्तक का ग्राफ़ V ऊपर रखता है।
ओम का ग्राफ़ V को ऊर्ध्वाधर अक्ष और I को क्षैतिज अक्ष पर रखता है, और रेखा मूल से गुज़रती है।
1/2 + 1/3 + 1/6 = 1।
तीनों समांतर हों तो Rp = 1 Ω। श्रेणी में योग 11 Ω होता।
अभिकथन (A): हीटर की डोरी नहीं चमकती।
कारण (R): डोरी और तापक अवयव में धारा समान है, पर डोरी का प्रतिरोध बहुत कम है इसलिए I²R ऊष्मा कम बनती है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): समांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध घट जाता है।
कारण (R): समांतर में हर शाखा की धारा शून्य होती है।
A सही है। R गलत — शाखाओं में धारा बहती है और कुल धारा उनका योग है।
R = V/I = 6.0 V / 0.50 A = 12 Ω। ऐमीटर पूरी धारा नापने के लिए श्रेणी में होना चाहिए। वोल्टमीटर दो बिंदुओं का अंतर नापने के लिए समांतर में होना चाहिए। उलटने पर ऐमीटर लगभग पूरी धारा अपने में से नहीं ले पाएगा और वोल्टमीटर परिपथ को गलत तरह से काट देगा।
P = VI = 220 V × 5 A = 1100 W = 1.1 kW। ऊर्जा = 1.1 kW × 2 h = 2.2 kWh। जूल में यह 2.2 × 3.6 × 10⁶ J होगा, क्योंकि 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| धारा | I = Q/t, मात्रक A |
| विभवांतर | V = W/Q, मात्रक V |
| ओम का नियम | V = IR (ताप समान) |
| प्रतिरोधकता | R = ρl/A, मात्रक Ω m |
| श्रेणी और समांतर | Rs = R1+R2+R3 ; 1/Rp = 1/R1+1/R2+1/R3 |
| ऊष्मा और शक्ति | H = I²Rt ; P = VI = I²R = V²/R |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।