प्रकाश-सुग्राही पर्दा।
लेंस रेटिना पर उलटा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 10 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
The Human Eye and the Colourful World
इस पेज को ऐसे पढ़ो:
1. पढ़ो — क्रियाकलाप 10.1 और 10.2, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र प्रिज्म-स्पेक्ट्रम है — बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है, लाल सबसे कम।
NCERT में यह अध्याय 10 है। बिहार की पुरानी किताब में यही पाठ अध्याय 11 कहलाता है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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Parts of the eye and the power of accommodation · NCERT 10.1 · समंजन · निकट बिंदु 25 cm
नेत्रगोलक लगभग गोलाकार है और इसका व्यास करीब 2.3 cm है। प्रकाश पतली झिल्ली कॉर्निया से घुसता है। अंदर आने वाली किरणों का सबसे अधिक मुड़ना कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है। क्रिस्टलीय लेंस केवल फोकस दूरी का बारीक समायोजन करता है।
कॉर्निया के पीछे परितारिका (iris) है। यह गहरी पेशीय डायफ्राम पुतली का आकार घटा-बढ़ाकर प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है। लेंस वस्तु का उलटा, वास्तविक प्रतिबिंब रेटिना पर बनाता है। रेटिना की प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ विद्युत संकेत बनाती हैं। संकेत दृक तंत्रिका से मस्तिष्क तक जाते हैं।
| भाग | काम |
|---|---|
| कॉर्निया | अधिकांश अपवर्तन |
| परितारिका | पुतली से प्रकाश की मात्रा |
| लेंस | फोकस दूरी का बारीक बदलाव |
| रेटिना | उलटा वास्तविक प्रतिबिंब |
| दृक तंत्रिका | संकेत मस्तिष्क तक |
लेंस रेशेदार, जेली जैसा होता है। पक्ष्माभी पेशियाँ उसकी वक्रता कुछ हद तक बदल देती हैं। पेशियाँ ढीली हों तो लेंस पतला हो जाता है, फोकस दूरी बढ़ती है और दूर की वस्तु साफ़ दिखती है। पास की वस्तु देखते समय पेशियाँ सिकुड़ती हैं, लेंस मोटा होता है और फोकस दूरी घटती है।
फोकस दूरी को एक सीमा से नीचे नहीं घटाया जा सकता। बिना जोर लगाए साफ़ देखने की सबसे कम दूरी स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है। इसे निकट बिंदु भी कहते हैं। सामान्य युवा आँख के लिए यह लगभग 25 cm है। दूर बिंदु अनंत है। इससे पास रखी किताब धुंधली लगती है और आँख पर जोर पड़ता है।
प्रश्न: समंजन क्षमता किसे कहते हैं? सामान्य आँख की सीमा क्या है?
उत्तर: आँख की वह क्षमता जिससे लेंस अपनी फोकस दूरी बदलकर पास और दूर की वस्तु रेटिना पर साफ़ जमा ले, समंजन क्षमता है। सामान्य युवा आँख 25 cm से अनंत तक साफ़ देखती है।
BSEB परिभाषा में दो शब्द साथ लिखो — पक्ष्माभी पेशी और फोकस दूरी। केवल «आँख सिकुड़ती है» अधूरा है।
CBSE अक्सर पूछता है कि प्रतिबिंब कहाँ बनता है। उत्तर रेटिना है, कॉर्निया या पुतली नहीं।
प्रकाश-सुग्राही पर्दा।
लेंस रेटिना पर उलटा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी।
सामान्य युवा आँख के लिए निकट बिंदु लगभग 25 cm है।
सही — ढीली पेशी पर लेंस पतला होता है और फोकस दूरी बढ़ती है।
अंग्रेज़ी शब्द accommodation।
इसे समंजन या समंजन क्षमता कहते हैं।
कॉर्निया पर किरणों का अधिकांश अपवर्तन होता है। नेत्र लेंस फोकस दूरी का बारीक समायोजन करके प्रतिबिंब को रेटिना पर लाता है।
दूर वस्तु पर u अनंत है, इसलिए f = v = 2.3 cm = 0.023 m। सूत्र P = 1/f। P = 1/0.023 = 43.5 D लगभग। मात्रक डायोप्टर है।
Myopia and hypermetropia — which lens · NCERT 10.2 · मायोपिया · हाइपरमेट्रोपिया
निकट-दृष्टि (myopia) में पास की वस्तु साफ़ दिखती है, दूर की नहीं। दूर बिंदु अनंत से पास आ जाता है। दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना से पहले बनता है। कारण दो हो सकते हैं — लेंस की वक्रता बहुत अधिक हो, या नेत्रगोलक लंबा हो गया हो। ठीक करने के लिए उचित क्षमता का अवतल लेंस लगता है।
दूर-दृष्टि (hypermetropia) में दूर की वस्तु साफ़ दिखती है, पास की नहीं। निकट बिंदु 25 cm से दूर खिसक जाता है। पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। कारण — लेंस की फोकस दूरी बहुत बड़ी हो, या नेत्रगोलक छोटा हो। ठीक करने के लिए उचित क्षमता का उत्तल लेंस लगता है।
| दोष | प्रतिबिंब | लेंस |
|---|---|---|
| निकट-दृष्टि | रेटिना से पहले | अवतल |
| दूर-दृष्टि | रेटिना के पीछे | उत्तल |
प्रश्न: एक व्यक्ति 40 cm से दूर की वस्तु साफ़ नहीं देख पाता। लेंस की प्रकृति और क्षमता ज्ञात करो।
सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u और P = 1/f, जहाँ f मीटर में हो।
चिह्न: दूर वस्तु के लिए u = −∞। प्रतिबिंब दूर बिंदु पर चाहिए, इसलिए v = −40 cm = −0.40 m।
स्थापन: 1/f = 1/(−0.40) − 0 = −2.5 m⁻¹। अतः f = −0.40 m और P = −2.5 D।
ऋणात्मक क्षमता का अर्थ अवतल लेंस है।
BSEB में दोष का नाम, प्रतिबिंब की जगह और लेंस — तीनों एक उत्तर में लिखो।
CBSE गणना में चिह्न माँगता है। u अनंत और v ऋणात्मक लिखे बिना −2.5 D नहीं आएगा।
प्रतिबिंब रेटिना से पहले बन रहा है, उसे पीछे खिसकाना है।
निकट-दृष्टि में अवतल लेंस लगता है।
नेत्रगोलक छोटा हो या फोकस दूरी बहुत बड़ी हो।
दूर-दृष्टि में प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। उत्तल लेंस उसे रेटिना पर लाता है।
गलत — दूर बिंदु अनंत से पास आ जाता है। व्यक्ति कुछ मीटर तक ही साफ़ देख पाता है।
अतिरिक्त फोकस क्षमता चाहिए।
दूर-दृष्टि में उत्तल (अभिसारी) लेंस लगता है।
1/f = 1/v − 1/u। u = −∞, v = −0.40 m। 1/f = 1/(−0.40) = −2.5 m⁻¹। P = −2.5 D। लेंस अवतल है।
Presbyopia, bifocal lenses and eye donation · NCERT 10.2 · जरा-दूरदर्शिता · मोतियाबिंद · नेत्रदान
अधिकतर लोगों में उम्र के साथ निकट बिंदु दूर खिसकने लगता है। पास की वस्तु बिना चश्मे के आराम से नहीं दिखती। इस दोष को जरा-दूरदर्शिता (presbyopia) कहते हैं। कारण — पक्ष्माभी पेशियाँ धीरे-धीरे कमज़ोर होती हैं और लेंस का लचीलापन घटता है।
कभी एक ही व्यक्ति को निकट-दृष्टि और दूर-दृष्टि दोनों होते हैं। तब द्विफोकसी लेंस लगता है। ऊपर का भाग अवतल होता है, दूर देखने के लिए। नीचे का भाग उत्तल होता है, पास पढ़ने के लिए। आज संपर्क लेंस या शल्य क्रिया से भी ये दोष सुधरते हैं।
बुढ़ापे में लेंस कभी दूधिया और धुंधला हो जाता है। इसे मोतियाबिंद (cataract) कहते हैं। दृष्टि आंशिक या पूरी घट सकती है। शल्य क्रिया से दृष्टि लौटाई जा सकती है।
मृत्यु के 4 से 6 घंटे के अंदर नेत्र निकालने होते हैं। नेत्र बैंक को तुरंत सूचना दो। निकालने में 10–15 मिनट लगते हैं और चेहरा नहीं बिगड़ता। कोई भी आयु या लिंग दान कर सकता है। चश्मा लगाने वाले और मोतियाबिंद की शल्य क्रिया करवा चुके लोग भी दान कर सकते हैं।
एड्स, हेपेटाइटिस B या C, रेबीज़, तीव्र ल्यूकेमिया, टिटनेस, हैजा, मेनिनजाइटिस या इंसेफेलाइटिस से संक्रमित या इनसे मृत व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते। एक जोड़ी नेत्र चार कॉर्निया-अंध लोगों तक को दृष्टि दे सकती है।
प्रश्न: दूर की दृष्टि के लिए लेंस की क्षमता −4.0 D है और पास की दृष्टि के लिए +2.5 D। दोनों की फोकस दूरी निकालो।
सूत्र: f = 1/P, और f मीटर में है जब P डायोप्टर में हो।
स्थापन: दूर की दृष्टि, f = 1/(−4.0) = −0.25 m = −25 cm। यह अवतल लेंस है।
पास की दृष्टि, f = 1/(+2.5) = 0.40 m = 40 cm। यह उत्तल लेंस है। द्विफोकसी चश्मे में ऊपर अवतल और नीचे उत्तल भाग होता है।
BSEB में द्विफोकसी का चित्र या वाक्य ऐसा हो कि ऊपर-नीचे की अदला-बदली न हो।
CBSE f = 1/P में P का चिह्न फोकस दूरी में भी जाता है। −4.0 D की फोकस दूरी ऋणात्मक है।
दूर देखने का भाग ऊपर रहता है।
ऊपर अवतल लेंस दूर की दृष्टि के लिए है। नीचे उत्तल लेंस पास की दृष्टि के लिए है।
सही — शल्य क्रिया से दृष्टि लौट सकती है।
यह उम्र के साथ आता है।
जरा-दूरदर्शिता में पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर होती हैं और लेंस कम लचीला रह जाता है।
मृत्यु के 4 से 6 घंटे के अंदर। एड्स, हेपेटाइटिस B या C, रेबीज़, तीव्र ल्यूकेमिया, टिटनेस, हैजा, मेनिनजाइटिस या इंसेफेलाइटिस में दान नहीं हो सकता।
f = 1/P = 1/(−2.0) = −0.50 m = −50 cm। ऋणात्मक फोकस दूरी अवतल लेंस है। ऊपरी भाग दूर की दृष्टि के लिए है।
Refraction through a prism — Activity 10.1 · NCERT 10.3 · क्रियाकलाप 10.1 · विचलन कोण
काँच की सिल्ली के दोनों फलक समान्तर होते हैं, इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समान्तर रहती है और केवल पार्श्व में खिसकती है। प्रिज्म की अपवर्तक सतहें एक-दूसरे की ओर झुकी होती हैं। दो पार्श्व फलकों के बीच का कोण प्रिज्म कोण (∠A) है।
प्रिज्म की आकृति के कारण निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से एक कोण पर मुड़ जाती है। इसी कोण को विचलन कोण (∠D) कहते हैं।
ड्राइंग बोर्ड पर सफ़ेद कागज़ ड्राइंग पिन से जमाओ। काँच का प्रिज्म उसके त्रिभुजाकार आधार पर रखो और पेंसिल से किनारा उतारो। एक अपवर्तक फलक AB की ओर झुकी सीधी रेखा PE खींचो। रेखा पर दो पिन P और Q गाड़ो।
दूसरे फलक AC से P और Q के प्रतिबिंब देखो। दो और पिन R और S ऐसे गाड़ो कि R, S और P, Q के प्रतिबिंब एक ही सीधी रेखा में पड़ें। पिन और प्रिज्म हटाओ। PE प्रिज्म की सीमा को E पर मिलती है। R और S को मिलाकर बढ़ाओ; यह सीमा को F पर मिले। E और F जोड़ो।
E और F पर अभिलंब खींचो। आपतन कोण ∠i, अपवर्तन कोण ∠r और निर्गत कोण ∠e अंकित करो। PE आपतित किरण है, EF अपवर्तित और FS निर्गत। पहले फलक पर हवा से काँच में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। दूसरे फलक पर काँच से हवा में वह अभिलंब से दूर मुड़ती है।
प्रश्न: प्रिज्म से निकलने के बाद किरण आपतित किरण के समान्तर क्यों नहीं रहती?
उत्तर: प्रिज्म के दोनों अपवर्तक फलक समान्तर नहीं हैं। पहले फलक पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है और दूसरे पर अभिलंब से दूर। दोनों मुड़ एक-दूसरे को रद्द नहीं करते। आपतित और निर्गत किरणों के बीच बचा कोण विचलन कोण है।
BSEB किरण-चित्र में PE, EF, FS और ∠i, ∠r, ∠e, ∠D के नाम लिखो। बिना नाम का चित्र अधूरा गिना जाता है।
CBSE पूछता है कि सिल्ली और प्रिज्म में निर्गत किरण का अंतर क्या है। एक वाक्य में समान्तर बनाम विचलन लिखो।
इसी कोण का नाम विचलन कोण है।
प्रिज्म की झुकी सतहों के कारण निर्गत किरण आपतित किरण से विचलन कोण पर मुड़ती है।
सही — विरल से सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
अंग्रेज़ी deviation।
यह विचलन कोण ∠D है। प्रिज्म कोण ∠A अलग चीज़ है।
दूसरे फलक से देखते हुए संरेखण।
R और S निर्गत किरण का रास्ता पकड़ते हैं। वे P और Q के प्रतिबिंबों के साथ एक रेखा में होते हैं।
फलक AB पर हवा से काँच में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है। फलक AC पर काँच से हवा में किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है।
v = c/n = (3.0 × 108) / 1.50 = 2.0 × 108 m/s।
Dispersion and recombination — Activity 10.2 · NCERT 10.4 · क्रियाकलाप 10.2 · इंद्रधनुष
मोटे गत्ते के बीचोंबीच एक छोटा छेद या पतली झिरी बनाओ। झिरी पर सूर्य का प्रकाश पड़ने दो, ताकि श्वेत प्रकाश की पतली किरणपुंज मिले। सूरज की ओर सीधा मत देखो; किरणपुंज को झिरी पर पड़ने दो।
काँच का प्रिज्म लो और यह किरणपुंज उसके एक फलक पर डालो। प्रिज्म को धीरे-धीरे तब तक घुमाओ जब तक निकलता प्रकाश पास के पर्दे पर न दिखे। पर्दे पर रंगों की एक सुंदर पट्टी मिलती है। क्रम है बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल — VIBGYOR। रंगों की इस पट्टी को स्पेक्ट्रम कहते हैं। श्वेत प्रकाश का अवयवी रंगों में बँटना विक्षेपण है।
हर रंग आपतित किरण के सापेक्ष अलग कोण से मुड़ता है। लाल सबसे कम मुड़ता है और बैंगनी सबसे अधिक। इसलिए हर रंग अलग रास्ते से निकलता है और पट्टी पर अलग दिखता है।
न्यूटन ने पहले काँच के प्रिज्म से सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम लिया। दूसरे सीधे प्रिज्म से वे रंग और नहीं बँटे। जब दूसरा वैसा ही प्रिज्म पहले के सापेक्ष उल्टा रखा, तो सभी रंग उसमें से गुज़रे और दूसरी ओर श्वेत प्रकाश निकला। जो प्रकाश सूर्य जैसा स्पेक्ट्रम दे, उसे श्वेत प्रकाश कहते हैं।
इंद्रधनुष वर्षा के बाद आकाश में सूर्य की विपरीत दिशा में बनता है। पानी की छोटी बूँदें प्रिज्म का काम करती हैं। वे सूर्य के प्रकाश को अपवर्तित और विक्षेपित करती हैं, फिर अंदर परावर्तित करती हैं, और बाहर निकलते समय फिर अपवर्तित करती हैं। सूरज पीठ पीछे हो तो झरने या फुहारे में भी इंद्रधनुष दिख सकता है।
प्रश्न: स्पेक्ट्रम के दो सिरों पर कौन-से रंग होते हैं, और दूसरा उल्टा प्रिज्म क्या करता है?
उत्तर: एक सिरे पर बैंगनी होता है, जो सबसे अधिक मुड़ता है। दूसरे सिरे पर लाल होता है, जो सबसे कम मुड़ता है। उल्टा रखा दूसरा प्रिज्म इन रंगों को फिर एक किरणपुंज में जोड़ता है और श्वेत प्रकाश निकलता है।
BSEB में VIBGYOR का क्रम लिखते समय बैंगनी को पहले रखो। लाल को अधिक विचलन मत दे दो।
CBSE इंद्रधनुष में तीन क्रियाएँ पूछता है — अपवर्तन, आंतरिक परावर्तन, फिर अपवर्तन। केवल «बूँद प्रिज्म है» आधा उत्तर है।
10-सेकंड रिवीजन
स्पेक्ट्रम के जिस सिरे का विचलन बड़ा है।
बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है और लाल सबसे कम।
क्रियाकलाप 10.2 की रंगीन पट्टी।
इस बँटवारे को विक्षेपण कहते हैं। रंगों की पट्टी स्पेक्ट्रम है।
सही — यही न्यूटन का पुनर्योजन का प्रेक्षण है।
VIBGYOR का अंतिम रंग।
लाल सबसे कम मुड़ता है। बैंगनी सबसे अधिक।
सूरज पीठ पीछे होना चाहिए।
इंद्रधनुष सूर्य की विपरीत दिशा में बनता है। बूँदें छोटे प्रिज्म का काम करती हैं।
लाल की तरंगदैर्घ्य = 1.8 × 400 = 720 nm। उल्टा दूसरा प्रिज्म इन रंगों को फिर जोड़कर श्वेत प्रकाश देता है, इसलिए सूर्य का प्रकाश सात रंगों से बना है। बैंगनी का विचलन लाल से बड़ा होता है।
Atmospheric refraction — twinkling and advanced sunrise · NCERT 10.5 · तारे · ग्रह · सूर्योदय 2 मिनट
आग के ऊपर गर्म हवा ठंडी हवा से हल्की होती है और उसका अपवर्तनांक थोड़ा कम होता है। माध्यम की अवस्था स्थिर नहीं रहती, इसलिए वस्तु की आभासी जगह डोलती रहती है। यही वायुमंडलीय अपवर्तन छोटे पैमाने पर है।
तारे का प्रकाश वायुमंडल में लगातार मुड़ता है। क्षितिज के पास तारा अपनी असली जगह से थोड़ा ऊपर दिखता है। वायुमंडल की अवस्था बदलती रहती है, इसलिए आभासी जगह भी बदलती है। तारे बहुत दूर होने से बिंदु-स्रोत जैसे हैं। आँख में पहुँचने वाली रोशनी कभी अधिक, कभी कम होती है — यही टिमटिमाना है।
ग्रह टिमटिमाते नहीं। वे पृथ्वी के अपेक्षाकृत पास हैं और फैले स्रोत दिखते हैं। बहुत-से बिंदु-स्रोतों के उतार-चढ़ाव मिलकर शून्य हो जाते हैं।
वास्तविक सूर्योदय का अर्थ है सूर्य का क्षितिज को वास्तव में पार करना। वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले और वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद दिखता है। सूर्योदय और सूर्यास्त पर सूर्य की डिस्क का चपटा दिखना भी इसी कारण है।
प्रश्न: तारे टिमटिमाते हैं और ग्रह नहीं। एक कारण लिखो।
उत्तर: दोनों पर वायुमंडलीय अपवर्तन होता है। तारा बिंदु-स्रोत है, इसलिए रोशनी का घटना-बढ़ना आँख तक पहुँचता है। ग्रह फैला स्रोत है, इसलिए अलग-अलग बिंदुओं का घटना-बढ़ना औसतन कट जाता है।
BSEB में «तारा ऊपर दिखता है» और «रोशनी घटती-बढ़ती है» दोनों बातें लिखो। केवल अपवर्तन शब्द कम है।
CBSE ग्रह वाला प्रश्न तुलना माँगता है। बिंदु-स्रोत और फैला स्रोत साथ लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
बदलते अपवर्तनांक वाली हवा।
तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण है।
गलत — ग्रह फैले स्रोत हैं और उनके प्रकाश का उतार-चढ़ाव औसतन शून्य हो जाता है।
सूर्यास्त भी लगभग इतने ही देर बाद दिखता है।
सूर्य लगभग 2 मिनट पहले उदय और लगभग 2 मिनट बाद अस्त दिखता है।
ग्रह पृथ्वी के पास हैं और फैले स्रोत दिखते हैं। बहुत-से बिंदुओं से आने वाले प्रकाश का उतार-चढ़ाव औसतन शून्य हो जाता है, इसलिए टिमटिमाना नहीं दिखता।
एक दिन का अतिरिक्त समय = 2 + 2 = 4 मिनट। 15 दिनों में 15 × 4 = 60 मिनट = 1 घंटा।
Scattering — blue sky, red sunset and the Tyndall effect · NCERT 10.6 · टिंडल · नीला आकाश · लाल संकेत
शुद्ध विलयन से गुज़रती प्रकाश की किरण का रास्ता दिखता नहीं। कोलॉइडी विलयन में कण बड़े होते हैं, इसलिए किरण का रास्ता दिखने लगता है। कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन से यह प्रभाव बनता है। इसे टिंडल प्रभाव कहते हैं।
वायुमंडल धुएँ, पानी की सूक्ष्म बूँदों, धूल और हवा के अणुओं का मिश्रण है। धुएँ से भरे कमरे में छोटे छेद से घुसती सूर्य की किरण, या घने जंगल की धुंध में छनता प्रकाश, इसी प्रभाव के उदाहरण हैं। बहुत महीन कण मुख्यतः नीला प्रकाश प्रकीर्णित करते हैं। बड़े कण लंबी तरंगदैर्घ्य प्रकीर्णित करते हैं। कण और बड़े हों तो प्रकीर्णित प्रकाश श्वेत भी दिख सकता है।
हवा के अणु और अन्य महीन कण दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से छोटे होते हैं। वे लाल सिरे की लंबी तरंगों की तुलना में नीले सिरे की छोटी तरंगों को अधिक प्रकीर्णित करते हैं। लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले की लगभग 1.8 गुना है। बिखरा नीला प्रकाश हमारी आँख में आता है, इसलिए साफ़ आकाश नीला दिखता है।
वायुमंडल न हो तो प्रकीर्णन नहीं होगा और आकाश काला दिखेगा। बहुत ऊँचाई पर उड़ते यात्रियों को आकाश काला दिखता है। सूर्योदय और सूर्यास्त पर प्रकाश को वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नीला रास्ते में बिखर जाता है और कम बिखरने वाला लाल प्रकाश आँख तक पहुँचता है। खतरे के संकेत लाल इसीलिए होते हैं — कोहरा या धुआँ लाल को सबसे कम बिखेरता है, इसलिए रंग दूर तक वही रहता है।
प्रश्न: अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीला नहीं, काला क्यों दिखता है?
उत्तर: नीला रंग हवा के महीन कणों के प्रकीर्णन से आता है। बहुत ऊँचाई पर ऐसा प्रकीर्णन प्रभावी नहीं रहता। प्रकीर्णन न हो तो आकाश काला दिखता है।
BSEB में नीला आकाश और लाल सूर्यास्त को एक ही नियम से जोड़ो — छोटी तरंग अधिक बिखरती है।
CBSE टिंडल और विक्षेपण को अलग रखता है। टिंडल कणों से बिखरना है। विक्षेपण प्रिज्म में रंगों का बँटना है।
10-सेकंड रिवीजन
कण इतने बड़े हों कि किरण का रास्ता दिखे।
कोलॉइडी कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं और किरण का रास्ता दिखता है। शुद्ध विलयन में रास्ता नहीं दिखता।
लाल की तरंगदैर्घ्य नीले की लगभग 1.8 गुना है।
हवा के महीन कण नीले प्रकाश को लाल से अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
सही — लाल दूर तक अपना रंग बनाए रखता है।
सबसे कम प्रकीर्णन वाला रंग।
लंबे रास्ते में नीला बिखर जाता है और लाल प्रकाश आँख तक पहुँचता है।
सूर्यास्त पर प्रकाश वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करता है। छोटी तरंगदैर्घ्य का नीला प्रकाश रास्ते में प्रकीर्णित हो जाता है और कम प्रकीर्णित लाल प्रकाश आँख तक आता है। कोहरा या धुआँ भी लाल को सबसे कम बिखेरता है, इसलिए संकेत दूर तक लाल दिखता है।
1 nm = 10−9 m। 720 nm = 720 × 10−9 m = 7.2 × 10−7 m।
प्रकार चुनो। पाठों के 39 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
लेंस को पतला या मोटा करने वाली पेशियाँ।
पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की वक्रता बदलकर फोकस दूरी बदलती हैं।
लेंस केवल बारीक समायोजन करता है।
अधिकांश अपवर्तन कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है।
सामान्य युवा आँख का निकट बिंदु।
सामान्य युवा आँख के लिए यह लगभग 25 cm है। दूर बिंदु अनंत है।
पास साफ़, दूर धुंधला।
यह निकट-दृष्टि है और अवतल लेंस से सुधरती है।
प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।
उत्तल लेंस अतिरिक्त फोकस क्षमता देता है।
निचला भाग पढ़ने के काम आता है।
नीचे उत्तल लेंस पास की दृष्टि के लिए है। ऊपर अवतल दूर की दृष्टि के लिए है।
विरल से सघन।
पहले फलक पर हवा से काँच में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
VIBGYOR का पहला रंग।
बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है और लाल सबसे कम।
सीधा दूसरा प्रिज्म रंग और नहीं बाँटता, जोड़ता भी नहीं।
उल्टा दूसरा प्रिज्म रंगों को पुनर्योजित करके श्वेत प्रकाश देता है।
बूँद छोटे प्रिज्म की तरह काम करती है।
बूँद अपवर्तित, विक्षेपित, आंतरिक परावर्तित और फिर अपवर्तित करती है।
बिंदु-स्रोत और बदलती हवा।
तारे का प्रकाश वायुमंडल में लगातार मुड़ता है और आँख तक पहुँचती रोशनी घटती-बढ़ती है।
सूर्योदय भी लगभग इतना ही पहले दिखता है।
वायुमंडलीय अपवर्तन से सूर्य लगभग 2 मिनट बाद तक दिखता है।
छोटी तरंगदैर्घ्य अधिक बिखरती है।
महीन कण नीले प्रकाश को लाल से अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
दूर तक वही रंग दिखे।
लाल का प्रकीर्णन सबसे कम होता है, इसलिए संकेत दूर तक लाल रहता है।
कोलॉइडी कण रास्ता दिखाते हैं।
धुएँ के कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं और किरण का रास्ता दिखता है।
सही — पुस्तक यही माप देती है।
गलत — 25 cm निकट बिंदु है। दूर बिंदु अनंत है।
गलत — निकट-दृष्टि में अवतल लेंस लगता है। उत्तल लेंस दूर-दृष्टि का है।
सही — शल्य क्रिया से दृष्टि लौट सकती है।
सही — प्रिज्म में ऐसा नहीं होता। वहाँ विचलन कोण बचता है।
गलत — बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है और लाल सबसे कम।
गलत — इंद्रधनुष सूर्य की विपरीत दिशा में बनता है।
सही — नीला रंग प्रकीर्णन से आता है।
परितारिका पुतली से प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है।
यह गहरी पेशीय डायफ्राम है।
सामान्य युवा आँख के लिए निकट बिंदु लगभग 25 cm है।
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी।
अवतल लेंस दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर लाता है।
प्रतिबिंब को रेटिना पर लाना है।
प्रिज्म कोण दो अपवर्तक पार्श्व फलकों के बीच होता है।
त्रिभुजाकार आधार नहीं।
अवयवी रंगों की पट्टी स्पेक्ट्रम कहलाती है।
विक्षेपण इस पट्टी को बनाता है।
लाल की तरंगदैर्घ्य नीले की लगभग 1.8 गुना है।
इसलिए नीला अधिक बिखरता है।
नेत्र 4 से 6 घंटे के अंदर निकालने होते हैं।
नेत्र बैंक को तुरंत बताओ।
ग्रह फैले स्रोत हैं और उतार-चढ़ाव औसतन कट जाता है।
तारा बिंदु-स्रोत है।
कॉर्निया अपवर्तन, परितारिका पुतली, रेटिना पर्दा, दृक तंत्रिका संकेत।
टिमटिमाना और आगे का सूर्योदय अपवर्तन हैं। नीला आकाश प्रकीर्णन है। स्पेक्ट्रम विक्षेपण है।
अभिकथन (A): निकट-दृष्टि अवतल लेंस से सुधरती है।
कारण (R): इस दोष में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना से पहले बनता है।
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A): साफ़ आकाश नीला दिखता है।
कारण (R): लाल प्रकाश नीले प्रकाश से अधिक प्रकीर्णित होता है।
A सही है। R गलत — नीला अधिक प्रकीर्णित होता है, लाल कम।
अभिकथन (A): प्रिज्म में बैंगनी प्रकाश सबसे कम मुड़ता है।
कारण (R): अलग-अलग रंगों का विचलन अलग-अलग होता है।
A गलत है — बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है। R सही है।
अभिकथन (A): ग्रह टिमटिमाते नहीं।
कारण (R): सूर्योदय वायुमंडलीय अपवर्तन से लगभग 2 मिनट पहले दिखता है।
दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है। दोनों बातें अलग हैं।
अभिकथन (A): खतरे के संकेत लाल होते हैं।
कारण (R): लाल प्रकाश कोहरे या धुएँ से सबसे कम प्रकीर्णित होता है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
निकट-दृष्टि अवतल। दूर-दृष्टि और जरा-दूरदर्शिता का पास का भाग उत्तल। सामान्य आँख को लेंस नहीं चाहिए।
पट्टी विक्षेपण है। नीला आकाश और टिंडल प्रकीर्णन हैं। टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन है।
नेत्र लेंस की फोकस दूरी बदलकर पास और दूर की वस्तु को रेटिना पर साफ़ फोकस करने की क्षमता समंजन है।
निकट बिंदु लगभग 25 cm है। दूर बिंदु अनंत है।
श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों में बँटना विक्षेपण है। इन रंगों की पट्टी स्पेक्ट्रम कहलाती है।
कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन से किरण का रास्ता दिखने लगता है। इसी को टिंडल प्रभाव कहते हैं।
प्रिज्म से निकलती किरण और आपतित किरण की दिशा के बीच का कोण विचलन कोण है।
लेंस की वक्रता बहुत अधिक हो सकती है, या नेत्रगोलक लंबा हो सकता है। दूर का प्रतिबिंब रेटिना से पहले बनता है। उचित क्षमता का अवतल लेंस प्रतिबिंब को रेटिना पर लाता है।
दूर-दृष्टि में पास का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है, क्योंकि फोकस दूरी बड़ी है या नेत्रगोलक छोटा है। उत्तल लेंस लगता है। जरा-दूरदर्शिता उम्र में आती है, जब पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर और लेंस कम लचीला हो। दोनों दोष साथ हों तो द्विफोकसी लेंस लगता है।
श्वेत प्रकाश की पतली किरणपुंज प्रिज्म से निकलकर रंगों की पट्टी बनाती है। क्रम VIBGYOR है — बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम मुड़ता है।
वास्तविक सूर्योदय सूर्य के क्षितिज पार करने का समय है। वायुमंडल सूर्य की किरणों को इस तरह मोड़ता है कि सूर्य क्षितिज से नीचे होने पर भी दिखता है। अंतर लगभग 2 मिनट है। सूर्यास्त भी लगभग 2 मिनट देर से दिखता है।
प्रकाश कॉर्निया से घुसता है, जहाँ अधिकांश अपवर्तन होता है। परितारिका पुतली से प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है। लेंस बारीक फोकस करता है और रेटिना पर उलटा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। संकेत दृक तंत्रिका से मस्तिष्क जाते हैं। समंजन में पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस को पतला या मोटा करती हैं। ढीली पेशी पर फोकस दूरी बढ़ती है और दूर की वस्तु साफ़ होती है। सिकुड़ी पेशी पर फोकस दूरी घटती है और पास की वस्तु साफ़ होती है। निकट बिंदु लगभग 25 cm है।
सूत्र 1/f = 1/v − 1/u और P = 1/f। दूर वस्तु के लिए u = −∞ और v = −2 m। 1/f = 1/(−2) − 0 = −0.5 m⁻¹। P = −0.5 D। मात्रक डायोप्टर है। अवतल लेंस दूर की वस्तु का प्रतिबिंब दूर बिंदु पर बनाता है, ताकि वह रेटिना पर पड़े।
महीन कण छोटी तरंगदैर्घ्य को अधिक प्रकीर्णित करते हैं। लाल की तरंगदैर्घ्य नीले की लगभग 1.8 गुना है, इसलिए नीला अधिक बिखरता है और आकाश नीला दिखता है। सूर्यास्त पर लंबा रास्ता नीले को बिखेर देता है और लाल आँख तक पहुँचता है। कोहरा भी लाल को सबसे कम बिखेरता है, इसलिए खतरे का संकेत दूर तक लाल दिखता है। वायुमंडल न हो तो आकाश काला दिखे।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। यह किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न-पत्र नहीं है।
दूर की वस्तु साफ़ नहीं।
यह निकट-दृष्टि है। अवतल लेंस लगता है।
पढ़ने की सामग्री 25 cm से अधिक दूर रखनी पड़ती है।
निकट बिंदु सामान्य 25 cm से दूर खिसक जाता है।
VIBGYOR — बैंगनी से लाल तक।
सात रंगों के अंग्रेज़ी नामों के पहले अक्षर।
हाँ। चश्मा, मोतियाबिंद की शल्य क्रिया, मधुमेह या उच्च रक्तचाप नेत्रदान में बाधक नहीं है, जब तक संक्रामक रोगों वाली वर्जित सूची में न हो।
u = −0.25 m, v = −0.50 m। 1/f = 1/v − 1/u = 1/(−0.50) − 1/(−0.25) = −2 + 4 = +2 m⁻¹। P = +2 D। लेंस उत्तल है।
10.1 में एक किरण प्रिज्म से गुज़रकर अपनी दिशा से विचलन कोण पर मुड़ती है। पहले फलक पर वह अभिलंब की ओर और दूसरे पर अभिलंब से दूर मुड़ती है। 10.2 में श्वेत प्रकाश रंगों की पट्टी में बँटता है। विचलन पूरे किरणपुंज के मुड़ने का कोण है। विक्षेपण रंगों का अलग-अलग कोणों पर बँटना है, जिसमें बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम मुड़ता है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। ये किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति या पुराना पेपर नहीं हैं।
ऋणात्मक क्षमता अवतल लेंस है।
निकट-दृष्टि में अवतल लेंस चाहिए। −0.5 D अवतल है।
इंद्रधनुष सूर्य के विपरीत बनता है।
पानी की बूँद छोटे प्रिज्म की तरह अपवर्तन, विक्षेपण और आंतरिक परावर्तन करती है।
अभिकथन (A): अंतिम पंक्ति का छात्र बोर्ड नहीं पढ़ पाता।
कारण (R): उसे निकट-दृष्टि है और अवतल लेंस से दोष सुधर सकता है।
A और R दोनों सही हैं और R सही कारण है।
अभिकथन (A): बहुत ऊँचाई पर आकाश काला दिखता है।
कारण (R): ऊँचाई पर विक्षेपण रुक जाता है क्योंकि प्रिज्म नहीं होता।
A सही है। R गलत — कारण प्रकीर्णन का कम हो जाना है, विक्षेपण नहीं।
यह दूर-दृष्टि है। पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। उचित क्षमता का उत्तल लेंस लगता है।
पहला प्रिज्म श्वेत प्रकाश को स्पेक्ट्रम में बाँटता है और उल्टा दूसरा प्रिज्म रंगों को जोड़ता है। इससे पता चलता है कि श्वेत प्रकाश सात रंगों से बना है। बैंगनी का विचलन लाल से बड़ा होता है, इसलिए वह पट्टी के दूसरे सिरे पर अलग हो जाता है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी | लगभग 25 cm (युवा सामान्य नेत्र) |
| निकट-दृष्टि | अवतल लेंस; प्रतिबिंब रेटिना से पहले |
| दूर-दृष्टि | उत्तल लेंस; प्रतिबिंब रेटिना के पीछे |
| विक्षेपण | बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम |
| वायुमंडलीय अपवर्तन | सूर्योदय लगभग 2 मिनट पहले |
| प्रकीर्णन | नीला आकाश; खतरे का संकेत लाल |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।