धुआँ ईंधन को खराब बनाता है।
बहुत धुआँ कसौटी नहीं है। काम, पहुँच, भंडारण और कीमत हैं।
कक्षा 10 · विज्ञान · अध्याय 14 · बिहार बोर्ड (BSEB)CBSE · NCERT 2026-27
Sources of Energy
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1. पढ़ो — 14.1 रूप · 14.2 ईंधन · 14.3 टरबाइन · 14.4 माँग · 14.5 काला फ्लास्क · 14.6 सौर कुकर · 14.7 असली स्रोत · 14.8 वातावरण · 14.9 कितने साल, चित्र, हल उदाहरण, बोर्ड टिप
2. जाँचो — हर पाठ के अपने प्रश्न; संख्या पाठ के हिसाब से
3. महारत ★ — उस पाठ के सब सही। गलत वाले «दोबारा करो»
4. याद रखने वाला चित्र दो स्तंभ दिखाता है — बाईं ओर परंपरागत स्रोत और दाईं ओर गैर-परंपरागत स्रोत।
बिहार की 16-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय 14 है। NCERT 2026-27 की 13-अध्याय वाली किताब में यह अध्याय नहीं है। प्रगति इसी ब्राउज़र में सेव रहती है।
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A good source — Activities 14.1 and 14.2 · अनुभाग 14.1 · क्रियाकलाप 14.1, 14.2
ऊर्जा मिटती नहीं, पर उपयोगी रूप आस-पास फैल जाता है। मोमबत्ती की गर्मी और रोशनी को वापस मोम नहीं बनाया जा सकता। गर्म पानी ठंडा हो जाए तो खोई गर्मी को समेटकर पानी फिर गर्म नहीं होता। इसलिए कोई स्रोत काम करने के बाद उसी रूप में दोबारा नहीं मिलता।
अच्छा स्रोत वह है जो प्रति एकांक आयतन या द्रव्यमान बहुत काम करे, आसानी से मिले, रखना और ले जाना आसान हो, और सस्ता पड़े। ईंधन पूछो: जलने पर गर्मी कितनी, धुआँ कितना, और वह मिलता है या नहीं।
जागने से स्कूल पहुँचने तक ऊर्जा के चार रूप लिखो। मांसपेशी, बिजली और भोजन की रासायनिक ऊर्जा किसी स्रोत से आती है। रूप और स्रोत एक नहीं हैं। ट्रेन का डीजल एक स्रोत है। सड़क की बत्ती में जो जलती है वह बिजली का रूप है।
खाना पकाने का ईंधन चुनते समय जंगल, दूर का पहाड़ी गाँव, दिल्ली और पाँच सौ साल पहले का घर एक जैसा उत्तर नहीं देते। लकड़ी जंगल में पास है। शहर में धुआँ और पहुँच दोनों रोकते हैं। काम भी चुनाव बदलता है: खाना पकाना और सर्दी में कमरा गर्म करना एक ही ईंधन माँगें, यह जरूरी नहीं।
प्रश्न: बिजली को ऊर्जा का स्रोत मानें या रूप?
उत्तर: बिजली एक रूप है। स्रोत कोयला, बहता पानी या सूर्य हो सकता है। क्रियाकलाप 14.1 यही अलग करवाता है। अच्छा स्रोत वाले चार बिंदु रूप पर नहीं, उस भंडार पर लगते हैं जिससे यह रूप बनता है।
अच्छे स्रोत के चार बिंदु सूची में लिखो। केवल «सस्ता» अधूरा रह जाता है।
रूप और स्रोत अलग वाक्य में रखो। बिजली रूप है, कोयला स्रोत हो सकता है।
धुआँ ईंधन को खराब बनाता है।
बहुत धुआँ कसौटी नहीं है। काम, पहुँच, भंडारण और कीमत हैं।
गलत — उपयोगी ऊर्जा आस-पास फैल जाती है और वापस नहीं समेटी जाती।
दूसरा शब्द तौल का है।
द्रव्यमान। साथ में पहुँच, भंडारण और कीमत भी गिनो।
जंगल, पहाड़, दिल्ली और पुराना समय।
जगह और किया जाने वाला काम ईंधन की सूची काट देते हैं।
बहुत काम प्रति एकांक आयतन या द्रव्यमान, आसान पहुँच, आसान भंडारण और परिवहन, और किफायती होना। ईंधन से यह भी पूछो कि गर्मी कितनी निकलती है और धुआँ कितना बनता है।
Fossil fuels, a turbine and thermal power — Activity 14.3 · 14.2.1 और 14.2.2 · क्रियाकलाप 14.3
कोयला और पेट्रोलियम लाखों साल में बने। भंडार सीमित है, इसलिए ये अनवीकरणीय हैं। इन्हें जलाने से कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड बनते हैं। ये अम्लीय ऑक्साइड हैं और अम्ल वर्षा जल व मिट्टी को बिगाड़ती है। कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाती है। दहन की दक्षता बढ़ाने और राख तथा हानिकारक गैस रोकने से प्रदूषण कुछ घटता है, समाप्त नहीं होता।
ताप बिजली घर में ईंधन जलाकर पानी गर्म किया जाता है, भाप टरबाइन घुमाती है और टरबाइन जनित्र घुमाती है। उतनी ही दूरी पर बिजली भेजना कोयला या तेल ढोने से अधिक कुशल है, इसलिए कई संयंत्र कोयला या तेल के खेत के पास बनते हैं।
टेबल-टेनिस की गेंद में तीन चीरें काटो। धातु की अर्धवृत्ताकार पंखुड़ियाँ इनमें लगाओ। गेंद को धुरी पर ऐसे टिकाओ कि वह स्वतंत्र घूमे। साइकिल का डायनेमो जोड़ो और बल्ब को श्रेणीक्रम में जोड़ो।
प्रेशर कुकर की भाप या पानी की धार पंखों पर मारो। पंख घूमते हैं, डायनेमो की धुरी घूमती है और बल्ब जल सकता है। सरल टरबाइन का एक चलने वाला भाग रोटर-ब्लेड होता है। चलता तरल ब्लेड को ऊर्जा देता है। यंत्र बिजली बनाता है। स्रोत बाद में बदलता है: कोयला, पानी की ऊँचाई या भाप।
प्रश्न: ताप बिजली घर को कोयला खदान के पास क्यों बनाते हैं?
उत्तर: ईंधन जलता है, गर्मी पानी को भाप बनाती है, भाप टरबाइन घुमाती है। कोयला सैकड़ों किलोमीटर ढोना महँगा और कम कुशल है। बिजली के तार उसी दूरी पर ऊर्जा अधिक कुशलता से ले जाते हैं। इसलिए संयंत्र खेत के पास रखा जाता है।
अम्लीय ऑक्साइड के नाम लिखो: कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर। केवल «प्रदूषण» अधूरा है।
संयंत्र खेत के पास इसलिए है कि बिजली ढोना कोयला ढोने से कुशल है। गर्मी शब्द मात्र से नाम «ताप» नहीं आता, उत्तर में क्रम लिखो।
दूरी दोनों में समान मानो।
उतनी ही दूरी पर बिजली का संचरण कोयला या तेल के परिवहन से अधिक कुशल है।
सही — इन्हीं से अम्ल वर्षा होती है।
चीरें भी उतनी ही हैं।
तीन चीरें और तीन पंख।
नाम «ताप» गर्मी वाले चरण से है।
ईंधन जलता है, पानी भाप बनता है, भाप टरबाइन घुमाती है, जनित्र बिजली देता है।
भंडार सीमित है, इसलिए ये अनवीकरणीय हैं। जलने पर अम्लीय ऑक्साइड अम्ल वर्षा करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाती है। ताप बिजली घर कहलाता है क्योंकि ईंधन जलाकर गर्मी बनाई जाती है और वही विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
गलत — प्रदूषण कुछ घटता है, समाप्त नहीं होता।
Water, biomass and wind · 14.2.3 और 14.2.4 · बाँध, गोबर गैस, पवन
जल विद्युत गिरते पानी की स्थितिज ऊर्जा को बिजली बनाती है। ऊँचे बाँध नदी रोककर जलाशय भरते हैं। बारिश जलाशय फिर भरती है, इसलिए यह नवीकरणीय है। भारत की जरूरत का लगभग एक चौथाई भाग जल विद्युत से जुड़ा बताया गया है। बड़े बाँध हर जगह नहीं बनते। खेत और बस्तियाँ डूबती हैं। डूबी वनस्पति बिना ऑक्सीजन सड़कर मेथेन छोड़ती है, जो ग्रीनहाउस गैस है। टिहरी बाँध गंगा पर है और सरदार सरोवर नर्मदा पर। विस्थापित लोगों का पुनर्वास अलग समस्या है।
लकड़ी सीमित ऑक्सीजन में जले तो चारकोल बचता है। वह लगभग बिना लौ और कम धुएँ के जलता है। गोबर, फसल अवशेष और सीवेज बिना ऑक्सीजन के सड़कर बायोगैस देते हैं। गुंबद ईंट का होता है। मिक्सर टंकी से कर्दम डाइजेस्टर में जाती है। कुछ दिनों में मेथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड बनते हैं। बायोगैस में 75 प्रतिशत तक मेथेन होता है। धुआँ और राख नहीं। बची कर्दम नाइट्रोजन और फॉस्फोरस वाली खाद है। पवन चक्की टरबाइन घुमाती है। एक चक्की का उत्पादन छोटा होता है, इसलिए फार्म बनाया जाता है। चाल 15 km/h से अधिक चाहिए। 1 MW के लिए लगभग 2 हेक्टेयर जमीन चाहिए। कन्याकुमारी के पास बड़ा फार्म 380 MW बनाता है। भारत पवन बिजली में पाँचवें स्थान पर है। डेनमार्क अपनी बिजली का 25 प्रतिशत से अधिक पवन से लेता है। कुल उत्पादन में जर्मनी आगे है।
प्रश्न: पुस्तक के नियम से 1 MW जनित्र को लगभग 2 हेक्टेयर चाहिए। 4 MW के फार्म को कितनी जमीन चाहिए?
सूत्र: क्षेत्र = शक्ति × 2 हेक्टेयर प्रति MW।
प्रतिस्थापन: क्षेत्र = 4 × 2 = 8।
उत्तर: 8 हेक्टेयर। यह आरंभिक अनुमान है। देख-भाल और बिना हवा के दिन के लिए भंडारण सेल अलग खर्च हैं।
जल विद्युत को अनवीकरणीय मत लिखना। वर्षा जलाशय भरती है। बाँध की हानि अलग पैराग्राफ में लिखो।
पवन की तीन सीमाएँ साथ लिखो: जगह, 15 km/h और बैकअप। केवल «मुफ्त» अधूरा है।
डाइजेस्टर में ऑक्सीजन नहीं होती।
75 प्रतिशत तक मेथेन। साथ में कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड भी बन सकते हैं।
सही — मेथेन ग्रीनहाउस गैस है। यही बड़े बाँध की एक हानि है।
इससे कम पर चाल नहीं बनती।
15 km/h से अधिक।
ईंटों का गुंबद, मिक्सिंग टंकी में गोबर और पानी की कर्दम, और बिना ऑक्सीजन वाला डाइजेस्टर। गैस ऊपर इकट्ठी होती है। बची कर्दम नाइट्रोजन और फॉस्फोरस से भरपूर खाद है।
Demand and the black flask — Activities 14.4 and 14.5 · 14.3 की शुरुआत · क्रियाकलाप 14.4, 14.5
मशीनें बढ़ीं तो बाहरी स्रोत की माँग बढ़ी। दादा-दादी पैदल या साइकिल से स्कूल जाते थे, पानी कुएँ से आता था और मनोरंजन में बिजली कम लगती थी। आज इन्हीं कामों में बाहर की ऊर्जा अधिक जाती है। जैसे पूर्वज जिएँ, वैसा लौटना आसान उपाय नहीं है। ज्ञात स्रोत को कुशल बनाना और नया स्रोत खोजना दोनों जरूरी हैं।
सूर्य लगभग 5 अरब साल से इसी दर पर ऊर्जा दे रहा है और लगभग 5 अरब साल और देगा। वायुमंडल लगभग आधा भाग सोख लेता है। साफ आसमान में भारत में प्रति दिन लगभग 4 से 7 kWh प्रति वर्ग मीटर मिलता है। सौर नियतांक लगभग 1.4 kW प्रति वर्ग मीटर है। काली सतह सफेद या चमकदार सतह से अधिक गर्मी सोखती है।
बड़ों से पूछो कि वे स्कूल कैसे जाते थे, पानी कैसे लाते थे और मनोरंजन क्या था। अपने तरीके से मिलाओ। जिस काम में बाहर की ऊर्जा अधिक लगे, उसे चिह्नित करो।
दो शंक्वाकार फ्लास्क लो। एक काला करो, एक सफेद। दोनों में पानी भरो और आधे घंटे से एक घंटे तक सीधी धूप में रखो। काला फ्लास्क अधिक गर्म लगता है। थर्मामीटर से दोनों का ताप नापो। यही गुण सौर कुकर और सौर जल-तापक में काम आता है।
प्रश्न: सौर नियतांक 1.4 kW/m² है। 2 m² क्षेत्र पर कितनी शक्ति आती है?
सूत्र: शक्ति = सौर नियतांक × क्षेत्र।
प्रतिस्थापन: शक्ति = 1.4 kW/m² × 2 m² = 2.8 kW।
उत्तर: 2.8 kW। यह आने वाली शक्ति है। एक सौर सेल इससे बहुत कम बिजली बनाता है, लगभग 0.7 W।
चित्र के बाएँ स्तंभ में पवन और जल लिखो। उन्हें दाएँ गैर-परंपरागत में मत खिसका देना।
1.4 kW/m² आने वाली शक्ति है। 0.7 W एक सेल की बिजली है। दोनों अंक एक वाक्य में मत मिलाना।
क्रियाकलाप 14.5।
काली सतह अधिक गर्मी सोखती है।
सही — दोनों ओर लगभग 5 अरब साल।
प्रति सेकंड 1.4 kJ भी यही बात है।
लगभग 1.4 kW/m²।
खंड 14.2।
पवन परंपरागत स्तंभ में है। वह नवीकरणीय भी है। दोनों बातें साथ रहती हैं।
सूत्र: शक्ति = 1.4 kW/m² × क्षेत्र। प्रतिस्थापन: 1.4 × 2 = 2.8। उत्तर 2.8 kW है। यह सेल की बिजली नहीं है।
A solar cooker and a solar cell — Activity 14.6 · 14.3.1 · क्रियाकलाप 14.6 · सेल और पैनल
सौर कुकर पर काँच की प्लेट ग्रीनहाउस प्रभाव से गर्मी अंदर रखती है। किरणें समेटने के लिए अवतल दर्पण उपयुक्त है, समतल या उत्तल नहीं। ऊष्मा-रोधी बक्सा और काली भीतरी सतह अवशोषण बढ़ाते हैं। कुकर और जल-तापक दिन के कुछ घंटों में ही काम आते हैं। बादल वाले दिन गर्म पानी नहीं मिलता।
सौर सेल धूप को बिजली में बदलता है। एक साधारण सेल 0.5 से 1 V और लगभग 0.7 W देता है। कई सेल मिलकर पैनल बनाते हैं। चलने वाला पुर्जा नहीं होता, देख-भाल कम है और फोकस करने वाला यंत्र जरूरी नहीं। दूर के गाँव में तार बिछाना महँगा हो तो पैनल उपयोगी है। सिलिकॉन प्रकृति में बहुत है, पर सौर ग्रेड सीमित है। पैनल में सेलों को जोड़ने वाली चाँदी कीमत बढ़ाती है। उपग्रह, यातायात बत्ती, कैलकुलेटर और खिलौने सेल चलाते हैं। घर में व्यापक उपयोग अभी महँगा है।
सौर कुकर या सौर जल-तापक की बनावट देखो। ऊष्मा कहाँ रुकती है और अधिकतम अवशोषण कैसे होता है, यह अलग लिखो। काला रंग, दर्पण और काँच तीन अलग काम हैं।
सस्ती सामग्री से छोटा कुकर या तापक बनाओ और पहुँचा हुआ ताप नापो। फायदे और सीमाएँ चर्चा में रखो। दिन के कुछ घंटे और बादल दोनों सीमा हैं। सेल दिन की इस सीमा को बिजली बनाकर पार करता है, पर उसकी अपनी कीमत और कम दक्षता है।
प्रश्न: एक सेल लगभग 0.7 W देता है। लगभग 7 W के लिए कितने सेल चाहिए?
सूत्र: संख्या = माँगी गई शक्ति / एक सेल की शक्ति।
प्रतिस्थापन: संख्या = 7 W / 0.7 W = 10।
उत्तर: 10 सेल। यह शक्ति की गिनती है। वोल्टेज अलग है: एक सेल केवल 0.5 से 1 V देता है, इसलिए ऊँचे वोल्टेज के लिए सेलों को श्रेणीक्रम में भी जोड़ा जाता है।
दर्पण वाला उत्तर अवतल लिखो और कारण भी: किरणें एक जगह जमा होती हैं।
सेल के दो अंक अलग रखो। वोल्ट 0.5–1 है और शक्ति लगभग 0.7 W है।
10-सेकंड रिवीजन
किरणें फोकस पर जमा करनी हैं।
अवतल दर्पण किरणें समेटता है।
गलत — बादल वाले दिन यह काम नहीं करता। धूप वाला दिन काम का है।
वोल्ट अलग संख्या है।
लगभग 0.7 W। वोल्टेज 0.5 से 1 V है।
दूर के गाँव में तार महँगा पड़ता है।
चलने वाला पुर्जा नहीं होता और देख-भाल कम लगती है। फोकस यंत्र भी जरूरी नहीं।
संख्या = 7 W / 0.7 W = 10 सेल। एक सेल केवल 0.5 से 1 V देता है, इसलिए ऊँचा वोल्टेज श्रेणीक्रम जोड़ से बनता है।
प्रकृति में सिलिकॉन बहुत है, ग्रेड खास है।
खास ग्रेड का सिलिकॉन सीमित है और पैनल की कड़ियों में चाँदी कीमत बढ़ाती है।
Sea, geothermal energy and the nucleus — Activity 14.7 · 14.3.2 से 14.3.4 · क्रियाकलाप 14.7
ज्वार मुख्यतः चंद्रमा के खिंचाव से आता है। संकरी खाड़ी पर बाँध बनाकर टरबाइन चलाया जाता है। ऐसी जगहें कम हैं। लहर की गतिज ऊर्जा वहीं काम की है जहाँ लहरें तेज हों। समुद्री तापीय संयंत्र तब चलता है जब सतह और लगभग 2 km गहराई के पानी में 20°C या अधिक का अंतर हो। गर्म पानी अमोनिया जैसे वाष्पशील द्रव को उबालता है। भाप टरबाइन घुमाती है। गहरा ठंडा पानी भाप को फिर द्रव बनाता है।
भूतापीय ऊर्जा गर्म चट्टान के «हॉट स्पॉट» से आती है। भूमिगत पानी भाप बनता है और गर्म चश्मा सतह पर निकल सकता है। न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे संयंत्र हैं। यह सूर्य से नहीं आती। नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम, प्लूटोनियम या थोरियम का भारी नाभिक धीमे न्यूट्रॉन से टूटता है। एक यूरेनियम परमाणु कोयले के एक कार्बन परमाणु से लगभग एक करोड़ गुना ऊर्जा देता है। रिएक्टर में शृंखला नियंत्रित रहती है और गर्मी भाप बनाती है। संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं, जैसे ड्यूटेरियम से हीलियम। सूर्य इसी से जलता है। व्यापारिक रिएक्टर अभी विखंडन वाले हैं।
खर्च हुए ईंधन से विकिरण जारी रहती है। भंडारण खराब हो तो मिट्टी और पानी दूषित होते हैं। अचानक रिसाव का खतरा रहता है। संयंत्र महँगा है और यूरेनियम सीमित है, इसलिए बड़े पैमाने पर उपयोग रुकता है। भारत में तारापुर, राणा प्रताप सागर, कलपक्कम, नरोरा, काकरापार और कैगा जैसे रिएक्टर कुल क्षमता के 3 प्रतिशत से कम हैं। कई औद्योगिक देशों में यह हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक है। हथियार की शृंखला और बिजली घर की शृंखला का भौतिक आधार मिलता-जुलता है, पर बनावट अलग है। हाइड्रोजन बम में विखंडन वाला विस्फोट ताप लगभग 10⁷ K तक ले जाता है, फिर संलयन होता है।
जैव मात्रा, पवन और समुद्री ताप की ऊर्जा का अंतिम स्रोत सूर्य है। जल विद्युत भी जल चक्र से जुड़ी है और लहर हवा से बनती है, इसलिए इन्हें भी सूर्य वाली ओर रखो।
भूतापीय ऊर्जा धरती की भीतरी गर्मी है। नाभिकीय ऊर्जा नाभिक के द्रव्यमान अंतर से है। ये दोनों सूर्य से नहीं आतीं। अभ्यास का वह प्रश्न भी यही जोड़ी अलग करता है।
प्रश्न: सतह का पानी 28°C है और 2 km गहरा पानी 6°C है। क्या समुद्री तापीय संयंत्र चल सकता है?
सूत्र: अंतर = सतह का ताप − गहराई का ताप।
प्रतिस्थापन: अंतर = 28°C − 6°C = 22°C।
उत्तर: 22°C, जो 20°C की शर्त से बड़ा है, इसलिए इस अंतर पर संयंत्र चल सकता है। अंतर 18°C होता तो नहीं चलता। गहराई की सीमा लगभग 2 km है।
विखंडन और संलयन की दिशा उलटी लिखो: भारी टूटना, हल्का जुड़ना। सूर्य संलयन है।
सूर्य से न आने वाली जोड़ी भूताप और नाभिक है। पवन और जैव मात्रा सूर्य से आते हैं।
10-सेकंड रिवीजन
20 K और 20°C यहाँ एक ही अंतर है।
सतह और लगभग 2 km गहराई में 20°C या अधिक का अंतर चाहिए।
गलत — वे विखंडन पर चलते हैं। संलयन सूर्य और हाइड्रोजन बम की बात है।
टरबाइन बाँध के मुँह पर होता है।
बाँध। ऐसी जगहें कम होती हैं।
नाभिक भी सूर्य से नहीं आता। इस विकल्प में भूताप है।
भूतापीय ऊर्जा धरती के अंदर की गर्मी है। पवन, जैव मात्रा और समुद्री ताप सूर्य से जुड़े हैं।
विखंडन भारी नाभिक को तोड़ता है और आज का रिएक्टर इसी नियंत्रित शृंखला पर है। संलयन हल्के नाभिक जोड़ता है और सूर्य में होता है; व्यापारिक बिजली घर अभी इस पर नहीं हैं। सावधानी: खर्च हुआ ईंधन विकिरण देता रहता है और खराब भंडारण वातावरण दूषित करता है।
The cost and the lifetime — Activities 14.8 and 14.9 · 14.4 और 14.5 · क्रियाकलाप 14.8, 14.9
हर स्रोत वातावरण को किसी न किसी तरह छेड़ता है। चुनाव चार बातों पर टिकता है: ऊर्जा निकालना कितना आसान है, कीमत क्या है, तकनीक कितनी कुशल है, और नुकसान क्या होगा। CNG को स्वच्छ कहना अधूरा है। सही वाक्य यह है कि एक स्रोत दूसरे से स्वच्छ है। सौर सेल चलते समय धुआँ नहीं देता, पर सेल बनने में नुकसान हो चुका होता है।
जो स्रोत एक दिन समाप्त होगा वह समाप्य या अनवीकरणीय है। पेड़ काटकर लकड़ी लें और उतने पेड़ फिर लगाएँ तो जैव मात्रा एक दर पर बनी रहती है। ऐसा स्रोत नवीकरणीय है। कोयले का लगभग 200 साल का अनुमान चिंता मिटाता नहीं; सूर्य के लगभग 5 अरब साल मनुष्य के समय में समाप्य नहीं गिने जाते।
हर स्रोत का वातावरण पर असर इकट्ठा करो। फायदे और नुकसान रखकर एक स्रोत चुनो। चुनते समय «बिल्कुल स्वच्छ» मत लिखना। लिखो कि वह दूसरे से स्वच्छ क्यों है।
दो मुद्दे बहस करो। कोयला लगभग दो सौ साल और चले, तो क्या चिंता छोड़ दें? सूर्य लगभग पाँच अरब साल और जले, तो क्या सौर ऊर्जा समाप्त होने की चिंता करें? बहस के बाद हर स्रोत को समाप्य, असमाप्य, नवीकरणीय या अनवीकरणीय में रखो। पहली जोड़ी और दूसरी जोड़ी हमेशा समान नहीं होतीं।
प्रश्न: हाइड्रोजन रॉकेट ईंधन है। क्या वह CNG से स्वच्छ है?
उत्तर: उपयोग के स्थान पर हाइड्रोजन जलकर पानी बनाती है, जबकि CNG कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है। इसलिए उपयोग के क्षण पर हाइड्रोजन स्वच्छतर है। हाइड्रोजन बनाने में जो ऊर्जा लगी, उसका हिसाब अलग है। कोई स्रोत पूरे जीवन में शून्य नुकसान का दावा नहीं कर सकता।
नवीकरणीय और समाप्य को एक तालिका में रखो। जल नवीकरणीय है और कोयला समाप्य है।
सौर सेल के उत्तर में चलने का समय और बनने का समय दोनों लिखो।
10-सेकंड रिवीजन
क्रियाकलाप 14.8 की बहस।
हर स्रोत कहीं न कहीं असर छोड़ता है। तुलना में एक दूसरे से स्वच्छ हो सकता है।
सही — ऐसे स्रोत को नवीकरणीय कहते हैं। बिना रोपे लकड़ी समाप्य की तरह व्यवहार करती है।
कोयले का अनुमान आज की दर का है। उपयोग बढ़े तो साल घटेंगे, और धुआँ तथा अम्ल वर्षा अभी होते हैं। कोयला उगता नहीं। सूर्य के पाँच अरब साल मनुष्य की योजना से बहुत बड़े हैं, इसलिए सौर ऊर्जा को जल्दी समाप्त मानना उपयोगी नहीं।
कोयला पुरानी जैव मात्रा से बना है, इस प्रश्न में वह उदाहरण है।
नाभिकीय ऊर्जा जैव मात्रा नहीं है। लकड़ी, गोबर गैस और कोयला इस प्रश्न के जैव उदाहरण हैं।
प्रकार चुनो। पाठों के 35 जाँच-प्रश्न अलग हैं — हर पाठ में जितने उसके विषय माँगते हैं। सब सही होने पर महारत ★ मिलती है।
कोई भी प्रश्न «सत्यापित PYQ» नहीं है। BSEB वाला सेट मॉडल अभ्यास है। CBSE वाले प्रश्न CBSE-शैली हैं, किसी वर्ष के पेपर की प्रति नहीं।
कीमत और पहुँच भी गिनो।
प्रति एकांक द्रव्यमान या आयतन बहुत काम करना पहली कसौटी है।
लाखों साल लगे थे।
कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय हैं।
ये ऑक्साइड अम्लीय हैं।
जीवाश्म ईंधन जलने पर ये अम्लीय ऑक्साइड बनते हैं।
ईंधन पहले पानी गर्म करता है।
भाप टरबाइन घुमाती है।
जीवाश्म की तरह समाप्त नहीं होता।
जलाशय बारिश से फिर भरता है।
अवायवीय जीव।
डाइजेस्टर बंद कक्ष है और उसमें ऑक्सीजन नहीं होती।
380 MW कन्याकुमारी का आँकड़ा है।
लगभग 2 हेक्टेयर प्रति MW।
अवतल दर्पण अलग काम करता है।
काँच गर्मी को अंदर रोकता है।
धूप रुक गई तो गर्मी नहीं बनेगी।
बादल वाले दिन।
पैनल कई सेल जोड़ता है।
लगभग 0.7 W और 0.5 से 1 V।
जगहें कम हैं।
संकरे मुँह पर बाँध और उसके द्वार पर टरबाइन।
संलयन सूर्य में है।
नियंत्रित विखंडन से।
भूताप भी नहीं निकलती।
नाभिकीय ऊर्जा नाभिक से आती है, सूर्य से नहीं।
भारत पाँचवें स्थान पर है।
लगभग 380 MW।
गलत — वह आस-पास कम उपयोगी रूप में फैल जाती है।
सही — बिजली भेजना ईंधन ढोने से अधिक कुशल है।
गलत — धुआँ नहीं और राख नहीं। खाद अलग से बचती है।
गलत — उत्पादन छोटा होता है, इसलिए फार्म बनाया जाता है।
गलत — चलने वाला पुर्जा नहीं होता और देख-भाल कम है।
गलत — यह धरती के अंदर के हॉट स्पॉट से आती है।
सही — विकिरण और दूषण का खतरा रहता है।
गलत — अनुमान आज की दर का है और नुकसान अभी होता है।
75 प्रतिशत तक।
धुआँ नहीं बनता।
15 km/h से अधिक।
फार्म वहीं बने जहाँ साल भर हवा चले।
गोबर गैस या बायोगैस।
शुरुआती पदार्थ मुख्यतः गोबर है।
1.4 kW/m²।
प्रति सेकंड प्रति वर्ग मीटर 1.4 kJ।
20°C।
गहराई लगभग 2 km तक।
हीलियम।
सूर्य का स्रोत यही है।
380 MW।
देश का स्थान पाँचवाँ है।
लगभग 200 साल।
पेट्रोलियम का अनुमान अलग और छोटा है।
बायोगैस में मेथेन, पवन को चाल, जीवाश्म को सीमित भंडार, नियतांक को 1.4।
दर्पण समेटता है, काँच रोकता है, डाइजेस्टर बिना ऑक्सीजन के काम करता है, डायनेमो बिजली बनाता है।
अभिकथन (A): कई ताप बिजली घर कोयला क्षेत्र के पास बनते हैं।
कारण (R): उतनी ही दूरी पर बिजली भेजना कोयला ढोने से अधिक कुशल है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
अभिकथन (A): बायोगैस में 75 प्रतिशत तक मेथेन होता है।
कारण (R): पवन फार्म के लिए चाल 15 km/h से अधिक चाहिए।
दोनों सही हैं, पर R बायोगैस की व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A): काली सतह समान धूप में सफेद से अधिक गर्म होती है।
कारण (R): सफेद सतह काली से अधिक गर्मी सोखती है।
A सही है। R गलत है — काली सतह अधिक सोखती है।
अभिकथन (A): आज के व्यापारिक रिएक्टर नाभिकीय संलयन पर चलते हैं।
कारण (R): संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं और बहुत अधिक ताप तथा दाब चाहिए।
A गलत है — व्यापारिक रिएक्टर विखंडन पर हैं। R सही है।
अभिकथन (A): बड़ा बाँध ग्रीनहाउस गैस बढ़ा सकता है।
कारण (R): डूबी वनस्पति बिना ऑक्सीजन सड़कर मेथेन छोड़ती है।
दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या है।
कोयला और पवन खंड 14.2 में हैं। सौर सेल और नाभिक खंड 14.3 में हैं।
कोयला और पेट्रोलियम समाप्त होंगे। पेड़ दोबारा लगाएँ तो जैव मात्रा और पवन लौटते हैं।
जलने पर अधिक गर्मी दे और धुआँ कम बनाए।
लकड़ी सीमित ऑक्सीजन में जलने के बाद चारकोल बचता है। वह लगभग बिना लौ के जलता है, धुआँ कम होता है और गर्मी अधिक देता है।
अवतल दर्पण सूर्य की किरणों को एक जगह समेटता है, इसलिए ताप बढ़ता है। समतल या उत्तल दर्पण यह काम नहीं करता।
धरती के अंदर के हॉट स्पॉट से निकली भाप या गर्म पानी से बनी ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा है। यह सूर्य से नहीं आती।
संलयन में हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं और बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है।
खेत और बस्तियाँ डूबती हैं तथा लोगों का पुनर्वास कठिन होता है। डूबी वनस्पति से मेथेन बनती है। वर्षा जलाशय को फिर भरती है, इसलिए स्रोत नवीकरणीय है।
हवा साल के अधिकांश दिन चलनी चाहिए और चाल 15 km/h से अधिक होनी चाहिए। बिना हवा के दिन के लिए भंडारण सेल चाहिए। 1 MW के लिए लगभग 2 हेक्टेयर जमीन लगती है।
चलने वाला पुर्जा नहीं होता और देख-भाल कम है। दूर के गाँव में तार की जगह पैनल लग सकता है। सीमा यह है कि खास सिलिकॉन और चाँदी के कारण कीमत अधिक और दक्षता कम है।
ज्वार का बाँध केवल संकरे मुँह पर बनता है। लहरें केवल तेज तट पर उपयोगी हैं। समुद्री ताप के लिए सतह और गहराई में कम से कम 20°C का अंतर चाहिए।
कसौटी: बहुत काम प्रति एकांक आयतन या द्रव्यमान, आसान पहुँच, आसान भंडारण और परिवहन, तथा किफायती होना। ताप बिजली घर में ईंधन जलता है, पानी भाप बनता है, भाप टरबाइन घुमाती है और जनित्र बिजली देता है। संयंत्र खदान के पास इसलिए होता है कि बिजली भेजना कोयला ढोने से अधिक कुशल है।
ईंटों के गुंबद में गोबर और पानी की कर्दम बिना ऑक्सीजन के सड़ती है। गैस में 75 प्रतिशत तक मेथेन होता है, धुआँ और राख नहीं बनते, और कर्दम खाद है। पवन के लिए चाल 15 km/h से अधिक चाहिए और 1 MW को लगभग 2 हेक्टेयर चाहिए। एक सौर सेल लगभग 0.7 W और 0.5 से 1 V देता है।
विखंडन भारी नाभिक तोड़ता है और नियंत्रित शृंखला से भाप बनती है। संलयन हल्के नाभिक जोड़ता है, सूर्य में होता है, और व्यापारिक रिएक्टर अभी इस पर नहीं चलते। सावधानी: खर्च हुए ईंधन का भंडारण और विकिरण का रिसाव। भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा सूर्य से नहीं आतीं।
यह मॉडल सेट अभ्यास के लिए है। किसी वर्ष की वार्षिक परीक्षा का प्रश्न नहीं है। स्रोत पृष्ठ मिलने पर ही वार्षिक प्रश्न जोड़े जाएँगे।
धूप चाहिए।
बादल वाले दिन गर्म पानी नहीं मिलता।
कोयला पुरानी जैव मात्रा है।
नाभिकीय ऊर्जा जैव मात्रा नहीं है।
75।
राख नहीं बचती।
पानी या भाप की धार पंख घुमाती है। धुरी डायनेमो घुमाती है और श्रेणीक्रम का बल्ब जल सकता है। यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
परंपरागत: कोयला और पवन। गैर-परंपरागत: सौर सेल और नाभिकीय विखंडन। समाप्य स्रोत एक दिन समाप्त होता है, जैसे कोयला। नवीकरणीय स्रोत लौट सकता है, जैसे वर्षा से भरने वाला जलाशय या दोबारा लगाई गई जैव मात्रा। पवन परंपरागत स्तंभ में रहकर भी नवीकरणीय है।
ये योग्यता-आधारित अभ्यास प्रश्न हैं। किसी CBSE प्रश्नपत्र की प्रति नहीं हैं।
क्रियाकलाप 14.2 जगह बदलता है।
दिल्ली में धुआँ और ईंधन की पहुँच जंगल जैसे नहीं हैं।
संख्या = कुल शक्ति / 0.7।
3.5 / 0.7 = 5 सेल।
अभिकथन (A): सौर सेल चलाते समय धुआँ नहीं बनता।
कारण (R): सेल के निर्माण में वातावरण को कोई नुकसान नहीं होता।
A सही है। R गलत — निर्माण में नुकसान हो सकता है, इसलिए स्रोत को बिल्कुल स्वच्छ नहीं कहते।
अभिकथन (A): गंगा पर टिहरी जैसे बाँध का विरोध होता रहा है।
कारण (R): बड़ा बाँध जमीन डुबोता है, लोगों को हटाता है और डूबी वनस्पति से मेथेन बना सकता है।
दोनों सही हैं और R विरोध का कारण है।
हवा साल के अधिकांश समय चले और चाल 15 km/h से अधिक हो। बिना हवा के लिए भंडारण सेल हों। 1 MW के लिए लगभग 2 हेक्टेयर खाली पड़े और आरंभिक खर्च तथा देख-भाल उठ सके।
अंतर = 25°C − 8°C = 17°C। शर्त 20°C या अधिक है। 17°C कम है, इसलिए यह संयंत्र नहीं चलेगा। गहराई 2 km के अंदर है, पर ताप अंतर काफी नहीं है।
ऊपर «BSEB | CBSE» से बोर्ड बदलो। पाठ वही NCERT है।
इस पेज पर वार्षिक परीक्षा का सत्यापित प्रश्न नहीं है, क्योंकि स्रोत पृष्ठ नहीं जोड़ा गया। नीचे मॉडल सेट बोर्ड के पैटर्न पर अभ्यास के लिए है।
सत्यापित लेबल तभी लगेगा जब प्रश्न का स्रोत पृष्ठ उपलब्ध हो।
ये केस और अभिकथन-कारण अभ्यास हैं। इन्हें CBSE का पुराना प्रश्न मत समझो।
गलत प्रश्न जल्दी लौटते हैं, सही वाले कुछ दिन बाद।
आपने क्या सीखा
| क्या | याद रखने लायक |
|---|---|
| अच्छा स्रोत | work, access, store, cost |
| बायोगैस | up to 75 percent methane |
| पवन की चाल | above 15 km/h |
| सौर सेल | 0.5–1 V and about 0.7 W |
| समुद्री ताप | 20°C gap, depth up to 2 km |
| कोयले का अनुमान | about 200 years at today’s rate |
नोट्स मूल लेखन हैं। पाठ्यपुस्तक केवल क्रम और क्रियाकलाप-संख्या के लिए संदर्भ है। «सत्यापित» केवल स्रोत पृष्ठ वाले प्रश्न पर लिखा जाएगा।